This section includes 7 InterviewSolutions, each offering curated multiple-choice questions to sharpen your Current Affairs knowledge and support exam preparation. Choose a topic below to get started.
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नेपोलियन को सच बोलने का क्या परिणाम भुगतना पड़ा? |
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Answer» नेपोलियन ने अपनी माँ को बता दिया कि उसके कारण अमरूद बेचनेवाली लड़की को हानि उठानी पड़ी है। उस लड़की को डर है कि उसकी माँ उसे बुरी तरह डाँटेगी। अपनी जेबखर्च की रकम में से उस लड़की को अमरूदों के पूरे पैसे देने के लिए नेपोलियन ने माँ से कहा। माँ नेपोलियन की सच्चाई से बहुत खुश हुई। उसने नेपोलियन से कहा कि अब एक महीने तक उसे जेबखर्च के लिए कुछ भी नहीं मिलेगा। नेपोलियन ने माँ की बात मान ली। उसने अपने सच बोलने के परिणाम को खुशी – खुशी भुगत लिया। |
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कौमुदी ने अपने कीमती गहने गाँधीजी को क्यों दे दिए? |
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Answer» कौमुदी ने अपने कीमती गहने गाँधीजी को दे दिए, क्योंकि उसकी दृष्टि में देश का महत्त्व गहनों से अधिक था। |
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अमरूदों के खराब हो जाने का क्या कारण था? |
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Answer» अमरूद कीचड़ में गिर जाने के कारण खराब हो गए थे। |
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नेपोलियन कैसा इन्सान था? |
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Answer» नेपोलियन सच्चाई के पथ पर चलनेवाला इन्सान था। |
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इलाइजा अमरूदवाली लड़की को घर ले जाने का विरोध क्यों कर रही थी? |
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Answer» इलाइजा अमरूदवाली लड़की को घर ले जाने का विरोध कर रही थी, क्योंकि उसे माँ के नाराज होने का डर था। |
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नेपोलियन किससे टकराया? |
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Answer» नेपोलियन एक अमरूद बेचने जा रही लड़की से टकराया। |
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सही वाक्यांश चुनकर पूरा वाक्य फिर से लिखिए :गाँधीजी ने कौमुदी के …(अ) हार को सच्चा आभूषण बताया।(ब) त्याग को सच्चा आभूषण बताया।(क) साहस को सच्चा आभूषण बताया। |
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Answer» गाँधीजी ने कौमुदी के त्याग को सच्चा आभूषण बताया। |
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सही वाक्यांश चुनकर पूरा वाक्य फिर से लिखिए :भाषण समाप्त कर गाँधीजी …(अ) महिलाओं से उनके जेवर माँगने लगे।(ब) सबको अपने हस्ताक्षर देने लगे।(क) भेंट में मिली वस्तुएँ नीलाम करने लगे। |
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Answer» भाषण समाप्त कर गाँधीजी भेंट में मिली वस्तुएं नीलाम करने लगे। |
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उदाहरण के अनुसार संयुक्त वर्ण से बने दो-दो शब्द लिखिए :(1) द् + ध = द्ध = शुद्ध – …………(2) त् + त = त्त = वित्त – …………(3) द् + म = द्म = पद्म – …………(5) ह + म = ह्म – ब्रह्म – ……… |
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Answer» (1) द् + ध = द्ध = शुद्ध – बुद्ध, क्रुद्ध (2) त् + त = त्त = वित्त – कुत्ता, छत्ता (3) द् + म = य = पद्म – छद्म, सद्म (4) द् + व = द्व = विद्वान – द्वार, द्वेष (5) ह + म = हा = ब्रह्म – ब्रह्मांड, ब्राह्मण |
