This section includes 7 InterviewSolutions, each offering curated multiple-choice questions to sharpen your Current Affairs knowledge and support exam preparation. Choose a topic below to get started.
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About kul bada ya karam |
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Answer» Answer to your QUESTION: ♡karam bada hota H KUL se. Bade kul m janam LENE se KUCH nhi hota.Insaan bada karam se hota.Hope it helps ^_^ |
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I wish you many many happy returns of the day tranletion in hindi |
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Answer» anslation in HINDI WOULD be:मैं आपको दिन की कई खुशियों की शुभकामनाएं देता हूं।Hope it HELPS ^_^ |
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In which year it was legally binding to use hindi in all official legal at offices? |
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Answer» ar.....it was the YEAR 1951 in UTTAR PRADESH n all over India EXCEPT TAMILNADU in 1976 |
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फायदे के अनुसार का समस्त पद । |
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Answer» ुसार ....✌️✌️✌️✌️✌️✌️✌️✌️✍️✍️✍️ |
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जीवन इस शब्द के दो पर्यायवाची शब्द लिखिए |
| Answer» R ANSWERTHANKSजिदगी, प्राण, | |
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if the radius of the height of a cylinder are ratio 5 is to 7 and its volume is 550 cm find its radius |
| Answer» 5:7Let the RADIUS and height be 5X and 7x,Volume = 550 cm^2Volume = = 22/7 × 5x ×5x ×7x = 550=22× 25x^3 = 550=550x^3=550=x^3=1 =x= CUBE root of 1 = 1 cmRadius= 5 ×1 =5 cmHeight= 7×1=7 cmMark it as the brainliest!!:) | |
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Aaj Manush sabhyata aur Sanskriti ke bramar mein kis Prakar phasha hai |
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Answer» me AUR USKE according myth par BHAROSA KAR KEEP phas gaya hai |
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Uttam jan me sa g me baav in hindhi |
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Answer» t is your QUESTION I can't UNDERSTAND |
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100 words about rani lakshmi baisi in hindi |
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Answer» लक्ष्मीबाई का जन्म काशी में 19 नवंबर 1835 को हुआ। इनके पिता का नाम मोरोपंत ताम्बे और माता का नाम भागीरथी बाई था। रानी लक्ष्मीबाई को बचपन में मनुबाई नाम से बुलाया जाता था। रानी लक्ष्मीबाई का विवाह सन् 1850 में गंगाधर राव से हुआ जोकि सन् 1838 से झांसी के राजा थे। जिस समय लक्ष्मीबाई का विवाह उनसे हुआ तब गंगाधर राव पहले से विधुर थे। सन् 1851 में लक्ष्मीबाई को पुत्र पैदा हुआ लेकिन चार माह बाद ही उसका निधन हो गया। रानी लक्ष्मीबाई के पति को इस बात का गहरा सदमा लगा और 21 नवंबर 1853 को उनका निधन हो गया। राजा गंगाधर राव ने अपने जीवनकाल में ही अपने परिवार के बालक दामोदर राव को दत्तक पुत्र मानकर अंगरेजी सरकार को सूचना दे दी थी। परंतु ईस्ट इंडिया कंपनी की सरकार ने दत्तक पुत्र को अस्वीकार कर दिया। इसके बाद शुरु हुआ रानी लक्ष्मीबाई के जीवन में संघर्ष, लार्ड डलहौजी ने गोद की नीति के अंतर्गत दत्तकपुत्र दामोदर राव की गोद अस्वीकृत कर दी और झांसी को अंगरेजी राज्य में मिलाने की घोषणा कर दी। लेकिन रानी लक्ष्मीबाई झांसी अग्रेजों की होने देना नहीं चाहती थी, उन्होंने विद्रोह कर दिया। रानी लक्ष्मीबाई ने सात दिन तक वीरतापूर्वक झांसी की सुरक्षा की और अपनी छोटी-सी सशस्त्र सेना से अंगरेजों का बड़ी बहादुरी से मुकाबला किया। रानी ने खुलेरूप से शत्रु का सामना किया और युद्ध में अपनी वीरता का परिचय दिया। वे अकेले ही अपनी पीठ के पीछे दामोदर राव को कसकर घोड़े पर सवार हो, अंगरेजों से युद्ध करती रहीं और अंत में रानी का घोड़ा बुरी तरह से घायल हो गया और वे वीरगति को प्राप्त हुई। इस तरह उन्होंने स्वतंत्रता के लिए बलिदान का संदेश दिया। |
