This section includes 7 InterviewSolutions, each offering curated multiple-choice questions to sharpen your Current Affairs knowledge and support exam preparation. Choose a topic below to get started.
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निम्नलिखित शब्दों के दो-दो पर्यायवाची शब्द लिखेंभाल = ———–प्रभु = ———–जगत = ———–वन। = ———– |
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Answer» कुल = वंश-श्री राम का जन्म रघुकुल में हुआ था। कूल = किनारा-यमुना नदी के कूल पर स्नानार्थियों की भीड़ थी। कटि = कमर-बाल कृष्ण की कटि पर छोटे-छोटे घुघरू बंधे हुए थे। कटी = फटना-उसकी कमीज़ नीचे से कटी हुई है। |
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पदावली के दूसरे पद में मीराबाई गिरिधर से क्या चाहती है ? |
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Answer» मीराबाई ने गिरिधर को अपने पति के रूप में स्वीकार कर उनसे चाहा है कि केवल वे ही उसका अब उद्धार कर सकते हैं। वह उनकी शरण को सदा के लिए पाना चाहती है। |
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निम्नलिखित पद्यांशों की सप्रसंग व्याख्या कीजिए(क) बसौ मेरे नैनन में नंद लाल।मोहनि मूरति साँवरी सूरति नैना बनै विसाल।मोर मुकुट मकराकृत कुंडल अरुण तिलक दिये भाल।अधर सुधारस मुरली राजति उर वैजन्ती माल।छुद्र घंटिका कटि तट सोभित नुपूर शब्द रसाल।मीरा प्रभु सन्तन सुखदाई भक्त बछल गोपाल॥ |
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Answer» कवयित्री अपनी कामना व्यक्त करते हुए कहती है कि हे नंद के पुत्र श्री कृष्ण, आप मेरे नेत्रों में निवास करने की कृपा करो। आपकी मोहित करने वाली आकृति तथा सांवले रंग की सूरत है। आपके नेत्र बहुत बड़े-बड़े हैं। आप ने मोर के पंखों का मुकुट सिर पर और कानों में मकर की आकृति के कुंडल धारण किए हुए हैं। आपके माथे पर लाल रंग का तिलक सुशोभित हो रहा है। आप के होठों पर अमृत समान मधुर स्वर रस की वर्षा करने वाली बाँसुरी तथा हृदय पर वैजंती माला विराजमान है। छोटी-छोटी घंटियाँ आप की कमर पर बंधी हुई हैं तथा पैरों में घुघरू बंधे हैं जिनकी मधुर गुंजार सुनाई दे रही है। मीरा के प्रभु संतों को सुख प्रदान करते हैं तथा अपन भक्तों की सदा रक्षा करते हैं। |
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मीरा अपने आँसुओं के जल से किस बेल को सींच रही है? |
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Answer» मीरा अपने आँसुओं के जल से श्रीकृष्ण के प्रति अपने हृदय में विद्यमान प्रेम रूपी बेल को सींच रही है। |
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निम्नलिखित पद्यांशों की सप्रसंग व्याख्या कीजिए(ख) मेरे तो गिरिधर गोपाल, दूसरो न कोई।जाके सिर मोर मुकुट, मेरो पति सोई।तात मात भ्रात बंधु, आपनो न कोई।छोड़ि दई कुल की कानि, कहा करै कोई।संतन ढिग बैठि बैठि, लोक लाज खोई।अँसुअन जल सींचि सींचि, प्रेम बेलि बोई।अब तो बेलि फैल गई, आनंद फल होई।भगत देखि राजी भई, जगत देखि रोई।दासी मीरा लाल गिरधर, तारौ अब मोही। |
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Answer» मीरा जी कहती हैं कि मेरा तो सर्वस्व गोवर्धन पर्वत धारी श्रीकृष्ण हैं। उनके अतिरिक्त मेरा किसी से कोई संबंध नहीं। मोर-मुकुट धारण करने वाले श्रीकृष्ण ही मेरे पति हैं। पिता, माता, भाई, सगा-संबंधी इनमें अब मेरा अपना कोई नहीं है। मैंने अपने परिवार की मान-मर्यादा को छोड़ कर उन्हें अपना लिया है। इसलिए मेरा अब कोई क्या कर सकता है अर्थात् मुझे किसी की परवाह नहीं है। मैं लोक-लाज की चिंता छोड़कर संतों के पास बैठती हूँ। मैंने आँसुओं के जल से सींच-सींच कर कृष्ण प्रेम की बेल को बोया है। अभिप्राय यह है कि श्रीकृष्ण के प्रति मीरा के मन की प्रेम रूपी बेल का विकास हो चुका है। अतः अब उसे किसी प्रकार से भी नष्ट नहीं किया जा सकता। मीरा जी कहती हैं कि वे प्रभु भक्त को देख कर तो प्रसन्न होती हैं पर संसार को देखकर रो पड़ती हैं। भाव यह है कि माया-मोह में लिप्त प्राणियों के दयनीय अंत की कल्पना मात्र से मीरा का हृदय दुःख से भर जाता है। मीरा स्वयं को श्रीकृष्ण की दासी मानती हुई उनसे अपने उद्धार की प्रार्थना करती है। |
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संतों की संगति में रहकर मीरा ने क्या छोड़ दिया ? |
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Answer» संतों की संगति में रहकर मीरा ने कुल की मर्यादा तथा लोकलाज को छोड़ दिया था। |
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मीरा ने किसे अपना पति माना है ? |
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Answer» मीरा ने सिर पर मोर के पंख का मुकुट धारण करने वाले श्रीकृष्ण को अपना पति माना है। |