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इन्सान अनूठा कब कहलाता है? |
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Answer» शिक्षक – महेश, क्या तुम बता सकते हो कि इन्सान अनूठा कब कहलाता है? महेश – गुरुजी, जब व्यक्ति कोई असाधारण काम करता है, तब वह ‘अनूठा इन्सान’ कहलाता है। जैसे – सरदार वल्लभभाई पटेल। शिक्षक – उन्होंने कौन-सा अनूठा काम किया था? महेश – गुरुजी, जब हमारा देश आज़ाद हुआ तब यहाँ लगभग 600 रियासतें थीं। इनमें से कुछ राजा बड़े हठी थे। वे अपनी रियासत छोड़ने को तैयार नहीं थे। सरदार पटेल ने बड़ी कुशलता से सभी राजाओं से उनकी रियासतें लीं और एक स्वतंत्र राष्ट्र का निर्माण किया। सभी लोग सरदार का लोहा मान गए। रौनक – गुरुजी, इसीलिए तो सरदार पटेल को ‘लौहपुरुष’ कहते हैं। शिक्षक – हाँ, सरदार पटेल लोखंडी इरादों के आदमी थे। सचमुच, वे ‘अनूठे इन्सान’ थे। |
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बापू के बारे में आप क्या जानते हैं? |
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Answer» बापू का पूरा नाम मोहनदास करमचंद गाँधी था। लोग उन्हें ‘महात्मा गाँधी’ के नाम से जानते हैं। महात्मा गाँधीजी ने देश की आज़ादी के लिए अंग्रेजों से लंबी लड़ाई लड़ी। वे अनेक बार जेल गए। उन्होंने कई सत्याग्रह किए। आज़ादी की लड़ाई में देश की जनता ने उनका पूरा साथ दिया। लोगों ने उन्हें ‘राष्ट्रपिता’ का सम्मान दिया। 15 अगस्त 1947 को हमारा देश स्वतंत्र हुआ। 30 जनवरी, 1948 को दिल्ली में बापू की हत्या हो गई। बापू ने हमें शांति, प्रेम और अहिंसा का संदेश दिया। उनकी समाधि ‘राजघाट’ के नाम से प्रसिद्ध हैं। |
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क्या आपने भी कभी अपने माता-पिता के सामने गलती स्वीकार की है? उस घटना को अपने शब्दों में बताइए। |
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Answer» एक बार छुट्टी के दिन मैं अपनी सोसायटी के मैदान में साथियों के साथ क्रिकेट खेल रहा था। बल्लेबाजी करते समय मैंने गेंद को इतनी जोर से मारा कि एक मकान की खिड़की का काँच टूट गया। मकान के मालिक क्रोधित होकर बाहर आए और पूछा, “मेरा काँच किसने तोड़ा?” साथियों ने मेरा ही नाम लिया। उस सज्जन ने जाकर मेरे मातापिता से इसकी शिकायत की। मैंने अपनी गलती मान ली। वे सज्जन भी खुश हुए और बोले, “कोई बात नहीं बेटा, खेलो जरूर, पर इतना ध्यान रखो कि किसी का नुकसान न हो।” |
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आपको कौमुदी का पात्र कैसा लगा? क्यों? |
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Answer» मुझे कौमुदी का पात्र बहुत प्रेरक लगा। महिलाओं को गहनों के प्रति स्वाभाविक मोह होता है। फिर कौमुदी तो। अभी सोलह साल की बालिका थी। उसके गहने बहुत कीमती थे। ऐसे गहने दुबारा नहीं बन सकते थे। फिर भी देश की आज़ादी के लिए उसने अपने गहनों का त्याग कर दिया। गाँधीजी को अपने सभी गहने भेंट कर उसने साबित कर दिया कि देशप्रेम से बढ़कर कुछ भी नहीं है। इसीलिए कौमुदी का पात्र हम सब के लिए बड़ा प्रेरणादायक है। |
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बापू धन क्यों इकट्ठा कर रहे थे? |
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Answer» उस समय देश में आज़ादी के लिए आंदोलन चल रहा था। बापू उसके नेता थे। आंदोलन के लिए धन की जरूरत पड़ती थी। बापू यह धन कहाँ से लाते? इसलिए वे सारे देश में घूम-घूमकर सभाएँ करते और धन इकट्ठा करते थे। |
