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कबीर ने ‘काल की पास’ बताया है(क) सांसारिक सुखों को .(ख) जप-तप-आराधना को(ग) राम के अतिरिक्त किसी अन्य के चिंतन को(घ) मृत्यु को |
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Answer» (ग) राम के अतिरिक्त किसी अन्य के चिंतन को |
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