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चिट्ठियों को कुएँ में गिरता देख लेखक की क्या मनोदशा हुई? |
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Answer» चिट्ठियों को कुएँ में गिरता देख लेखक की मनोदशा उसी प्रकार हुई जैसे घास चरते हुए हिरन की आत्मा गोली से हत होने पर निकल जाती है और वह तड़पता रह जाता है। |
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