Explore topic-wise InterviewSolutions in Current Affairs.

This section includes 7 InterviewSolutions, each offering curated multiple-choice questions to sharpen your Current Affairs knowledge and support exam preparation. Choose a topic below to get started.

1.

समवृत्ति अंग किसे कहते हैं ?

Answer» जीवों के उन अंगों या संरचाओं को जो रचना तथा उत्पत्ति में भिन्न होते हुए भी कार्य में समानता प्रदर्शित करते हैं, समवृत्ति अंग कहलाते हैं । इस प्रकार की समानता समवृत्तिता (Analogy ) कहलाती हैं । तितली के पंख , पक्षी के पंख तथा चमगादड़ के पंख समवृत्तिता प्रदर्शित करते हैं । इनमे रचना तथा उत्पत्ति की दृष्टि से पर्याप्त अंतर पाया जाता है । तितली के पंख काइटिन, पक्षियों के पंख अग्रपाद पर लगने से तथा चमगादड़ के पंख उंगलियों के बीच की त्वचा से बनते हैं ।
2.

अवशेषी अंग किसे कहते हैं ? समझाइए ।

Answer» जीवों के शरीर में पाए जाने वाले ऐसे अंग अथवा संरचनाएँ जिनका पूर्व में उपयोग होता था परन्तु वे वर्तमान में उपयोगी न होने के कारण ह्रासित अवस्था में होते है , अवशेषी अंग कहलाते हैं । जैसे - मनुष्य के आंत में पाया जाने वाला वर्मीफॉर्म अपेण्डिक्स, आँख में निमेषक पटल तथा कर्णपल्ल्व की पेशियाँ तथा पुच्छ कशेरुका आदि ।
3.

डार्विन को विकासवाद की प्रेरणा देने वाली दो घटनाओं को लिखिए ।

Answer» (i) डार्विन ने भ्रमण के दौरान गैलापेंगो द्वीप पर पायी जाने वाली एक प्रकार की चिड़िया फिंच ( Finch ) तथा दूसरे जन्तुओं में एक वातावरण में रहने के बाद भी कई विभिन्नताएँ देखीं, जिससे उन्हें विभिन्नता की उत्पत्ति के महत्व का ज्ञान हुआ ।
(ii) कबूतरबाजों द्वारा खराब गुणों वाले कबूतर को मरकर पीढ़ी-दर -पीढ़ी स्वस्थ कबूतर पैदा करते देखकर उन्हें प्राकृतिक चयन के महत्व का ज्ञात हुआ ।
उपर्युक्त दोनों घटनाओं ने प्राकृतिक चयनवाद को प्रस्तुत करने में मुख्य भूमिका निभायी।
4.

जैव विकास का सिद्धांत किसने दिया ?

Answer» चार्ल्स डार्विन ने जैव विकास का सिद्धान्त प्रतिपादित किया ।
5.

जैव विकास किसे कहते हैं ?

Answer» विकास या जैव विकास वह क्रिया है, जिसके क्रमिक एवं धीमे परिवर्तन के फलस्वरूप सुदीर्घ कालान्तर में प्रारम्भिक सरल जीवों से नये जटिल जीवों का निर्माण होता है ।
6.

