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This section includes 7 InterviewSolutions, each offering curated multiple-choice questions to sharpen your Current Affairs knowledge and support exam preparation. Choose a topic below to get started.

1.

कौन मनोवैज्ञानिक मनोविज्ञान की प्रथम प्रयोगशाला से सम्बन्धित है?(क) फ्रायड(ख) वाटसन(ग) वुण्ट(घ) टिचनर

Answer»

सही विकल्प है  (ग) वुण्ट

2.

मनोविज्ञान को विज्ञान का दर्जा दिये जाने का श्रेय किस विधि को दिया जाता है?(क) अन्तर्दर्शन विधि(ख) निरीक्षण विधि(ग) नैदानिक निरीक्षण विधि(घ) प्रयोग विधि

Answer»

सही विकल्प है (घ) प्रयोग विधि

3.

1879 में लिपजिंग में मनोविज्ञान की प्रथम प्रयोगशाला किसने स्थापित की?(क) मन(ख) टिचनर(ग) विलियम वुण्ट(घ) ऐबिंगहास

Answer»

सही विकल्प है  (ग) विलियम वुण्ट

4.

विद्यार्थी की व्यक्तिगत समस्या समाधान के लिए उनका अध्ययन करेंगे(क) अन्तर्दर्शन विधि से(ख) निरीक्षण विधि से(ग) प्रयोगात्मक विधि से(घ) नैदानिक विधि से

Answer»

सही विकल्प है  (घ) नैदानिक विधि से

5.

निम्नलिखित में से किस स्थिति में नैदानिक विधि को अपनाया जाएगा?(क) सामान्य रूप से झूठ बोलने अथवा चोरी करने वाले छात्र के अध्ययन के लिए(ख) क्रीड़ा-स्थल पर बच्चों के व्यवहार को जानने के लिए।(ग) परीक्षा में उत्तम अंक प्राप्त करने वाले छात्र के व्यवहार को जानने के लिए(घ) उपर्युक्त सभी प्रकार के अध्ययनों के लिए

Answer»

 (क) सामान्य रूप से झूठ बोलने अथवा चोरी करने वाले छात्र के अध्ययन के लिए

6.

किस विधि से व्यक्ति स्वयं की मानसिक क्रियाओं और अनुभवों का अध्ययन कर सकता है?(क) अन्तर्दर्शन(ख) निरीक्षण(ग) नैदानिक निरीक्षण,(घ) प्रयोगात्मक

Answer»

सही विकल्प है (क) अन्तर्दर्शन

7.

किस अध्ययन विधि में बालक व पशु के व्यवहार का अध्ययन सम्भव नहीं होता?(क) अन्तर्दर्शन विधि में(ख) नैदानिक निरीक्षण विधि में(ग) सामान्य निरीक्षण में(घ) प्रयोग विधि में

Answer»

सही विकल्प है (क) अन्तर्दर्शन विधि में,

8.

मनोवैज्ञानिक अध्ययनों में नैदानिक विधि द्वारा अध्ययन किया जाता है(क) व्यक्ति के दैनिक क्रियाकलापों का(ख) परिवार के सदस्यों के आपसी व्यवहार का(ग) असामान्य व्यवहार या मानसिक रोग के निदान के लिए व्यवहार को(घ) हर प्रकार के व्यवहार का

Answer»

 (ग) असामान्य व्यवहार या मानसिक रोग के निदान के लिए व्यवहार का

9.

घायल व्यक्ति को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाते समय किन-किन बातों का ध्यान रखना चाहिए और क्यों?याघायल व्यक्ति को स्थानान्तरित करते समय किन-किन सावधानियों को ध्यान में रखना चाहिए।

Answer»

रोगी के स्थानान्तरण में निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना चाहिए

⦁     ऊँचे-नीचे स्थानों से ले जाने पर घायल व्यक्ति को कष्ट होता है; अत: उसे सदैव सुगम मार्ग से ले जाने का प्रयास करना चाहिए।
⦁    दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति के घायल अंगों का विशेष ध्यान रखकर ही उसका स्थानान्तरण करना चाहिए।
⦁    स्थानान्तरण करते समय घायल की अवस्था देखनी चाहिए। होश में होने पर अथवा मूच्छित होने पर घायल के स्थानान्तरण के लिए उपयुक्त विधि का चयन करना चाहिए।
⦁    स्ट्रेचर पर घायल को ले जाते समय गड्ढे या नालों को सावधानीपूर्वक पार करना चाहिए।

10.

