This section includes 7 InterviewSolutions, each offering curated multiple-choice questions to sharpen your Current Affairs knowledge and support exam preparation. Choose a topic below to get started.
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विद्यालय शिक्षा का किस प्रकार का अभिकरण है ? |
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Answer» विद्यालय शिक्षा का मुख्यतम औपचारिक अभिकरण है। |
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शिक्षा के औपचारिक अभिकरण के रूप में विद्यालय का विकास कैसे हुआ है ? |
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Answer» विद्यालय के विकास के कारक (Points of Development of Schools) शिक्षा के औपचारिक अभिकरण के रूप में व्यवस्थित विद्यालयों का विकास सभ्यता के पर्याप्त विकास के बहुत बाद में हुआ है। शिक्षा के औपचारिक अभिकरण के रूप में विद्यालय के विकास को प्रोत्साहन देने वाले मुख्य कारक निम्नलिखित हैं 1. पारम्परिक परिवार के स्वरूप में परिवर्तन- पारम्परिक रूप से परिवार का स्वरूप एवं आकार आज के एकाकी परिवार से नितान्त भिन्न था। परिवार बड़े एवं विस्तृत थे। इस प्रकार के परिवारों में बच्चों की सामान्य शिक्षा की समुचित व्यवस्था परिवार में ही हो जाती थी। परन्तु जब पारम्परिक परिवार ने क्रमशः एकाकी परिवार का रूप ग्रहण किया तो परिवार में बच्चों की शिक्षा की व्यवस्था हो पाना असम्भव हो गया। अत: बच्चों की शिक्षा की सुचारु व्यवस्था के लिए व्यवस्थित विद्यालयों की आवश्यकता अनुभव की जाने लगी। इसके अतिरिक्त सभ्यता के विकास के साथ-साथ शिक्षा भी अधिक विस्तृत, विशिष्ट एवं जटिल हो गई। इस प्रकार की शिक्षा की व्यवस्था घर पर सम्भव नहीं थी। |
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शिक्षा के एक मुख्य औपचारिक अभिकरण के रूप में विद्यालय के कार्यों का उल्लेख कीजिए।याविद्यालय के कार्यों की व्याख्या कीजिए। विद्यालय के चार प्रमुख कार्यों की व्याख्या कीजिए।यावैयक्तिक विकास के विचार से विद्यालय के कार्यों को लिखिए। |
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Answer» विद्यालय के कार्य (Functions of School) विद्यालय के कुछ महत्त्वपूर्ण कार्य निम्नलिखित हैं| 1.शारीरिक विकास- आधुनिक विद्यालयों का प्रमुख एवं प्रथम कर्तव्य बालक का शारीरिक विकास करना है। बालकों का मानसिक विकास, शारीरिक विकास पर ही निर्भर करता है। अत: बालकों को स्वच्छता व स्वास्थ्यवर्द्धन का विद्यालय के कार्य प्रशिक्षण प्रदान करने हेतु प्रत्येक विद्यालय अपने प्रांगण में खेलकूद और व्यायाम का समुचित प्रबन्ध रखता है। इसके अलावा आजकल विद्यालयों में बच्चों के लिए सन्तुलित आहार एवं चिकित्सा सेवा की व्यवस्था भी रहती है। |
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औपचारिक शिक्षा का प्रमुख साधन है(क) घर(ख) समाज(ग) राज्य(घ) विद्यालय |
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Answer» सही विकल्प है (घ) विद्यालय |
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आधुनिक युग में विद्यालय के विकास का कारक है(क) परिवार के आकार एवं स्वरूप में परिवर्तन(ख) शिक्षा का जटिल एवं विस्तृत हो जाना(ग) शिक्षा-व्यवस्था को सामाजिक दायित्व स्वीकार करना(घ) उपर्युक्त सभी कारण |
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Answer» सही विकल्प है (घ) उपर्युक्त सभी कारण |
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घर तथा विद्यालय में पाए जाने वाले सम्बन्ध का उल्लेख कीजिए। |
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Answer» घर तथा विद्यालय का आपसी सम्बन्ध (Relation between Home and School) घर अथवा परिवार तथा विद्यालय के आपसी सम्बन्ध की आवश्यकता एवं महत्त्व को रॉस ने इन शब्दों में स्पष्ट किया है, “यदि गृह एवं विद्यालय के बीच सहयोग या सामंजस्य स्थापित न किया जाए तो बालक का अत्यधिक अहित होगा। घर बालक का प्रथम विद्यालय है और विद्यालय एक प्रकार से घर का विस्तार है। शिक्षण संस्था के रूप में विद्यालय घर का स्थान नहीं ले सकता, परन्तु इन दोनों के बीच विशेष सहयोग होता है।” घर अथवा परिवार तथा विद्यालय के आपसी सम्बन्ध का संक्षिप्त विवरण निम्नवर्णित है ⦁ घर तथा विद्यालय दोनों ही समाज की अभिन्न इकाइयाँ हैं तथा बालक के सर्वांगीण विकास के लिए अत्यधिक महत्त्वपूर्ण हैं। |
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विद्यालय की एक संक्षिप्त परिभाषा लिखिए। |