जीवों के विकास में चयन और अनुकूलन की क्या भूमिका है ? एक उदाहरण द्वारा समझाइए ।

Answer» 1. जीवों के विकास में चयन की भूमिका - प्राकृतिक चयन द्वारा प्रकृति में योग्यतम जीवों की उत्तरजीविता को चुना जाता है । ऐसे जीवों का समूह प्राप्त होता है, जो अपने पूर्वजों से गुणों में भिन्न होता है । अर्थात इसके द्वारा जैव विकास प्रमाणित किया जा सकता है ।
औषिधि प्रतिरोधकता का तात्पर्य किसी औषधि के प्रति प्रतिरोधक क्षमता का विकसित होने से है, यह प्राकृतिकवरण का उत्तम उदाहरण है, जिसे मच्छरों में कीटनाशी के प्रयोग द्वारा समझाया जा सकता है, जब मच्छरों को नष्ट करने के लिए DDT कीटनाशी का पहली बार प्रयोग हुआ तो अधिकांश मच्छर नष्ट हो गए । लेकिन कुछ उत्परिवर्ती मच्छर पर DDT को कोई प्रभाव नहीं पड़ा और वे जीवित बच गए DDT के अधिक उपयोग के कारण DDT के प्रति संवेदनशील मच्छर नहीं पड़ता था । पीढ़ी-दर-पीढ़ी इनकी संख्या में वृद्धि होती गई । इस प्रकार DDT संवेदनशील मच्छरों की समाप्ति एवं DDT प्रतिरोधी मच्छरों की पूरी आबादी हो गई, जिस प्रकार DDT ने मच्छरों की एक नई जाति उत्पन्न कर दी, इसी प्रकार प्राकृतिक चयन द्वारा नई जातियों की उत्पत्ति हो गई ।
2. जीवों के विकास में अनुकूलन की भूमिका - अनुकूलन समस्त जीव अपने आपको वातावरण के अनुसार परिवर्तित कर देते हैं , जिस कारण वातावरण में रहने के लिए आसानी होती है जीवों के इस गुण को अनुकूलन कहते हैं ।
दीर्घकालिक अनुकूलन - जब किसी जीव की सम्पूर्ण जाति में कई पीढ़ियों के कारण वातावरण के प्रति स्थायी अनुकूलन उत्पन्न हो जाता है, तो इस प्रकार के अनुकूलन को दीर्घकालिक कहते हैं । यह अनुकूलन दो प्रकार का होता है -
( a ) संरचनात्मक अनुकूलन ( Structural adaptation ) - ऐसी अनुकूलन जिसमे जीवों के विभिन्न अंगों की सरचना में परिवर्तन होता है जैसे - जिराफ की गर्दन ।
( b ) क्रियात्मक अनुकूलन ( Physionogical adaptation ) - ऐसा अनुकूलन जो जीव की कार्यकी में परिवर्तन लाता है, जैसे - स्तनियों के पाचन में होने वाला अनुकूलन , पक्षियों के पंजों तथा चोंच में अनुकूलन दीर्घकालिक अनुकूलन का उदाहरण है ।
7.

भ्रूण विज्ञान किस तरह से जैव विकास की क्रिया को प्रमाणित करने में सहायक है ? संक्षेप में समझाइए ।

Answer» किसी जीव के भ्रूणीय विकास को व्यक्तिवृत्ति ( Ontogeny ) कहते हैं, जबकि किसी जाति के विकास को जातिवृत्ति ( Phulogeny ) कहते हैं । हीकल के अनुसार व्यक्तिवृत्ति जातिवृत्ति की पुनरावृत्ति करती है अर्थात किसी जीव के भ्रूणीय विकास में वे सभी अवस्थाएँ पायी जायेंगी जिनसे होकर उसकी जाति का विकास हुआ है । अगर हम मनुष्य , पक्षी तथा मछली के भ्रूणीय विकासों का अध्ययन करें तों उनमे समानताएँ पायी जाती हैं, जो इस बात को प्रमणित करते हैं कि मानव जाति का विकास मछली तथा पक्षी से होकर हुआ होगा अर्थात भ्रुणिकी का अध्ययन जैव विकास को प्रमाणित करता है ।
8.

जीवों का परस्पर सम्बन्ध किस बात को इंगित करता है ?

Answer» जीवों का परस्पर सम्बन्ध इस बात की पुष्टि करता है कि सभी जीवों की उत्पत्ति एकसमान जीवों से हुई है अर्थात जैव विकास हुआ है ।
9.

क्या डायनासोर का विलुप्तीकरण किसी सक्षम प्रजाति के विकास के कारण हुआ है ? इस संदर्भ में आपकी क्या राय है ?