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उदाहरण के अनुसार लिंग परिवर्तन कीजिए:उदाहरण : मोर – मोरनी(1) शेर – …………(2) जादूगर – ………(3) मास्टर – ………(4) डॉक्टर- ……(5) ऊँट – ……… |
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Answer» (1) शेर – शेरनी (2) जादूगर – जादूगरनी (3) मास्टर – मास्टरनी (4) डॉक्टर – डॉक्टरनी (5) ऊँट – ऊँटनी |
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उदाहरण के अनुसार लिंग परिवर्तन कीजिए:उदाहरण : साँप – साँपिन(1) कुम्हार – ……(2) नाग – ………(3) बाघ – …(4) धोबी – ……(5) ग्वाला – ………………………… |
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Answer» (1) कुम्हार – कुम्हारिन (2) नाग – नागिन (3) बाघ – बाघिन (4) धोबी – धोबिन (5) ग्वाला – ग्वालिन |
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उदाहरण के अनुसार लिंग परिवर्तन कीजिए:उदाहरण : पुत्र – पुत्री(1) मेढ़क – …………(2) तरुण – ………(3) कुमार – ……(4) देव – …………(5) हिरन – ………… |
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Answer» (1) मेढक – मेढकी (2) तरुण – तरुणी (3) कुमार – कुमारी (4) देव – देवी (5) हिरन – हिरनी |
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तुम अपने देश की सेवा कैसे करोगे? |
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Answer» शिक्षक – (विद्यार्थियों से) तुम लोग महात्मा गाँधी, जवाहरलाल नेहरु, लालबहादुर शास्त्री आदि नेताओं की देशसेवा के बारे में जानते हो। लेकिन तुम खुद अपने देश की सेवा कैसे करोगे? अंशुमान – गुरुजी, मैं कृषि वैज्ञानिक बनूँगा। मैं खेती के नए-नए तरीकों का आविष्कार कर तरह-तरह के अनाजों, दालों और शाक-सब्जियों की पैदावार बढ़ाऊँगा। प्रदीप – गुरुजी, मैं इंजीनियर बनकर ऐसी तकनीक विकसित करूँगा कि जिससे सस्ते, सुंदर और मजबूत मकान बने। मैं ऐसा प्रयत्न करूँगा कि देश में कोई बेघर न रहे। कौशल – गुरुजी, मैं देश में फैले हुए भ्रष्टाचार को जड़-मूल से उखाड़ फेंकने का इरादा रखता हूँ। इसके लिए जो भी हो सकेगा, मैं ईमानदारी से करूँगा। शिक्षक – मुझे खुशी है कि तुम लोग किसी-न-किसी तरह देश की सेवा करना चाहते हो। भविष्य में तुम्हारे हाथों में ही देश की बागडोर होगी। मुझे विश्वास है कि तुम लोग सच्चे देशसेवक बनोगे। |
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आप अपने जेब खर्च का उपयोग किस प्रकार करते हैं? |
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Answer» मुझे जेबखर्च के लिए प्रतिदिन 10 रुपये मिलते हैं। मैं सभी पैसे खर्च नहीं करता। हमारे स्कूल के उपहारगृह में चीजें किफायती दरों पर मिलती हैं। इसलिए स्कूल में नाश्ता करने के बाद भी मेरे पास कुछ रुपये बच जाते हैं। इन्हें मैं अपने पास बचाकर रखता हूँ। कभी किसी सहपाठी को सहायता की आवश्यकता हो तो मैं इस बचत में से उसकी मदद करता हूँ। छोटी बहन की वर्षगाँठ का उपहार भी मैं इसी बचत की रकम से खरीदता हूँ। माताजी और पिताजी के जन्मदिनों पर इसी बचत से मैं उनके लिए फूलों के हार जरूर लाता हूँ। इस प्रकार, अपने जेबखर्च का मैं आवश्यकता के अनुसार उपयोग करता है। |
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नेपोलियन अपनी बहन के साथ कौन – सा खेल खेल रहा था?A. पकड़ा – पकड़ीB. आँख – मिचौनीC. टेनिसD. खो – खो |
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Answer» B. आँख – मिचौनी |
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गाँधी जी और नेपोलियन के बारे में परिचय प्राप्त कीजिए। |
