This section includes 7 InterviewSolutions, each offering curated multiple-choice questions to sharpen your Current Affairs knowledge and support exam preparation. Choose a topic below to get started.
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अन्य लिंग रूप लिखिए :1. आदमी2. नायक3. राजा4. देवता5. स्वामी6. बाप7. अध्याप |
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Answer» 1. आदमी – औरत 2. नायक – नायिका 3. राजा – रानी 4. देवता – देवी 5. स्वामी – स्वामिनी 6. बाप – माँ 7. अध्यापक – अध्यापिक |
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निम्नलिखित विलोम शब्दों को सही शब्दों के साथ जोडकर लिखिए :1. आस्तिक2. पता3. दिन4. शक रात5. उत्तीर्ण |
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Answer» 1. आस्तिक x अनुत्तीर्ण 2. पता x लापता 3. दिन x रात 4. शक रात x बेशक 5. उत्तीर्ण x नास्तिक |
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अनुरूपता :1. करीदोडुन पाल्या : के.डी.पाल्या :: होले नरसीपुरा : _______2. पूर्वाक्षर : उपसर्ग शब्द :: कन्नडपन : _______3. ए.जेब : औरंगजेब :: एस.गुप्त : _______4. बी.आर. हिल्स : बिलिगिरि रंगनबेट्टा :: डी.आर.दुर्ग : ______ |
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Answer» 1. करीदोडुन पाल्या : के.डी.पाल्या :: होले नरसीपुरा : 2. पूर्वाक्षर : उपसर्ग शब्द :: कन्नडपन : प्रत्यय 3. ए.जेब : औरंगजेब :: एस.गुप्त : समुद्रगुप्त 4. बी.आर. हिल्स : बिलिगिरि रंगनबेट्टा :: डी.आर.दुर्ग : देवरायनदुर्गा |
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रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए :1. आगे आनेवाले संशोधकों को _______ट करने का काम है।2. सबको पूर्वाक्षरों में छिपी देना बड़ा ही _______ विषय है।3. सुबह नाम _______ करना प्रारंभ करो तो समाप्त होते-होते _______ हो जाती थी।4. कभी-कभी तो पूरा का पूरा नाम ही _______ ! में सिकुड़ जाता है।5. सभी _______ विद्यार्थियों की जिह्वा पर अंग्रेजी के वर्ण बनकर सुशोभित होते हैं। |
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Answer» 1. आगे आनेवाले संशोधकों को पथभ्रष्ट करने का काम है। 2. सबको पूर्वाक्षरों में छिपी देना बड़ा ही दर्दनाक विषय है। 3. सुबह नाम पुकारना करना प्रारंभ करो तो समाप्त होते-होते शाम हो जाती थी। 4. कभी-कभी तो पूरा का पूरा नाम ही अंग्रेजी वर्गों ! में सिकुड़ जाता है। 5. सभी अध्यापक विद्यार्थियों की जिह्वा पर अंग्रेजी के वर्ण बनकर सुशोभित होते हैं। |
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हेमावती नदी कहाँ बहती है ? |
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Answer» हेमावती नदी होले नरसीपुरा गाँव में बहती है। |
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लोगों के पास, किसके लिए समय नहीं है ? |
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Answer» आजकल लंबे-लंबे नाम पुकारने के लिए लोगों के पास समय नहीं है। |
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हमें क्या त्याग करना चाहिए ? |
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Answer» अंग्रेजी वर्गों का प्रभाव हमारे नामों पर हुआ है, इसका हमें त्याग करना चाहिए। |
