1.

कबीरदास की वाणी साखी क्यों कहलाती है? स्पष्ट कीजिए।

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साखी’ शब्द संस्कृत के ‘साक्षी’ का ही विकसित या तद्भव रूप है।’साक्षी’ वह होता है जिसने किसी घटना या वस्तु को स्वयं अपनी आँखों से देखा हो। ‘साखी’ नाम से रचित दोहों में कबीरदास जी द्वारा अपने स्वयं के अनुभव से प्राप्त विचारों, शिक्षाओं और सन्देशों को व्यक्त किया गया है। अत: कबीरदास के आध्यात्मिक अनुभवों पर आधारित होने के कारण, इन दोहों को ‘साखी’ नाम दिया गया प्रतीत होता है।



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