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a. कोई बच्चा किसी घूर्णिका (घूर्णी मन्च) पर अपनी दोकनों भुजाओं को बाहर की ओर फैलाकर खड़ा है। घूर्णिका को 40rev/min की कोणीय चाल से घूर्णन कराया जाता है। यदि बच्चा अपने हाथों को वापस सिकोड़ कर अपना जड़त्व –आघूर्ण अपने आरम्भिक जड़त्व-आघूर्ण का 2//5 गुना कर लेता है तो इस स्थिति में उसकी कोणीय चाल क्या होगी? यह मानिए कि घूर्णिका की घूर्णन गति घर्षणरहित है। b. यह दर्शाइए कि बच्चे की घूर्णन की नयी गतिज ऊर्जा उसकी आरम्भिक घूर्णन की गतिज ऊर्जा से अधिक है। आप गतिज ऊर्जा में हुई इस वृद्धि की व्याख्या किस प्रकार करेंगें? |
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Answer» a. चूंकि निकाय पर बाह्य बल –आघूर्ण शून्य है अतः निकाय का कोणीय संवेग `J(=Iomega)` नियत है। `:.I_(1)omega_(1)=I_(2)omega_(2)impliesomega_(2)=(I_(1)omega_(1))/(I_(2))` परंतु प्रश्नानुसार `I_(2)=2/5I_(1),omega_(1)=40` चक्कर/मिनट `:.` अन्तिम कोणीय चाल `omega_(2)=(I_(1))/((2/5I_(1)))xx40` चक्कर/मिनट `=5/2xx40` चक्कर/मिनट `=100` चक्कर/मिनट। b. घूर्णन गतिज ऊर्जा `K=1/2 I omega^(2)=1/2xxIxx(J^(2))/(I^(2))=(J^(2))/(2I)` अब चूंकि कोणीय संवेग `J` संरक्षित है अतः घूर्णन गतिज ऊर्जा `K prop 1/I` `:.(K_(1))/(K_(2))=(I_(2))/(I_(1))=((2//5)I_(1))/(I_(1))` अथवा `K_(2)=5/2K_(1)k=2.5K_(1)` अतः सिद्ध हुआ कि अन्तिम गतिज ऊर्जा प्रारम्भिक गतिज ऊर्जा से अधिक (लगभग 2.5 गुना) है । गतिज ऊर्जा में यह वृद्धि बच्चे की मांसपेशियों में एकत्रित ऊर्जा के मुक्त होने के कारण हुई है। |
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