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Answer» गाँधीजी महात्मा गाँधी का नाम केवल भारत में ही नहीं, सारे संसार में प्रसिद्ध है। उनका नाम मोहनदास करमचंद गाँधी था। उनकी माता का नाम पुतलीबाई था। उनका जन्म गुजरात के पोरबंदर शहर में 2 अक्तूबर, 1869 को हुआ था। उनकी प्रारंभिक शिक्षा राजकोट में हुई। फिर वे इंग्लैंड जाकर बैरिस्टर बने। गाँधीजी ने भारत में अंग्रेज सरकार के अत्याचारों के विरुद्ध सत्याग्रह आंदोलन चलाया। गाँधीजी के प्रयत्नों से सदियों से गुलाम भारत को स्वतंत्रता मिली। गाँधीजी ने हिन्दुओं और मुसलमानों की एकता के लिए काम किया। उन्होंने हरिजनों की दुर्दशा सुधारने के लिए भरसक प्रयत्न किए। उन्होंने खादी – प्रचार, ग्रामसुधार, स्त्री शिक्षा जैसे कई महत्त्वपूर्ण कार्य किए। उन्होंने जीवनभर हमारे देश की सेवा की, इसलिए वे हमारे देश के ‘राष्ट्रपिता’ कहलाए। गाँधीजी सत्य, प्रेम और अहिंसा के पुजारी थे। वे सरलता और सादगी की मूर्ति थे। वे बच्चों को बहुत प्यार करते थे। 30 जनवरी, 1948 के दिन गाँधीजी की हत्या हो गई। मरते समय गाँधीजी के मुख से ‘हे राम’ शब्द निकला था। आज गाँधीजी हमारे बीच नहीं है, फिर भी उनके महान कार्य हमें हमेशा प्रेरणा देते रहेंगे। नेपोलियन बोनापार्ट नेपोलियन बोनापार्ट फ्रांस का शासक था। उसका जन्म 15 अगस्त, 1769 में हुआ था। पहले वह सेनापति था, परंतु क्रांति के बाद वह सम्राट बन गया। उसने फ्रांस के आसपास के कई देश जीत लिए। 1812 में उसने रूस पर आक्रमण किया, किंतु भयंकर ठंड में उसके बहुत से सैनिक मारे गए और आखिर उसे वापस लौटना पड़ा। 1815 में वाटर लू के युद्ध में उसकी बुरी तरह पराजय हुई। उसे गिरफ्तार कर लिया गया। उसे बन्दी बनाकर सेन्टहेलना टापू में रखा गया। वहीं 6 वर्ष के बन्दी जीवन में उसकी मृत्यु हुई। नेपोलियन की गिनती विश्व के महान सेनापतियों में की जाती है। |
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चित्र के आधार पर चर्चा करके कहानी लिखिए : |
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Answer» सच्चे मित्र एक दिन हिरन घूमते – घूमते शिकारी के जाल में फँस गया। कौआ, चूहा और कछुआ कहीं दूर चले गए थे। उसने मित्रों को आवाज दी, पर वहाँ कोई नहीं था। कुछ समय के बाद कौआ आया। उसने हिरन को जाल में फँसा हुआ देखा तो बहुत दुःखी हुआ। उसने हिरन से कहा, “मित्र, चिंता न करो। मैं अभी तुम्हें जाल से मुक्त कराता हूँ।” वह उड़ता हुआ चूहे के पास पहुँचा और बोला, “चूहा भाई, जल्दी चलो। अपना मित्र हिरन शिकारी के जाल में फँस गया है। जाल काटकर उसे तुम्हीं मुक्त करा सकते हो। ऐसा करो कि तुम मेरी पीठ पर बैठ जाओ तो हम जल्दी पहुँच जाएँगे।” कछुए ने कहा, “कौआ ठीक कहता है। तुम दोनों जल्दी जाओ। मैं भी बाद में आता हूँ।” कौआ चूहे को अपनी पीठ पर बिठाकर ले आया। चूहे ने धीरे – धीरे जाल काट डाला। कौए ने दूर से शिकारी को आते हुए देखा। उसने हिरन को सावधान किया। हिरन जाल से निकलकर भागा। चूहा पास की झाड़ी में छिप गया। तब तक कछुआ वहाँ पहुँच चुका था। शिकारी के पास थैली थी। हिरन को न पाकर गुस्से में उसने कछुए को पकड़कर थैली में ले जाना चाहा, लेकिन तब तक कछुआ तालाब में सरक गया। शिकारी हाथ मलता रह गया। इस तरह कौआ, हिरन, चूहा और कछुआ चारों ने मित्रता निभाई। |
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निम्नलिखित विषय पर चर्चा कीजिए:महात्मा गाँधी और देशप्रेम |