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PLEASE ANSWER THIS QUESTION Q. NO. 3 |
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Answer» pline का मतलब होता है कि अपने जीवन में कुछ नियम बनाकर चलें और साथ ही समय का सदुपयोग करते हुए अपना जीवन जिए.अनुशासन की गई कारण आप सोचते हैं कि हम नियमों में अगर बंध जाएंगे तो अपना जीवन खुशहाली पूर्वक कैसे जी पाएंगे ?अनुशासन का मतलब यह नहीं होता है कि आप अपनी इच्छा अनुसार अपना जीवन नहीं जी पाएंगे इसका मतलब यह होता है कि आपको हर कार्य समय पर और व्यवस्थित ढंग से करना होता हैजैसे सुबह उठने से लेकर स्कूल जाने तक, ऑफिस जाने तक, किसी जरूरी कार्य पर जाने तक अगर आप इन कार्यों को समय पर नहीं करते है तो आप जीवन में कभी भी सफल नहीं हो पाते है. और साथ ही कई लोग आपका साथ भी छोड़ देते है जिससे आप जीवन में अकेले पड़ जाते है.अगर आप जीवन को अनुशासन से जिएंगे तो आप जीवन में सफल नहीं होंगे बल्कि लोग आपका आदर और सम्मान भी करेंगे. अनुशासन का मतलब यह भी होता है कि वह बड़े बुजुर्गों का सम्मान करें और सभी लोगों से आदर और प्रेम पूर्वक बात करें. कभी भी ऐसा काम ना करें जिससे किसी भी व्यक्ति को चोट या ठेस पहुंचे. |
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Which figure of speech is in the word "takhari see" |
| Answer» HYPERBOLE. PLEASE. MARK. it. as. the. BRANIEST | |
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Hey guys iss topic mein se 5 questions bna do plz...... |
| Answer» | |
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Helllooo friends!!! please give me an essay on yog divas in hindi. |
| Answer» 2014 में भारतीय प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा अंतरराष्ट्रीय योग दिवस को मनाने का प्रस्ताव रखा गया था। इसका समर्थन विभिन्न योग चिकित्सकों और दुनिया भर के आध्यात्मिक नेताओं द्वारा किया गया। संयुक्त राष्ट्र ने दिसंबर 2014 में 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस घोषित किया।पहले अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस को दुनिया भर में उत्साह के साथ मनाया गया था लेकिन दिल्ली में राजपथ एक अलग ही तरह की जगह है जहाँ इसका अभ्यास किया जा सकता है। इस दिन का जश्न मनाने के लिए हजारों लोग इकट्ठे हुए। प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी दुनिया के विभिन्न हिस्सों की कई मशहूर हस्तियों के साथ इस आयोजन का एक हिस्सा बने और यहां योग आसनों का अभ्यास किया।योग का बुखार इसी तरह जारी रहा और दूसरे और तीसरे अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर भी लोगों ने बड़ी संख्या में भाग लिया। दूसरे अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर चंडीगढ़ में एक बड़ा आयोजन आयोजित किया गया। तीसरे अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर लखनऊ में भी इसी तरह से एक बड़ा आयोजन किया गया था। भारत के विभिन्न हिस्सों में और साथ ही दुनिया भर में हर साल इस दिन के लिए कई मनोरंजक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।कई योग आसन हैं जो विभिन्न स्तरों पर काम करते हैं ताकि हमें एक स्वस्थ जीवन जीने में मदद मिल सके। हमें इन सभी के अभ्यास की कोशिश करनी चाहिए और उन योग आसनों की पालना करनी चाहिए जिन्हें करना हमारे लिए फायदेमंद है। एक स्वस्थ जीवन शैली विकसित करने के लिए चुने हुए योग आसनों का नियमित रूप से अभ्यास करना चाहिए। योग को एक दिन समर्पित करने के पीछे पूरा विचार यह है कि दुनिया को यह समझने में मदद मिल सके कि इसका नियमित रूप से अभ्यास कर कितना फायदा मिल सकता है। | |
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Gandhi ji ki mata ka kya nam hai |
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Answer» !!GANDHI JI KI MATA ka kya nam PUTTALI BAI GANDHI hai HOPE this helps GOOD DAY MATE![email protected] ❤ |
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Yadi kaksha me sishak na aae to |
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Answer» ⤵Answer ---- Kaksh ✔✔hope it HELPS ❤❤ |
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If u get a chance to become a class moniter then how will you maintain your class in hindi |