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मीरा किसे अपने नयनों में बसाना चाहती है? |
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Answer» मीरा नंद के पुत्र श्रीकृष्ण को अपने नयनों में बसाना चाहती है। |
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मीरा श्रीकृष्ण को कहां बसाना चाहती है? |
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Answer» मीरा श्रीकृष्ण को अपने नेत्रों में बसाना चाहती है। |
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श्रीकृष्ण ने किस प्रकार का मुकुट और कुंडल धारण किए हैं ? |
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Answer» श्रीकृष्ण ने मोर पंखों का मुकुट और मकर की आकृति के कुंडल धारण किए हुए हैं। |
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मीरा किसे देखकर प्रसन्न हुई और किसे देखकर दुःखी हुई ? |
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Answer» मीरा भक्तों को देखकर प्रसन्न हुई और सांसारिक माया-मोह में फंसे हुए लोगों को देख कर दुःखी हुई। |
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श्रीकृष्ण ने कैसे कुंडल पहने हुए हैं(क) मत्स्याकृत(ख) सर्पाकृत(ग) मकराकृत(घ) वृत्ताकृत। |
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Answer» सही विकल्प है (ग) मकराकृत |
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‘श्रीकृष्ण का वर्ण कैसा है(क) गौर(ख) सांवला(ग) सुनहरा(घ) आसमानी। |
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Answer» सही विकल्प है (ख) साँवला |
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मीरा ने किनके साथ बैठकर लोक लाज गँवा दी थी? |
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Answer» मीरा ने संतों के साथ बैठकर लोक लाज गँवा दी थी। |
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श्रीकृष्ण की कमर में क्या बंधा हुआ है? |
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Answer» श्रीकृष्ण की कमर में छोटी-छोटी घंटियाँ बंधी हुई हैं। |
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मीरा श्रीकृष्ण के प्रेम में दीवानी भक्तिन कही जाती है। वह उन्हें ‘गिरिधर,’ ‘गोपाल’ आदि नामों से पुकारती थी। श्री कृष्ण को गिरिधर इसलिए कहते हैं क्योंकि उन्होंने इंद्र के प्रकोप से वृंदावन के लोगों की रक्षा करने के लिए गोवर्धन पर्वत को छतरी के समान अपनी उंगली पर धारण कर लिया था और वृंदावनवासियों को घनघोर वर्षा से बचाया था। वे ‘गोपाल’ इसलिए कहलाते हैं क्योंकि वे गौओं को चराया करते थे।1. श्रीकृष्ण की आकृति तथा वर्ण कैसा है?2. श्रीकृष्ण के माथे की शोभा में वृद्धि किस से हो रही है?3. श्रीकृष्ण की कौन-सी ध्वनि मन को आकर्षित करती है?4. मीरा ने किसे अपना पति कहा है/5. ‘तात मात भ्रात बंधु, आपनो न कोई ‘ से मीरा का क्या आशय है?6. मीरा की प्रेम बेलि पर कैसा फल लगा है?7. मीरा ने श्रीकृष्ण की कैसी छवि को अपने मन में कल्पित किया था ?8. मीराबाई ने श्रीकृष्ण के प्रति अपने कैसे भावों को अभिव्यक्त किया था ? |
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Answer» 1. श्रीकृष्ण की मन को मोहित करने वाली आकृति तथा सांवले वर्ण की शारीरिक छवि है। 2. श्रीकृष्ण के माथे की शोभा में वृद्धि उनके माथे पर लगे हुए लाल रंग के तिलक से हो रही है। 3. श्रीकृष्ण की कौन-सी ध्वनि मन को आकर्षित करती है? 4. मीरा ने मोर पंखों का मुकुट धारण करने वाले श्रीकृष्ण को अपना पति कहा है। 5. मीरा का मानना है कि अब इस संसार में श्रीकृष्ण के अतिरिक्त उसका अपना कोई पिता, माता, भाई-बंधु नहीं 6. मीरा की प्रेम-बेलि पर श्रीकृष्ण से मिलन रूपी आनंद का फल लगा है। 7. मीरा ने अपने मन में कल्पित किया था कि श्रीकृष्ण अपार शोभावान थे। उनकी छवि शोभा से युक्त थी। उनका सांवला रंग था। उनकी आँखें अति संदर और बड़ी-बड़ी थीं। उनके सिर पर मोर-मुकुट शोभा देता था। कानों में कुंडल और माथे पर लाल रंग का तिलक अपार शोभा देता था। उनके होठों पर बाँसुरी अति सुंदर लगती है। वैजन्ती माला उनकी छाती की शोभा बढ़ाती है। 8. मीरा ने स्पष्ट रूप से स्वीकार किया था कि श्रीकृष्ण ही उसके स्वामी थे। उनके अतिरिक्त कोई भी दूसरा उसका नहीं था। वे ही उसके पति थे। उन्हीं के कारण उसने अपने सारे सांसारिक रिश्ते-नाते त्याग दिए थे। उन्हीं के लिए उसने सभी सामाजिक और दुनियादारी के बंधन सदा के लिए छोड़ दिए थे। उसने अपने आँसुओं से ही अपने प्रेम को पोषित किया था। |
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श्री कृष्ण ने कौन-सा पर्वत धारण किया था? |
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Answer» श्री कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को धारण किया था। |
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