1.

कबीर ने संसार की तुलना ‘सेंबल’ के फल से क्यों की है ? स्पष्ट कीजिए।

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सेंबल (शाल्मली) के वृक्ष पर लाल रंग के फूल या बौंडी आते हैं। ये देखने में सुन्दर होते हैं। कहा जाता है कि तोता इसे कोई मधुर फल समझकर इनके पकने की प्रतीक्षा करता है। पकने पर तोता जब इसे चखने को चोंच चलाता है तो इसके अन्दर से रूई जैसी नीरस पदार्थ निकल पड़ता है। बेचारा तोता ठगा सा रह जाता है और उड़ जाता है। कबीर के अनुसार सांसारिक सुख भी बाहर से बड़े आकर्षक और प्रिय लगते हैं, पर इनका परिणाम निराशाजनक और दु:खदायी होता है।



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