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किसी ट्रांसमीटर ऐंटेना से आकाश की ओर प्रेषित रेडियो तरंगो का आयनमंडल से परावर्तन होना और पुनः अभिग्राही ऐंटेना व्दारा प्राप्त होने की प्रक्रिया को आकाश तरंग संचार कहा जाता हैं । ऐसी रेडियो - तरंगो को आकाश तरंग भी कहा जाता हैं । आयनमंडल ( ionosphere) का अस्तित्व पृथ्वी - पृष्ठ से 80 km की ऊँचाई से लेकर 300 km तक होता हैं जो इलेक्ट्रॉन तथा आयन जैसे आवेशित कणों से मिलकर बनता हैं । पृथ्वी की सतह के निकट आयनमंडलीय सतह पर आयनीकरण की डिग्री ( degree of ionization ) अधिक होती हैं और ऊपरी पृष्ठ पर अपेक्षाकृत कम होती हैं । यही कारण है कि आयनमंडल की निचली सतह पर रेडियो - तरंगो का अपवर्तनांक अधिक होता हैं और ऊपर जाने के क्रम में इसका मान घटता जाता हैं । रेडियो - तरंगे के लिए आयनामंडल का अपवर्तनांकA. नीचे से ऊपर की ओर जाने के क्रम में बढ़ता हैंB. नीचे से ऊपर की ओर जाने के क्रम में घटता हैंC. सभी स्थानों पर समान रहता हैं चाहे दूरी कुछ भी होD. सदैव एकांक (unity ) केा होता हैं । |
| Answer» Correct Answer - B | |