This section includes 7 InterviewSolutions, each offering curated multiple-choice questions to sharpen your Current Affairs knowledge and support exam preparation. Choose a topic below to get started.
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Dialogue writing in marathi and the topic is between two friends discuss to take part in competition in Marathi |
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Answer» हाय! विलियम तुम कैसे हो विलियम: मैं ठीक हूँ। आप क्या? स्मिथ: मैं भी ठीक हूँ। विलियम: स्मिथ कल विज्ञान प्रतियोगिता के बारे में आपकी क्या राय है? स्मिथ: यह बहुत अच्छा होगा! बहुत सी बातें सीखने को मिलेंगी। विलियम: हाँ, एक विज्ञान प्रतियोगिता ऐसी होनी चाहिए, जो ज्ञान से भरी हो। मैं रोशनी से बहुत प्रेरित हूं जो ध्वनियों से चालू और बंद हो सकता है। स्मिथ: बिल्कुल, यह बहुत अच्छा होगा, ऊर्जा उत्पादन के लिए छोटा बांध मॉडल भी छात्रों को बांध देगा। विलियम: वह मॉडल निश्चित रूप से लोगों से बहुत अधिक इरादे अर्जित करेगा। स्मिथ: वास्तव में, छोटे रोबोट भी बहुत दिलचस्प हैं, यह देखना अच्छा है कि वे कैसे काम करते हैं विलियम: प्रतियोगिता का पूरा हिस्सा एक चट्टान होगा। स्मिथ: ठीक है मुझे एक काम के लिए जाना है,। विलियम: ठीक है बाय बाय।Disclaimer - ANSWER provided in HINDI. You MAY TRANSLATE it to MARATHI. |
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Why andhra is called bagyaghar |
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Answer» pradesh is FAMOUS for its twinkling pearls & glass embedded BANGLES....the city was founded during qutub SHAHI & was CALLED bhagyanagar.... |
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Anuched pustako ka mahatva in Hindi |
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Answer» very imporntance of our LIFE |
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Plz koi answer de Dena plz |
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Answer» का स्वभाव मेल-मिलाप का नहीं था | वह हरदम सबसे झगड़ा करती थी । HOPE it HELPS you✌✌✌✌✌✌✌✌✌✌ |
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Tanavgrast ka vilom kya hai |
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Answer» ्त । तनावग्रस्त का मतलब होता है:- चिंता मे,और तनावमुक्त का मतलब होता है बगैर किसी चिंता के।i HOPE it's HELPFUL. |
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Kabri Billi Ne kis Prakar Ramu ki Bahu ke naak mein Dum Kar Rakha that |
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Answer» illi USKE dwara bnaye jane wale vyanjano ko KHA jaya KRTI thi Hope it helps ✔ |
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Jo bath kaha na sake jiska ek shabd in hindi me? |
| Answer» N the ATTACHMENT ✌✌✌✌ | |
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औपचारिक और अनौपचारिक संचार के बीच अंतर क्या है? |
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Answer» संचार किसी संस्था में विचारपूर्वक स्थापित की जाती है। किस व्यक्ति को किसको और किस अन्तराल में सूचना देनी चाहिए, यह किसी संस्था में विभिन्न स्तरों पर कार्यरत् व्यक्तियों के मध्य सम्बन्धों को स्पष्ट करने में सहायक होता है। औपचारिक सन्देशवाहन के निर्माण व प्रेषण में अनेक औपचारिक सम्वाद अधिकांशत: लिखित होते हैं। यथा-संस्था का प्रधानाचार्य अपने उप प्रधानाचार्य को कुछ निर्देश प्रदान करता है, तो वह औपचारिक प्रकृति का ही समझा जायेगा क्योंकि एक उच्चाधिकारी अपने नीचे रहने वाले अधिकारियों या कर्मचारियों को निर्देश देने की ही स्थिति में बाध्य होता है। औपचारिक सन्देशवाहन के अन्य उदाहरण, आदेश, बुलेटिन आदि।