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टी.नरसीपुरा के संक्षिप्तीकरण के बारे में लेखक के क्या विचार हैं ? |
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Answer» तिरुमकूडलु नरसीपुर का संक्षिप्तिकरण टी. नरसीपुर बन गया है। टी. नरसीपुरा में टी (चाय) के बागान होने के कारण आया होगा ऐसा लेखक को विचार है। |
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करदोड्डुन पाल्या के बारे में लेखक क्या कहते हैं? |
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Answer» करीदोडुन पाल्या नामक गाँव के.डी. पाल्या बन जाएगा। संशोधन निर्णय लेंगे कि केडी (गुंडे) होने से यह नाम आया होगा। और गाँव को बदनाम करदेगा। गाँव की निष्कलंक कीर्ति में दाग लग जाएगा। |
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किस कारण से आज हम नाम छोटे-छोटे रख रहे |
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Answer» अंग्रेजों के कारण आज हम नाम छोटेछोटे रख रहे हैं। |
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किन गाँवों के नामों का परिशीलन करना ठीक रहेगा? |
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Answer» संकोच-प्रक्रिया की बलि बने हुए कुछ गाँवों के नामों का परिशलिन करना ठीक रहेगा। |
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के.आर.एस.नाम अपनी पहचान क्यों खो बैठी है? |
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Answer» अत्यंत मनोहर, सुंदर, वृंदावन गाईन्स वाला कृष्णराजसागर आज नीरस के.आर. सागर हो गया है। इसका लघुकरण बही पर नही रुका है, वह के.आर.एस. बनकर अंग्रेजी वर्णमाला के तीन अक्षरो में सिमटकर अपनी पहचान खो बैठा है। |
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इनिशियलों में सिमटे कितने गाँवों के नाम लेखक ने लिया है ? वे कौन-कौन से हैं ? |
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Answer» चिक्कनायकन हल्ली आज सी.एन. हल्ली बनगया है। चनरायपट्टणा – सी.आर. पट्टण, हेगडदेवनकोटे – एच.डी.कोटे, कालमुद्दन दोड्डी के.एम.दोड्डी, श्रवणबेलगोला एस.बी.गोला, इनिशियलों में सिमटे गाँवो के नाम लेखक ने लिए है। |
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इस पाठ के लेखक का पूरा नाम क्या है ? |
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Answer» इस पाठ के लेखक का नाम पी.एस.रामानुजम् । |
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पूर्वाक्षर का पूर्वाग्रह पाठ का सारांश लिखें। |
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Answer» पूर्वाक्षर का पूर्वाग्रह पाठ का सारांश – आज के जमाने में शहरों के नाम अंग्रेजी के इनिशियलों में पहचाने जाने लगे है। अपना कन्नड पन, अपनी । पहचान, अपना अस्तित्व खो रहा है। पहले व्यक्तियों के नाम से पहले इनिशियल लगता था। आज दीर्घ का लघु बनाने की प्रवृत्ति एक फैरान बन । गई है। या फिर लोकोपयोगी विभागवालों ने गाँवों। शहरों के नाम को छोटे फलकों में बदला होगा।. संकोच प्रक्रिया की बलि बने हुए गाँवों के उदाहरण हैं। जैसे तिरूमकूडलु नरसीपुर अब टी नरसीपुर बन गया है। हमारे देश से अंग्रेजी भाषा के हट जाने से इन इनिशियलों का अर्थ ढूँढना मुश्किल हो जाएगा। अनेक खोजें करने के बार विचित्र परिणाम प्राप्त होंगे। करीदोडुन पाल्या नामक गाँव का के.