Answer» डार्विन के अनुसार, किसी आवास में जीने के लिए अधिक सक्षम प्रजातियों की आबादी, अन्य प्रजातियों का स्थान ले-लेती है, जिससे प्रजातियों को आबादी में क्रमशः बदलाव आता है और जीवों का विकास चलता रहता है । इसी क्रम में डायनोसोर वातावरण में परिवर्तन के कारण अपने आवास में अनुकूलित नहीं रह पाए और अधिक सक्षम प्रजाति के विकास के कारण विलुप्त हो गये ।
10.

जीवों के विकास के सिद्धांत के चार बिंदुओं का वर्णन कीजिए ।

Answer» डार्विन और वैलेस द्वारा प्रतिपादित जीवों के विकास सिद्धांत का मुख्य बिन्दु निम्न है-
(i) जीवों में विविधता पाई जाति है ।
(ii) नई जातियों की उत्पत्ति , पूर्व में उपस्थित प्रजातियों से हुई है ।
(iii) जीवों की उत्पत्ति एकसमान पूर्वज से हुई है, अर्थात सभी जीवों के पूर्वज एक ही थे ।
(iv) जीवों में पाई जाने वाली विभिन्नताएँ आनुवंशिक होती हैं अर्थात एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में जाती है ।
(v) प्रजातियों की आबादी में बदलाव होता रहता है, जिससे जीवों का विकास चलता रहता है ।
11.

'जैविक प्रजाति ' शब्द से क्या अभिप्राय है ?

Answer» जीवन संघर्ष में वे ही जीव सफल होते हैं जिनकी अधिकांश भिन्नताएँ वातावरण के अनुकूल होते हैं इसे ही ( डार्विन के अनुसार ) प्राकृतिक वरण कहा जाता है ।
12.

जीवधारियों की विभिन्न जातियों के उद्भव के सम्बन्ध में डार्विन के क्या विचार हैं ?

Answer» 1. डार्विन के प्राकृतिक वरणवाद के अनुसार, जीव विविधता, अनुकूलन की वंशागतिकी तथा प्राकृतिक वरण द्वारा नयी जातियों को निम्नलिखित चरणों में पैदा करते हैं -
2. अधिक सन्तानोत्पत्ति के बावजूद किसी सीमित क्षेत्र में भोजन , वायु , प्रकाश , जल की एक निश्चित माता की उपलब्ध है । अतः नये उत्पादित जीवों में जीवन के लिए जरुरी चीजों के लिए आपस में संघर्ष होता है । यह संघर्ष एक जाति के सदस्यों के बीच, दूसरी जातियों से तथा वातावरणीय कारकों से भी होता है।
3. विभिन्नताएँ एवं आनुवंशिकता - एक ही जाति के जीवों में पाए जाने वाली भिन्नताओं या अंतर को विभिन्नता कहते हैं । विभिन्नताएँ जीवन संघर्ष के दौरान विविध परिस्थितियों के अनुकूलन के कारण पैदा होती हैं । उपयोगी विभिन्नता वाले जीवों में अधिक सामर्थ्य होने के कारण जीवों का क्रमशः समाप्त कर देती हैं । उपयोगी विभिन्नता वाले जीव अपना गन संततियों में पहुँचाते रहते हैं । इस वंशागति से ही नयी जातियों का उद्भव होता है ।
4 . समर्थ का जीवत्व - जीवन संघर्ष में योग्यतम अर्थात उपयोगी विभिन्नताओं वाले जीव सफल होते हैं प्रकृति इन जीवों का संरक्षण करती है तथा इन सन्ततियों में भिन्नताएँ एकत्रित होती जाती हैं, जबकि जो जीव प्रकृति के अनुरूप और अनुकूल अपने आप को नहीं रख पते हैं, धीरे धीरे नष्ट हो जाते हैं, समर्थ का जीवत्व तथा असमर्थ की मृत्यु को ही प्राकृतिक वरण कहा जाता हैं ।
5 . वातावरण के प्रति अनुकूलन - वातावरण निरंतर परिवर्तनशील है । इस परिवर्तन के अनुकूलन या अनुरूप जो जीव अपने आपको योग्य नहीं बना पाता, उसमे विकृतियाँ जन्म लेती हैं और वह नष्ट हो जाता है, जबकि जो जीव प्रकृति के अनुरूप योग्य बना रहता है वह जीवित रहता है मीसोजोइक युग के विशालकाय सरीसृपों का साम्राज्य वातावरण की बदली परिस्थितियों के प्रति अपने आपको अनुकूल न बना पाने के कारण समाप्त हो गया ।
6. नयी जातियों की उत्पत्ति - डार्विन के मतानुसार वातावरण के प्रति अनुकूलन से पैदा हुई विभिन्नताएँ धीरे-धीरे पीढ़ी-दर-पीढ़ी एकत्रित होती जाती हैं, जिससे एक जाति के जीव अपने पूर्वजों से भिन्न होते जाते हैं । धीरे -धीरे भिन्नताएँ इतनी बढ़ जाती हैं, कि नये जीव एक अलग जाति के रूप में बदल जाते हैं ।
13.

