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Answer» गृहिणी गृह की संचालिका है। नि:सन्देह उसे गृह के अधिकांश कार्य स्वयं सम्पन्न करने पड़ते हैं, जिससे उसे बहुत श्रम करना पड़ता है। प्रत्येक गृहिणी की शारीरिक शक्ति सीमित होती है। इस स्थिति में यदि कुछ बातों को ध्यान में न रखा जाए तो गृहिणी को गृह- कार्यों से अधिक थकान हो सकती है। इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए कुछ ऐसे उपाय किए जाने चाहिए, जो गृहिणी के समय तथा श्रम को बचाने में सहायक हों। समय व श्रम की बचत के उपाय निम्नलिखित उपाय एवं उपकरणों की सहायता से समय व श्रम की बचत होती है ⦁ कार्य करते समय यह ध्यान रखें कि इसके लिए अनावश्यक क्रियाएँ अथवा श्रम न करना पड़े। उदाहरण के लिए-वस्तुओं को एक व्यवस्थित क्रम में रखने पर कार्य करने के समय उनको ढूंढ़ने में समय अथवा श्रम व्यर्थ नहीं होता। ⦁ खाद्य पदार्थ, मिर्च, मसाले आदि सामग्री, बर्तन इत्यादि का रसोई-गृह में इस क्रम में रखा जाए जिससे कि उनको लेने-रखने में अधिक चलना, झुकनां व उचकना न पड़े। ⦁ एक साथ उपयोग में आने वाली आवश्यक वस्तुओं को एक साथ रखें; जैसे–मिर्च, मसाले व नमक आदि को मसालेदानी में रखें। चीनी एवं चाय की पत्ती को पास-पास ही रखें। ⦁ श्रम व समय की बचत करने वाले उपकरणों एवं यन्त्रों; जैसे-गैस का चूल्हा, प्रेशर कुकर, वाशिंग मशीन, बिजली की प्रेस आदि का यथासम्भव प्रयोग किया जाना चाहिए। ⦁ प्रयोग में आने वाले सभी उपकरण ठीक स्थिति में होने चाहिए तथा इनकी गुणवत्ता भी सन्तोषजनक होनी चाहिए। ⦁ कार्य करते समय गृहिणी की शारीरिक स्थिति अथवा उठने, बैठने व खड़े होने का ढंग इस प्रकार हो कि जिसमें कम-से-कम थकावट हो। ⦁ एक कार्य करते हुए गृहिणी जब थकने लगे, तो उसे कार्य-परिवर्तन करना चाहिए। ⦁ मेज-कुर्सी आदि फर्नीचर गृहिणी की ऊँचाई के अनुसार होने चाहिए, जिससे थकावट कम हो। ⦁ सभी दैनिक कार्यों को उपयुक्त योजना बनाकर करना चाहिए। ⦁ परिवार के सभी सदस्यों के मध्य उनकी कार्यक्षमता एवं योग्यता के अनुसार कार्यों का विभाजन करना चाहिए। अर्थ (धन) की बचत के उपाय परिवार की लगभग सभी आवश्यकताएँ आर्थिक साधनों अर्थात् धन पर निर्भर करती हैं। अतः आर्थिक साधनों का सोच-समझकर व नियन्त्रित ढंग से उपयोग करना चाहिए तथा भविष्य के लिए बचत का प्रावधान अवश्य रखना चाहिए। अग्रलिखित उपायों से यह सम्भव हो सकती है (1) आय-व्यय में सन्तुलन बनाए रखना: परिवार के आर्थिक साधन प्रायः सीमित होते हैं, परन्तु आवश्यकताएँ अनन्त होती हैं। अतः आय-व्यय का सन्तुलन प्रमुख आवश्यकताओं की पूर्ति को ही प्राथमिकता देकर किया जा सकता है। आय के साधनों एवं आवश्यकताओं के अनुसार प्रत्येक गृहिणी को बजट बनाना चाहिए तथा उसे सिद्धान्त रूप से बजट में निर्धारित मदों पर निर्धारित धनराशि का ही व्यय करना चाहिए। (2) मितव्ययिता के उपाय प्रयोग में लाना: निम्नलिखित उपायों के आधार पर गृहिणी दैवीक जीवन में धन की बचत कर सकती है ⦁ केवल अत्यावश्यक वस्तुओं को ही खरीदना। ⦁ समान पौष्टिक गुणों वाले सस्ते खाद्य पदार्थ खरीदना। ⦁ प्रतिकूल ऋतु में सस्ता सामान खरीदना, जैसे कि ग्रीष्म ऋतु में ऊन। ⦁ पानी, ईंधन व बिजली का केवल आवश्यक उपयोग करना। ⦁ खाद्य पदार्थों की बर्बादी न करना। ⦁ कम-से-कम नौकर रखना। ⦁ बच्चों को ट्यूटर न रखकर स्वयं पढ़ाना।
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