डी. पाल्या संक्षिप्त रूप बन जाएगा। इसका अर्थ बहुत ही विचित्र और गाँव को बदनाम कर देनेवाला होगा। अंग्रेजी पूर्वातरों से होनेवाली हानि दुखदायक है। होलेनरसीपुरा गाँव का नाम एच.एन.पुरा बन गया है। इस गाँव के बारे में दंतकथाएँ भी बनेगी। सब अंग्रेजी अद्याक्षरों का सहारा लेकर अपना अस्तित्व खोए जा रहे है। हम इसे अपना बदनसीब समझेंगे। चिक्कनायकन हल्ली का सी.एन. हल्ली बन गया है। चेन्नरायपट्टणा सी.आर. पट्टणा, हेग्गडदेवन कोटे एच.डी. कोटे बना दिया। इन प्रदेशों पर जिन राजाओं ने देवताओं ने राज किया उन सबको पूर्वाक्षरों में द्विपा दिया गया है। यह बडी दर्दनाक बात है। कालमुद्दनदोड्डी का के.एम. दोड्डी बन गया है, वैसे श्रवणबेलगोला एस.बी. गोला बन जाएगा विजयपुरा वि.पुरा बन जाएगा। इसका मतलब आजकल लंबे-लंबे नाम पुकारने के लिए लोगों के पास समय नहीं है। समय अभाव के कारण छोटे-छोटे नाम रखने लगे है। नामों को इसतरह विकृत बना दिया है कि हम इस विषय में अंग्रेजों में भी आगे बढ़ गए है। झूठो है यह जग बाते सिद्धांत के अनुसार आद्य नामों को अदृश्य बना रहे है। आगे चलकर हमारे सारे व्यवहारों में ह्रस्व की अभिव्यक्ति को स्टाइल चल पडेगा। जैसे टी.डी. तिरूपति देवालय वि.सी. वेंकटाचलपति एम.सी.आर. मेलुकोटे, चलुवराय स्वामी, वि.ज़ी. स्वामी वेणु गोपाल स्वामी। बिलीगिरिरंगनबेट्टा बी.आर.हिंल्स बनकर पूरा अंग्रेजी बन गया है। डी.आर. दुर्गा देवरायन दुर्गा। वहाँ रहनेवाले स्वामीजी है।
नरसीपुर में रहनेवाले स्वामी जी.एन. स्वामी – गुंजा नरसिंह स्वामी। इसतरह नाम का सिर्फ लघुकरण नहीं हुआ बल्की’ उसका अंग्रेजी में नामांकरण हो गया है। कृष्णराज सागर के.आर. सागर। श्रीरंगपट्टण एस.आर. पट्टणा, रंगनाथ स्वमी आर.एन.स्वामी। व्यक्तियों का नाम का पुकरणहो जाए यह समझ सकते है लेकिन गाँव स्थानों के नाम का इनिशियलों में ढालना ठीक नहीं है। व्यक्ति का पूरा नाम लेकर पुकारना साहस का काम बन गया है। इस संदर्भ में एक घटना लेखर के साथ पटित हुई वो ऐसी आय.पी.एस. उत्तीर्ण होकर आगे की पढाई के लिए माऊंट आबू, शिक्षा अकादमी में चले गए थे। सबको अपना अपना नाम पूरा बनाना था। लेखक ने अपना नाम पी.एस. प्रतिबादी भयंकर संपत्कुमाराचार्य रामानुजम् बनाया। अफसर ने उनको उनका नाम ऑफिस में आकर लिखने के लिए कहा। अभितक इस पद्धति को हमने पाठ्य-पुस्तकों के लिए नही अपनाया। विशेष रूप से इतिहास के पाठ्यपुस्तक के लिए। नहीं तो राणाप्रतापसिंह आर.पी. सिंह बनजाएगा। |
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नीचे दिये गये गद्यांश को पढ़कर प्रश्नों के उत्तर एक वाक्य में लिखिए।तभी तेनाली ने उन्हें रोका और कहा – “महाराज ! मैं आपसे कुछ नहीं चाहता । मैं तो सिर्फ़ आपको दिखाना चाहता था कि छोटी – छोटी चीजें भी कितनी महत्वपूर्ण होती हैं । एक महान विजय हासिल करने के लिए पहले कदम उठाना आवश्यक है । मेरी हार्दिक कामना है कि आप इसी प्रकार आगे बढ़ते हुए और अधिक विजय प्राप्त करें ।”1. एक महान विजय हासिल करने के लिए पहले क्या करना आवश्यक है?2. उन्हें किसने रोका?3. तेनाली राम राजा कृष्णदेवराय को क्या दिखाना चाहता था?4. इस अनुच्छेद में “महाराज” कौन हैं?5. “कामना” शब्द का विलोम क्या है? |
Answer»
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अकबर ने किसे और क्यों आभार व्यक्त किया? |
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Answer» बीरबल का समाधान “जिस समय राजा का न्याय ग़लत हो जाता है ” सुनकर अकबर ने बीरबल । आभार व्यक्त किया। |