अनौपचारिक सन्देश वाहनों में किसी प्रकार की औपचारिकता नहीं बरती जाती। ऐसे सन्देशवाहन मुख्यत: पक्षकारों के बीच अनौपचारिक सम्बन्धों पर निर्भर करते हैं। अनौपचारिक सन्देशवाहन के कुछ उदाहरण है - नेत्रों से किये जाने वाले इशारे, सिर हिलाना, मुस्कराना, क्रोधित होना आदि। ऐसे संचार का दोष यह होता है कि सावधानी के अभाव में कभी-कभी अफवाहों को फैलाने में सहायक हो जाते हैं।I HOPE this will HELP YOUIF not then COMMENT me |
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Write paragraph on this picture in hindi |
| Answer» SON are enjoy his breakfast and TEA and a girl SURVE all PEOPLE FOOD dish | |
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असर्फी की लूट और कोयले पर छाप का मुहावरा वाक्य में प्रयोग कीजिए |
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Answer» की लूट और कोयले पर छाप अर्थात (मूल्यवान वस्तुओं को नष्ट करना और तुच्छ को सँजोना) संजय दिन प्रतिदिन इतना नासमझ हो रहा है की उसे ये भी ख्याल नहीं की वो हीरों को लुटा कर पत्थर संजो रहा है अर्थात समय को व्यर्थ गवा कर अपने अनपढ़ और बुरी आदतों वाले मित्र बना कर खेलता रहता है ।उसके लिए ये कहना कतई गलत न होगा अशर्फी की लूट और कोयले पर छाप । |
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Ncert ne kitne mulya mane hai |
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Answer» 2018 से राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) का सेलेबस उत्तर प्रदेश के तकरीबन 26 हजार स्कूलों में लागू करने जा रहा यूपी बोर्ड अपने पाठ्यक्रम के महत्वपूर्ण अंश को बरकरार रखेगा। बोर्ड ने कक्षा 9 से 12 तक के अपने पाठ्यक्रम की समीक्षा पूरी कर ली है और 15 सितंबर तक एनसीईआरटी से मूल्यांकन के लिए भेजना है। सूत्रों के अनुसार बोर्ड 70 प्रतिशत सेलेबस ही एनसीईआरटी का लेगा। लगभग 30 प्रतिशत यूपी बोर्ड का महत्वपूर्ण अंश होगा। जैसे यूपी बोर्ड ने 2012 में काउंसिल ऑफ बोर्ड्स ऑफ स्कूल एजुकेशन इन इंडिया (कोब्से) से अनुमोदित इंटर भौतिक, रसायन, जीव विज्ञान और गणित का सेलेबस लागू किया था। यही सेलेबस सीबीएसई व अन्य बोर्ड में भी लागू है इसलिए में इसमें बहुत अधिक बदलाव की जरूरत नहीं पड़ेगी। अंग्रेजी और संस्कृत व्याकरण भी बोर्ड बरकरार रखना चाह रहा है। समीक्षा करने वाले दोनों विषयों के विशेषज्ञों का मानना है कि यूपी बोर्ड का सेलेबस अधिक बेहतर है जबकि सीबीएसई स्कूलों में चल रहे एनसीईआरटी के सेलेबस में व्याकरण इतने व्यापक स्तर पर नहीं पढ़ाया जाता।Disclaimer - For such DOUBTS, do surf news REGULARLY. |
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CaCo3 लवण की धनायन और ऋणायन की पहचान करें पयोग |
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Answer» म कार्बोनेट एक रासायनिक यौगिक है जिसमें तीन मुख्य तत्वों: कार्बन, ऑक्सीजन और कैल्शियम द्वारा निर्मित फार्मूला CACO3 है। यह दुनिया के सभी हिस्सों में चट्टानों में पाया जाने वाला एक आम पदार्थ है (सबसे विशेष रूप से चूना पत्थर के रूप में), और समुद्री जीवों, घोंघे, कोयला गेंदों, मोती और अंडों के गोले का मुख्य घटक है।CaCO3 विभिन्न बहुरूपियों में मौजूद है, प्रत्येक विशिष्ट स्थिरता के साथ है जो चर की विविधता पर निर्भर करता है। |
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नए और पुराने को आप किस आधार पर अपनाना चाहेंगे नाखून क्यों बढ़ते हैं पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए |
