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गेहूं के उत्पादन के लिए उपयुक्त भौगोलिक दशाओं का वर्णन कीजिए तथा ऑस्ट्रेलिया या चीन में उसकी खेती का विवेचन कीजिए। यासंयुक्त राज्य अमेरिका के गेहूँ उत्पादक-क्षेत्रों का वर्णन कीजिए। याविश्व के दो प्रमुख गेहूँ उत्पादक देशों का वर्णन कीजिए।यागेहूं की खेती के लिए आवश्यक भौगोलिक दशाओं का वर्णन कीजिए तथा विश्व के प्रमुख गेहूँ उत्पादक देशों का उल्लेख कीजिए। |
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Answer» सामान्य परिचय – मानव की तीन आधारभूत आवश्यकताओं- भोजन, वस्त्र एवं आवास- में भोजन सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण है। भोजन उपलब्ध कराने में गेहूं का महत्त्वपूर्ण स्थान है। गेहूँ में पोषक तत्त्वों एवं प्रोटीन की मात्रा अन्य खाद्यान्नों की अपेक्षा अधिक होती है। इसी कारण इसे ‘अन्नराज’ कहा जाता है। भूमध्यसागरीय क्षेत्रों को गेहूँ की जन्म-भूमि होने का गौरव प्राप्त है। गेहूं की खेती शीतोष्ण कटिबन्ध में उत्तरी गोलार्द्ध में 30° से 60° उत्तरी अक्षांशों के मध्य प्रमुख रूप से की जाती है, जहाँ विश्व का 90% गेहूं उत्पन्न होता है। दक्षिणी गोलार्द्ध में 20 से 40° अक्षांशों के मध्य गेहूं की खेती की जाती है। इसके अतिरिक्त विषुवतीय कटिबन्ध के उच्च पठारी भागों में (अफ्रीका महाद्वीप के कीनिया आदि देशों में) तथा रूस के ध्रुवीय प्रदेशों में गेहूं की विस्तृत खेती की जाती है। Necessary Geographical Factors for Producing Wheat (1) जलवायु – गेहूँ की कृषि के लिए सम-शीतोष्ण कटिबन्धीय जलवायु उपयुक्त रहती है। ⦁ तापमान – गेहूँ बोते समय हल्की ठण्डे तथा पकते समय हल्की गर्मी आवश्यक होती है। बोते समय 15° सेग्रे तथा पकते समय 26° सेग्रे तापमान उपयुक्त रहता है। इसकी फसल के लिए 90 दिन धूप युक्त स्वच्छ मौसम उपयुक्त रहता है। गेहूं की फसल के लिए पाला, कोहरा एवं ओला हानिकारक होते हैं। भूमध्यसागरीय जलवायु गेहूं की कृषि के लिए आदर्श जलवायु मानी जाती है। ⦁ वर्षा – इसकी खेती के लिए कम नमी की आवश्यकता होती है, अर्थात् 50 से 75 सेमी वर्षा उपयुक्त रहती है। इससे अथिक वर्षा हानिकारक होती है। इससे कम वर्षा वाले भागों में सिंचाई की आवश्यकता होती है। (2) मिट्टी – गेहूं की खेती के लिए उपजाऊ भारी दोमट, नाइट्रोजनयुक्त काली मिट्टी, जिसे चरनोजम कहते हैं, अधिक उपयुक्त रहती है। इसके अतिरिक्त भारी चीका एवं रेतीली मिट्टी भी उपयुक्त होती है। इसी कारण गंगा-सतलुज का मैदान, ह्वांग्हो मैदान एवं दजला-फरात के मैदान गेहूं की कृषि के लिए बहुत ही उपयुक्त हैं। गेहूं के उत्पादन से मिट्टी के पोषक तत्त्व नष्ट हो जाते हैं। अत: मिट्टी की उर्वरता बनाये रखने के लिए अमोनियम सल्फेट, पोटैशियम, सोडियम नाइट्रेट जैसे रासायनिक उर्वरकों को देते रहना चाहिए। (3) धरातल – इसकी कृषि के लिए समतल धरातल उपयोगी रहता है, क्योंकि इसमें आधुनिक मशीनों का प्रयोग किया जा सकता है। यान्त्रिक विधियों