1.

प्रकाश - ऊर्जा व्दारा किसी धातु के पृष्ठ से इलेक्ट्रॉन के उत्सर्जन को प्रकाश - वैद्युत प्रभाव कहते हैं तथा इस प्रकार निर्गत इलेक्ट्रॉनों को प्रकाश - इलेक्ट्रॉन कहते हैं । दिए गए धातु के लिए यदि आपतित प्रकाश की आवृत्ति एक निश्चित न्यूनतम मान से कम हो , तो प्रकाश इलेक्ट्रॉन उत्सर्जित नही होते । आपतित प्रकाश की वह न्यूनतम आवृत्ति जिससे दिए गए धातु से इलेक्ट्रॉन उत्सर्जित हो सकते हैं , देहली आवृत्ति ( threshold frequency ) कहलाती हैं । उत्सर्जित इलेक्ट्रॉनों की गतिज ऊर्जा शून्य से एक अधिकतम मान तक होती हैं । यदि धातु का कार्य फलन `phi_(0) ` हो तथा आपतित प्रकाश की आवृत्ति v अथवा तरंगदैर्घ्य `lamda` हो , तो उत्सर्जित इलेक्ट्रॉनों की अधिकतम गतिज ऊर्जा , `E_(k) = hv - phi_(0) = (hc)/(lamda) - phi_(0)`. यह आंइस्टीन का प्रकाश - वैद्युत समीकरण कहलाता हैं । यदि देहली आवृत्ति `v_(0)` तथा देहली तरंगदैर्घ्य `lamda_(0)` हो , तो धातु का कार्य - फलन , ` phi_(0) = hv_(0) = (hc)/(lamda_(0))` . यदि उत्सर्जित इलेक्ट्रानों की अधिकतम गतिज ऊर्जा `E_(k)`हो , तो निरोधी विभव (stopping potential ) `v_(0)` के लिए `E_(k) = (1)/(2)mv_(max)^(2) = eV_(0)` जिसमें `v_(max)` प्रकाश - इलेक्ट्रॉनों की अधिकतम चाल हैं । जब 400 nm तरंगदैर्घ्य वाला बैंगनी प्रकाश एक प्रकाश - वैद्युत सेल पर गिरता हैं , तो इसके कैथोड़ से इलेक्ट्रॉन की गति रोकने के लिए `0.5 eV` के निरोधी विभव की आवश्यकता होती हैं । यदि h `= 6.6 xx 10^(-34)` Js हो , तो इस सेल के लिए देहली आवृत्ति हैंA. `6.4 xx 10^(14) Hz`B. ` 4.2 xx 10^(14)Hz`C. `3.6 xx10^(14) Hz`D. `8xx10^(14)Hz`

Answer» Correct Answer - A


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