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Answer» ्यों बढ़ते हैं कहानी हजारी प्रसाद द्विवेदी द्वारा लिखी गई है जो उनके बेटी द्वारा पूछे गए प्रश्न "नाखून क्यों बढ़ते हैं "पर आधारित है। नाखून हम सब मानव के शरीर के अंगों का एक हिस्सा है और यह प्राकृतिक रूप से बढ़ता है।लेखक ने कहानी में ही बता दिया है कि एक समय में मानव बनमानस था जिसे लड़ने के लिए नाखून की आवश्यकता थी। वह नाखून से अपनी रक्षा करते थे। इसलिए नाखून को बदलते वक्त के साथ नहीं हटाया गया है मानव अंगों से।नया हो या पुराना मानव अंग है उन्हीं बनमानस का जिनके पास नाखून थे । नाखून की जरूरत आपातकालीन स्थिति में पड़ती है इसलिए इन्हें काटने पर भी बढ़ जाती है। |
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हिंदी साहित्य का इतिहास का निष्कर्ष |
| Answer» PE HELPED MARK AS BRAINLIEST | |
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Himalaya ka Sandesh Kavita Mein Kavi kis Bharat Ki Baat Karta Hai Us spasht kare |
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Answer» ARATHINDUSTAN |
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बौद्ध धर्म में अंतिम संस्कार कैसे किया जाता है? |
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Answer» र्म में अंतिम संस्कार में मृतक के पार्थिव देह को खुल्लेमे छोड़ दिया जाता है जिससे जरूरतमंद पशु पक्षिओ को खोराक मिल पाए | यह जीवदया की भावना से प्रेरित है, क्योंकि बौद्ध धर्म हंमेशा से ही दयाभावना से प्रेरित रहा है और इस प्रकार के अंतिम संस्कार में मृतक के पार्थिव देह का भी इस तरह से उपयोग होता है की कोई भी पशु पक्षि जो भूख से तड़प रहा हो उसकी क्षुधा शांत हो पाए | |
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Definition of alankar |
| Answer» NING is सजावट | |
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We....to the park on Sunday |
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Answer» the QUESTION here |
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Dwandwa samas aur awyayibhav samas me antar batayiye |
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Answer» samas me do shabd ek dash ke maadhyam SE jode JAATE hai, jaise maata-pita, sukh-dukh,.Awyayibhav samas me UPASARG me ek awyaya HOTA hai, jaise, yathashakti, aajam,.HOPE it helps❤️❤️ |
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क्या भूलूं क्या याद करूं किस विधा की रचना है |
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Answer» राय बच्चन की आत्मकथा |
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Hello mates, this is really an important question plss write any of these hindi dramas in story 1 bahu ki vidha 2 mathribhumi ka maan 3 sukhi daali pls answer fast urgently plss fst |
| Answer» ATE HERE'S YOUR ANSWER>> सूखी डाली ,उपेन्द्रनाथ अश्क जी द्वारा लिखित प्रसिद्ध एकांकी है . सूखी डाली एकांकी में आपने संयुक्त परिवार प्रणाली का चित्रण किया है . एकांकी का आरंभ पूरी तरह से नाटकीय है .इंदु के शब्द और "क्या ईंट मारती मैं " स्पष्ट ही ईंट मारने की सी क्रिया की व्यंजना है . संवादों में स्वाभाविकता चरम सीमा तक है .नयी बहु को ससुराल की प्रत्येक चाल - ढाल अपने मायके से भिन्न प्रतिक्त होती है जो स्वाभाविक है और उसी के अनुसार वह बात -बात पर दोनों घरों की तुल्तना करती है . ससुराल में यह सबको बुरा लगता है . एकांकी में तीन दृश्यों की योजना की गयी है . समस्त कथा एक ही घर में और कुछ दिनों के अंतराल में समाप्त हो जाती है .