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परिवार के सदस्यों की संख्या तथा कार्य-व्यवस्था में क्या सम्बन्ध है? या ”परिवार की सदस्य-संख्या गृह-कार्य-व्यवस्था को प्रभावित करती है।” स्पष्ट कीजिए। |
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Answer» समस्त गृह-कार्य मुख्य रूप से परिवार के सदस्यों द्वारा ही किए जाते हैं। इसके साथ यह भी सत्य है कि समस्त गृह-कार्य परिवार के सदस्यों के लिए होते हैं अर्थात् परिवार के सदस्यों की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए ही समस्त गृह-कार्य किए जाते हैं। इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए कहा जा सकता है कि परिवार के सदस्यों की संख्या तथा गृह-कार्य-व्यवस्था के बीच घनिष्ठ सम्बन्ध होता है। यदि किसी परिवार में सदस्यों की संख्या अधिक होती है अर्थात् परिवार का आकार बड़ा होता है, तो निश्चित रूप से उस परिवार के सदस्यों को अधिक गृह-कार्य करने पड़ते हैं। उदाहरण के लिए-बड़े आकार के परिवार के लिए गृहिणी को अधिक मात्रा में भोजन तैयार करना पड़ता है तथा अधिक वस्त्रों को धोना पड़ता है तथा अन्य कार्य भी अधिक करने पड़ते हैं। इस स्थिति में यदि परिवार के सदस्यों के कार्यों का समुचित विभाजन नहीं होता, तो परिवार के कुछ सदस्यों पर कार्य का अधिक बोझा पड़ जाता है तथा ऐसे में गृह-कार्य-व्यवस्था अस्त-व्यस्त भी हो सकती है। इसके विपरीत, यदि समस्त गृह-कार्यों को परिवार के सभी सदस्यों में उचित ढंग से विभाजित कर लिया जाए, तो समस्त कार्य सरलता से तथा शीघ्र ही सम्पन्न हो सकते हैं। यदि परिवार के सदस्यों की संख्या कम हो तो उस स्थिति में समस्त गृह-कार्य निश्चित रूप से उन्हीं सदस्यों को करने पड़ते हैं। इस स्थिति में विशेष सूझ-बूझ की आवश्यकता होती है। समस्त कार्यों को नियोजित तथा सुव्यवस्थित ढंग से करना पड़ता है। कम सदस्य संख्या वाले परिवार कुछ कार्यों को परिवार के बाहर की संस्थाओं द्वारा भी करवा लेते हैं। उदाहरण के लिए–लाण्ड्री से कपड़े धुलवाना, कुछ डिब्बा बन्द भोज्य सामग्रियाँ इस्तेमाल करना तथा घर की सफाई व्यवस्था के लिए मेहरी रखना आदि। यहाँ यह स्पष्ट कर देना आवश्यक है कि कम सदस्य संख्या वाले परिवारों में कोई भी सदस्य सामान्य रूप से कामचोर नहीं होता। इस स्थिति में गृह-कार्य-व्यवस्था सुचारू रूप से चलती रहती है। इसके विपरीत, अधिक सदस्य संख्या वाले परिवारों में कुछ सदस्य कामचोर भी होते हैं। ऐसे में परिवार में तनाव तथा कटुता का वातावरण बना रहता है तथा गृह-कार्य-व्यवस्था भी उत्तम नहीं बन पाती। |
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