द्वारा कृषि करने से अधिक उत्पादन प्राप्त होता है। (4) मानवीय श्रम – कम जनसंख्या वाले भागों में, जहाँ श्रम महँगा होता है, वहाँ गेहूँ की कृषि आसानी से की जा सकती है, क्योंकि इसकी कृषि के लिए अधिक श्रम की आवश्यकता नहीं पड़ती। संयुक्त राज्य अमेरिका एवं रूस में यन्त्रों ने श्रम को सस्ता बना दिया है। यूरोपीय देशों में इसी कारण गेहूँ की सघन खेती की जाती है। विश्व में गेहूं का उत्पादन विश्व में निम्नलिखित दो प्रकार का गेहूँ उगाया जाता है – (1) शीतकालीन गेहूँ – विश्व का 75% गेहूँ शीतकालीन होता है। इसके मुख्य उत्पादक देश संयुक्त राज्य अमेरिका, रूस, मध्य चीन, उत्तरी-पश्चिमी भारत, अर्जेण्टाइना, पाकिस्तान, ऑस्ट्रेलिया आदि हैं। (2) वसन्तकालीन गेहूं – अधिक शीत पड़ने वाले देशों में शीघ्र पकने वाला वसन्तकालीन गेहूँ उगाया जाता है। कनाडा, संयुक्त राज्य अमेरिका, रूस का साइबेरिया प्रदेश एवं उत्तरी चीन इसे गेहूं के मुख्य उत्पादक क्षेत्र हैं। विश्व में प्रत्येक माह किसी-न-किसी देश में जलवायु के अनुसार गेहूं बोया एवं काटा जाता रहता है। विश्व के गेहूँ उत्पादक देशों को निम्नलिखित तीन श्रेणियों में रखा जा सकता है – ⦁ पहली श्रेणी में वे देश आते हैं जो गेहूं का उत्पादन केवल अपने उपभोग के लिए करते हैं, अर्थात् माँग के अनुसार पूर्ति करते हैं। ऐसे देशों में यूरोपीय देश प्रमुख हैं। (1) चीन – यह विश्व का वृहत्तम गेहूँ उत्पादक देश है। यहाँ विश्व का 17% गेहूँ उत्पन्न होता है। यहाँ गेहूँ उत्पादन के पाँच प्रमुख क्षेत्र निम्नवत् हैं – ⦁ मंचूरिया क्षेत्र (2) भारत – यह विश्व का द्वितीय वृहत्तम गेहूँ उत्पादक देश है। ‘हरित-क्रान्ति’ के फलस्वरूप अब भारत में विश्व का लगभग 13% गेहूं उत्पन्न होता है। यहाँ शीतकालीन गेहूं उगाया जाता है। उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश, बिहार व गुजरात क्रमश: बड़े गेहूँ उत्पादक राज्य हैं। यहाँ गेहूं की खेती में सिंचाई का विशेष महत्त्व है। (3) CIS देश – ये विश्व के अग्रणी गेहूँ उत्पादक देश हैं। यहाँ विश्व का 16% से अधिक गेहूं उत्पन्न होता है। रूस की गेहूं पेटी का विस्तार लगभग 4,800 किमी लम्बाई व 650 किमी चौड़ाई में काला सागर तट से बैकाल झील तक समतल एवं उर्वर चरनोजम मिट्टी के क्षेत्र पर है। रूस में 2/3 गेहूँ वसन्तकालीन होता है। प्रमुख क्षेत्र वोल्गा बेसिन, यूराल प्रदेश, उत्तरी यूक्रेन व कजाकिस्तान हैं। शीतकालीन गेहूं के प्रमुख क्षेत्र यूक्रेन, क्रीमिया व उत्तरी काकेशस प्रदेश हैं। यह क्षेत्र पूर्व सोवियत संघ की ‘रोटी की टोकरी’ (Bread basket of Russia) कहलाता था। रूस में गेहूं की पेटी की सीमा के विस्तार (उत्तर में साइबेरिया एवं दक्षिण में शुष्क मरुस्थलीय भागों की ओर) के निरन्तर प्रयास किये जा रहे हैं। यहाँ सम्पूर्ण कृषि सरकारी फार्मों पर मशीनों द्वारा की जाती है। (4) फ्रांस – यह विश्व का चौथा वृहत्तम गेहूँ उत्पादक देश है। यहाँ विश्व का 5.5% से अधिक गेहूँ पैदा होता