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Answer» apna class ka monitor banuga to me pehle sabhi KE upar nahi chillaunga.pehle sabhi ko ........betne keliye bolounga aur phir me monitor karunga unkaof course ek aur monitor hoga naa jo dusra kaam, arthath discipline register MEY likhega ! agar koi mera baat nahi manega to UNKA NAAM humare class teacher ko boldunga |
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Difference between homeopathy and electro homeopathy in hindi |
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Answer» Homeopathic Practitioner, I am very much familiar with Homeopathy and it works wonders when prescribed properly as Comrade above has mentioned, its been around for 200+ years and is the new school of smart medicine which cure WITHOUT any SIDE effects and complications. Sadly our conventional doctors are still stuck to their old out DATED ways of medication and seem not to accept the newer ways of medication and their out dated so called scientific research is SUFFICIENT to comprehend the BASIC principals of Homeopathy. Electro-homeopathy is a a new addition to homeopathy and its potential is yet to be fully understood and its still in initial stages. |
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Certainly what a beautiful mess that i have created meaning in hindi |
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Answer» one says that they are a BEAUTIFUL MESS, it means that they are a flawed, but loveable person. That person would likely mean that despite off putting TRAITS (being sloppy, always running late, being forgetful, being neurotic, etc) he or she is nevertheless GOOD NATURED. |
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Bismillah khan sangeet ke sache sadhak tha. Bataiye |
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Answer» शहनाई के बादशाह बिस्मिल्ला खां को कौन नहीं जानता। शहनाई को पूरी दुनिया में मशहूर करने वाले बनारस के लाल ने न केवल भारत में बल्कि विदेशों में भी अपनी कला से सबको चकित किया है। 21 मार्च को शहनाई के जादूगर का जन्मदिन है। इस मौके पर उनकी मीठी यादों को ताजा करते हैं। |
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Advantage of computer in hindi |
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Answer» टर इस शताब्दी के सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण आविष्कारो में से एक है | आज कम्प्यूटर हिसाब – किताब एव सोच – विचार के वे सभी कार्य करने लगा है जो कभी मानव – मस्तिष्क ही किया करता था | इसी कारण कम्प्यूटर को ‘ मशीनी मस्तिष्क’ जाने लगा है| इसके विकास का कार्य काफी समय से चला आ रहा है और आज भी वैज्ञानिक इससे ऐसे कार्य लेने की कोशिश में है, जो मानव के बूते के बाहर है |कम्प्यूटर हो आज प्रत्येक क्षेत्र की प्रगति एव द्रुत विकास के लिए आवश्यक माना जाने लगा है | शिक्षा , व्यवसाय, शासन – प्रशासन सभी में आज कम्प्यूटर प्रणाली की आवश्यकता ही अनुभव नही की जा रही है, बल्कि उसे यथासम्भव अपनाया भी जा रहा है | मानव – मस्तिष्क से भी बढकर तीव्रगति से कार्य करने वाला कम्प्यूटर वास्तव में अंक – गणित पद्धति के विकास की एक महत्त्वपूर्ण आधुनिक देन है |आज अमेरका , रूस , फ्रांस , जर्मनी, हालैंड, स्वीडन , ब्रिटेन आदि देशो में इसे मानव-मस्तिष्क का दर्जा मिल चुका है | भारत में कम्प्यूटर विज्ञान का तीव्रता से विकास हो रहा है | तथा हर क्षेत्र में उसकी सहायता लेकर कार्यक्षमता को बढाया जा रहा है | हमारे देश में सबसे पहला कम्प्यूटर सन 1961 ई. में आया था | तब से आज तक दुसरे देशो से बहुत – से कम्प्यूटर हमारे देश में आ चुके है | आब तो कम्प्यूटर यहाँ भी बनाए जाने लगे है |आज सरकारी – गैर सरकारी प्रत्येक क्षेत्र में बड़े व्यापक स्तर पर कम्प्यूटर का प्रयोग किया जाने लगा है | इसका उपयोग कारखानों में कल-पुर्जे बनाने, डाक छांटने, रेल मार्ग संचालन करने, टिकट बाटने , शिक्षा , मौसम की जानकारी , वैज्ञानिक अनुसधान, अन्तरिक्ष विज्ञान , परिवहन व्यवस्था विमान परिवहन , व्यापार , चिकित्सा , वीडियो खेल , मुद्रण कला, लेखा – जोखा परिणति का हाल जानने आदि उपयोग किया जा रहा है, बैको में हिसाब – किताब रखने , पचो को जाचने में भी इनका प्रयोग हो रहा है | इसकी सहायता से पुस्तके महीनों के स्थान पर दिनों में तैयार हो जाती है | समाचार पत्रों के प्रकाशन और समूचे क्रिया – कलापों का आधार तो कम्प्यूटर बन ही चुका है |आज के युग में कम्प्यूटर लगभग सभी क्षेत्रो में हमारी सहायता कर रहा है | इसके इस महत्त्व को देखते हुए , विद्दालयो में सभी विद्दार्थियो को इसका शिक्षण दिया जा रहा है | इससे कई बार इतनी बड़ी-बड़ी गलतियाँ हो जाती है जिस कारण इस पर मानव – मस्तिष्क जैसा विश्वास तो नही किया जा सकता है | परन्तु फिर भी यह मानव जीवन के लिए सबसे अधिक उपादेय है | |