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अकबर ने क्या प्रश्न किया? |
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Answer» अकबर ने यह प्रश्न किया कि “बीरबल ! ऊपरवाले यानी अल्लाह का न्याय कब होता है? |
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शहरों के नाम किसमें सिमट रहे हैं ? |
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Answer» शहरों के नाम पूर्वाक्षरों में मतलब अंग्रेजी के इनिशियलों में सिमट रहे है। |
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नीचे दिये गये गद्यांश को पढ़कर प्रश्नों के उत्तर एक वाक्य में लिखिए।महाराज ने सेवक को आदेश दिया। सेवकों ने शतरंज की बिसात पर चावल के दाने रखने शुरू कर दिये। पहले खाने में एक दाना, दूसरे में 2 दाने, तीसरे में 4 दाने, चौथे में 8 दाने, पाँचवे में 16 दाने, इस तरह गिनती बढ़ती गयी। दसवें खाने तक पहुँचने पर 512 दाने रखे गये और बीसवें खाने तक पहुँचने पर 5,24,288 दाने रखे गये। इस प्रकार शतरंज की आधी बिसात यानी 32 खाने तक पहुँचने तक दानों की संख्या 214 करोड़ से भी ज़्यादा तक पहुंच चुकी थी।1. महाराज ने किसे आदेश दिया?2. दसवें खाने तक पहुँचने पर कितने दाने रखे गये?3. सेवकों ने क्या करना शुरू कर दिये?4. बीसवें खाने तक पहुँचने पर कितने दाने रखे गये?5. उपर्युक्त गद्यांश किस पाठ से लिया गया है? |
Answer»
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तेनालीराम ने राजा से क्या निवेदन किया? |
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Answer» राजा के सामने रखे शतरंज की बिसात की ओर इशारा करते हुए तेनालीराम ने राजा से इस प्रर । निवेदन किया कि “महाराज! यदि आप चावल का एक दाना शतरंज के पहले खाने में रख दें और । अगले खाने में पिछले खाने का दुगना रखते जायें, तो उसे ही अपना ईनाम समशृंगा।” |
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निम्नलिखित गद्यांश पढ़कर दिये गये प्रश्नों के उत्तर एक वाक्य में लिखिए।तेनालीराम तेनाली के रहने वाले थे। वे बहुत चतुर और ज्ञानी व्यक्ति थे। यह घटना उन दिनों की है, जब उनकी मुलाकात राजा श्रीकृष्णदेवराय से नहीं हुई थी। एक दिन वे राजा कृष्णदेवराय से मिलने उनकी राजधानी हंपी पहुंचे। उन्होंने सुना था कि राजा ज्ञानी लोगों का बड़ा आदर, सत्कार करते हैं।1. तेनालीराम कैसे व्यक्ति थे?2. राजा श्रीकृष्णदेवराय की राजधानी का नाम क्या है?3. राजा किनका आदर, सत्कार करते थे?4. “ज्ञानी’ शब्द का विलोम शब्द क्या है?5. यह गद्यांश किस पाठ से दिया गया है? |
Answer»
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तेनालीराम की बुद्धिमता के बारे में बताओ। |
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Answer» तेनालीराम तेनाली के रहने वाले थे। वे बहुत चतुर और ज्ञानी व्यक्ति थे। वे अच्छी तरह कविता करते थे। उनकी चतुराई से प्रभावित होकर श्री कृष्णदेवराय ने उन्हें अपने दरबार के अष्टदिग्गजों में एक कवि बना दिया। ये ‘विकटकवि’ के नाम से मशहूर थे। तेनालीराम बडे बुद्धिमान और चतुर थे। एक दिन किसी कारणवश श्रीकृष्णदेवराय को तेनालीराम पर गुस्सा आया। उन्होंने सज़ सुनायी कि तेनालीराम अपना मुख न दिखाये। दूसरे दिन तेनालीराम एक मुखौटा पहनकर आये। इसका कारण जानकर श्रीकृष्णदेवराय और सभी दरबारी हँस पडे। यह उनकी बुद्धिमता से संबंधित एक घटना थी। |