इस चित्र से इन जंतुओं के विकास के बारे में अपनी समझ को विस्तार से लिखिए ।

Answer» जीवों का विकास प्राकृतिक चयन द्वारा हुआ है । पीढ़ी दर पीढ़ी विभिन्नता के कारण जीवों की संरचना व प्रकृति में अंतर आया है । उदा स्वरूप चिंपांजी और मनुष्य दोनों में अंतर है । उनका निवास स्थान व प्रकृति भिन्न है ।
14.

हमारे शरीर के अंदर विशेषकर हमारी आंतों में कई जीवाणु पाए जाते हैं । यह लगभग हर 20 मिनट में प्रजनन करते हैं । प्रजनन के दौरान विभिन्नताएं उत्पन्न होती हैं । पीढ़ी दर पीढ़ी कुछ विभिन्नताएँ बढ़ती हैं जिनसे इनकी आबादी में काफी विभिन्नताएँ पाई जाती हैं । इस प्रकार इनमे बहुत जल्दी विकास होता है । एन्टीबायोटिक दवाईयों से जीवाणुओं की कई प्रजातियाँ खत्म हो जाती हैं पर विभिन्नताओं के कारण कोई न कोई प्रजाति बच जाती है जिन पर एन्टीबायोटिक का कोई असर नहीं हुआ हो । इनकी आबादी बढ़ने से ये एन्टीबायोटिक प्रतिरोधक बन जाते हैं । इस जानकारी की मदद से निम्नलिखित सवालों का उत्तर दीजिए - विकास में विभिन्नताओं की क्या भूमिका है ?

Answer» पीढ़ी-दर -पीढ़ी विभिन्नता बढ़ती है जिससे आबादी में भी विभिन्नता आती है, इस प्रकार जीवों के बहुत जल्दी विकास होता है ।
15.

हमारे शरीर के अंदर विशेषकर हमारी आंतों में कई जीवाणु पाए जाते हैं । यह लगभग हर 20 मिनट में प्रजनन करते हैं । प्रजनन के दौरान विभिन्नताएं उत्पन्न होती हैं । पीढ़ी दर पीढ़ी कुछ विभिन्नताएँ बढ़ती हैं जिनसे इनकी आबादी में काफी विभिन्नताएँ पाई जाती हैं । इस प्रकार इनमे बहुत जल्दी विकास होता है । एन्टीबायोटिक दवाईयों से जीवाणुओं की कई प्रजातियाँ खत्म हो जाती हैं पर विभिन्नताओं के कारण कोई न कोई प्रजाति बच जाती है जिन पर एन्टीबायोटिक का कोई असर नहीं हुआ हो । इनकी आबादी बढ़ने से ये एन्टीबायोटिक प्रतिरोधक बन जाते हैं । इस जानकारी की मदद से निम्नलिखित सवालों का उत्तर दीजिए - " विकास की प्रक्रिया धीमी भी हो सकती है और जल्दी भी। " इस कथन के अनुसार धीमी और तेज गति से होने वाले विकास का एक-एक उदाहरण दीजिए।

Answer» 1. धीमी गति से होने वाली विकास प्रक्रिया -कपि से मनुष्य विकसित होना ।
2. तीव्र गति से होने वाली विकास प्रक्रिया - कीटों में DDT का छीडकाव होने पर वे DDT के लिये अभ्यस्त हो जाते हैं । अर्थात उत्परिवर्तित हो जाते हैं ।
16.

