1.

पठित दोहों के आधार पर गुरु के महत्व का वर्णन अपने शब्दों में कीजिए।

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हमारी पाठ्यपुस्तक में संकलित संत कबीर दास के दोहों में गुरु की महिमा का प्रभावशाली वर्णन हुआ है। भारतीय संस्कृति सद्गुरु को ब्रह्मा, विष्णु, शिव यहाँ कि साक्षात् परब्रह्म के तुल्य मानती है। कबीर ने भी पूरी श्रद्धा और आस्था के साथ गुरु की इस अपार महत्ता को स्वीकार किया है। कबीर गुरु और गोविन्द (ईश्वर) में कोई अंतर ही नहीं मानते हैं। यदि व्यक्ति अहंकार से मुक्त होकर गुरु की शरण में जाये तो उसे अवश्य ही ईश्वर की प्राप्ति हो सकती है। गुरु केवल ईश्वर की कृपा होने पर ही प्राप्त होता है। अतः ज्ञान के भण्डार और प्रभु से मिलाने वाले गुरु को कभी भूलना नहीं चाहिए। सद्गुरु शिष्य को अंधविश्वास और भेड़चाल से बचाकर उसे ज्ञान का मार्ग दिखाता है। गुरु ही थोथे अहंकार में लिप्त शिष्य को भवसागर में डूबने से बचाता है। कबीर ने तो यहाँ तक कहा है कि परमात्मा रूठ जाएँ तो गुरु शिष्य की रक्षा कर सकता है। किन्तु गुरु के रूठने पर ईश्वर भी उसकी रक्षा नहीं करता।



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