1.

चित्र में आँख की बनावट का एक सरलीकृत स्वरुप दिखाया गया हैं , जिसमें आँख पर आपतित संपूर्ण प्रकाश के अपवर्तन को कॉर्निया से होता माना गया हैं । कॉर्निया आँख का सबसे अगला भाग हैं , जो लगभग 2 सेंटीमीटर के एक नियत फोकस दूरीवाला अभिसारी लेंस होता हैं । अनंत से आनेवाली समांतर किरणें कॉर्निया से अपवर्तित होकर रेटिना पर फोकसित प्रतिबिंब बनाती हैं । रेटिना प्रतिबिंब बनने की सूचना को प्रकाश तंत्रिका के माध्यम से मस्तिष्क तक पहुँचाती हैं । निकट - दृष्टि दोष एंव दूर - दृष्टि दोष आँख में होनेवाली दो सामान्य बीमारियाँ हैं । निकट - दृष्टि दोष (myopia) में दूर से आनेवाली किरणें कॉर्निया से अपवर्तन के बाद दूरस्थ वस्तु का प्रतिबिंब रेंटिना के सम्मुख बना देती हैं । दूर - दृष्टि दोष (hypermetropia) में नजदीक की वस्तु का प्रतिबिंब कॉर्निया से अपवर्तन के बाद रेटिना के पीछे बनता हैं । दोनों दोषों को दूर करने के लिए उपयुक्त फोकस - दूरी एंव प्रकृति के लेंस का उपयोग किया जाता हैं । कॉर्निया तथा प्रयुक्त लेंस का संयुक्त समूहन प्रतिबिंब को पुनः रेटिना पर ले आता हैं । यदि दूर की वस्तु को अनंत पर माना जाए तब कॉर्निया से प्रतिबिंब की दूरी (v) को निम्नलिखित सूत्र से ज्ञात किया जा सकता हैंः `(1)/(f_(c)) + (1)/(f_(1) - x) = (1)/(v)`, जहाँ `f_(c)` = कॉर्निया की फोकस - दूरी , `f_(1)` = संशोधी लेंस की फोकस - दूरी , x = कॉर्निया एंव संशोधी लेंस के बीच की दूरी । निकट - दृष्टि दोष एंव दूर - दृष्टि दोष को दूर करने के लिए क्रमशः किस प्रकृति के लेंस का उपयोग का जाना चाहिए ? ( मान ले कि `f_(c) = x`)A. उत्तल , उत्तलB. अवतल , उत्तलC. उत्तल , अवतलD.

Answer» Correct Answer - B


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