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रसना रा गुण राजिया’ से कवि का क्या आशय है? स्पष्ट कीजिए। |
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Answer» कहा गया है-वाणी एक अमोल है, जो कोई जानै बोल। वाणी या बोली भगवान द्वारा दी गई एक अमूल्य वस्तु है। बस मनुष्य को इसका सही प्रयोग करना आना चाहिए। कवि कृपाराम भी ‘रसना का गुण’ अर्थात् वाणी के इसी महत्त्व को बता रहे हैं। कवि कोयल और कौए का उदाहरण देकर अपनी बात को प्रमाणित कर रहा है। कोयल अपनी मधुर बोली से हृदय में प्यार जगाती है और सबके मन को प्रसन्न किया करती है। इसके विपरीत कौआ अपनी कर्कश काँव-काँव द्वारा मन में खीझ उत्पन्न करता है। वाणी में अन्तर से ही कोयल सबकी प्रिय है और कौआ अप्रिय है। |
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