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Answer» “विद्यालय वे संस्थाएँ हैं, जिनको सभ्य मनुष्य के द्वारा इस उद्देश्य से स्थापित किया जाता है कि समाज में सुव्यवस्थित और योग्य सदस्यता के लिए बालकों की तैयारी में सहायता मिले।” –रॉस |
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बच्चों की शिक्षा की सुव्यवस्था के लिए घर तथा विद्यालय में समुचित सहयोग की आवश्यकता को स्पष्ट कीजिए। |
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Answer» बच्चों की शिक्षा की सुव्यवस्था के लिए घर तथा विद्यालय के बीच समुचित सहयोग अति आवश्यक है। वास्तव में घर बच्चों की शिक्षा की प्रथम पाठशाला है तथा उनकी प्रारम्भिक शिक्षा घर-परिवार द्वारा शुरू की जाती है। शिक्षा की इस प्रक्रिया को विस्तृत, व्यवस्थित तथा विशिष्ट रूप प्रदान करने का कार्य विद्यालय द्वारा किया जाता है। विद्यालय द्वारा बच्चों को शिक्षित करने के कार्य में परिवार द्वारा महत्त्वपूर्ण योगदान प्रदान किया जाता है। बच्चे की पारिवारिक समस्याओं के निवारण में शिक्षक द्वारा समुचित योगदान दिया जा सकता है। इसी प्रकार से बच्चे को विद्यालय सम्बन्धी समस्याओं के समाधान में भी परिवार को सहयोग आवश्यक होता है। वर्तमान समय में विद्यालय की शिक्षा पर्याप्त व्यय-साध्य हो गई है। यह खर्च परिवार द्वारा ही वहन किया जाता है। इस प्रकार स्पष्ट है कि बच्चों की शिक्षा की सुव्यवस्था के लिए घर तथा विद्यालय में समुचित सहयोग अति आवश्यक है। |
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बच्चों के सर्वांगीण विकास के उद्देश्य की पूर्ति के लिए घर एवं विद्यालय का क्या दायित्व है? |
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Answer» बच्चों के सर्वांगीण विकास के उद्देश्य की पूर्ति के लिए घर एवं विद्यालय में पूर्ण सहयोग होना चाहिए। |
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शाब्दिक दृष्टिकोण से विद्यालय के अर्थ को स्पष्ट कीजिए। |
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Answer» ‘विद्यालय’ शब्द ‘विद्या’ तथा ‘आलय’ दो शब्दों के योग से बना है। इस प्रकार से विद्यालय का अर्थ है–विद्या या ज्ञान का घर। |
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विद्यालय के सामान्य महत्त्व का उल्लेख कीजिए। |
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Answer» विद्यालय का सामान्य महत्त्व (General Importance of School) विद्यालय के सामान्य महत्त्व का विवरण निम्नलिखित है| ⦁ आधुनिक जीवन अत्यधिक जटिल होता जा रहा है। जनसंख्या, आवश्यकताओं तथा मूल्य-वृद्धि ने मनुष्यों को जीवन-व्यापार में असामान्य रूप से व्यस्त कर दिया है। लोगों के पास इतना समय नहीं रह गया है। कि वे अपने बच्चों की शिक्षा की देखभाल कर सकें। अत: शिक्षा सम्बन्धी अधिकतम दायित्व विद्यालय के पास आ गए हैं। ⦁ अपने सुनिश्चित उद्देश्य तथा पूर्व-नियोजित शैक्षिक कार्यक्रमों के माध्यम से विद्यालय बालक के व्यक्तित्व को व्यापक रूप से प्रभावित करता है। यहाँ बालक के व्यक्तित्व का सामंजस्यपूर्ण विकास होता |
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परिवार ने अपने आपको बच्चों की शिक्षा के दायित्व से मुक्त क्यों कर लिया? |
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Answer» परिवार के आकार एवं स्वरूप के परिवर्तित हो जाने तथा शिक्षा के जटिल एवं विस्तृत हो जाने के कारण परिवार ने अपने आपको बच्चों की शिक्षा के दायित्व से मुक्त कर लिया। |
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आपके विचारानुसार घर तथा विद्यालय में आवश्यक सहयोग कैसे स्थापित किया जा सकता है? |
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Answer» बच्चों की सुचारु शिक्षा के लिए घर-परिवार तथा विद्यालय के बीच में समुचित सहयोग होना। अति आवश्यक है। इस प्रकार का सहयोग स्थापित करने के लिए विद्यालय के शिक्षकों तथा बच्चों के अभिभावकों के बीच निकटता के सम्बन्ध एवं नियमित सम्पर्क बना रहना अति आवश्यक है। इस सम्पर्क के लिए विद्यालय द्वारा शिक्षक-अभिभावक संघ की स्थापना की जानी चाहिए तथा इस संघ की समय-समय पर बैठक होनी चाहिए। इसके अतिरिक्त शिक्षकों को भी कभी-कभी बच्चों के घर जाना चाहिए। शिक्षकों का दायित्व है कि वे बच्चों की शैक्षिक, अनुशासनात्मक तथा व्यक्तिगत गतिविधियों से उनके अभिभावकों को अवगत कराते रहें। इन सभी उपायों द्वारा घर तथा विद्यालय के बीच आवश्यक सहयोग स्थापित किया जा सकता है। |