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Advantage and disadvantage of pagemaker computer written hindi |
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Answer» in GOOGLE ।।।। |
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Aim of my life is to become a astronaut essay in hindi in |
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Answer» का महत्वाकांक्षी होना एक स्वाभाविक गुण है । प्रत्येक व्यक्ति जीवन में कुछ न कुछ विशेष प्राप्त करना चाहता है । कुछ बड़े होकर डॉक्टर या इंजीनियर बनना चाहते हैं तो कुछ व्यापार में अपना नाम कमाना चाहते हैं ।इसी प्रकार कुछ समाज सेवा करना चाहते हैं तो कुछ भक्ति के मार्ग पर चलकर ईश्वर को पाने की चेष्टा करते है । सभी व्यक्तियों की इच्छाएँ अलग-अलग होती हैं परंतु इनमें से बहुत कम लोग ही अपनी इच्छा को साकार रूप में देख पाते हैं । थोड़े से भाग्यशाली अपनी इच्छा को मूर्त रूप दे पाते हैं । ऐसे व्यक्तियों में सामान्यता दृढ़ इच्छा-शक्ति होती है और वे एक निश्चित लक्ष्य की ओर सदैव अग्रसर रहते हैं ।मनुष्य के जीवन में एक निश्चित लक्ष्य का होना अनिवार्य है । लक्ष्यविहीन मनुष्य क्रिकेट के खेल में उस गेंदबाज की तरह होता है जो गेंद तो फेंकता है परंतु सामने विकेट नहीं होते । इसी भाँति हम परिकल्पना कर सकते हैं कि फुटबाल के खेल में जहाँ खिलाड़ी खेल रहे हों और वहाँ से गोल पोस्ट हटा दिया जाए तो ऐसी स्थिति में खिलाड़ी किस स्थिति में होंगे इस बात का अनुमान स्वत: ही लगाया जा सकता है । अत: जीवन में एक निश्चित लक्ष्य एवं निश्चित दिशा का होना अति आवश्यक है ।मेरे जीवन का लक्ष्य है कि मैं बड़ा होकर चिकित्सक बनूँ और अपने चिकित्सा ज्ञान से उन सभी लोगों को लाभान्वित करूँ जो धन के अभाव में उचित चिकित्सा प्राप्त नहीं कर पाते हैं । मैं इस बात को अच्छी तरह समझता हूँ कि एक अच्छा चिकित्सक बनना आसान नहीं है ।अच्छे विद्यालय का चयन, उसमें प्रवेश पाना तथा पढ़ाई में होने वाला खर्च आदि अनेक रुकावटें हैं । परंतु मुझे पूरा विश्वास है कि मैं इन बाधाओं को पार कर सकूँगा । इसके लिए मैंने बहुत कड़ी मेहनत का संकल्प लिया है । उचित मार्गदर्शन के लिए मैं अपने अध्यापक व अनुभवी छात्रों का सहयोग ले रहा हूँ ।चिकित्सक बनने के बाद मैं भारत के उन गाँवों में जाना चाहता हूँ जहाँ पर अच्छे चिकित्सक का अभाव है अथवा जहाँ पर चिकित्सा केंद्र की व्यवस्था नहीं है । में उन सभी लोगों का इलाज नि:शुल्क करना चाहता हूँ जो धन के अभाव में अपना इलाज नहीं करा पाते हैं । इसके अतिरिक्त मैं उनमें अच्छे स्वास्थ्य के बारे में जागरूकता लाना चाहता हूँ ।वे किस प्रकार जीवन-यापन करें, सफाई, स्वास्थ्य एवं संतुलित भोजन के महत्व को समझें, इसके लिए मैं व्यापक रूप से अपना योगदान देना चाहता हूँ । आजकल कुछ परंपरागत रोगों का इलाज तो आसानी से संभव है लेकिन उचित जानकारी का अभाव, रोग तीव्र होने पर ही इलाज के लिए तत्पर होना जैसी समस्याएँ अशिक्षितों एवं ग्रामीणों की प्रमुख समस्याएँ हैं ।इस दिशा में मैं कुछ सार्थक कदम जरूर उठाना चाहूँगा । मेरे लक्ष्य में देश और समाज की सेवा का भाव निहित है । सभी लोगों, विशेषकर निर्धन लोगों को चिकित्सा तथा अच्छे स्वास्थ्य संबंधी जानकारी देकर मैं निश्चय ही आत्म-संतुष्टि प्राप्त करूँगा ।समाचार-पत्रों व दूरदर्शन अथवा अन्य माध्यमों से जब मुझे इस बात की जानकारी प्राप्त होती है कि देश के गाँवों में प्रतिवर्ष हजारों लोग कुपोषण के कारण तथा उचित चिकित्सा के अभाव में मृत्यु के शिकार हो जाते हैं तो मुझे वास्तव में बहुत दु:ख होता है ।यह निश्चय ही देश के लिए दुर्भाग्यपूर्ण बात है। यह मेरे लिए सौभाग्य की बात होगी कि मैं अपने देश और देशवासियों के लिए अपना योगदान कर सकूँगा । दूसरी ओर एड्स जैसी कई बीमारियाँ ऐसी हैं जिनके बारे में समाज को जागरूक बनाना अत्यावश्यक है ।मुझे विश्वास है कि मेरे इस जीवन के लक्ष्य में गुरुजनों, सहपाठियों व माता-पिता सभी का सहयोग प्राप्त होगा । ईश्वर मेरे इस नेक कार्य व मेरे लक्ष्य प्राप्ति के मार्ग में मेरी सहायता करेंगे इसका मुझे पूर्ण विश्वास है । मैं खुद भी अपने लक्ष्य की प्राप्ति में कोई कसर नहीं छोड़ूँगा ।भाई इसमें एस्ट्रोनॉट जोड़ लेना।।आशा है कि यह उत्तर आपको अच्छा लगा होगा। |
