| 1. |
आंगिक संवेदनाओं के अर्थ एवं प्रकारों को स्पष्ट कीजिए। |
|
Answer» प्राणियों द्वारा ग्रहण की जाने वाली एक मुख्य प्रकार की संवेदनाएँ, आंगिक संवेदनाएँ हैं। इन संवेदनाओं का सम्बन्ध प्राणियों की कुछ आन्तरिक अंगों की विशिष्ट दशाओं से होता है। आंगिक संवेदनाएँ इन्द्रियों के माध्यम से ग्रहण नहीं की जातीं। आंगिक संवेदनाओं के मुख्य उदाहरण हैं – खुजली अथवा पीड़ा, बेचैनी, वेदना, पुलकित होना तथा भूख एवं प्यास। आंगिक संवेदनाओं के तीन वर्ग या प्रकार निर्धारित किये गये, जिनका सामान्य परिचय निम्नलिखित है – (अ) निश्चित स्थानवाली आंगिक संवेदनाएँ-जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है, इस प्रकार की आंगिक संवेदनाओं का शरीर में निश्चित स्थान होता है अर्थात् व्यक्ति या जीव यह स्पष्ट रूप से जान लेता है कि संवेदना शरीर के किस अंग या भाग से सम्बन्धित है। उदाहरण के लिए—खुजली अथवा दर्द की संवेदना निश्चित स्थाने वाली आंगिक संवेदना होती है। (ब) अनिश्चित स्थान वाली आंगिक संवेदनाएँ—इस वर्ग में उन आंगिक संवेदनाओं को सम्मिलित किया जाता है, जिनकी उत्तेजना का स्थान शरीर में स्पष्ट रूप से जाना नहीं जा सकता। इस प्रकार की मुख्य संवेदनाएँ हैं-बेचैनी, वेदना तथा आनन्दित अथवा पुलकित होने की संवेदनाएँ। (स) अस्पष्ट स्थान वाली आंगिक संवेदनाएँ-तीसरे वर्ग या प्रकार की संवेदनाओं को अस्पष्ट स्थान वाली आंगिक संवेदनाएँ कहा जाता है। इस प्रकार की आंगिक संवेदनाओं के स्थान को शरीर में स्पष्ट रूप से निर्धारित नहीं किया जा सकता। भूख तथा प्यास की संवेदनाएँ इसी प्रकार की आंगिक संवेदनाएँ हैं। |
|