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कवि कृपाराम खिड़िया ने अपने सोरठों में कोयल और कौआ तथा कस्तूरी और शक्कर की तुलना द्वारा क्या सन्देश देना चाहा है? अपने शब्दों में लिखिए।

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कृपाराम ने इन दोनों सोरठों द्वारा पाठकों को मधुरवाणी और जीवन में गुणों के महत्त्व का सन्देश दिया है। सभी जानते हैं। कि लोग कोयल को प्यार करते हैं और कौए को भगा देते हैं। इसका एकमात्र कारण वाणी का स्वरूप है। कोयल अपनी मीठी बोली से सभी के मन में प्रेम भाव जगाती है और सुनने वालों के मन को प्रसन्न कर देती है। जबकि कौए की कर्कश बोली कानों को तनिक भी नहीं सुहाती । कवि का यही सन्देश है कि सबका प्रिय बनना है तो सदा मधुर वाणी का प्रयोग करना चाहिए।

कस्तूरी और शक्कर का उदाहरण सामने रखकर कवि ने सन्देश दिया है कि केवल वस्तु या व्यक्ति की सुन्दरता उसे समाज में सम्मान नहीं दिला सकती। सम्मान और मूल्य मनुष्य को उसके श्रेष्ठ गुणों से प्राप्त होते हैं। कस्तूरी भले ही देखने में काली-कुरूप हो किन्तु उसकी अद्वितीय मादक सुगन्ध ने उसे अति मूल्यवान बना दिया है। शक्कर भले देखने में सुन्दर लगे पर वह कस्तूरी के सामने मूल्य और महत्त्व में कहीं नहीं ठहरती।



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