स्ट्रेचर न मिलने पर रोगी को उठाकर सुविधापूर्वक कैसे ले जा सकते हैं?यारोगियों को ले जाने के लिए किन-किन विधियों का प्रयोग किया जाता है? किसी एक का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।याघायल के स्थानान्तरण की कौन-कौन सी विधियाँ हैं? किसी एक विधि का वर्णन कीजिए।

Answer»

रोगी को अभीष्ट स्थान पर ले जाने का सर्वोत्तम साधन स्ट्रे
उपलब्ध न होने पर रोगी को स्थानान्तरित करने की विधियाँ निम्नलिखित हैं –

(1) अकेले व्यक्ति द्वारा: इसकी निम्नलिखित उपविधियाँ हैं
⦁    सहारा देकर ले जाना
⦁    गोद में ले जाना
⦁    पीठ पर लादकर ले जाना
⦁    कन्धे पर लादकर ले जाना।

(2) दो व्यक्तियों द्वारा: इसकी उपविधियाँ निम्नलिखित हैं

(क) हस्त-आसन विधि:
इस विधि में घायल के स्थानान्तरण के लिए दोहत्थी, तिहत्थी व चौहत्थी आसन प्रयोग में लाए जाते हैं।

(ख) अग्र-पृष्ठ विधि:
यह कूल्हे पर चोट लगे व्यक्ति के स्थानान्तरण में प्रयोग में लाई जाती है।

11.

तिहत्थी बैठकी में क्या मुख्य सावधानी बरतनी चाहिए?

Answer»

तिहत्थी बैठकी. में रोगी की दोनों भुजाएँ वाहकों के गले में पड़ी होनी चाहिए तथा एक वाहक को, जिसका एक हाथ खाली है, रोगी के पैरों को सहारा देना चाहिए।

12.

मूर्च्छित व्यक्ति के स्थानान्तरण की दो विधियाँ लिखिए।

Answer»

मूर्च्छित व्यक्ति को कन्धे पर लादकर या स्ट्रेचर द्वारा स्थानान्तरित किया जा सकता है।यदि बच्चा हो, तो उसे गोद में उठाकर भी स्थानान्तरित किया जा सकता है।

13.

भारत में मिलने वाले किन्हीं चार खनिज पदार्थों के नाम लिखो।

Answer»

भारत में मिलने वाले खनिज पदार्थ हैं-मैंगनीज़, अभ्रक, तांबा तथा बॉक्साइट।

14.

वर्तमान युग में खनिज पदार्थों का महत्त्व क्यों बढ़ गया है?

Answer»

वर्तमान वैज्ञानिक युग में अनुसंधान और तकनीकी विकास के कारण खनिज पदार्थों का महत्त्व बहुत अधिक बढ़ गया है।

15.

हस्त-आसन से क्या अभिप्राय है?याहैण्ड स्ट्रेचर क्या है ?

Answer»

हाथों द्वारा बनाई गई बैठक को हस्त-आसन कहते हैं।

16.

भारत के लोगों को खनिज पदार्थों के प्रयोग में कौन-सी सावधानी बरतनी चाहिए?

Answer»

हमें खनिज सम्पदा का बुद्धिमानी और सतर्कता से प्रयोग करना चाहिए ताकि उसका अपव्यय कम-से-कम हो।

17.

सूर्यग्रहण के समय क्या सावधानी बरतनी चाहिए?

Answer»

वैज्ञानिकों के अनुसार सूर्यग्रहण के समय सूर्य से खतरनाक किरणें निकलती हैं। ये किरणे हमारी आँखों के लिए हानिकारक हैं और हमें अन्धा भी बना सकती हैं। इसलिए सूर्यग्रहण को नंगी आँखों से नहीं देखना चाहिए। बल्कि इसे वैज्ञानिकों द्वारा निर्धारित विशेष चश्मे से ही देखना चाहिए।

18.