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“शिक्षालय न तो ज्ञान की दुकान हैं और न अध्यापक उसके विक्रेता।” प्रस्तुत कथन किसका है ? |
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Answer» प्रस्तुत कथन जॉन एडम्स का है। |
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विद्यालय के चार मुख्य कार्यों का उल्लेख कीजिए। |
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Answer» ⦁ छात्रों का शारीरिक एवं मानसिक विकास करना, ⦁ छात्रों का नैतिक एवं चारित्रिक विकास करना, ⦁ व्यावसायिक एवं औद्योगिक प्रशिक्षण प्रदान करना तथा ⦁ नेतृत्व एवं नागरिकता के गुणों का विकास करना। |
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घर एवं विद्यालय में समुचित सहयोग बनाए रखने का मुख्यतम उपाय बताइए। |
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Answer» घर एवं विद्यालय में समुचित सहयोग बनाए रखने के लिए विद्यालय के शिक्षकों तथा बच्चों के अभिभावकों में निरन्तर सम्पर्क स्थापित होना चाहिए। |
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बच्चों की शैक्षिक-व्यवस्था के दृष्टिकोण से घर तथा विद्यालय के सम्बन्ध को स्पष्ट कीजिए। |
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Answer» बच्चों की शैक्षिक-व्यवस्था के दृष्टिकोण से घर तथा विद्यालय परस्पर पूरक हैं। |
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घर एवं विद्यालय के आपसी सम्बन्ध को स्पष्ट करने वाला कथन है(क) घर एवं विद्यालय दो नितान्त भिन्न संस्थाएँ हैं।(ख) घर पालन-पोषण करता है, जबकि विद्यालय शिक्षा की व्यवस्था करता है।(ग) घर तथा विद्यालय परस्पर पूरक संस्थाएँ हैं।(घ) घर एवं विद्यालय परस्पर विरोधी संस्थाएँ हैं। |
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Answer» (ग) घर तथा विद्यालय परस्पर पूरक संस्थाएँ हैं |
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“विद्यालय को वास्तव में घर का विस्तृत रूप होना चाहिए।” ऐसा किसने कहा? |
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Answer» जॉन डीवी ने। |
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विद्यालय के महत्व को दर्शाने वाला कथन है(क) विद्यालय में ढीला-ढाला अनुशासन होता है।(ख) विद्यालय एक विस्तृत संस्था है।(ग) विद्यालय का घर-परिवार से कोई सम्बन्ध नहीं है।(घ) विद्यालय घर तथा समाज को जोड़ने वाली कड़ी है। |
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Answer» (घ) विद्यालय घर तथा समाज को जोड़ने वाली कड़ी है |
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“विद्यालय को एक ऐसा सामाजिक आविष्कार मॉनना चाहिए जो समाज के बालकों के लिए विशेष प्रकार की शिक्षा प्रदान करने में समर्थ हो।” यह कथन किसका है ? |
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Answer» प्रस्तुत कथन प्रसिद्ध शिक्षाशास्त्री ओटावे का है। |
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स्पष्ट कीजिए कि पारिवारिक परिस्थितियों में होने वाले परिवर्तन ने विद्यालय के विकास को प्रोत्साहन दिया है ? |
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Answer» पारम्परिक रूप से घर या परिवार ही बच्चों को शिक्षा प्रदान करने का कार्य करता था, परन्तु सभ्यता के विकास के साथ-साथ परिवार की परिस्थितियाँ, कार्य-क्षेत्र एवं स्वरूप में उल्लेखनीय परिवर्तन होने लगा। इस स्थिति में घर-परिवार द्वारा बच्चों की शिक्षा की व्यवस्था कर पाना कठिन हो गया। परिणामस्वरूप, बच्चों की शिक्षा की व्यवस्था करने के लिए विद्यालय का विकास हुआ। एक अन्य पारिवारिक कारक ने भी विद्यालय के विकास में उल्लेखनीय योगदान प्रदान किया। यह कारक था शिक्षा का अधिक जटिल तथा विस्तृत हो जाना। इस प्रकार की शिक्षा की व्यवस्था कर पाना परिवार के लिए सम्भव नहीं था। अत: विद्यालय का प्रादुर्भाव एवं विकास हुआ। |
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“विद्यालय बाह्य जीवन के बीच एक अर्द्ध-पारिवारिक कड़ी है, जो बालक की उस समय प्रतीक्षा करता है जब वह अपने माता-पिता की छत्रछाया को छोड़ता है।” यह कथन किसका है?(क) जॉन डीवी का(ख) रेमॉण्ट का।(ग) फ्रॉबेल का।(घ) टी० पी० नन का |
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Answer» सही विकल्प है (ख) रेमॉण्ट का |
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