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यदि कोई पिण्ड घूर्णन कर रहा है तो क्या निश्चित रूप...
1.
यदि कोई पिण्ड घूर्णन कर रहा है तो क्या निश्चित रूप से उस पर कोई बल-आघूर्ण लग रहा है?
Answer» नहीं बल-आघूर्ण केवल कोणीय त्वरण के लिए आवश्यक है।
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एक पतली एकसमान छड़ बिंदु `O` पर कीलकित है तथा क्षैतिज तल में एक समान कोणीय चाल `omega` से घूम रही है। `t=0` पर एक छोटा कीड़ा `O` से चलना प्रारम्भ करके `t=T` समय पर छड़ के अन्तिम सिरे पर पहुंच कर रूक जाता है। कीड़ा छड़ के सापेक्ष एकसमान चाल `v` से चलता है । निकाय की कोणीय चाल पूरे समय `omega` बनी रहती है। `O` के परितः निकाय पर लगने वाले बल आघूर्ण का मान `(tau)` समय के साथा जिस प्रकार बदलता है उसका सर्वोत्तम वर्णन किस ग्राफ में है? A. B. C. D.
`m` द्रव्यमान का एक छोटा कण `X`अक्ष से `theta` कोण पर प्रारम्भिक वेग `v_(0)` से x-y तल में चित्रानुसार प्रक्षेपित किया गया है। समय `t lt (v_(0)sin theta)/g` पर कण का कोणीय संवेग है: जहां `hati, hatj, hatk, x-, y-` तथा z- अक्ष के अनुदिश एकांक सदिश है।A. `1/2m g v_(0)t^(2)cos theta hati`B. `-mg v_(0)t^(2)cos theta hatj`C. `m g v_(0)t cos theta hatk`D. `-1/2m g v_(0) t^(2) cos theta hatk`
गाड़ी के एक पहिये की त्रिज्या 0.4 मीटर है। गाड़ी विरामावस्था से 20 सेकण्ड तक 1.5 `"Radian"// "second"^(2)` के कोणीय त्वरण से त्वरित होती है। इस समयान्तराल में पहिया कितनी दूरी तय कर लेता है तथा इसका रेखीय वेग कितना हो जाता है?
रेखीय त्वरण तथा कोणीय त्वरण में संबंध का सूत्र लिखिए।
एक कण के लिए उसके स्थिति सदिश `vecr` तथा रेखीय संवेग `vecp` किस प्रकार समबन्धित हैं?
दोनों सिरों पर खुला एक पतला खोखला सिलिण्डर जिसका द्रव्यमान `M` है (i)बिना लुढ़के वेग `v` से फिसलता है (ii)बिना फिसले उसी वेग से लुढ़कता है। दोनों दशाओं में इसमें निहित गतिज ऊर्जाओं की तुलना कीजिए।
पत्थर पीसने वाले पहियेक की धुरी पर जिसकी त्रिज्या 2 सेमी है एक 600 न्यूटन का नियत स्पर्शरेखीय बल लगाया गया है। इस पर लगने वाले बल –आघूर्ण एवं 8 सेकण्ड पश्चात इसके द्वारा अर्जित कोणीय संवेग की गणना कीजिए। पहिया विराम स्थिति से चलता है।
`3kg` द्रव्यमान तथा `40cm` त्रिज्या के किसी खोखले सिलिण्डर पर कोई द्रव्यमान की रस्सी लपेटी गई है। यदि रस्सी को 30N बल से खींचा जाए तो सिलिण्डर को कोणीय त्वरण् क्या होगा? रस्सी का रैखिक त्वरण क्या है? यह मानिए कि इस प्रकरण में कोई फिसलन नहीं है।
दो डिस्कों (चक्रिकायों) के जड़त्व आघूर्ण आपस में बराबर हैं। ये अपनी-अवपी नियमित अक्ष जो इनके समतल के लम्बवत है और चक्रिका के केंद्र से होकर गुजरती है के परितः क्रमश: `omega_(1)` तथा `omega_(2)` कोणीय वेग से घूण्रन कर रही है। इनकों एक दूसरे के सम्मुख इस प्रकार सम्पर्क में लाया जाता कि इनकी घूर्णन अक्ष संपाती हो जाती है। तो इस प्रक्रम में ऊर्जा क्षय के लिए व्यंजक होगा:A. `1/2(omega_(1)+omega_(2))^(2)`B. `1/4I(omega_(1)-omega_(2))^(2)`C. `I(omega_(1)-omega_(2))^(2)`D. `1/2(omega_(1)-omega_(2))^(2)`
दो चक्रिकाएं जिनके अपने-अपने अक्षों (चक्रिका के अभिलम्बवत तथा चक्रिका के केंद्र से गुजरने वाले) के परितः जड़त्व आघूर्ण `I_(1)` तथा `I_(2)` हैं और जो `omega_(1)` तथा `omega_(2)` कोणीय चालों से घूर्णन कर रही हैं को उनके घूर्णन अक्ष सम्पाती करके आमने-सामने लाया जाता है। a. इस दो चक्रिका निकाय की कोणीय चाल क्या है? b. यह दर्शाइए कि इस संयोजित निकाय की गतिज ऊर्जा दोनों चक्रिकाओं की आम्भिक गतिज ऊर्जाओं के योग से कम है। ऊर्जा में हुइ हानि की आप कैसे व्याख्या करेंगे? `omega_(1)!=omega_(2)` लीजिए।
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