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‘गंग’ और ‘सुसंग’ को तुलसीदास ने समान कैसे बताया है? |
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Answer» गंगा के जल से जो वस्तु मिलती है या जो व्यक्ति स्नान करता है, वह गंगा के समान ही पवित्र हो जाता है। इसी प्रकार सत्संग करने वाला व्यक्ति सदाचारी हो जाता है। |
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