1.

विश्व में गन्ने के उत्पादन में सहायक भौगोलिक कारकों का विश्लेषण कीजिए तथा किसी एक महाद्वीप में उसके उत्पादक क्षेत्रों का विवरण दीजिए।याविश्व में गन्ने के वितरण, उत्पादन तथा व्यापार का वर्णन कीजिए।यागन्ने की खेती के लिए उपयुक्त भौगोलिक दशाओं का वर्णन कीजिए तथा विश्व में इसके प्रमुख उत्पादक क्षेत्रों का उल्लेख कीजिए। 

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व्यावसायिक फसलों में गन्ने का महत्त्वपूर्ण स्थान है। चीनी प्राप्त होने वाले स्रोतों में गन्ना, चुकन्दर, शकरकन्द, ताड़, खजूर, नारियल, अंगूर, आलू, मेपुल आदि हैं, परन्तु इनमें गन्ना तथा चुकन्दर अन्तर्राष्ट्रीय बाजार में महत्त्वपूर्ण स्थान रखते हैं। दक्षिणी-पूर्वी एशिया को गन्ने की जन्म-भूमि होने का सौभाग्य प्राप्त है, जहाँ बागाती कृषि के रूप में इसका प्रारम्भ किया गया था। जैसे-जैसे यूरोपीय देशों में चीनी की माँग बढ़ती गयी, गन्ने के उत्पादन में भी उत्तरोत्तर वृद्धि होती गयी, परन्तु यूरोपीय देशों में चुकन्दर ने इसकी प्रतिस्पर्धा ले ली, फिर भी आज विश्व की 63% चीनी का उत्पादन गन्ने से ही किया जाता है। अतः गन्ना एक प्रमुख मुद्रादायिनी उपज है।

आवश्यक भौगोलिक दशाएँ

Necessary Geographical Conditions

(1) जलवायु – गन्ना उष्ण कटिबन्धीय आर्द्र भागों की उपज है। इसके बोते समय आर्द्र जलवायु होनी चाहिए। उगते समय बीच-बीच में शुष्क एवं गर्म मौसम रहने से इसमें मिठास अधिक हो जाता है। इसकी फसल 10-12 महीनों में तैयार हो जाती है। गन्ने का उत्पादन क्षेत्र 32° उत्तरी अक्षांश से 36° दक्षिणी अक्षांशों के मध्य विस्तृत है। क्यूबा में इसकी फसल 15 महीनों में तैयार होती है, जबकि हवाई द्वीप समूह में दो वर्ष तक लग जाते हैं।

⦁    तापमान – गन्ना उत्पादन के लिए उच्च तापमान की आवश्यकता होती है, बोते समय औसत तापमान 20° सेग्रे तथा वृद्धि के समय 20° सेग्रे से 28° सेग्रे तक तापमान आवश्यक है। 34° सेग्रे से अधिक तापमान हानिकारक रहता है तथा 15° सेग्रे पर इसकी वृद्धि रुक जाती है। पाला एवं कोहरा इसकी फसल को हानि पहुँचाता है। पकते समय शुष्क मौसम गन्ने के रस एवं उसकी मिठास में वृद्धि कर देता है।

⦁    वर्षा – गन्ने की कृषि के लिए आर्द्र जलवायु आवश्यक होती है। अत: 100 से 200 सेमी वर्षा वाले भागों में गन्ने की खेती की जाती है। नम सागरीय पवनें इसकी फसल के लिए बहुत ही लाभप्रद होती हैं। वर्षा वर्षभर निरन्तर होती रहनी चाहिए। कम वर्षा वाले भागों में सिंचाई की आवश्यकता पड़ती है।

(2) मिट्टी – गन्ने के लिए उपजाऊ गहरी चिकनी मिट्टी आवश्यक होती है। जलोढ़ एवं लावायुक्त मिट्टी अधिक उपयुक्त रहती है। अच्छी फसल के लिए नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, कैल्सियम आदि रासायनिक उर्वरक लाभदायक रहते हैं, क्योंकि गन्ना मिट्टी के पोषक तत्त्वों का अधिक शोषण करता है।

(3) धरातल एवं मानवीय श्रम – गन्ने की कृषि के लिए समतल धरातल एवं पानी निकास की उचित व्यवस्था होनी चाहिए। समतल धरातल पर सिंचाई एवं आवागमन के साधन सुलभ रहते हैं। इसकी कृषि के लिए अधिक श्रमिकों की आवश्यकता रहती है, इसीलिए गन्ना सघन जनसंख्या वाले देशों में अधिक उगाया जाता है।

विश्व में गन्ने के उत्पादक देश
Sugarcane Producing Countries in the World

विश्व में प्रमुख गन्ना उत्पादक देश निम्नलिखित हैं –

(1) ब्राजील – गन्ना उत्पादन में ब्राजील का विश्व में प्रथम स्थान है। यह विश्व का 54% गन्ना पैदा करता है। यहाँ पुर्तगालियों द्वारा गन्ने की खेती का श्रीगणेश किया गया है। इस देश की जलवायु, दशाएँ एवं भौगोलिक परिस्थितियाँ गन्ना उत्पादन के अधिक अनुकूल हैं। अनुकूल जलवायु, सस्ता एवं कुशल श्रम, उपजाऊ भूमि, गन्ना उत्पादन की विस्तृत क्षेत्रफल, रासायनिक उर्वरकों का अधिकाधिक प्रयोग आदि कारक गन्ना उत्पादन में सहायके हुए हैं। अलागोस, बाहिया, मिनास-गेरास, पेरानाम्बुके आदि राज्य गन्ने के प्रमुख उत्पादक क्षेत्र हैं।