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नीचे दिये गये गद्यांश को पढ़कर प्रश्नों के उत्तर एक वाक्य में लिखिए।तेनालीराम हंपी पहुँचे। उन्हें राजदरबार में पेश किया गया। राजा ने उन्हें एक कविता सुनाने को कहा। तेनाली ने एक सुंदर कविता सुनायी। राजा को उनकी कविता पसंद आयी।\1. तेनालीराम कहाँ पहुँचे ?2. तेनालीराम ने राजा को क्या सुनाया?3. तेनालीराम को कहाँ पेश किया गया?4. राजा को तेनाली की कविता कैसी लगी?5. उपर्युक्त यह गद्यांश किस पाठ से दिया गया है? |
Answer»
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तेनालीराम के व्यक्तित्व के बारे में लिखो। |
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Answer» तेनालीराम चतुर और ज्ञानी व्यक्ति थे। समस्या का हल वे बडी हास्यात्मक ढंग से ढूँढते थे। अपनी चतुराई से सुझाव देकर राजा का मार्ग – दर्शन करते थे। |
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निम्न लिखित गद्यांश पढ़कर दिये गये प्रश्नों के उत्तर विकल्पों में से चुनकर लिखिए।डॉ. अंबेडकर राजनैतिक आज़ादी के साथ सामाजिक और आर्थिक आज़ादी भी चाहते थे। उनको कमज़ोर वर्ग के प्रति सहानुभूति थी। वे उनके दुखों को दूर करने का प्रयत्न करते थे। दर असल वे पीड़ित मानवता के प्रवक्ता थे। वे सच्चे राष्ट्रप्रेमी और समाज सुधारक थे।1. कमज़ोर वर्ग के प्रति सहानुभूति किन्हें थी?A) राजाजी कोB) गाँधीजी कोC) डॉ. अंबेड्कर कोD) नानक को2. डॉ. अंबेड्कर किसके प्रवक्ता थे?A) पीडित मानवता केB) हिंसा केC) विज्ञान केD) अशांति के3. सच्चे राष्ट्रप्रेमी और समाज सुधारक कौन थे?A) नेहरूB) तिलकC) बोसD) अंबेडकर4. डॉ. अंबेडकर राजनैतिक आज़ादी के साथ – साथ किस आजादी को चाहते थे?A) धार्मिकB) नैतिकC) सामाजिक तथा आर्थिकD) समानता रूपी5. उपर्युक्त गद्यांश के लिए उपयुक्त शीर्षक निम्न में से क्या होगा?A) आज़ादीB) डॉ. अंबेड्करC) डॉ. राधाकृष्णनD) डॉ. मेहता |
Answer»
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नीचे दिये गये गद्यांश को पढ़कर प्रश्नों के उत्तर एक वाक्य में लिखिए।यह सुनकर राजा श्रीकृष्णदेवराय तेनालीराम से बहुत खुश हुए, जिसने उन्हें चावल के एक दाने से जीवन का महत्व समझा दिया था । उन्होंने तुरंत तेनाली को सम्मान के साथ अष्टदिग्गजों में शामिल कर लिया।1. राजा का नाम क्या था?2. श्रीकृष्णदेवराय किनसे बहुत खुश हुए?3. चावल के एक दाने से जीवन का महत्व किसने समझाया था?4. श्रीकृष्णदेवराय ने तुरंत क्या किया?5. यह उपर्युक्त गद्यांश किस पाठ से दिया गया है? |
Answer»
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तेनालीराम की जगह यदि तुम होते तो इनाम के रूप में क्या लेते? |
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Answer» तेनालीराम की जगह यदि मैं होता तो इनाम के रूप में पहले खाने में एक रुपया, अगले खाने में दुगुने रुपये ऐसा रखकर देने के लिए कहता इस प्रकार मैं चावल के बदले रुपये लेता । |
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“चावल के दाने” पाठ का सारांश अपने शब्दों में लिखो। |
