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संतो, भाई आई ज्ञान की आँधी रे। पद में कबीर क्या संदेश देना चाहते हैं? स्पष्ट कीजिए। |
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Answer» कबीर भले ही घोषणा करते हों कि उन्होंने मसि-कागद तौ छुओ नहिं, कलम गही ना हाथ’ परन्तु उन्होंने अपनी बात सटीक प्रतीकों और रूपकों द्वारा कहने में पूर्ण निपुणता दिखाई है। उपर्युक्त पद में कवि कबीर ने ज्ञान की महत्ता को अलंकारिक शैल में प्रस्तुत किया। उनकी मान्यता है स्वभावगत सारे दूषणों से मुक्ति पाने के लिए ज्ञान से बढ़कर और कोई औषध नहीं है। जब हृदय में ज्ञानरूपी आँधी आती है तो सारे दुर्गुण एक-एक करके धराशायी होते चले जाते हैं और अंत में साधक को हृदय प्रेम की रिमझिम से भीग उठता है। ज्ञान-सूर्य का उदय होते ही अज्ञान की अंधकार विलीन हो जाता है। यही ज्ञान-प्राप्ति की साधना का संदेश इस पर पद द्वारा कबीर ने दिया है। |
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