हमारे शरीर के अंदर विशेषकर हमारी आंतों में कई जीवाणु पाए जाते हैं । यह लगभग हर 20 मिनट में प्रजनन करते हैं । प्रजनन के दौरान विभिन्नताएं उत्पन्न होती हैं । पीढ़ी दर पीढ़ी कुछ विभिन्नताएँ बढ़ती हैं जिनसे इनकी आबादी में काफी विभिन्नताएँ पाई जाती हैं । इस प्रकार इनमे बहुत जल्दी विकास होता है । एन्टीबायोटिक दवाईयों से जीवाणुओं की कई प्रजातियाँ खत्म हो जाती हैं पर विभिन्नताओं के कारण कोई न कोई प्रजाति बच जाती है जिन पर एन्टीबायोटिक का कोई असर नहीं हुआ हो । इनकी आबादी बढ़ने से ये एन्टीबायोटिक प्रतिरोधक बन जाते हैं । इस जानकारी की मदद से निम्नलिखित सवालों का उत्तर दीजिए - "जीवाणुओं का विकास प्राकृतिक चयन द्वारा होता है ।" इस कथन की पुष्टि कीजिए।

Answer» प्रजनन के दौरान विभिन्नता आती है जो पीढ़ी दर पीढ़ी बढ़ती जाति है । एन्टीबायोटिक दवाईयों के कारण जीवाणुओं की कई प्रजाति खत्म हो जाती है परंतु विभिन्नता के कारण कुछ प्रजाति पर एन्टीबायोटिक का असर नहीं होता और वह बच जाती है ।
अतः कह सकते हैं कि जीवाणुओं का विकास प्राकृतिक चयन द्वारा होता है ।
17.

हमारे शरीर के अंदर विशेषकर हमारी आंतों में कई जीवाणु पाए जाते हैं । यह लगभग हर 20 मिनट में प्रजनन करते हैं । प्रजनन के दौरान विभिन्नताएं उत्पन्न होती हैं । पीढ़ी दर पीढ़ी कुछ विभिन्नताएँ बढ़ती हैं जिनसे इनकी आबादी में काफी विभिन्नताएँ पाई जाती हैं । इस प्रकार इनमे बहुत जल्दी विकास होता है । एन्टीबायोटिक दवाईयों से जीवाणुओं की कई प्रजातियाँ खत्म हो जाती हैं पर विभिन्नताओं के कारण कोई न कोई प्रजाति बच जाती है जिन पर एन्टीबायोटिक का कोई असर नहीं हुआ हो । इनकी आबादी बढ़ने से ये एन्टीबायोटिक प्रतिरोधक बन जाते हैं । इस जानकारी की मदद से निम्नलिखित सवालों का उत्तर दीजिए - किस प्रक्रिया के दौरान विभिन्नताएँ उत्पन्न होती हैं ?

Answer» प्रजनन प्रक्रिया के दौरान विभिन्नताएँ उत्पन्न होती है ।
18.

कोई दो जंतुओं के नाम लिखिए जिनमे सबसे ज्यादा सम्बन्ध हो ?

Answer» ( ब ) (a) मूषक , चूहा
(b) मनुष्य , चिंपांजी ।
19.

क्या मनुष्य की बढ़ती आबादी का बाघों की संख्या पर कोई असर पड़ रहा है ? वर्णन कीजिए ?

Answer» मनुष्य की बढ़ती हुई आबादी के कारण उसके आवास तथा अन्य बुनियादी जरूरतों की पूर्ति हेतु तेजी से जंगलों का विनाश हो रहा है, जिसके कारण बाघों व अन्य वन्य जीवों के आवास की कमी हो रही है । चूँकि किसी भी जीव के आवास में उसकी बनियादी जरूरतें जैसे - भोजन , प्रजनन , सुरक्षा आदि की पूर्ति होती है, अतः बाघों की संख्या बहुत कम हो रही है ।
20.

