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आशा को कबीर ने क्या बताया है और इससे मुक्त होने का गुरु मंत्र किसे बताया है?

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आशा को कबीर ने साँपन बताया है जिसने सारे संसार को डस रखा है। इस दोहे में कबीर का आशा को सर्पिणी बताने का भाव यह है कि जो व्यक्ति केवल आशाओं के सहारे रहता है, वह जीवन में कभी सुखी नहीं हो सकता। आशा के साथ उद्यम भी होना चाहिए। आशा की दासता से छुटकारा पाने का एकमात्र उपाय सन्तोष की भावना है। वही आशारूपी सर्पिणी के विष से व्यक्ति की रक्षा कर सकती है। सन्तोषरूपी गुरु मन्त्र के द्वारा ही आशारूपी सर्पिणी का विष उतारा जा सकता है।



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