छोटी बहु का सबकी हँसी के बीच सहसा प्रवेश और हँसी का रुक जाना नाटकीय है और मनोवैज्ञानिक रूप से उसके मन पर यह प्रभाव पड़ता है मानों वह हँसी उसी की उड़ाई जा रही थी . इस प्रकार के अन्य दृश्य भी एकांकी में आते है . एकांकी में एकांकीकार ने यह भी प्रकट किया है आधुनिक युग में अन्यी पीढ़ी भले ही संयुक्त परिवार को महत्व न दे पर संयुक्त परिवार में राखार बहुत सी समसएं बुजुर्गों के परामर्श तथा अन्य सदयों के सहयोग से सरलता से सुलझाई जा सकती है . सूखी डाली एकांकी में पात्रों के स्वभाव के अनुकूल ही हलकी और गंभीर भाषा का प्रयोग हुआ है .मंझली बहु की जुबां कितनी तेज़ चलती है ,इंदु कितनी जल्दी बिगड़ जाती है और दादाजी कितनी गंभीरता से बात को सोचते हैं ,एकांकी में पात्रों के चरित्रों का विकास प्रदर्शित करने वाली ऐसी अनेक बातें हैं .एकांकी का अंत अत्यंत सुन्दर है .परिवार में भिन्न व्यक्तियों के स्वभाव वैषम्य के बीच भी एकता की एक ऐसी डोर रहती है जिसके सहारे परिवार का संचालन होता है .यही एकांकी का मूल उद्देश्य है और लेखक का विचार है कि ऐसी डोर का सिरा परिवार के किसी एक व्यक्ति के हाथों में ही होने पर परिवार की कुशलता है .प्रस्तुत एकांकी चरम सीमा तक समाप्त हो जाता है पर उसका अंत दुखांत नहीं है .इस एकांकी में प्रभावोत्पादकता प्रयाप्त मारट्र में हैं .इसे एक सफल एकांकी कहा जा सकता है . HOPE IT HELPSPLZ MRK AS BRAINLIST | |
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Hello mates, this is really an important question plss write any of these hindi dramas in story 1 bahu ki vidha 2 mathribhumi ka maan 3 sukhi daali pls answer fast urgently |
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Answer» ि का मान 'मातृभूमि का मान' एकांकी श्री हरिकृष्ण प्रेमी जी द्वारा लिखी गई है ।यह ऐतिहासिक देशभक्ति और देश प्रेम पर आधारित है ।इस मेँ हाडा राजपूत वीरसिंह और उनके साथियो के बलिदान का चित्रण किया गया है ।इस एकांकी का मुख्य उद्देश्य भी मातृभूमि के प्रति प्रेम दिखाना है ।इस मेँ दिखाया गया है की राजपूत कभी अपने मातृभूमि के अधीन नहीं जा सकते ।वीरसिंह का चरित्र बलिदान वाला था, देश के लिए बलिदानी, साम्राज्य के लिए बलिदानी।बूँदी के मान -सम्मान और स्वाभिमान से जोड़कर सिपाही वीर सिंह ने जिस तरह अपना बलिदान दिया ,वह देश प्रेम की पराकाष्ठा है।वीर सिंह के चरित्र ने हमें जन्म भूमि का मान करना सिखाया है तथा यह सन्देश दिया है कि सभी राजपूत अपने देश जाति और वंश की रक्षा के लिए बलिदान करने वाले सैनिक बने। |
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Shatranj ke khiladi kahani ki mir aur mirja ki shatranj ke khel ke prati ekagrata ka ulekh hai.yadi yah ekgrata desh tatha samaj ke prati hoti toh kya paridaam hota |
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Answer» चैस) दो खिलाड़ियों के बीच खेला जाने वाला एक बौद्धिक एवं मनोरंजक खेल है। किसी अज्ञात बुद्धि-शिरोमणि ने पाँचवीं-छठी सदी में यह खेल संसार के बुद्धिजीवियों को भेंट में दिया। समझा जाता है कि यह खेल मूलतः भारत का आविष्कार है, जिसका प्राचीन नाम था- 'चतुरंग'; जो भारत से अरब होते हुए यूरोप गया और फिर १५/१६वीं सदी में तो पूरे संसार में लोकप्रिय और प्रसिद्ध हो गया। इस खेल की हर चाल को लिख सकने से पूरा खेल कैसे खेला गया इसका विश्लेषण अन्य भी कर सकते हैं।शतरंजएक स्टॉन्टन शतरंज सेट के भाग (बाएं से दाएं): एक सफेद राजा, एक काला हाथी, एक काले रंग का वजीर या रानी, एक सफेद प्यादा या सैनिक, एक काला घोड़ा और एक सफेद ऊंट।सर्वोच्च नियंत्रण निकायवर्ल्ड चेस फेडरेशनसबसे पहले खेला गयाछट्ठी शताब्दी – वर्तमानविशेषताएँदल के सदस्यदोनों ओर 2 खिलाड़ीआकस्मिक खेल आम तौर पर 10 से 60 मिनट, टूर्नामेंट खेल दस मिनट से छह घंटे या अधिक समय के लिए।