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Suavsar ka mahatva nibandh in hindi |
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Answer» ्वर की ओर से मानव को प्रदत्त दुर्लभ व अनुपम उपहार है। प्रभु जिस उद्देश्य से मनुष्य को सुअवसर प्रदान करते हैं, यदि मनुष्य उस अदृश्य सत्ता के संकेतों को समझ जाए और उसका सदुपयोग करे तो जीव व जीवन का कायाकल्प संभव है।अवसर वह अनमोल मोती है, जिसे हड़पने के लिए विध्वंसक व सर्जक सदैव आतुर रहते हैं। यदि अवसर विध्वंसक के हाथ लगता है तो विनाश, महामारी, अराजकता, अनाचार, पीड़ा, दंश, असंतोष और पश्चाताप बनकर जीवन को पीड़ामय बनाता है, लेकिन यदि यह सर्जक के हाथ लगता है, तो आनंद, उत्साह, जिज्ञासा, संतोष, प्रेरणा, हर्ष, ज्ञान, सुख, शांति, सौहार्द, प्रेम व भाईचारे की आधार भूमि बनता है।ईश्वर द्वारा प्रदत्त अवसर का सदुपयोग या दुरुपयोग ही हमारे भावी व्यक्तित्व के अच्छे व बुरे होने का निर्धारण करता है। ईश्वर इस धरती पर किसी भी जीव को जीवन व अवसर निर्थक नहीं प्रदान करता। वह हर जीव को श्रेष्ठ कृति के रूप में इस धरती पर अवसर का अनुपम उपहार देकर उतारता है। फिर वह चिंतन कार्य, कर्म, संगति, व्यवहार से इसको निकृष्ट अथवा उत्कृष्ट बनाता चलता है। अवसर उसे महत्व देता है जो अवसर को महत्व देता है। महान चिंतक सफोक्लीज का मत है कि 'अवसर उसकी मदद कभी नहीं करता, जो अपनी मदद नहीं करते।' विवेकशील, कर्मठ व साधक व्यक्ति के सान्निध्य का अवसर ऐतिहासिक स्वर्णिम व स्मरणीय बन जाता है, किंतु निष्क्रिय व निकृष्ट सोच वाले व्यक्ति का साथ या अवसर कलंकित व कंटकाकीर्ण हो जाता है।अवसर का सदुपयोग कर अध्ययन व श्रम से एक व्यक्ति आइएएस परीक्षा उत्तीर्ण कर सम्मानजनक पद पा लेता है, जबकि इसका दुरुपयोग कर कोई व्यक्ति किसी का कत्ल कर स्वयं को कलंकित कर आजीवन कारावास या मृत्युदंड भी प्राप्त कर सकता है। अवसर तपी व श्रेष्ठ व्यक्ति का साथ पाकर पारसमणि बन जाता है, जबकि गुणहीन व्यक्ति का साथ पाकर कलुषित व दागी हो जाता है। अवसर सदैव बुद्धिमान के पक्ष में रहता है। अवसर उस द्रुतगामी वायुयान या रेलगाड़ी की तरह है, जिसे निश्चित समय पर उस दूरस्थ यात्र के लिए निकलना ही है। श्रम संयोजन कर जो अवसर तक पहुंचता है, उसे वह समय पर अपने निर्धारित गंतव्य पर छोड़ देता है। धन्यवाद।। |
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Suavsar ka mahatva essay in hindi |
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Answer» ्वर की ओर से मानव को प्रदत्त दुर्लभ व अनुपम उपहार है। प्रभु जिस उद्देश्य से मनुष्य को सुअवसर प्रदान करते हैं, यदि मनुष्य उस अदृश्य सत्ता के संकेतों को समझ जाए और उसका सदुपयोग करे तो जीव व जीवन का कायाकल्प संभव है।अवसर वह अनमोल मोती है, जिसे हड़पने के लिए विध्वंसक व सर्जक सदैव आतुर रहते हैं। यदि अवसर विध्वंसक के हाथ लगता है तो विनाश, महामारी, अराजकता, अनाचार, पीड़ा, दंश, असंतोष और पश्चाताप बनकर जीवन को पीड़ामय बनाता है, लेकिन यदि यह सर्जक के हाथ लगता है, तो आनंद, उत्साह, जिज्ञासा, संतोष, प्रेरणा, हर्ष, ज्ञान, सुख, शांति, सौहार्द, प्रेम व भाईचारे की आधार भूमि बनता है।ईश्वर द्वारा प्रदत्त अवसर का सदुपयोग या दुरुपयोग ही हमारे भावी व्यक्तित्व के अच्छे व बुरे होने का निर्धारण करता है। ईश्वर इस धरती पर किसी भी जीव को जीवन व अवसर निर्थक नहीं प्रदान करता। वह हर जीव को श्रेष्ठ कृति के रूप में इस धरती पर अवसर का अनुपम उपहार देकर उतारता है। फिर वह चिंतन कार्य, कर्म, संगति, व्यवहार से इसको निकृष्ट अथवा उत्कृष्ट बनाता चलता है। अवसर उसे महत्व देता है जो अवसर को महत्व देता है। महान चिंतक सफोक्लीज का मत है कि 'अवसर उसकी मदद कभी नहीं करता, जो अपनी मदद नहीं करते।' विवेकशील, कर्मठ व साधक व्यक्ति के सान्निध्य का अवसर ऐतिहासिक स्वर्णिम व स्मरणीय बन जाता है, किंतु निष्क्रिय व निकृष्ट सोच वाले व्यक्ति का साथ या अवसर कलंकित व कंटकाकीर्ण हो जाता है।