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Answer» शिक्षक – शौनक, हम गाँधीजी को क्या कहकर उन्हें मान देते हैं? शौनक – गुरुजी, हम गाँधीजी को ‘बापू’ और ‘राष्ट्रपिता’ कहकर उन्हें मान देते हैं। शिक्षक – शाबाश, परंतु उन्हें ‘राष्ट्रपिता’ क्यों कहते हैं? सुनील – गुरुजी, गाँधीजी ने अपना सारा जीवन देश की सेवा में अर्पित कर दिया। उन्होंने अपने घर-परिवार की चिंता नहीं की, केवल देश की चिंता की। रमण – उन्होंने कई सत्याग्रह किए और वे कई बार जेल गए। उन्होंने कई बार उपवास किए। देश को अंग्रेजों के शासन से आज़ाद कराने के लिए उन्होंने कोई भी प्रयत्न बाकी नहीं रखा। उन्होंने नि:स्वार्थ भाव से देश की सेवा की। सचमुच, बापू महान देशप्रेमी थे। |
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आप नेपोलियन की जगह होते तो क्या करते? |
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Answer» नेपोलियन का धक्का लगने से अमरूद बेचने जानेवाली लड़की के अमरूद कीचड़ में गिरकर खराब हो गए थे। अब वह उन्हें बेच नहीं सकती थी उसे डर था कि अब वह अपनी माँ को क्या जवाब देगी? नेपोलियन को लगा कि उसके कारण उस गरीब लड़की की हानि हुई है। उसकी हानि को पूरा करना उसने अपना फर्ज समझा। उसने अपनी माँ को सच-सच हकीकत बता दी और उस लड़की को माँ से पूरे पैसे दिलवाए। अगर नेपोलियन की जगह मैं होता तो मैं भी उसीकी तरह उस गरीब लड़की का नुकसान न होने देता। |
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गाँधी जी को सोने की चूड़ी देनेवाली लड़की का नाम क्या था? |
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Answer» गाँधीजी को सोने की चूड़ा देनेवाली लड़की का नाम ‘कौमुदी’ था। |
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नेपोलियन की बहन का नाम क्या था? |
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Answer» नेपोलियन की बहन का नाम इलाइजा था। |
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हस्ताक्षर करने के बाद गाँधी जी ने क्या लिखा? |
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Answer» हस्ताक्षर करने के बाद गाँधीजी ने लिखा, तुम्हारे इन आभूषणों की अपेक्षा “तुम्हारा त्याग ही सच्चा आभूषण है।” |
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नेपोलियन और उसकी बहन के स्वभाव में क्या अंतर था? |
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Answer» नेपोलियन सच बोलने से डरता नहीं था। उसमें सच्चाई का सामना करने का साहस था। अपने कारण हुई दूसरे की हानि वह सहन नहीं कर सकता था। उसकी बहन का चरित्र इसके विपरीत था। वह डरपोक थी और सच्चाई का सामना नहीं कर सकती थी। वह झूठ बोलकर सच्चाई से बच निकलने में ही अपनी भलाई मानती थी। उसे केवल अपने बचाव की चिंता थी, दूसरों के नुकसान की नहीं। इस प्रकार, नेपोलियन और उसकी बहन के स्वभाव में बहुत अंतर था। |
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नेपोलियन लड़की को अपने घर क्यों ले गया? |
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Answer» लड़की के अमरूद खराब हो जाने से उसे नुकसान हुआ था। नेपोलियन माँ से पैसे दिलाकर उसका नुकसान पूरा करवाना चाहता था। इसलिए वह लड़की को अपने घर ले गया। |
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गाँधी जी ने कौमुदी से क्या कहा? |
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Answer» गाँधीजी ने कौमुदी से कहा, “तुम्हें दोनों चूड़ियाँ देने की जरूरत नहीं है। एक ही चूड़ी लेकर मैं तुम्हें अपने हस्ताक्षर दे दूंगा।” |
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सही वाक्यांश चुनकर पूरा वाक्य फिर से लिखिए :माँ नेपोलियन से खुश हुई, क्योंकि …(अ) वह लड़की को धक्का देकर भागा नहीं था।(ब) उसने माँ को सच – सच बता दिया था।(क) उसने अपने जेबखर्च का पैसा दिलाया था। |