निरीक्षण विधि का दोष है(क) घटनाओं का अनियन्त्रित होना(ख) पक्षपात एवं निरीक्षणकर्ता की रुचियों का प्रभाव(ग) प्रशिक्षण एवं अभ्यास का अभाव(घ) उपर्युक्त सभी दोष

Answer»

सही विकल्प है (घ) उपर्युक्त सभी दोष

19.

निरीक्षण विधि को नहीं अपनाया जा सकता(क) व्यक्ति के व्यवहार सम्बन्धी किसी तथ्य को जानने के लिए(ख) सम्बन्धित व्यक्ति की सामाजिक गतिविधियों को जानने के लिए(ग) किसी व्यक्ति के मन में निहित प्रेम, ईर्ष्या तथा द्वेष आदि आन्तरिक भावों को जानने के लिए(घ) व्यक्ति के क्रियाकलापों को जानने के लिए

Answer»

 (ग) किसी व्यक्ति के मन में निहित प्रेम, ईष्र्या तथा द्वेष आदि आन्तरिक भावों को जानने के लिए

20.

हस्त-आसन विधि में कितने वाहकों की आवश्यकता होती है?

Answer»

हस्त-आसन विधि में प्राय: दो वाहकों की आवश्यकता होती है।

21.

मनोवैज्ञानिक अध्ययन की प्रयोग विधि की विशेषता है(क) शुद्ध वैज्ञानिक विधि है(ख) अध्ययन को दोहराना सम्भव है।(ग) वस्तुनिष्ठ, विश्वसनीय एवं सम्पूर्ण विधि है।(घ) उपर्युक्त सभी विशेषताएँ।

Answer»

सही विकल्प है  (घ) उपर्युक्त सभी विशेषताएँ

22.

किन-किन विषय पात्रों का अध्ययन अन्तर्दर्शन विधि द्वारा नहीं किया जा सकता?

Answer»

अबोध बालकों, असामान्य व्यक्तियों, मानसिक रोगियों तथा पशुओं के व्यवहार का अध्ययन अन्तर्दर्शन विधि द्वारा नहीं किया जा सकता।

23.

निरीक्षण विधि के मुख्य चरण अथवा पद कौन-कौन से हैं?

Answer»

⦁    उपयुक्त योजना का निर्माण
⦁    व्यवहार का प्रत्यक्ष अवलोकन
⦁    व्यवहार का लेखन
⦁    व्यवहार का विश्लेषण एवं व्याख्या तथा
⦁    सामान्यीकरण।

24.

कम्प्यूटर की प्रमुख विशिष्टता है(a) क्षमता(b) भण्डारण(c) गति(d) उपर्युक्त सभी।

Answer»

(d) उपर्युक्त सभी।  

25.

कम्प्यूटर का प्रमुख भाग है(a) मॉनीटर(b) सी०पी०यू०(c) माउस(d) उपर्युक्त सभी।

Answer»

(d) उपर्युक्त सभी। 

26.

कम्प्यूटर की केन्द्रीय संगणना इकाई के प्रमुख अंग मुख्य स्मृति के कार्यों का उल्लेख कीजिए।

Answer»

मुख्य स्मृति के कार्य-यह CPU का सबसे महत्त्वपूर्ण एवं प्रमुख अंग है। इसे आन्तरिक स्मृति या प्राथमिक स्मृति भी कहा जाता है। इसके तीन प्रमुख कार्य होते हैं

⦁    निवेश किए गए आँकड़ों और निर्देशों का भण्डारण करना।
⦁    नियन्त्रण इकाई तथा अंकगणितीय एवं तार्किक प्रभाग के आँकड़े व सूचनाएँ पहुँचाना।
⦁    नियन्त्रण इकाई तथा अंकगणितीय एवं तार्किक प्रभाग द्वारा परिणाम के रूप में उत्पन्न आँकड़ों का पुनः भण्डारण करना।

27.

अन्तर्दर्शन विधि को इस्तेमाल नहीं किया जा सकता(क) किसी भी व्यक्ति के व्यवहार के अध्ययन के लिए(ख) महिलाओं के व्यवहार के अध्ययन के लिए।(ग) बच्चों, असामान्य व्यक्तियों तथा पशुओं के व्यवहार के अध्ययन के लिए(घ) बौद्धिक व्यक्तियों के व्यवहार के अध्ययन के लिए

Answer»

(ग) बच्चों, असामान्य व्यक्तियों तथा पशुओं के व्यवहार के अध्ययन के लिए

28.