स्थलबोर्ड गेमसार रणनीति खेलओलंपिक१९००शतरंज एक चौपाट (बोर्ड) के ऊपर दो व्यक्तियों के लिये बना खेल है। चौपाट के ऊपर कुल ६४ खाने या वर्ग होते है, जिसमें ३२ चौरस काले या अन्य रंग ओर ३२ चौरस सफेद या अन्य रंग के होते है। खेलने वाले दोनों खिलाड़ी भी सामान्यतः काला और सफेद कहलाते हैं। प्रत्येक खिलाड़ी के पास एक राजा, वजीर, दो ऊँट, दो घोडे, दो हाथी और आठ सैनिक होते है। बीच में राजा व वजीर रहता है। बाजू में ऊँट, उसके बाजू में घोड़े ओर अंतिम कतार में दो दो हाथी रहते है। उनकी अगली रेखा में आठ पैदल या सैनिक रहते हैं।चौपाट रखते समय यह ध्यान दिया जाता है कि दोनो खिलाड़ियों के दायें तरफ का खाना सफेद होना चाहिये तथा वजीर के स्थान पर काला वजीर काले चौरस में व सफेद वजीर सफेद चौरस में होना चाहिये। खेल की शुरुआत हमेशा सफेद खिलाड़ी से की जाती है।[1]HOPE I'll help you |
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Sagun and nirgun bhakti me antar |
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Answer» ौर में बहुत से लोग परमात्मा को सगुण रूप में पूजते है और बहुत से निर्गुण रूप में । सगुण रूप में पूजने का सीधा सीधा मतलब होता है कि हम परमात्मा को एक आकर में देखते है । आप अपनी सोच के हिसाब से परमात्मा को देखते है । हम कृष्ण को उस रूप में देखते है , जिस रूप में हमें बताया गया, दिखाया गया, चित्रित किया गया हमारे द्वारा और मूर्तिवत रूप दे दिया गया उन्हें, जिन्हें हम पूजते है। ये है सगुण पूजा -एक रूप की, आकार की, ये है सगुण साकार ब्रह्म । जब भी हम ब्रह्म को एक शरीर में मूर्त रूप में देखते है तो ये सोच ये नजर हमारी है तमोगुणी, क्योंकि सोच का धरातल शरीर है । और यदि हम प्रभु को देखते है मन के धरातल पर तो ये रजोगुणी है और यदि हम देखते है आत्मा के धरातल पर तो ये सतोगुणी है । ये अलग अलग ढंग से देखने की नजर है, आँख है प्रभु को देखने की ।अब इसको विस्तार से समझते है । यदि हम परमात्मा को एक अस्तित्व के तौर पर सर्वत्र विद्यमान सत्ता के रूप में देखते है तभी हम अपने अंदर सोच लाते है निराकार की । एक ऐसी परम सत्ता जिसका कोई ओर-छोर नहीं, एक ऐसी सत्ता जो सर्वत्र है । यदि हमें एक खिडकी से पूरे आकाश को देखना चाहे तो क्या देख पाएंगे ? नहीं, क्योंकि वो आकार नहीं है । आपने अधूरा देखा । आप उसे पूरा देख ही नहीं सकते । आप उसमें है, आप कैसे देखेंगे अस्तित्व को । आप हाथ जितना खोलोगे आकाश उतना ज्यादा । मुट्ठी भींच लो, आकाश नहीं । हम मूर्ति पूजा करें, कोई मतभेद नहीं लेकिन हम जैसे-जैसे अपनी उम्र के पड़ाव को पार करते जाये साथ साथ अपने आप को उतारे उस अस्तित्व में परम के क्योंकि पहुंचना तो सही मायने में यही है । यही तो है यात्रा परम की ।लोग गुलाम हो गये है आदतों के । आज तक आरतियों के अंदर, घंटों की आवाजों में, उलझे है आदतन । इससे होता कुछ नहीं । क्या होगा इससे, ह्रदय परिवर्तन कैसे होगा ? परिवर्तन तब होगा जब हमारी यात्रा सगुण साकार से निर्गुण निराकार यानि ह्रदय की बने । हम इतना डूबे इसमें कि जो अमृत छिपा है अंदर, छलके वह, दिखे हमारे चेहरे पर वो तेज आनंद का और ह्रदय में अविरल बहे धारा उस परम आनद की । गीता में प्रभु ने स्वयं कहा है मै सगुण भी हूँ और निर्गुण भी क्योंकि जिस सगुण के तुम उपासक हो वह भी तो अस्तित्व का एक हिस्सा ही है । कैसे अलग है वह अस्तित्व से । हम यदि गुलाब के हजारों फूलों को निचोड़ के इत्र बनाये, वह है समाधि की अवस्था ।हमें जरुरत है अभिप्सा की, एक ऐसी प्यास की, जो कभी खत्म न हो । एक ऐसी तड़प, परमात्मा को पाने की, जो सदा हमें दिलाये एहसास उसके करीब होने का हर पल हर साँस में घटे वो हममें ।