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Answer» माँ नेपोलियन से खुश हुई, क्योंकि उसने माँ को सच – सच बता दिया था। |
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नेपोलियन ने लड़की को क्या दिया?A. दो सिक्केB. तीन सिक्केC. चार सिक्केD. पाँच सिक्के |
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Answer» सही विकल्प है B. तीन सिक्के |
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सही वाक्यांश चुनकर पूरा वाक्य फिर से लिखिए :नेपोलियन भागा नहीं, क्योंकि …(अ) वह लड़की को जो हानि हुई थी उसे भरपाई करना चाहता था।(ब) वह निडर था।(क) वहाँ से भागना संभव नहीं था। |
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Answer» नेपोलियन भागा नहीं, क्योंकि वह लड़की को जो हानि हुई थी उसे भरपाई करना चाहता था। |
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सही वाक्यांश चुनकर पूरा वाक्य फिर से लिखिए :लड़की को डर था, कि …(अ) अब वह केले कहाँ से खरीदेगी?(ब) कीचड़ में गिरकर अमरूद खराब न हो गए हों।(क) वह माँ को क्या जवाब देगी? |
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Answer» लड़की को डर था, कि वह माँ को क्या जवाब देगी? |
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कोष्ठक में से उचित शब्द चुनकर रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए : (जेवरों, अमरूद, बड़गरा, कौमुदी, सत्यवादी, दृढ़, देशप्रेम, टोकरी)(1) नेपोलियन जब छोटा था तभी से वह ……………. था।(2) लड़की …………. बेचने के लिए जा रही थी।(3) नेपोलियन के टकराने से उसकी …………. नीचे गिर पड़ी।(4) बचपन से ही उसे खुद पर …………. विश्वास था।(5) वहाँ …………………………. नाम के गाँव में सभा का आयोजन किया गया।(6) गाँधीजी ने उपस्थित बहनों से …………………………………. की भीख माँगी।(7) गाँधीजी ने …………………………………. से कहा।(8) …………………………………. से बढ़कर कुछ नहीं। |
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Answer» (1) नेपोलियन जब छोटा था तभी से वह सत्यवादी था। (2) लड़की अमरूद बेचने के लिए जा रही थी। (3) नेपोलियन के टकराने से उसकी टोकरी नीचे गिर पड़ी। (4) बचपन से ही उसे खुद पर दृढ़ विश्वास था। (5) वहाँ बड़गरा नाम के गाँव में सभा का आयोजन किया गया। (6) गाँधीजी ने उपस्थित बहनों से जेवरों की भीख माँगी। (7) गाँधीजी ने कौमुदी से कहा। (8) देशप्रेम से बढ़कर कुछ भी नहीं। |
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कौमुदी के पिता किसकी नीलामी करा रहे थे?A. हस्ताक्षरों कीB. आवेदनपत्रों कीC. मानपत्रों कीD. आभूषणों की |
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Answer» सही विकल्प है C. मानपत्रों की |
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नेपोलियन कैसा इन्सान था?A. निडरB. दिलदारC. बहादुरD. अनूठा |
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Answer» सही विकल्प है D. अनूठा |
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कौमुदी ने गाँधीजी को भेंट में क्या – क्या दिया? |
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Answer» कौमुदी ने गाँधीजी को भेंट में अपने हाथों की सोने की चूड़ियाँ, गले का स्वर्णहार और कानों के रत्नजड़ित बुंदे दिए। |
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बड़गरा गाँव किस राज्य में है? |
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Answer» बड़गरा गाँव केरल राज्य में है। |
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