भौगोलिक आँकड़ों के तीन प्रकार कौन-से हैं?

Answer»

भौगोलिक आँकड़े तीन प्रकार के हैं

⦁    स्थानिक आँकड़े- स्थानिक आँकड़े विभिन्न तत्त्वों के भौगोलिक स्थान पर दिक्स्थान का प्रतिनिधित्व करते हैं। बिन्दु, रेखाएँ और बहुभुज इन आँकड़ों को अभिलक्षित करते हैं।

⦁    गैर-स्थानिक आँकड़े- स्थानिक आँकड़ों का वर्णन करने वाले आँकड़ों को गैर-स्थानिक अथवा गुण न्यास आँकड़े कहते हैं।

⦁    बहुभुज आँकड़े- ये आँकड़े किसी विशेष क्षेत्र को परिलक्षित करते हैं।

29.

वर्कशीट क्या होती है?

Answer»

कम्प्यूटर के मूल में एक केन्द्रीय प्रक्रमण इकाई होती है जो आँकड़ों के प्रक्रमण हेतु क्रमादेशों का क्रियान्वयन और परिधीय उपस्करों का नियन्त्रण करती है, इसे ‘वर्कशीट’ कहते हैं।

30.

राज्य के अन्तर्गत जिलों का प्रदर्शन किस प्रकार के स्थानिक आँकड़ों द्वारा होगा(क) बिन्दु(ख) रेखाएँ(ग) बहुभुज(घ) उपर्युक्त में से कोई नहीं।

Answer»

सही विकल्प है (क) बिन्दु।

31.

एक वर्कशीट के सेल में दिए गए सूत्र में वह कौन-सा प्रचालक है जिसका पहले परिकलन किया जाता है(क) +(ख) –(ग) /(घ) ×

Answer»

सही विकल्प है (क) +

32.

नैदानिक विधि को अपनाने का मुख्य उद्देश्य क्या होता है?

Answer»

नैदानिक विधि को अपनाने को मुख्य उद्देश्य किसी असामान्य व्यवहार के कारणों को जानना होता है।

33.

नैदानिक विधि के गुण-दोषों का उल्लेख कीजिए।

Answer»

मनोवैज्ञानिक अध्ययनों के लिए अपनायी जाने वाली नैदानिक विधि के मुख्य गुण-दोषों का संक्षिप्त विवरण अग्रलिखित है –

गुण – मनोवैज्ञानिक अध्ययनों में नैदानिक विधि का विशेष महत्त्व है। इस विधि को मुख्य रूप से व्यक्ति के असामान्य व्यवहार अथवा मनोविकारों के अध्ययन के लिए अपनाया जाता है। सामान्य रूप से व्यक्ति के असामान्य व्यवहार के कारणों के निदान के लिए इस विधि को अपनाया जाता है। एक बार असामान्य व्यवहार के कारण ज्ञात हो जाने पर उसका उपचार सरल हो जाता है। इस प्रकार स्पष्ट है कि नैदानिक विधि मनोचिकित्सा के क्षेत्र में विशेष उपयोगी है। हम कह सकते हैं कि व्यावहारिक दृष्टिकोण से नैदानिक विधि का अधिक महत्त्व है।

दोष – नैदानिक विधि का मुख्य दोष यह है कि यह विधि एक अत्यधिक जटिल विधि है तथा इस विधि के माध्यम से अध्ययन करने के लिए पर्याप्त अनुभवी, धैर्यवान तथा विशेषज्ञ अध्ययनकर्ता की आवश्यकता होती है। यदि नैदानिक विधि के प्रयोग में कोई त्रुटि हो जाती है तो इसके गम्भीर परिणाम हो सकते हैं।

34.