गीता में प्रभु कहते है कि अगर देखने की नजर रखता है तो देख कुछ भी अलग अलग नहीं है । ना सांख्य-योग ना कर्म योग, ना भक्ति योग । सब एक ही तो है । नजर बना देखने की । अगर कोई कर्त्ता है ही नहीं तो परमात्मा की तरफ किस रास्ते से पहुंचे वह, ये फैसला भी तो परमात्मा का ही है । वह कुछ करता ही नहीं, करवा तो प्रभु रहे है । आदमी अपने जीवन में ये मानना शुरू कर देता है कि वह कर्त्ता है तब वह सत्य से दूर असत्य को गले लगाता है जो ये मानता है कि यात्रा तेरी, मै तेरा, समा ले मेरे छोटे से दिये की टिमटिमाती लौ को अपने परम प्रकाश में । सोच उसकी ही सही है । सत्य साथ है उसके, क्योंकि वह किसी भी तरह के बंधन में नहीं है । भला-बुरा सब तुझे अर्पण, मै हूँ नहीं कुछ, न श्रेष्ठ, न दीन, हर दम एक सा, जैसा हूँ, तेरा हूँ । सारा खेल भाव का है । कैसे याद करें हम उसको ? किस श्रेणी का बनाया हमने अपने आपको, प्रभु ने क्या पात्रता मांगी थी हमसे, सिर्फ इतना ही तो, जैसा भेजा था इस दुनिया में निर्दोष वैसे ही बने रहे हम । सब खो दिया हमने । हम अपने आपको बुद्धिमान कहते है । कहाँ है बुद्धिमता ? सब कुछ धीरे-धीरे अवगुणों से ढँक दिया हमने ।प्रभु की लीला है सगुण और निर्गुण । इसको हम एक तरीके से और कह सकते है कि सब ‘भाव’ चित्त का है । जैसी जिसकी पात्रता वैसा उसका दर्जा । जब श्रीराम ने लंका पर चढाई करने का विचार बनाया तो उससे पहले कहा उन्होंने कि यज्ञ और अनुष्ठान करने है और इसके लिए एक ब्राह्मण की आवश्यकता है जो श्रेष्ठ हो । जानकारी आई कि इस क्षेत्र का सर्वश्रेष्ठ ब्राह्मण है रावण। अब रावण को सन्देश भेजा गया कि श्रीराम लंकापति रावण को परास्त करने के लिए, चढाई करने के लिए पुल का निर्माण करना चाहते है और इसके अनुष्ठान और यज्ञ के लिए ब्राह्मण रावण को बुलावा देते है । रावण के पास सन्देश भेजा गया । स्वीकार किया रावण ने । कहा, कह दो यजमान से, अवश्य पहुंचेंगे । पहुंचा रावण, कराया उसने अनुष्ठान और यज्ञ इतने विधि विधान और तरीके से कि जब यज्ञ का प्रसाद दिया उसने श्रीराम को तब कहा श्रीराम ने आपने जिस अति उत्तम तरीके से विधि पूर्वक निर्दोष इस यज्ञ को करवाया उसके लिए मै आपको प्रणाम करता हूँ । ब्राह्मण रावण ने आशीर्वाद दिया श्रीराम को सफलता का । मतलब अपने ही संहार का, अपने पर ही विजय का । ये सब लीला थी प्रभु की, एक सन्देश था जनमानस के लिए । कर्त्ता का क्या मतलब है, सब कुछ तो लीला है प्रभु की । सिर्फ कर्म करने का अधिकार है हमें, वह भी अकर्त्ता बनकर, यही सच है ।हमेशा करे हम सगुण से निर्गुण की यात्रा यानि शरीर से आत्मा की ओर चलें हम जिये उस अनुभूति में उस परम को हर पल हर क्षण। |
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बिहारी की भक्ति भावना पर प्रकाश डालिए |
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Answer» लाल की भक्ति भावना” हिंदी साहित्य में रीति काल के कवियों में बिहारी का नाम महत्वपूर्ण है। बिहारीलाल मुख्य रूप से श्रृंगारी कवि हैं। उनकी भक्ति भावना राधा कृष्ण के प्रति है। सतसई के आरंभ में मंगलाचरण का यह दोहा राधा के प्रति उनके भक्तिभाव का ही परिचायक है। "मेरी भव बाधा हरो, राधा नागरि सोय"बिहारी लाल ने भक्ति भावना के माध्यम से प्रकृति चित्रण का भी बहुत सुंदर वर्णन किया है । जिसमें में से उन्होंने सभी ऋतु ओं का उल्लेख किया है। वे राधा कृष्ण के भक्त हैं तथा उनके प्रति उनके मन में बड़ी आदर और श्रद्धा है। उन्हें विश्वास है कि भगवान श्री कृष्ण की शरण में जो आता है उन सब का कल्याण हो जाता है। |
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Bhartiya asryabhasonke prakar |
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Answer» a Arya bhashaoke TEEN prakar HOTE hai :- 1) Adhunikkalin Arya BHASHA ,2) Madyakalin Arya Bhasha,3) PRACHIN kal Arya Bhasha |
