1.

ना हों देखों और कें, ना तुझ देख न देउँ। यह बात कबीर ने किस प्रसंग में कही है। पठित दोहों के आधार पर लिखिए।

Answer»

एक अक्खड़ संत के अतिरिक्त कबीर के व्यक्तित्व का एक मृदुल और हृदयस्पर्शी पक्ष भी है। वह स्वयं को प्रियतम ‘राम’ (ईश्वर) की बहुरिया और विरहिणी के रूप में में प्रस्तुत करते हैं। उपर्युक्त पंक्ति कबीर ने इसी संदर्भ में कही है। वह अपने प्रियतम को अपनी आँखों में बसाना चाहते हैं, ताकि कोई और वहाँ न आ बसे । नेत्र बंद करके वह किसी और को नहीं देख पाएँगे, और उनके प्रियतम को भी किसी की नजर न लगेगी।



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