मनोविज्ञान द्वारा अपनायी जाने वाली निरीक्षण विधि तथा नैदानिक निरीक्षण विधि में अन्तर स्पष्ट कीजिए।

Answer»

मनोवैज्ञानिक अध्ययन के लिए अपनायी जाने वाली दो मुख्य विधियाँ हैं–निरीक्षण विधि तथा नैदानिक निरीक्षण विधि। ये दोनों दो भिन्न विधियाँ हैं तथा इनमें स्पष्ट अन्तर है। किसी व्यक्ति के किसी सामान्य व्यवहार के अध्ययन के लिए सामान्य निरीक्षण विधि को अपनाया जाता है। इस प्रकार से निरीक्षण विधि मनोविज्ञान की एक सामान्य अध्ययन विधि है। इससे भिन्न नैदानिक निरीक्षण विधि को मुख्य रूप से मनोचिकित्सा के क्षेत्र में अपनाया जाता है। इस विधि के माध्यम से व्यक्ति के असामान्य व्यवृहार के कारणों को जानने का प्रयास किया जाता है। इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए कहा जा सकता है कि नैदानिक निरीक्षण विधि को अध्ययन-क्षेत्र सामान्य निरीक्षण विधि की तुलना में सीमित है। निरीक्षण विधि तथा नैदानिक निरीक्षण विधि में एक अन्य अन्तर भी है। निरीक्षण विधि को केवल सम्बन्धित व्यक्ति के व्यवहार के अध्ययन के लिए अपनाया जाता है। इससे भिन्न नैदानिक निरीक्षण विधि द्वारा सम्बन्धित व्यक्ति के असामान्य व्यवहार के कारणों को ज्ञात किया जाता है तथा साथ ही उस असामान्य व्यवहार के उपचार के उपाय भी सुझाये जाते हैं। इस प्रकार निरीक्षण विधि सैद्धान्तिक दृष्टिकोण से महत्त्वपूर्ण है, जबकि नैदानिक निरीक्षण विधि सैद्धान्तिक एवं व्यावहारिक दोनों दृष्टिकोणों से महत्त्वपूर्ण है।

35.

अन्तर्दर्शन विधि एक वैज्ञानिक विधि क्यों नहीं है?

Answer»

यह सत्य है कि अन्तर्दर्शन विधि मनोविज्ञान की एक पुरानी तथा मौलिक अध्ययन विधि है, परन्तु आधुनिक मान्यताओं के अनुसार, अन्तर्दर्शन विधि को अवैज्ञानिक विधि माना जाता है। इनका मुख्य कारण यह है कि इस विधि के माध्यम से एक समय में एक से अधिक मनोवैज्ञानिकों द्वारा वस्तुनिष्ठ ढंग से अध्ययन नहीं किया जा सकता। इसके साथ ही अन्तर्दर्शन विधि एक व्यक्तिगत अध्ययन विधि है। इससे प्राप्त होने वाला ज्ञान आत्मगत तथा व्यक्तिनिष्ठ होता है। वैज्ञानिक ज्ञान का वस्तुनिष्ठ होना आवश्यक है। अतः अन्तर्दर्शन विधि को वैज्ञानिक विधि मानना सम्भव नहीं है।

36.

नैदानिक विधि अथवा नैदानिक निरीक्षण (Clincial Observation) का अर्थ स्पष्ट कीजिए।

Answer»

हम जानते हैं कि मनोविज्ञान द्वारा सामान्य तथा असामान्य दोनों प्रकार के व्यवहार का अध्ययन किया जाता है। मनोविज्ञान के अन्तर्गत व्यक्ति के असामान्य व्यवहार के अध्ययन के लिए अपनायी जाने वाली एक मुख्य विधि को नैदानिक विधि अथवा नैदानिक निरीक्षण कहा जाता है। इस विधि को सामान्य रूप से सम्बन्धित व्यक्ति के असामान्य व्यवहार या मानसिक रोग के निदान के लिए अपनाया जाता है। इस विधि को मुख्य रूप से मनोविकारों की चिकित्सा के क्षेत्र में अपनाया जाता है। इस विधि को अपनाने का मुख्य उद्देश्य व्यक्ति के मनोविकारों के निहित कारणों को ज्ञात करना होता है। नैदानिक निरीक्षण के अर्थ को जी० मर्फी ने इन शब्दों में स्पष्ट किया है, “नैदानिक विधि व्यक्ति के उस मनोवैज्ञानिक पक्ष का अध्ययन करती है जिसमें उसके जीवन की प्रसन्नता एवं उसके प्रभावपूर्ण सामंजस्य का कार्य निर्भर करता है; यह विधि उसकी क्षमताओं तथा परिसीमाओं, सफलता और असफलता के कारण तथा जीवन की समस्याओं का अध्ययन करती है। इस विधि में उन कारणों का अध्ययन सम्मिलित है जो व्यक्ति के जीवन का निर्माण करते हैं या उसे बिगाड़ देते हैं।”

37.

