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किसी विद्युत व्दिध्रुव का नेट आवेश शून्य होता हैं , लेकिन इसका व्दिध्रुव - आपूर्ण अशून्य होता हैं । बिंदु A तथा B पर स्थित (-q) तथा (+ q) आवेश के सरल निकाय के लिए चित्र से `(-q)vec(r_(1)) + (+ q) vec(r_(2)) = q(vec r_(2) - vec(r_(1))) = q vec(r) = vec (P)` = व्दिध्रुव - आघूर्ण सदिश । व्यापक रुप से यदि आवेश के वितरण में नेट आवेश शून्य हो , तो उस निकाय का व्दिध्रुव - आघूर्ण सदिश रुप से परिभाषित होता हैं : आवेश के असंतत (discrete) वितरण के लिए , `vec(P) = sum vec(r_(i) q_(i)) तथा आवेश के संतत ( continuous) वितरण के लिए , `vec(P) = int vec(r_(i))dq_(i).` उपर्युक्त आवेशित रिंग के कारण बिंदु P(n R, 0,0) पर विद्युत - क्षेत्र ज्ञात करें , जहाँ n का मान बहूत बड़ा हैं ।A. `(1)/(4piin_(0)(nR)^(3))hati`B. `(1)/(4piin_(0)(nR)^(3))hati`C. `(1)/(4piin_(0)(nR)^(3))hati`D. `(1)/(4piin_(0)(nR)^(3))hati` |
| Answer» Correct Answer - B | |