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परिवार के सदस्यों की अभिरुचि का गृह कार्य-व्यवस्था से क्या सम्बन्ध है? स्पष्ट कीजिए। |
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Answer» परिवार के सदस्यों की अभिरुचियाँ भी गृह-कार्य-व्यवस्था को प्रभावित करती हैं। अभिरुचि एक व्यक्तिगत गुण या विशेषता होती है। व्यक्ति की किसी कार्य के प्रति रुचि तथा उसे सीखने की क्षमता को सम्मिलित रूप से अभिरुचि कहते हैं। अभिरुचि के लिए कार्य के प्रति रुचि तथा कार्य करने की योग्यता दोनों का ही होना आवश्यक है। उत्तम गृह-कार्य-व्यवस्था को प्राप्त करने के लिए परिवार के सदस्यों की अभिरुचियों को ध्यान में रखना नितान्त आवश्यक होता है। गृह-कार्यों का विभाजन परिवार के सदस्यों की अभिरुचियों के अनुसार ही किया जाना चाहिए। परिवार के प्रत्येक सदस्य को गृह-कार्य-व्यवस्था के अन्तर्गत उसकी अभिरुचि के अनुकूल कार्य ही सौंपना चाहिए। अभिरुचि के अनुकूल कार्य सौंपने पर सम्बन्धित कार्य उत्तम एवं शीघ्र हो जाता है तथा साथ-साथ कार्य करने वाला भी प्रसन्न तथा अपने कार्य से सन्तुष्ट रहा करता है। इस स्थिति में गृह-कार्य-व्यवस्था उत्तम रहती है तथा परिवार का वातावरण भी अच्छा एवं उत्साहवर्द्धक रहता है। इसके विपरीत, यदि परिवार के सदस्यों को उनकी अभिरुचि के विरुद्ध कार्य सौंप दिए जाएँ तो वे न तो सम्बन्धित कार्य को ही अच्छे ढंग से कर पाते हैं और न ही उन्हें सम्बन्धित कार्य को करने में किसी प्रकार की प्रसन्नता ही होती है। ऐसी स्थिति में गृह-कार्य जैसे-तैसे पूरे तो हो सकते हैं। परन्तु न तो गृह-कार्य-व्यवस्था उत्तम रह सकती है और न ही परिवार के सदस्य प्रसन्न रह सकते हैं। इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए सुझाव दिया जाता है कि जहाँ तक हो सके परिवार के प्रत्येक सदस्य को उसकी अभिरुचि के अनुकूल ही गृह-कार्य सौंपने चाहिए। |
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