सदिश फाइलों का प्रयोग किन परिस्थितियों में किया जाता है?

Answer»

सदिश फाइलों का प्रयोग मुख्यत: निम्न परिस्थितियों में किया जाता है

⦁    उच्च परिष्कृत अनुप्रयोग की आवश्यकता हो।
⦁    फाइलों के आकार महत्त्वपूर्ण हों।
⦁    मानचित्र के प्रत्येक लक्षण का विश्लेषण आवश्यक हो।
⦁    वर्णनात्मक सूचना का भण्डारण अनिवार्य हो।

38.

भौगोलिक सूचना तंत्र कोट में उपयोग कर नगरीय परिवर्तन की पहचान कुशलतापूर्वक की जाती है(क) उपरिशायी प्रचालन(ख) सामीप्य विश्लेषण(ग) परिपथ जाल विश्लेषण(घ) बफरिंग।

Answer»

सही विकल्प है (घ) बफरिंग। 

39.

हस्तेन विधियों की सीमाओं का उल्लेख कीजिए।

Answer»

हस्तेन विधियों की सीमाएँ निम्नलिखित हैं

⦁    मानचित्रीय सूचना एक विशेष ढंग से प्रक्रमित और प्रदर्शित की गई होती है।
⦁    एक मानचित्र एक अथवा. एक से अधिक पूर्व-निर्धारित विषय-वस्तुओं को दर्शाता है।
⦁    मानचित्रों में चित्रित सूचना में परिवर्तन करने पर एक नया मानचित्र आलेखित करना पड़ता है

40.

सदिश (वेक्टर) आँकड़ा फॉरमेट का एक गुण क्या है(क) समिश्र आँकड़ा संरचना(ख) कठिन उपरिशायी प्रचालन(ग) सुदूर संवेदन आँकड़ों के साथ कठिन सुसंगतता(घ) सघन आँकड़ा संरचना।

Answer»

(ग) सुदूर संवेदन आँकड़ों के साथ कठिन सुसंगतता।

41.

आँकड़ा संरचना के प्रकार हैं(a) दो(b) तीन(c) चार(d) पाँच।

Answer»

सही विकल्प है (a) दो।

42.

सदिश (वेक्टर) मॉडल की हानियों का उल्लेख कीजिए।

Answer»

सदिश (वेक्टर) मॉडल की हानियाँ निम्नलिखित हैं

⦁    इसकी आँकड़ा संरचना जटिल होती है।
⦁    अधिचित्रण में कठिन प्रचालन होता है।
⦁    उच्च स्थानिक विचरणशीलता का अदक्ष प्रतिनिधित्व होता है।
⦁    यह सुदूर संवेदन प्रतिबिंबों के साथ असंगत होता है।

43.

चित्ररेखाएंज (रैस्टर) एवं सदिश (वेक्टर) आँकड़ा फॉर्मेट को उदाहरण सहित समझाइए।

Answer»

किारेखा{ज (रैस्टर) आँकड़ा फॉर्मेट चित्ररेखाएंज आँकड़े वर्गों के जाल के रूप में आँकड़ों का ग्राफीय प्रदर्शन करते हैं जिसमें स्तम्भ एवं पंक्तियों का जाल होता है। स्तम्भों व पंक्तियों के जाल को ‘ग्रिड’ (Grid) तथा एक स्तम्भ एवं पंक्ति के भेदन स्थल को ‘सेल’ (Cell) कहते हैं।

मान लीजिए कागज पर एक तिरछी रेखा खींची गई है। चित्ररेखाएंज में इसे ग्राफ पेपर पर बने आयतों की भाँति प्रदर्शित किया जाता है और उसके आधार पर इसका मूल्य निर्धारित किया जाता है। (चित्र) आँकड़ों का यह प्रदर्शन प्रयोक्ता को प्रतिबिम्ब के पुनर्गठन अथवा दृश्यांकन में सहायता करता है।