है। पेरिस बेसिन में समस्त देश का आधा गेहूं उत्पन्न होता है। एक्वीटेन बेसिन व रोन घाटी अन्य मुख्य उत्पादक क्षेत्र निम्नवत् हैं। (5) ऑस्ट्रेलिया – यह विश्व का पाँचवाँ वृहत्तम गेहूँ उत्पादक देश है। यहाँ विश्व का 4% गेहूँ उत्पन्न होता है। यहाँ विस्तृत कृषि फार्मों पर गेहूँ की शुष्क कृषि पूर्णत: यन्त्रीकृत है। गेहूँ उत्पादन के दो प्रमुख क्षेत्र हैं ⦁ दक्षिणी-पूर्वी तथा दक्षिणी क्षेत्र – ग्रेट डिवाइडिंग रेन्ज के पश्चिम में आन्तरिक भागों की ओर इस क्षेत्र का विस्तार न्यूसाउथवेल्स, विक्टोरिया, दक्षिणी ऑस्ट्रेलिया व क्वीन्सलैण्ड राज्य के भागों पर है। ब्रिस्बेन, सिडनी, मेलबोर्न व एडीलेड पत्तनों से गेहूँ निर्यात किया जाता है। ⦁ दक्षिणी-पश्चिमी क्षेत्र – पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया राज्य के दक्षिणी-पश्चिमी भाग में भूमध्यसागरीय जलवायु के क्षेत्र गेहूँ के मुख्य उत्पादक हैं। फ्रीमेन्टल गेहूं का प्रमुख निर्यातक पत्तन है। (6) संयुक्त राज्य अमेरिका – यह विश्व का छठा बड़ा गेहूँ उत्पादक देश है। यहाँ विश्व का 4% से अधिक गेहूं उत्पन्न होता है। देश के उत्तरी भाग में वसन्तकालीन एवं दक्षिणी भाग में शीतकालीन गेहूँ उत्पन्न होता है। किन्तु दक्षिणी राज्यों में अधिक तापमानों के कारण गेहूँ के रोगग्रस्त होने तथा कपास की वाणिज्यिक कृषि उपज से स्पर्धा होने के कारण गेहूँ उत्पादन सीमित है। इस देश में गेहूं उत्पादन के पाँच प्रमुख क्षेत्र निम्नवत् हैं – ⦁ वसन्तकालीन गेहूँ क्षेत्र – इसका विस्तार मिनीसोटा राज्य में रेड नदी-घाटी से पश्चिम में रॉकी पर्वतों तक एवं उत्तर में कनाडा के प्रेयरी प्रदेश तक मोन्टाना, उत्तरी व दक्षिणी डकोटा एवं मिनीसोटा राज्यों पर है। मिनियापोलिस व डुलुथ प्रमुख गेहूँ मण्डियाँ हैं। ⦁ शीतकालीन कठोर गेहूँ क्षेत्र – यह क्षेत्र संयुक्त राज्य के मध्य में कन्सास, नेब्रास्का, मिसौरी, ओकलाहामा, टैक्सास व कोलोरेडो राज्यों पर विस्तृत है। यहाँ गेहूं की अधिकांशत: स्थानीय खपत होती है। शेष गेहूँ गाल्वेस्टन, मोबाइल व न्यूआर्लियन्स पत्तनों द्वारा निर्यात किया जाता है। ⦁ शीतकालीन कोमल गेहूँ क्षेत्र – इस प्रदेश का विस्तार देश के उत्तरी-पूर्वी भाग में ओहियो घाटी में ओहियो-इलिनॉयस, इण्डियाना, वर्जीनिया, पेन्सिलवेनिया, मैरीलैण्ड तथा न्यूयॉर्क राज्यों में हैं। बफैलो व शिकागो प्रमुख गेहूँ मण्डियाँ तथा निर्यातक पत्तन हैं। ⦁ कोलम्बिया पठार का गेहूँ क्षेत्र – इस लघु क्षेत्र का विस्तार पूर्वी वाशिंगटन, उत्तरी ओरेगन तथा पश्चिमी इदाहो राज्यों पर है। यहाँ शीतकालीन कठोर गेहूँ एव वसन्तकालीन गेहूँ समान रूप से उगाये जाते हैं। सिएटल व पोर्टलैण्ड प्रमुख निर्यातक पत्तन हैं। ⦁ कैलीफोर्निया गेहूँ क्षेत्र – कैलीफोर्निया राज्य की सान जोक्विन तथा सेक्रामेण्टो घाटियों में शीतकालीन गेहूं उगाया जाता है। सार्न फ्रांसिस्को प्रमुख निर्यातक पत्तन है। (7) जर्मनी – यहाँ विश्व का लगभग 4% गेहूं उत्पन्न होता है। प्रमुख