अवसर का सदुपयोग कर अध्ययन व श्रम से एक व्यक्ति आइएएस परीक्षा उत्तीर्ण कर सम्मानजनक पद पा लेता है, जबकि इसका दुरुपयोग कर कोई व्यक्ति किसी का कत्ल कर स्वयं को कलंकित कर आजीवन कारावास या मृत्युदंड भी प्राप्त कर सकता है। अवसर तपी व श्रेष्ठ व्यक्ति का साथ पाकर पारसमणि बन जाता है, जबकि गुणहीन व्यक्ति का साथ पाकर कलुषित व दागी हो जाता है। अवसर सदैव बुद्धिमान के पक्ष में रहता है। अवसर उस द्रुतगामी वायुयान या रेलगाड़ी की तरह है, जिसे निश्चित समय पर उस दूरस्थ यात्र के लिए निकलना ही है। श्रम संयोजन कर जो अवसर तक पहुंचता है, उसे वह समय पर अपने निर्धारित गंतव्य पर छोड़ देता है। वहीं जो निष्क्रिय है, हाथ पर हाथ धरे रह जाता है, वह फिर हाथ मलता ही रह जाता है।धन्यवाद।। |
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Punjabi - matrabhasha par niband.... plz tell fast in need it urngently |
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Answer» (गुरमुखी: ਪੰਜਾਬੀ ; शाहमुखी: پنجابی) एक हिंद-आर्यन भाषा है और ऐतिहासिक पंजाब क्षेत्र (अब भारत और पाकिस्तान के बीच विभाजित) के निवासियों तथा प्रवासियों द्वारा बोली जाती है। इसके बोलने वालों में सिख, मुसलमानऔर हिंदू सभी शामिल हैं। पाकिस्तान की १९९८ की जनगणना और २००१ की भारत की जनगणना के अनुसार, भारत और पाकिस्तान में भाषा के कुल वक्ताओं की संख्या लगभग ९-१३ करोड़ है, जिसके अनुसार यह विश्व की ११वीं सबसे व्यापक भाषा है। कम से कम पिछले ३०० वर्षों से लिखित पंजाबी भाषा का मानक रूप, माझी बोली पर आधारित है, जो ऐतिहासिक माझा क्षेत्र की भाषा है।आपको मेरा उत्तर तो THANK you दबाए।।धन्यवाद।। |
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Computer aaj ki jarurat |
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Answer» दी ने संचार के क्षेत्र में एक क्रांति ला दी. विज्ञान के चमत्कार से हम भलीभांति परिचित है, आये दिन नए नए अविष्कार होते रहते है. संचार के क्षेत्र में सबसे अधिक बदलाव लाया है, एक ऐसी मशीन ने जिससे जटिल से जटिल संख्या का गुणा, भाग, जोड़ना, घटाना माइक्रो सेकंड में हो जाता है. यह मशीन है कंप्यूटर. कंप्यूटर से बड़े बड़े काम इतनी जल्दी होने लगे, जिसकी कोई कल्पना भी नहीं कर सकता था. विज्ञान मॉडर्न लाइफ में किसी आशीर्वाद से कम नहीं है. कुछ समय पहले तक कंप्यूटर को एक अदभुत मशीन के तौर पर देखा जाता था, किसी ने सोचा नहीं था कि कंप्यूटर का विकास इतनी तेजी से होगा, और कंप्यूटर के द्वारा मानव जाति का विकास इस तरीके से होगा. कुछ सालों पहले ये मशीन पर्सनल कंप्यूटर के रूप में हमारे घर में आई और आज ये हर घर ऑफिस की जरूरत के साथ, हमारी जिंदगी का हिस्सा बन चुकी है.विज्ञान के चमत्कार ने सूचना, संचार के क्षेत्र में मोबाइल, कंप्यूटर व इन्टरनेट के द्वारा बहुत बड़ा बदलाव किया है. विज्ञान के चमत्कार पर निबंध जानने के लिए पढ़े. इसके द्वारा मानव जाति की बहुत सी परेशानियाँ हल हो गई है. हमारे देश में कंप्यूटर का प्रयोग लगभग दो दशक से हो रहा है, इसके द्वारा भारत देश ने विकास के क्षेत्र में एक लम्बी छलांग लगाई है. कंप्यूटर के द्वारा हम बहुत से काम कर सकते है. इस छोटी सी मशीन में बड़े से बड़ा डाटा सेव हो सकता है, ऑफिस का काम आसानी से हो जाता है, इन्टरनेट के द्वारा दुनिया भर में किसी से भी बात कर सकते है, शॉपिंग कर सकते है, जानकारी इकट्टा कर सकते है, इसके अलावा भी बहुत से काम है जो कंप्यूटर करता है.आपको मेरा उत्तर अच्छा लगे तो THANK you dabanaplease।।।। |
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Media ki sambedhan shunatiya mtlb ki aaj kl media apne fyde k liye logo se thra thra k sval krti h aur apni channel zada chlana chyti h |
| Answer» KYA KARNA HAI | |
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सौ सौ अंधियारी रातो से,तेरी मुस्कान कहीं सुन्दर अर्थ क्या |
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Answer» hai KI USKA body KALA hai auruska datt WHITE haiisiliye usne kaha hai.... samjhe bachva..... |
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Apne janam din par mitra dwara bheje gaye upahar ke liye dhanyavad patra |
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Answer» Hope it HELPS you. EXPLANATION:Please Mark it as brainliest ANSWER |