सेलों के आकार और उनकी संख्या के बीच सम्बन्ध को चित्ररेखाएंज (रैस्टर) के विभेदन के रूप में अभिव्यक्त किया जाता है।
नीचे दिए गए चित्र में चित्ररेखाएंज फॉर्मेट में आँकड़ों पर जाल या वर्ग के आकार को स्पष्ट किया गया है।

सदिश आँकड़ा फॉर्नेट

उसी तिरछी रेखा का सदिश (वेक्टर) प्रदर्शन केवल निर्देशांकों के आरम्भिक एवं अन्तिम बिन्दुओं को दर्ज कर रेखा की स्थिति को दर्ज करके होगा। प्रत्येक बिन्दु की अभिव्यक्ति दो अथवा तीन संख्याओं के रूप में होगी। यह इस बात पर निर्भर करेगा कि प्रदर्शन द्वि-आयामी था या त्रि-आयामी, जिसे प्राय: X, Y अथवा X, Y, Z निर्देशांकों द्वारा निर्दिष्ट किया जाता है। (चित्र)

पहली संख्या X, बिन्दु और कागज की बाईं सीमा के बीच की दूरी है; Y बिन्दु तथा कागज की निचली सीमा के बीच दूरी; Z कागज के ऊपर अथवा नीचे से बिन्दु की उच्चता है। मापे गए बिन्दुओं को मिलाने से सदिश का निर्माण होता है।

44.

सदिश संरचना के गुणों का उल्लेख कीजिए।

Answer»

सदिश संरचना के गुण निम्नलिखित हैं

⦁    यह सांस्कृतिक लक्षणों को प्रदर्शित करने के लिए अधिक उपयोगी है।
⦁    ग्लोबल पोजीशनल सिस्टम (GPS) तथा टोटल स्टेशनों से आँकड़े सीधे ही प्राप्त हो सकते हैं।
⦁    इसमें कम स्मृति की आवश्यकता होती है।
⦁    स्थालाकृतियों को दर्शाने तथा उनके विश्लेषण में अधिक शुद्धता होती है।

45.

भौगोलिक सूचना तन्त्र के कोर में स्थानिक सूचना बनाने की विधि क्या हैं?

Answer»

भौगोलिक सूचना तन्त्र के कोर में स्थानिक सूचना बनाने की विधि निम्नलिखित हैं

⦁    आँकड़ा आपूर्तिदाता से आंकिक रूप में आँकड़े प्राप्त करना।
⦁    विद्यमान अनुरूप ऑकड़ों का अंकीकरण करना।
⦁    भौगोलिक सत्ताओं का स्वयं सर्वेक्षण करके।

46.

सामान्यतः पशु-व्यवहार का अध्ययन आप किस विधि से करेंगे और क्यों?

Answer»

व्यवहार के अध्ययन के लिए मुख्य रूप से अन्तर्दर्शन विधि, निरीक्षण विधि तथा प्रयोग विधि को अपनाया जाता है। पशु-व्यवहार के अध्ययन के लिए सामान्यत: इनमें से निरीक्षण विधि को ही अपनाया जाता है। वास्तव में, अन्तर्दर्शन विधि द्वारा पशु-व्यवहार के अध्ययन का प्रश्न ही नहीं उठता, क्योंकि पशुओं द्वारा अपनी मनोस्थिति को प्रकट नहीं किया जा सकता। इसके अतिरिक्त प्रयोग विधि द्वारा पशु-व्यवहार का अध्ययन तो किया जा सकता है, परन्तु प्रयोगशाला में पशुओं का व्यवहार स्वाभाविक न रहकर कृत्रिम हो जाता है; अत: यह अध्ययन भी कुछ हद तक अयथार्थ ही होता है। इस स्थिति में स्वाभाविक पशु-व्यवहार के अध्ययन के लिए उनके मुक्त वातावरण में निरीक्षण विधि को ही अपनाना सर्वोत्तम माना जाता है।

47.

स्थानिक सूचना प्रौद्योगिकी क्या है?

Answer»

स्थानिक सूचना प्रौद्योगिकी से अभिप्राय किसी स्थान अथवा क्षेत्र विशेष से सम्बन्धित आँकड़ों एवं सूचनाओं का एकत्रीकरण करना तथा कम्प्यूटर द्वारा उन सूचनाओं की संगणना, भण्डारण, विश्लेषण और उपयोग करने से है।

48.

