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परिवार के सदस्यों का व्यवहार गृह-कार्य-व्यवस्था को किस प्रकार प्रभावित करता है? स्पष्ट कीजिए।

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गृह-कार्य-व्यवस्था पर प्रभाव डालने वाले कारकों में परिवार के सदस्यों का व्यवहार भी महत्त्वपूर्ण कारक है। वास्तव में, परिवार के सदस्यों के व्यवहार से ही कार्य बनते या बिगड़ते हैं। । परिवार में अनेक सदस्य होते हैं तथा परिवार के सभी सदस्य परिवार की कार्य-व्यवस्था में भाग लेते हैं। परिवार के सभी सदस्यों में पारस्परिक सम्बन्ध होते हैं। परिवार के सदस्यों के पारस्परिक सम्बन्ध इनके पारस्परिक व्यवहारों द्वारा निर्धारित होते हैं। यदि परिवार के सदस्यों के पारस्परिक सम्बन्ध मधुर, सहयोगात्मक तथा सामंजस्यपूर्ण होते हैं, तो गृह-कार्य-व्यवस्था अच्छी बनी रहती है। इसके विपरीत, यदि परिवार के सदस्यों के पारस्परिक सम्बन्ध कटु, तनावपूर्ण तथा असहयोगात्मक हों, तो निश्चित रूप से परिवार की कार्य-व्यवस्था अच्छी नहीं रह सकती। इस प्रकार के पारिवारिक सम्बन्धों की स्थिति में गृह-कार्य-व्यवस्था बिगड़ जाती है तथा कोई भी कार्य सुचारू रूप से नहीं हो पाता। परिवार के सदस्यों के पारस्परिक सम्बन्धों को सौहार्दपूर्ण बनाने के लिए आवश्यक है कि परिवार के प्रत्येक सदस्य का व्यवहार उत्तम हो।

परिवार के किसी भी सदस्य द्वारा इस प्रकार का व्यवहार नहीं किया जाना चाहिए कि किसी अन्य सदस्य की भावनाओं को ठेस पहुँचे। परिवार के सभी सदस्यों का अन्य सदस्यों के प्रति मधुर व्यवहार होना चाहिए। इस प्रकार के मधुर व्यवहार गृह-कार्य-व्यवस्था को उत्तम बनाने में महत्त्वपूर्ण योगदान करते हैं। परिवार में कुछ वरिष्ठ सदस्यों द्वारा नियन्त्रणकारी व्यवहार भी किया जाना चाहिए। इस प्रकार का नियन्त्रणकारी व्यवहार भी गृह-कार्य-व्यवस्था पर अनुकूल प्रभाव डालता है। परिवार के सदस्यों के अतिरिक्त घर के नौकरों के प्रति भी सन्तुलित व्यवहार होना चाहिए अर्थात् नौकरों के प्रति न तो अधिक कठोर व्यवहार होना चाहिए और न अधिक कोमलता का। नौकरों के प्रति सन्तुलित व्यवहार होने पर ही वे गृह-कार्य-व्यवस्था में समुचित तथा कुशलतापूर्वक योगदान प्रदान करते हैं।



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