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Answer» गृहिणी गृह-संचालन में मुख्य भूमिका निभाती है। वह पत्नी, माता, गुरु व गृह-स्वामिनी के कर्तव्यों का पालन करते हुए अपने गृह में समृद्धि, सुख एवं सन्तोष का वातावरण बनाए रखती है। गृह की सुव्यवस्था के लिए प्रत्येक गृहिणी में निम्नलिखित गुणों का होना आवश्यक है| (1) कर्तव्यों का ज्ञान: पति से मधुर व्यवहार करना, सास-ससुर का आदर करना, ननद व देवर से स्नेह रखना, अतिथियों का सत्कार करना, बच्चों से प्रेम करना व उन्हें अच्छी शिक्षा देना आदि ऐसे कर्तव्य हैं, जिनका पालन कर गृहिणी सबका हृदय जीत लेती है। (2) अनुकूलता: एक कुशल गृहिणी परिवार के सभी सदस्यों से मधुर सम्बन्ध बनाए रखती है। वह प्रत्येक सदस्य की अभिरुचियों, कार्यक्षमता व भावनाओं का ज्ञान रखती है तथा गृह की सुव्यवस्था में सदस्यों से अपेक्षित सहयोग प्राप्त करती है। (3) परिश्रमी होना: गृह-कार्यों को करने के लिए प्रत्येक गृहिणी को परिश्रमी होना चाहिए। इसके लिए गृहिणी को सामान्य स्वास्थ्य अच्छा होना चाहिए। (4) चरित्रवान होना: अच्छे चरित्र को बच्चों पर व परिवार के अन्य सदस्यों पर अनुकूल प्रभाव पड़ता है। अतः गृहिणी का चरित्रवान होना अनिवार्य है। (5) कार्य-कुशलता: गृह की सुयवस्था के लिए गृहिणी का गृह-कार्यों में निपुण होना अत्यन्त आवश्यक है। कुशल गृहिणी के सभी का सही समय पर होते हैं, घर स्वच्छ रहता है तथा परिवार के सभी सदस्य सन्तुष्ट रहते हैं। (6) भोजन की सुव्यवस्था: भोजन शरीर के विकास एवं निर्माण का आधार है। रुचिकर एवं पौष्टिक भोजन परिवार के सदस्यों को सन्तुष्ट एवं स्वस्थ रखता है। एक कुशल गृहिणी अपने परिवार के सदस्यों के लिए उनकी आवश्यकता के अनुसार पौष्टिक तथा सन्तुलित आहार की व्यवस्था करती है। परिवार में बच्चों, वृद्धों एवं रोगी सदस्यों के लिए कुछ भिन्न प्रकार के आहार की आवश्यकता हो सकती (7) गृह-परिचर्या: प्रत्येक गृहिणी को गृह-परिचर्या का आवश्यक ज्ञान होना चाहिए, जिससे कि वह समय पड़ने पर घर पर परिवार के किसी रोगी सदस्य की उचित देखभाल कर सके। (8) नियोजन का ज्ञान: प्रत्येक गृहिणी को सभी गृह-कार्य एक उचित योजना बनाकर करने चाहिए। इससे समय व श्रम की बचत होती है। (9) आय-व्यय का सन्तुलन: प्रत्येक गृहिणी को आय-व्यय का सन्तुलन बनाए रखने के लिए बजट बनाना चाहिए। धन को प्रायः आवश्यक कार्यों में ही व्यय करना चाहिए तथा भविष्य के लिए बचत का प्रावधान रखना चाहिए। (10) परिवार में शान्ति बनाए रखना: प्रत्येक गृहिणी को महत्त्वपूर्ण कार्य सभी सदस्यों के परामर्श से करने चाहिए। गृहिणी को सभी सदस्यों से यथोक्ति व्यवहार करना चाहिए तथा आपसी मनमुटाव व झगड़ों को हतोत्साहित करना चाहिए। इस दृष्टिकोण को अपनाने से परिवार का वातावरण सौहार्दपूर्ण बना रहता है। (11) सेवकों के प्रति व्यवहार: सेवकों को समय पर वेतन देना चाहिए तथा उनके अच्छे कार्यों की प्रशंसा करनी चाहिए। सेवकों के प्रति सन्तुलित व्यवहार रखना चाहिए अर्थात् उनके प्रति न तो अधिक कठोर व्यवहार करना चाहिए और न ही उन्हें आवश्यकता से अधिक ढील ही दी जानी चाहिए। (12) अतिथि सत्कार: प्रत्येक गृहिणी को अतिथियों का समुचित आदर-सत्कार करना चाहिए। इससे परिवार को सामाजिक प्रतिष्ठा प्राप्त होती है। (13) पति के प्रति कर्तव्य: पति की सेवा करना व आज्ञा-पालन करना गृहिणी का सबसे महत्त्वपूर्ण कर्तव्य है। अच्छे-अच्छे कार्यों के लिए पति को उत्साहित करना, मानसिक व आर्थिक कठिनाइयों में पति का साहस बढ़ाना, गृहस्थी के दायित्वों के प्रति पति को सदैव सजग रखना इत्यादि ऐसे महत्त्वपूर्ण कार्य हैं, जिनको अपने प्रेमपूर्ण व्यवहार से केवल एक कुशल गृहिणी ही कर सकती है।
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