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On_ herd_ hearing the noise some other women and children_far_ the locality reached almost___ . They tried to stop the quarrel but it __ all in vain . The two mothers __ came to blows.At last__people called the police to short out the matter |
| Answer» ESTION is irrelevent.Pls RETYPE. | |
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Sangnya means in hindi |
| Answer» SANGNYA it "SANGYA" MEANS "NOUN" in englishसंज्ञा को 'नाम' भी कहा जाता है, जिस शब्द से किसी प्राणी, वस्तु, स्थान, जाति, भाव आदि के 'नाम' बोध होता है उसे संज्ञा कहते हैं | |
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He does not want sit .................. girls |
| Answer» | |
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It leapt out towards the dark forest meaning in hindi |
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Answer» s यह अंधेरे जंगल की ओर निकल गया in HINDI |
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मुहावरे का अर्थ लिखिए स्वर सिधारना |
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Answer» धारना मुहावरे का अर्थ है-मर जाना |
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What is employer noc |
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Answer» ction CERTIFICATE, popularly abbreviated as NOC, is a type of legal certificate issued by any AGENCY, organization, institute or, in certain cases, an individual. It does not object to the COVENANTS of the certificate. |
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In kabuliwala main lekhak kaman kiske liye chanchal rahta tha In hindi |
| Answer» | |
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Bijli or vishnu k prayvachi? |
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Answer» तडित, दामिनी, चपला, सौदामिनी, चंचला।विष्णु = नारायण, माधव , केशव, दामोदर, रमापति। |
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ahavan Kavita Mein Rashtriya Ekta ke Paksh mein veividh sumanu Ki Mala ka udharan Diya gaya hai aap aisa hai koi upyog udharan Dekhte Huye us ki sarthakta ka ullekh kijiye |
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Answer» s KAVITA.... |
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Fashion ko lekar do ladkiyo ke beech samvad |
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Answer» ार तूने कल का अखबार पढ़ा उसमें तूने देखा कपड़ों पर से लगी हुई थीप्रिया- हां यार दिखा पर मेरे पापा कह रहे थे कि यह कपड़े अच्छे नहीं होतेनिशा- सोचा तो मैंने भी कि इतने कम पैसों में इतने अच्छे कपड़े कैसे यह लोग फैशन को लेकर कुछ भी करते हैं हमें इन से सजग रहना चाहिएPriya- हां सही बोला आजकल फैशन एक हीन की चीज बना दिया लोग कुछ भी पहनना पसंद करते हैं हमें सोच-समझकर चीज खरीदनी चाहिए।mark it as BRAINLY |
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How to say this words in hindi i am going to talk about? |
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Answer» MATE ❤️❤️❤️❤️ HERE IS UR ANSWER..MAIN ABHI KUCH BOLNE JAA RAHA HU...IN HINDI....✌️✌️☺️☺️hope this will help you ❤️❤️❤️❤️stay blessed and happy always ☺️ ☺️❤️❤️ |
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Is ques ka lakar btado koi.. |
| Answer» E!I THINK IT WOULD BE LANG LAKAR.PLEASE MARK MY ANSWER AS A BRAINLIEST ANSWER.THANK YOU. | |