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Answer» तेनाली के रहनेवाले तेनालीराम बहुत चतुर और ज्ञानी व्यक्ति थे। उनकी मुलाकात राजा कृष्णदेवराय से न होने के कारण वे एक दिन उनकी राजधानी हंपी पहुँचे । राजदरबार में पेश करने के बाद तेनाली राम ने राजा को एक सुंदर कविता सुनाई । राजा को कविता पसंद आने से ईनाम माँगने को कहा ! तब तेनालीराम ने कहा कि “क्षमा करें महाराज मेरा आपसे एक निवेदन है।” राजा की अनुमति से तेनालीराम वहाँ के शतरंज की बिसात की ओर इशारा करते हुये कहा कि “महाराज ! यदि आप चावल का एक दाना उस शतरंज के पहले खाने में रख दें और अगले खाने में पिछले खाने का दुगना रखते जायें तो मैं उसे ही अपना ईनाम समझूगा”। राजा फिर आश्चर्य से पूछा कि तुम्हें यकीन है कि “सिर्फ चावल के दाने चाहिए, सोना नहीं।” तेनालीराम ने विनम्रता से “हाँ” कहा । महाराज ने सेवक को आदेश देने से चावल के दाने रखने शुरू कर दिये । पहले खाने में एक दाना दूसरे में 2 दाने, तीसरे में चार, चौथे में 8 इस प्रकार दसवें खाने तक पहुँचने पर 512 दाने रखे गये और बीसवें खाने तक पहुँचने पर 5, 24, 288 दाने रखे गये। इस प्रकार शतरंज के आधी बिसात यानी 32 खाने तक पहुँचने तक दानों की संख्या 214 करोड़ से भी ज़्यादा तक पहुंच चुकी थी। कुछ देर के बाद ऐसी हालत पहुँच गई कि पूरा राजभंडार का अनाज तेनालीराम के हवाले करने के सिवाय कोई दूसरा मार्ग न रहा । तब तेनालीराम ने राजा से कहा कि “महाराज मैं आपसे कुछ नहीं चाहता । मैं तो आपको यह दिखाना चाहता था कि छोटी-छोटी चीजें भी कितनी महत्वपूर्ण होती हैं। एक महान विजय हासिल करने के लिए पहले कदम उठाना आवश्यक है मेरी हार्दिक कामना है कि आप इसी प्रकार आगे बढ़ते हुए और अधिक विजय प्राप्त करें।” चावल के एक दाने से जीवन का महत्व समझाने के कारण राजा खुश होकर तेनालीराम को अपने अष्टदिग्गजों में शामिल कर लिया। |
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निम्न लिखित गद्यांश पढ़कर दिये गये प्रश्नों के उत्तर विकल्पों में से चुनकर लिखिए।बगदाद शहर में एक नाई रहता था। वह तरह – तरह के बाल काटना जानता था। इसलिए उसकी दुकान पर हमेशा भीड़ लगी रहती थी। एक दिन नाई दुकान के बाहर खडा था। उसे एक लकडहारा आता दिखाई दिया। नाई को रसोई के लिए लकड़ियाँ चाहिए इसलिए उसने लकडहारे को पुकारा।1. नाई कहा रहता था?A) अलंपुरी मेंB) बगदादC) अहमदाबादD) घजियाबाद2. नाई क्या जानता था?A) तरह – तरह के लकडी काटनाB) कपडे सीनाC) बाजे बजानाD) तरह – तरह के बाल काटना3. नाई की दुकान पर हमेशा क्या लगी रहती थी?A) मेलाB) भीडC) शोरD) सन्नाटा4. एक दिन उसे कौन दिखाई दिया?A) लकडहाराB) ग्वालाC) भेडियाD) किसान5. उसने लकडहारे को क्यों पुकारा?A) लकडी खरीदनेB) लकडी बेचनेC) लकडहारे को देखनेD) बाल काटने |
Answer»
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इस पाठ से क्या संदेश मिलता है? |
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Answer» इस पाठ से हमें यह संदेश मिलता है कि छोटी – छोटी चीजों का भी अधिक महत्व होता है। सफलता पाने के लिए पहले कदम को ही सोचकर रखना चाहिए। |
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निम्न लिखित गद्यांश पढ़कर दिये गये प्रश्नों के उत्तर विकल्पों में से चुनकर लिखिए।अब्दुल हमीद एक दिन अपने पिता के साथ दुकान में बैठा था। उसके गाँव का एक सिपाही कपडे मिलाने उसकी दुकान पर आ पहुँचा। अब्दुल हमीद फ़ौज की वरदी पहने उस सैनिक को देखता रहा। उसक पिता खाना खाने घर चले गये तो अब्दुल हमीद ने कहा : “भैया ! तुम तो इस वरदी में बहुत अच्छे लग रहे हो।”1. अब्दुल हमीद किसके साथ दुकान में बैठा था?A) माता के साथB) दोस्त के साथC) भाई के साथD) पिता के साथ2. सिपाही दुकान पर क्यों पहुँचा?A) कपडे सिलवानेB) कपडे बेचनेC) हमीद को देखनेD) उसके पिता से मिलने3. अब्दुल हमीद किसे देता रहा?A) पिता कोB) कपडे कोC) लोगों कोD) फौजी वरदी पहने सैनिक को4. पिता घर क्यों चले गये?A) खाना खाने के लिएB) सोने के लिएC) आराम करने के लिएD) पत्नी से मिलने के लिए5. “सैनिक” शब्द में प्रत्यय क्या है?A) सैB) निकC) इकD) सैनि |
