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चल-कुंडली गैलवेनोमीटर की फॉस्फर ब्रौंज (phosphor bronze) का बारीक़ तार कुंडली को लटकाने के लिए तथा त्रैज्य (radial) चुम्बकीय क्षेत्र का व्यवहार क्यों किया जाता है? |
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Answer» चल-कुंडली गैलवेनोमीटर की कुंडली एक ऐठन-शीर्ष (torsion head) से फॉस्फर ब्रौंज के बारीक़ तार से लटकाई जाती है। इसके निम्नलिखित कारण है- (a) फॉस्फर ब्रौंज के तार की एकांक ऐठन (unit twist) के लिए बलयुग्म के आघूर्ण का मान कम होता है। इससे लाभ यह होता है की गैलवेनोमीटर की कुंडली में उत्पन्न बलयुग्म के आघूर्ण का कम मान भी तार में अधिक ऐठन उत्पन्न कर देता है जिससे स्केल पर प्राप्त विक्षेप अधिक होता है। इसके अतिरिक्त फॉस्फर-ब्रौंज का तार विक्षेप के बाद अपनी पूर्व स्थिति में तुरंत वापस चला आता है। (b) इसका प्रतिरोध कम होती है, जिससे इससे कम-से-कम मान वाली धारा भी आसानी से प्रवाहित हो सकती है। यह वायुमंडल के ऑक्सीजन, नमी आदि से मिलकर ऑक्सीकृत (oxidised) नहीं हो पाता। (c) यह अचुम्बकीय (nonmagnetic) होता है। (d) इसकी प्रत्यास्थता (elasticity) अधिक होती है, जिस कारण इसका पतले-से-पतला तार भी जल्दी नहीं टूटता। चल-कुंडली गैलवेनोमीटर की कुंडली जिन ध्रुव-खण्डों (pole pieces) के बीच लटकती है, उनकी बनावट अवतल होती है। इससे चुम्बकीय क्षेत्र त्रैज्य () हो जाता है जिससे लाभ यह होता है की कुंडली की ऊर्ध्वाधर भुजाओं पर बल, कुंडली की किसी भी विक्षेपित स्थिति के लिए हमेशा तल के लम्बवत होता है। इससे कुंडली का विक्षेप मापी जानेवाली धारा (जो कुंडली से प्रवाहित होती है) के समानुपाती होता है। |
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