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Give me the samples of letter writing mates plzzz in marathi |
| Answer» | |
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सम् Upsarg se shabd likhie |
| Answer» | |
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ओलंपिक खेल पर प्रस्ताव |
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Answer» e here's your answer. प्राचीनकाल में सैनिक युद्ध कला सीखने के साथ-साथ सैन्य प्रशिक्षण के अन्तर्गत कुश्ती, मुक्केबाजी, दौड़ा, घोड़ा दौड़ जैसे खेलों का अभ्यास भी किया करते थे । तब शान्ति के समय में यदा-कदा खेल प्रतियोगिता का आयोजन किया जाता था और सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाले सैनिकों को सम्राट पुरस्कृत करते थे ।शुरू-शुरू में इसी प्रकार योद्धा-खिलाड़ियों के मध्य प्राचीन ओलम्पिक खेल प्रतियोगिता का आयोजन किया गया था । विश्व में प्रथम ओलम्पिक खेलों का विधिवत् आयोजन 776 ई. पूर्व यूनान (ग्रीस) के ओलम्पिया नामक नगर में हुआ था ।इस कारण इस खेल आयोजन को ओलम्पिक नाम दिया गया । इस प्रथम ओलम्पिक के आयोजन के बाद प्रत्येक चार वर्ष की अवधि पर ओलम्पिक खेलों का आयोजन किया जाने लगा, जिसमें हजारों की संख्या में लोग एकत्र होकर खेलों का आनन्द लेते थे ।उस समय इन आयोजनों में खेलों के अतिरिक्त साहित्य, कला, नाटक, संगीत एवं जिमनास्टिक आदि की स्पर्द्धाएँ भी होती थीं । 394 ई. में रोम के तत्कालीन सम्राट थियोडोसिस ने एक राज्यादेश द्वारा इन खेलों के आयोजन पर प्रतिबन्ध लगा दिया ।इस आयोजन पर प्रतिबन्ध लगने के कुछ समय बाद ही एक विनाशकारी भूकम्प के कारण ओलम्पिया शहर का अस्तित्व लगभग समाप्त-सा हो गया और इसी विनाश के साथ ओलम्पिक खेलों का आयोजन भी बन्द हो गया ।19वीं शताब्दी में ओलम्पिया शहर की खुदाई के बाद ओलम्पिक खेलों के बारे में दुनिया को पता चला एवं इसे पुन: प्रारम्भ करने के प्रयास अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर शुरू हुए ।आधुनिक ओलम्पिक खेलों का आयोजन प्रारम्भ करने का श्रेय फ्रांस के विद्वान् खेल प्रेमी पियरे डि कुबर्तिन को जाता है । 1894 ई. में उनके प्रयासों से ‘अन्तर्राष्ट्रीय ओलम्पिक समिति’ का गठन किया गया, जिसके प्रथम अध्यक्ष ‘पियरे डि कुबर्तिन’ ही बनाए गए ।वर्ष 2012 ओलम्पिक में अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन से प्रभावित हो यहाँ के युवा वर्ग के कृत संकल्पित निरन्तर अभ्यास से आशा बँध रही है कि वर्ष 2016 के ब्राजील ओलम्पिक में भारत पदक-तालिका में सम्मानजनक स्थान अवश्य प्राप्त कर लेगा ।Hope this may HELP you..... |
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Essay on peoples role in conservation of fuel |
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Answer» play very crucial role in CONSERVATION of fuel. First of all I want to introduce you what is fuel conservation?It means saving fuel or usage of fuel at LIMITED level. People like Mr. Ignorance says that Why should i only? But Mr. Foresighted says ki Me km DISTANCE ke liye walking krta hu. orr isi tarah public fuel conservation me bhot BIG role play krti he. Hope it helps you.for more english solutions Follow me. |
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Ulka aur graha mein antar aur samanata |
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Answer» ans a comet ASTROID LIKE graha means PLANET and have big ciliates body.follow me PLEASE,, |
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5 words from prataya aawat |
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Answer» खावटसजावटमिलावटसिखावट |
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Why do we need parliament |
| Answer» ENT plays an important part in our life. We need parliament because US FREEDOM to speak, freedom to TALK and many more. | |
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गुरु शिष्य संबंध पर प्रस्ताव |