उत्पादक क्षेत्र- उत्तर में ⦁ लोयस मिट्टी क्षेत्र व दक्षिण में (8) कनाडा – यहाँ विश्व का लगभग 4% गेहूँ उत्पादन होता है। यहाँ गेहूँ के दो प्रमुख उत्पादक क्षेत्र निम्नवत् हैं – ⦁ वसन्तकालीन गेहूँ क्षेत्र – इसका विस्तार कनाडा के प्रेयरी प्रदेश (सस्केचवान, मैनीटोबा व अलबर्टा राज्य) तक है। विनिपेग गेहूं की विश्वविख्यात मण्डी है। पोर्ट आर्थर भी गेहूँ का प्रमुख व्यापारिक केन्द्र है। ⦁ शीतकालीन कोमल गेहूँ क्षेत्र – इसका विस्तार महान् झीलतटीय क्षेत्र (ओण्टारिया व क्यूबेक राज्य) पर है। मॉण्ट्रियल, हैलीफैक्स तथा सेंट जॉन पत्तन गेहूँ के निर्यातक हैं। (9) पाकिस्तान – यहाँ विश्व को 3.4% से अधिक गेहूं उत्पन्न होता है। पंजाब, सिन्ध व सीमा प्रान्तों के सिंचित भाग मुख्य गेहूँ उत्पादक हैं। (10) अर्जेण्टाइना – यहाँ विश्व का 3% से अधिक गेहूँ उत्पन्न होता है। यह दक्षिणी अमेरिका का वृहत्तम गेहूँ उत्पादक देश है। पम्पा के विस्तृत समतल, उर्वर मैदानी भाग में अर्द्धचन्द्राकार गेहूँ क्षेत्र स्थित है। यहाँ हजारों एकड़ भूमि में विस्तृत कृषि फार्मों पर मशीनों द्वारा विस्तृत खेती की जाती है। ब्यूनस आयर्स व बाहिया ब्लांका प्रमुख गेहूँ निर्यातक पत्तन हैं। (11) इटली – यहाँ विश्व का लगभग 2% गेहूँ उत्पन्न होता है। गेहूँ उत्पादन के तीन प्रमुख क्षेत्र – ⦁ पो-बेसिन का लोम्बार्डी मैदान (12) ब्रिटेन – स्कॉटलैण्ड के दक्षिणी – पूर्वी भाग एवं इंग्लैण्ड के पूर्वी भाग में लोयस मिट्टी के क्षेत्र में गेहूं का उत्पादन अधिक होता है। यहाँ विश्व का 2% गेहूँ उत्पादन होता है। ⦁ एशियाई देशों में – इराक, सीरिया, लेबनान, इजराइल, जोर्डन, अफगानिस्तान, जापान के कुछ भाग गेहूँ उत्पन्न करते हैं। ⦁ यूरोपीय देशों में – स्पेन का जमोरा क्षेत्र, पुर्तगाल का उत्तरी क्षेत्र; ऑस्ट्रिया, हंगरी, रूमानिया व बल्गेरिया के डेन्यूब घाटी-क्षेत्र; यूगोस्लाविया के उत्तर में बनाते क्षेत्र इटली का पो बेसिन आदि गेहूँ उत्पादक क्षेत्र हैं। ⦁ अफ्रीकी देशों में – मिस्र में नील नदी-घाटी, दक्षिणी अफ्रीका में केप प्रान्त, ट्रान्सवाल बिट्स वे रुस्टेनबर्ग क्षेत्र; मोरक्को, अल्जीरिया व ट्यूनिशियों के उत्तरी तटीय मैदानी भाग, अबीसीनिया के पठारी भाग तथा सोमालिया के तटीय भागों में गेहूं उत्पन्न होता है। अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार International Trade विश्व में गेहूं के प्रमुख निर्यातक देश संयुक्त राज्य अमेरिका, कनाडा, अर्जेण्टाइना व ऑस्ट्रेलिया हैं। विश्व का 40% से अधिक गेहूँ निर्यात संयुक्त राज्य अमेरिका से होता है। प्रमुख आयातक देश चीन, यूरोपीय देश (ब्रिटेन, जर्मनी, पोलैण्ड, चेक गणराज्य एवं स्लोवाकिया) जापान एवं ब्राजील हैं। चीन वे भारत प्रमुख गेहूँ उत्पादक होने पर भी सघन जनसंख्या के कारण गेहूँ के आयातक देश हैं। विगत वर्षों में हरित क्रान्ति द्वारा भारत गेहूँ उत्पादन में आत्मनिर्भर हो गया है। |
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