भौगोलिक सूचना तन्त्र को किन स्रोतों से आँकड़े प्राप्त होते हैं?

Answer»

भौगोलिक सूचना तन्त्र को निम्नलिखित स्रोतों से आँकड़े प्राप्त होते हैं

⦁    भारतीय सर्वेक्षण विभाग के स्थलाकृतिक मानचित्र तथा वायुचित्र।
⦁    उपभोक्ताओं द्वारा एकत्रित प्राथमिक आँकड़े।
⦁    भारतीय जनगणना विभाग के विशाल आँकड़े और मानचित्र।
⦁    राष्ट्रीय दूर संवेदी एजेन्सी, हैदराबाद।
⦁    राष्ट्रीय प्राकृतिक संसाधन प्रबन्ध प्रणाली, बंगलुरु।
⦁    महानगरों के विकास प्राधिकरण।
⦁    राज्यों और जिलों के सांख्यिकीय विभाग। .
⦁    राष्ट्रीय विषयक मानचित्र संगठन, कोलकाता।

49.

निरीक्षण विधि के दोषों का निवारण किस प्रकार किया जा सकता है?

Answer»

भले ही निरीक्षण विधि को मनोवैज्ञानिक अध्ययन की एक उत्तम विधि माना जाता है, परन्तु अन्य विधियों के ही समान इस विधि में भी कुछ दोष हैं; जैसे—कि घटनाओं की क्रमबद्धता का अभाव, घटनाओं का नियन्त्रित न होना, पक्षपात की आशंका, निरीक्षणकर्ता की व्यक्तिगत रुचियों का प्रभाव, निरीक्षणकर्ता का प्रशिक्षित न होना तथा सम्बन्धित व्यक्ति के व्यवहार का अस्वाभाविक होना। निरीक्षण विधि के इन मुख्य दोषों के निवारण के लिए निम्नलिखित उपाय किये जा सकते हैं –

⦁    निरीक्षण कार्य करते समय प्रयोगकर्ता को चाहिए कि वह अपनी व्यक्तिगत भावनाओं पर नियन्त्रण रखे ताकि तथ्य आत्मगत अवलोकन से दूषित न हों तथा अध्ययन की वस्तुनिष्ठता बनी रहे।
⦁    निरीक्षण प्रक्रिया का पर्याप्त प्रशिक्षण तथा अनुभव प्रदान करने के उपरान्त ही निरीक्षणकर्ता को क्षेत्रीय निरीक्षण के लिए भेजना चाहिए।
⦁    निरीक्षणकर्ता अपनी कल्पना अथवा अनुभव का समावेश कर तथ्यों को अविश्वसनीय ने बना दे; अत: वह जैसा अवलोकन करे वैसा ही लिखे भी—इससे निरीक्षण वैज्ञानिकप्रकृति का बन सकेगा।
⦁    प्रयोग से पहले अपनी पूर्वधारणाओं, राग-द्वेष, पक्षपातों तथा अन्य व्यक्तिगत प्रवृत्तियों को प्रभाव न्यूनतम करने की दृष्टि से निरीक्षक को अपनी मनोवृत्तियों का विश्लेषण कर लेना चाहिए।
⦁    निरीक्षण विधि से प्राप्त परिणामों की तुलना अन्तर्दर्शन एवं प्रयोगात्मक विधि से प्राप्त परिणामों से करना अपेक्षाकृत लाभकारी सिद्ध होगा।

50.

सदिश भौगोलिक सूचना तन्त्र की विशेषताओं को समझाइए।

Answer»

सदिश भौगोलिक सूचना तन्त्र की विशेषताएँ निलिखित हैं

⦁    इसमें भौगोलिक सूचनाओं, बिन्दुओं, रेखाओं और क्षेत्र (बहुभुज) का उपयोग किया जाता है।
⦁    सामाजिक सुविधाओं, उद्योगों के मानचित्रण और भौगोलिक रूप से वितरित सुविधाओं के अंकन में सदिश भौगोलिक सूचना तन्त्र उपयोगी है।
⦁    इसमें सड़कों के अंकीकृत जाल से दो बिन्दुओं के मध्य यात्रा समयावधि का अनुभव किया जा सकता है।
⦁    यह पद्धति बताती है कि “प्रत्येक वस्तु कहाँ है?”