कुटुमसर गुफा की कानी मछली ( मछरी ) की प्रजाति कैसे अपने ही वंश की मछलियों से अलग हो गई और अपने आवास में अनुकूलित हो गई ?

Answer» कुटुमसर की गुफा में बहुत अधिक अंधेरा होता है । अंधेरे आवास में रहने के लिए मछलियों में अनुकूलन के फलस्वरूप कुछ भिन्नताएँ उत्पन्न हुई, जिसके कारण कानी मछली ( मछरी ) के उत्पत्ति हुई । इस प्रकार यह अपने ही वंश की मछलियों से अलग हो गई और अंधेरे आवास में रहने के लिए अनुकूलित हो गई ।
21.

' जैविक प्रजाति ' शब्द से क्या अभिप्राय है ?

Answer» प्रकृति या जीवों का ऐसा समूह जो आपस में लैंगिक प्रजनन कर सकें " जैविक प्रजाति " माना गया ।
22.

अनुकूलर किसे कहते हैं ?

Answer» किसी जीव के अपने आवास में ढल जाने की प्रक्रिया को हम अनुकूल कहते हैं ।
23.

जीवों का विकास में चयन और अनुकूलन की क्या भूमिका है ?

Answer» चयन के कारण श्रेष्ठ जीवों का विकास हुआ, यह प्रकृति द्वारा स्वतः चलने वाली प्रक्रिया है और इन जीवों का अपने प्राकृतिक आवास में ढल जाने की प्रक्रिया अनुकूलन है ।
24.

प्राकृतिक चयन किसे कहते है ?

Answer» प्रकृति में होने वाली चयन की प्रक्रिया जिसमे भौगोलिक परिस्थितयों के अनुरूप लक्षणों का चयन होता है, प्राकृतिक चयन कहा जाता है ।
25.

एक ही जाति समूह में उपस्थित सभी जीवों के लक्षण समान होते हैं । इस समानता के कोई तीन कारण लिखिए ।

Answer» एक ही जाति समूह में उपस्थित जीवों में समानता के निम्नलिखित कारण हैं -
(i) एक ही जाति की समस्त समष्टियों का जीन कोष ( Gene pool ) समान होता है ।
(ii) एक ही जाति समूह के जीवों में प्रजनन की क्रिया एक समान पायी जाती है ।
(iii) एक ही जाति के जीवों में एक समान स्वतंत्र जीन प्रवाह होता है ।
26.

समजात अंग से आप क्या समझते हैं ?

Answer» जंतुओं तथा जीवों के वे अंग ( या संरचनाएँ) जो रचना तथा उत्पत्ति में समानता रखते हैं , लेकिन अलग-अलग कार्य के कारण बाह्य रूप में अलग दिखाई देते हैं, समजात अंग कहलाते हैं तथा अंगों की यह समानता समजातता ( Homology ) कहलाती है । मेढ़क के अग्रपाद , सीलफ्लिपर , चमगादड़ के पंख, मनुष्य के हाथ , घोड़े के अग्रपाद तथा मोल के अग्रपाद समजात अंगों के उदाहरण हैं , क्योंकि ये समान अस्थियों ह्यूमरस, रेडियो अल्ना, कार्पल्स, मेटाकार्पल्स तथा उँगलियों के बने होते हैं ।
27.

डार्विन और वैलेस द्वारा प्रतिपादित जीवों के विकास के सिद्धांत से हमे क्या पता चलता है ?

Answer» डार्विन और वैलेस द्वारा प्रतिपादित जीवों के विकास के सिद्धान्त से हमें यह पता चलता है , कि जीवों में विविधता पाई जाती है, जिसके कारण उनका रूप , रंग आयु में अंतर होता है। वे जीव जो अपने वातावरण में रहने के लिए अनुकूलित होते हैं, वे जीवित रहते हैं तथा विभिन्नताओं के द्वारा नयी जाति को उत्पन्न करते हैं तथा वे जीव जो अनुकूलित नहीं हो पाते ही, नष्ट हो जाते हैं ।
Previous Next