Answer»
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निम्न लिखित गद्यांश पढ़कर दिये गये प्रश्नों के उत्तर विकल्पों में से चुनकर लिखिए।किसी गाँव में एक गरीब औरत रहती थी। वह मटके बनाकर बेचती थी। वह मटके लेकर शहर जाती थी। वहाँ उन्हें बेचती थी। मटके बेचकर वह शहर से घरेलू ज़रूरत की चीजें खरीदकर लाती थी। एक दिन वह मटके लेकर शहर जा रही थी। वह रास्ते में एक छायादार पेड के नीचे आराम करने के लिए बैठ गई । उसने अपनी पोटली खोली और उसमें से रोटियाँ निकाल कर खाई।1. गरीब औरत क्या काम करती थी?A) भीख माँगती थी।B) कागज चुनती थी।C) मटके बेचती थी।D) तरकारी बेचती थी।2. गरीब औरत उन्हें कहाँ बेचती?A) शहर मेंB) गाँव मेंC) रेल मेंD) बस में3. गरीब औरत कहाँ बैठ गई?A) घर मेंB) चौराहे मेंC) जंगल मेंD) पेड के नीचे4. गरीब औरत शहर से क्या लाती थी?A) कपडेB) घरेलू चीज़ेC) बरतनD) चावल5. उसने पेड़ के नीचे क्या किया?A) सोईB) रोटियाँ खाईC) फल खाईD) चावल खाई |
Answer»
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निरंतर अभ्यास से व्यक्ति कैसे योग्य बन जाता है? वृन्द जी ने इस के लिए क्या उदाहरण दिया है? |
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Answer» जैसे बार-बार रस्सी घिसने से पत्थर पर भी निशान पड़ जाते हैं, वैसे ही निरंतर अभ्यास से अयोग्य व्यक्ति भी योग्य बन जाता है। |
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बिहारी जी के अनुसार किस का साथ शोभा देता है? |
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Answer» बिहारी जी के अनुसार एक जैसे स्वभाव अथवा प्रकृति वालों का साथ शोभा देता है। |
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बिहारी के अनुसार गुणवान कौन होता है? |
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Answer» बिहारी जी का मानना है कि किसी गुणहीन व्यक्ति को बार-बार गुणी-गुणी कहते रहने से वह गुणवान नहीं बन जाता क्योंकि सच्चा गुणी तो वही होता है जिसमें स्वाभाविक रूप से सद्गुण होते हैं। |
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भाषा और वर्तनी का स्वरूप बदलता रहता है । इस पाठ में हिंदी गद्य का प्रारंभिक रूप व्यक्त हुआ है, जो लगभग 75-80 वर्ष पहले था । इस पाठ के किसी पसंदीदा अनुच्छेद को वर्तमान मानक हिंदी रूप में लिखिए :अनुच्छेद : लण्डन के मन्त्रिमंडल … कुछ नहीं हो सकता । |
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Answer» लंडन के मंत्रिमंडल का यह मत है कि नाना का स्मृति चिन तक मिटा दिया जाए । इसलिए वहाँ की आज्ञा के विरुद्ध कुछ नहीं हो सकता । |
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ककि किसकी खोज में भटक रहे हैं ? |
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Answer» कवि पूर्णता की खोज में भटक रहे है। |
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प्रत्येक पम पर क्या अटकता रहा है ? |
