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दो डिस्कों (चक्रिकायों) के जड़त्व आघूर्ण आपस में बराबर हैं। ये अपनी-अवपी नियमित अक्ष जो इनके समतल के लम्बवत है और चक्रिका के केंद्र से होकर गुजरती है के परितः क्रमश: `omega_(1)` तथा `omega_(2)` कोणीय वेग से घूण्रन कर रही है। इनकों एक दूसरे के सम्मुख इस प्रकार सम्पर्क में लाया जाता कि इनकी घूर्णन अक्ष संपाती हो जाती है। तो इस प्रक्रम में ऊर्जा क्षय के लिए व्यंजक होगा:A. `1/2(omega_(1)+omega_(2))^(2)`B. `1/4I(omega_(1)-omega_(2))^(2)`C. `I(omega_(1)-omega_(2))^(2)`D. `1/2(omega_(1)-omega_(2))^(2)` |
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Answer» कोणीय संवेग संरक्षण के नियम से `Iomega_(1)+Iomega_(2)=2Iomega` `:.omega=(omega_(1)+omega_(2))/2` प्रारम्भिक गतिज ऊर्जा `K_(i)=1/2I omega_(1)^(2)+1/2I omega_(2)^(2)=1/2I(omega_(1)^(2)+omega_(2)^(2))` अन्तिम घूर्णन गतिज ऊर्जा `K_(f)=1/2xx2Iomega^(2)=I((omega_(1)+omega_(2))/2)^(2)` ऊर्जा क्षय `K_(i)-K_(f)=1/2I(omega_(1)^(2)+omega_(2)^(2))-I((omega_(1)+omega_(2))/2)^(2)` `=1/4I[2omega_(1)^(2)+2omega_(2)^(2)-omega_(1)^(2)-omega_(2)^(2)-2omega_(1)omega_(2)]` `=1/4[omega_(1)^(2)+omega_(2)^(2)-2omega_(1)omega_(2)]` `=I/4(omega_(1)-omega_(2))^(2)` |
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