1.

व्यक्तिगत तथा सामान्य भ्रमों में अन्तर स्पष्ट कीजिए।

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त्रुटिपूर्ण प्रत्यक्षीकरण को भ्रम या विभ्रम कहते हैं। भ्रम दो प्रकार के होते हैं—व्यक्तिगत भ्रम तथा सामान्य भ्रम। इन दोनों प्रकार के भ्रमों में कुछ मौलिक अन्तर होते हैं। व्यक्तिगत भ्रमों का स्वरूप भिन्न-भिन्न व्यक्तियों के सन्दर्भ में भिन्न-भिन्न होता है। उदाहरण के लिए कम प्रकाश में किसी व्यक्ति द्वारा रस्सी को साँप समझ बैठना एक व्यक्तिगत भ्रम है। हो सकता है कि इसी परिस्थिति में कोई अन्य व्यक्ति भ्रमित न हों तथा रस्सी को रस्सी ही समझे। इससे भिन्न सामान्य भ्रम सार्वभौमिक होते हैं, अर्थात् इस प्रकार के भ्रमों की स्वरूप सभी व्यक्तियों के लिए एकसमान ही होता है। उदाहरण के लिए पानी में पड़ी छड़ टेढ़ी दिखाई देती है। यह एक सामान्य भ्रम है जो प्रत्येक व्यक्ति के लिए एकसमान होता है।



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