(2) भारत – वर्तमान में भारत का विश्व में गन्ना उत्पादन में दूसरा स्थान है, जहाँ विश्व का 22.8% गन्ना उगाया जाता है। उष्ण एवं शुष्क जलवायु होने के कारण प्रति हेक्टेयर उत्पादन कम है तथा गन्ने के रस में चीनी की मात्रा भी कम पायी जाती है। गन्ना उत्पादन के प्रमुख क्षेत्र मध्ये गंगा घाटी एवं समुद्रतटीय मैदान हैं। उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र एवं तमिलनाडु तीनों राज्य मिलकर 70% गन्ने का उत्पादन करते हैं, जब कि गंगा के मैदान में देश का 50% गन्ना उत्पन्न किया जाता है। उत्तरी भारत गन्ने का प्रमुख क्षेत्र है। पूर्वी उत्तर प्रदेश में गोरखपुर, गोण्डा, बस्ती, बलिया एवं आजमगढ़ जिले गन्ने के प्रमुख उत्पादक हैं, जबकि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, मेरठ, बुलन्दशहर, गाजियाबाद, अलीगढ़, मुरादाबाद आदि जिले मुख्य स्थान रखते हैं।
दक्षिणी भारत में तमिलनाडु, आन्ध्र प्रदेश, कर्नाटक, महाराष्ट्र राज्यों का स्थान मुख्य है। यहाँ समुद्री जलवायु के कारण गन्ना अच्छा पनपता है तथा उत्तरी भारत की अपेक्षा प्रति हेक्टेयर उत्पादन भी अधिक होता है।

(3) चीन – गन्ना उत्पादन में विश्व में चीन का तीसरा स्थान है। यहाँ विश्व का 8.3% गन्ना उगाया जाता है। दक्षिणी चीन में गन्ने का उत्पादन सबसे अधिक होता है। सीक्यांग बेसिन एवं तटीय क्षेत्र गन्ना उत्पादन में प्रमुख स्थान रखते हैं। ताईवान द्वीप में भी गन्ने का उत्पादन किया जाता है।

(4) पाकिस्तान – यहाँ विश्व को 3.5% गन्ना पैदा होता है। पाकिस्तान के शुष्क भागों में जहाँ पर्याप्त सिंचाई की सुविधाएँ विद्यमान हैं, वहाँ गन्ने की कृषि की जाती है, परन्तु प्रति हेक्टेयर उत्पादन कम है। लाहौर, लायलपुर, मुल्तान, स्यालकोट एवं रावलपिंडी आदि प्रमुख उत्पादक जिले हैं।

(5) वियतनाम – वियतनाम में विश्व का 1.2% गन्ना पैदा होता है। जावा द्वीप प्रमुख गन्ना उत्पादक है। इस देश में गन्ने के उत्पादन के लिए भौगोलिक दशाएँ क्यूबा जैसी ही उपलब्ध हैं। ज्वालामुखी उद्गारों से प्राप्त लावा मिट्टी तथा उष्ण जलवायु ने गन्ने की कृषि का विकास किया है। यहाँ बागाती कृषि के रूप में गन्ना उत्तरी तटीय मैदान तथा पूर्वी भागों में उगाया जाता है। गन्ना उत्पादन में इस देश को सबसे बड़ी सुविधा चीनी मिलों का गन्ना उत्पादक क्षेत्रों के निकट स्थापित किया जाना है

(6) फिलीपीन्स – गन्ना उत्पादन फिलीपन्स का प्रमुख व्यवसाय है। यहाँ विश्व का 2.2% गन्ना पैदा होता है। यहाँ पर इसकी कृषि के लिए सबसे बड़ी सुविधा ज्वालामुखी से प्राप्त लावा मिट्टी है, जो गन्ने की उत्पत्ति में बहुत ही उपजाऊ है। नेग्रोस, पनाय तथा लूजोन द्वीपों पर समुद्रतटीय भागों में गन्ने का उत्पादन किया जाता है।
इनके अतिरिक्त थाईलैण्ड, ऑस्ट्रेलिया, संयुक्त राज्य अमेरिका, मारीशस, हवाई द्वीप-समूह, पीरू, अर्जेण्टाइना, मिस्र तथा अफ्रीका के कांगो बेसिन में भी गन्ने का उत्पादन किया जाता है।

अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार
International Trade

गन्ने का कोई विदेशी व्यापार नहीं किया जाता। गन्ने को कच्चे संसाधन के रूप में प्रयुक्त कर चीनी एवं गुड़ आदि तैयार किये जाते हैं। इससे निर्मित चीनी का अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार में बड़ा महत्त्व है। सामान्यत: विश्व की कुल चीनी का लगभग 50% विकासशील देश, 30% विकसित देश तथा 20% साम्यवादी देश उत्पन्न करते हैं, किन्तु विश्व में कुल निर्यात मात्रा का 75% भाग विकासशील देशों से। प्राप्त होता है।
विश्व में चीनी के मुख्य आयातक राष्ट्र-संयुक्त राज्य अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम, जापान, जर्मनी, इटली, नाइजीरिया, कनाडा आदि हैं। चीनी के निर्यातक देशों में क्यूबा, भारत, जावा, फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, फिलीपीन्स, थाईलैण्ड, मॉरीशस आदि मुख्य हैं।



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