| Answer» E here's your ANSWER गुरु-शिष्य परम्परा आध्यात्मिक प्रज्ञा का नई पीढ़ियों तक पहुंचाने का सोपान। भारतीय संस्कृति में गुरु-शिष्य परम्पराके अन्तर्गत गुरु (शिक्षक) अपने शिष्य को शिक्षा देता है या कोई विद्या सिखाता है। बाद में वही शिष्य गुरु के रूप में दूसरों को शिक्षा देता है। यही क्रम चलता जाता है। यह परम्परा सनातन धर्म की सभी धाराओं में मिलती है। गुरु-शिष्य की यह परम्परा ज्ञान के किसी भी क्षेत्र में हो सकती है, जैसे- अध्यात्म, संगीत, कला, वेदाध्ययन, वास्तु आदि। भारतीय संस्कृति में गुरु का बहुत महत्व है। कहीं गुरु को 'ब्रह्मा-विष्णु-महेश' कहा गया है तो कहीं 'गोविन्द'। 'सिख' शब्द संस्कृत के 'शिष्य' से व्युत्पन्न है।'गु' शब्द का अर्थ है अंधकार (अज्ञान) और 'रु' शब्द का अर्थ है प्रकाश ज्ञान। अज्ञान को नष्ट करने वाला जो ब्रह्म रूप प्रकाश है, वह गुरु है। आश्रमों में गुरु-शिष्य परम्परा का निर्वाह होता रहा है। भारतीय संस्कृति में गुरु को अत्यधिक सम्मानित स्थान प्राप्त है। भारतीय इतिहास में गुरु की भूमिका समाज को सुधार की ओर ले जाने वाले मार्गदर्शक के रूप में होने के साथ क्रान्ति को दिशा दिखाने वाली भी रही है। भारतीय संस्कृति में गुरु का स्थान ईश्वर से भी ऊपर माना गया है.“गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णु गुरुर्देवो महेश्वर: ।गुरुः साक्षात् परं ब्रह्म तस्मै श्री गुरुवे नमः”प्राचीन काल में गुरु और शिष्य के संबंधों का आधार था गुरु का ज्ञान, मौलिकता और नैतिक बल, उनका शिष्यों के प्रति स्नेह भाव, तथा ज्ञान बांटने का निःस्वार्थ भाव. शिष्य में होती थी, गुरु के प्रति पूर्ण श्रद्धा, गुरु की क्षमता में पूर्ण विश्वास तथा गुरु के प्रति पूर्ण समर्पण एवं आज्ञाकारिता. अनुशासन शिष्य का सबसे महत्वपूर्ण गुण माना गया है.आचार्य चाणक्य ने एक आदर्श विद्यार्थी के गुण एस प्रकार बताये हैं-“काकचेष्टा बको ध्यानं श्वाननिद्रा तथैव च ।अल्पहारी गृहत्यागी विद्यार्थी पञ्चलक्षणम् ”।।गुरु और शिष्य के बीच केवल शाब्दिक ज्ञान का ही आदान प्रदान नहीं होता था बल्कि गुरु अपने शिष्य के संरक्षक के रूप में भी कार्य करता था। उसका उद्द्येश्य रहता था कि गुरु उसका कभी अहित सोच भी नहीं सकते. यही विश्वास गुरु के प्रति उसकी अगाध श्रद्धा और समर्पण का कारण रहा है।गीता में भगवान श्रीकृष्ण जी ने गुरु-शिष्य परम्परा को ‘परम्पराप्राप्तम योग’ बताया है। गुरु-शिष्य परम्परा का आधार सांसारिक ज्ञान से शुरू होता है,परन्तु इसका चरमोत्कर्ष आध्यात्मिक शाश्वत आनंद की प्राप्ति है,जिसे ईश्वर -प्राप्ति व मोक्ष प्राप्ति भी कहा जाता है। बड़े भाग्य से प्राप्त मानव जीवन का यही अंतिम व सर्वोच्च लक्ष्य होना चाहिए। ”HOPE this MAY HELP you...... | |
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Aapda prabandhan pr lekh in hindi |
| Answer» E HERE IS YOUR ANSWERसूखा, बाढ़, चक्रवाती तूफानों, भूकम्प, भूस्खलन, वनों में लगनेवाली आग, ओलावृष्टि, टिड्डी दल और ज्वालामुखी फटने जैसी विभिन्न प्राकृतिक आपदाओं का पूर्वानुमान नहीं लगाया जा सकता है, न ही इन्हें रोका जा सकता है लेकिन इनके प्रभाव को एक सीमा तक जरूर कम किया जा सकता है, जिससे कि जान-माल का कम से कम नुकसान हो। यह कार्य तभी किया जा सकता है, जब सक्षम रूप से आपदा प्रबंधन का सहयोग मिले। प्रत्येक वर्ष प्राकृतिक आपदाओं से सर्वाधिक प्रभावित होने वाले देशों में भारत का दसवां स्थान हैभू जलवायु परिस्थितियों के कारण भारत पारंपरिक रूप से प्राकृतिक आपदाओं के प्रति संवेदनशील रहा है। यहां पर बाढ़, सूखा, चक्रवात, भूकंप तथा भूस्खलन की घटनाएं आम हैं। भारत के लगभग 60% भू भाग में विभिन्न प्रबलताओं के भूकंपों का खतरा बना रहता है। 40 मिलियन हेक्टेर से अधिक क्षेत्र में बारंबार वाढ़ आती है। कुल 7,516 कि.मी. लंबी तटरेखा में से 5700 कि.मी. में चक्रवात का खतरा बना रहता है। खेती योग्य क्षेत्र का लगभग 68% भाग सूखे के प्रति संवेदनशील है। अंडमान-निकोबार द्वीप समूह और पूर्वी व पश्चिम घाट के इलाकों में सुनामी का संकट बना रहता है। देश के कई भागों में पतझड़ी व शुष्क पतझड़ी वनों में आग लगना आम बात है। हिमालयी क्षेत्र तथा पूर्वी व पश्चिम घाट के इलाकों में अक्सर भूस्खलन का खतरा रहता है।HOPE IT WILL HELP YOU | |
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Abstract noun of of:- likhnabahnagabranaplease find and answer in hindi |
| Answer» | |
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BSFA ka full form bataiye |
| Answer» ANDS for BRITISH SCIENCE FICTION ASSOCIATION . | |
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Hey can you say all the answer of abhyas sagar of class8 in dav |
| Answer» | |