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Answer» प्रत्येक पग परा रोड्या अटकता रहा है। |
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हमास काम क्या है ? |
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Answer» हमरा काम चलना है। चलते रहना हमारा काम है। |
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पैरों में कैसी गति भरी है ? |
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Answer» पैरों में प्रबल गति भरी है। |
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किसकी गति रुकी नहीं है ? |
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Answer» जीवन की गति रुकी नही है। |
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नीचे दिये गए शब्दों का शुद्ध रूप लिखिए :1. चकरवरती – चक्रवर्ती2. चिता – चिंता3. नश्ट – नष्ट4. अलास – आलस5. सरवथा – सर्वथा6. समय – संयम |
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Answer» 1. चकरवरती – चक्रवर्ती 2. चिता – चिंता 3. नश्ट – नष्ट 4. अलास – आलस 5. सरवथा – सर्वथा 6. समय – संयम |
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उदाहरण के अनुसार तुकांत शब्दों को पहचानकर लिखिए :1. बहाने – नहाने2. समता – क्षमता3. धन – मन4. लगा दो – मिला दो5. जानो – मानो6. पाओगे – खोओगे |
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Answer» 1. बहाने – नहाने 2. समता – क्षमता 3. धन – मन 4. लगा दो – मिला दो 5. जानो – मानो 6. पाओगे – खोओगे |
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बहाने बनाने का प्रमुख कारण क्या है ? |
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Answer» बहाने बनाने का प्रमुख कारण आलस है। |
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उदाहरण के अनुसार शब्द लिखिए :1. पुत्र – सुपुत्र2. फल – सुफल3. मन – सुमन4. योग्य – सुयोग्य5. यश – सुयश6. नाद – सुनाद7. मति सुमत |
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Answer» 1. पुत्र – सुपुत्र 2. फल – सुफल 3. मन – सुमन 4. योग्य – सुयोग्य 5. यश – सुयश 6. नाद – सुनाद 7. मति – सुमति |
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अपने अध्यापक की सहायता से इसे पूर्ण कीजिए:एक पहर – तीनएक दिन – चौबीसएक सप्ताह – सातएक पक्ष – पंद्रहएक मास – तीस दिनएक साल – तीन सौ पैंसठ – दिन |
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Answer» एक पहर – तीन |
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अनुरूपताः1. आलस : परिश्रम :: नष्ट : ——2. जानो : मानो :: लगा दो : —3. धन : निर्धन :: दिया : ——4. जीवन : मरण :: खोना : — |
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Answer» 1. लाभ 2. भगा दो 3. लिया 4. पाना |
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समय के खोने से क्या होता है ? |
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Answer» समय के खोने से हमेशा पछताना पडता |
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समय किसका दिया हुआ अनुपम धन है ? |
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Answer» समय भगवान (ईश) का दिया हुआ अनुपम धन है। |
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