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गति संवेदनाओं के अर्थ एवं प्रकारों को स्पष्ट कीजिए। |
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Answer» गति से सम्बन्धित संवेदनाओं को गति संवेदना के नाम से जाना जाता है। सामान्य रूप से शरीर के जोड़ों, कण्डराओं तथा मांसपेशियों के माध्यम से गति संवेदनाओं को ग्रहण किया जाता है। गति संवेदनाओं के मुख्य उदाहरण हैं-खिंचाव, तनाव तथा सिकुड़न। गति संवेदनाओं की अनुभूति जहाँ एक ओर शरीर की विभिन्न मांसपेशियों के तथा स्नायु तन्तुओं द्वारा होती है, वहीं दूसरी ओर पूरी त्वचा का भी गति संवेदनाओं से सम्बन्ध होता है। ये संवेदनाएँ अग्रलिखित तीन प्रकार की होती हैं – (अ) स्थिति से सम्बन्धित गति संवेदनाएँ – प्रत्येक व्यक्ति का अनुभव है कि यश-कदा बैठे-बैठे ही व्यक्ति की भुजाओं या जंघाओं की मांसपेशियों में एक विशेष प्रकार की कम्पन्न या गति होने लगती है। इस गति के लिए न तो अंगों को हिलाया जाता है और न ही फैलाया जाता है। इस प्रकार की संवेदनाओं को स्थिति से सम्बन्धित गति संवेदनाएँ कहते हैं। |
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