This section includes 7 InterviewSolutions, each offering curated multiple-choice questions to sharpen your Current Affairs knowledge and support exam preparation. Choose a topic below to get started.
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भौगोलिक सूचना तन्त्र के लाभ/महत्त्व/उपयोगिता का वर्णन कीजिए। |
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Answer» भौगोलिक सूचना तन्त्र के मुख्य लाभ/महत्त्व/उपयोगिता निम्नलिखित हैं ⦁ भौगोलिक सूचना तन्त्र की सहायता से भूगोलवेत्ता स्थानिक प्रतिरूपों और प्रक्रियाओं की पहचान कर उनका विश्लेषण कर सकता है। |
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भौगोलिक सूचना तन्त्र से सम्बन्धित कार्यों को क्रमबद्ध रूप में किस प्रकार किया जाता है? एक व्याख्यात्मक लेख प्रस्तुत कीजिए। |
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Answer» भौगोलिक सूचना तन्त्र की क्रियाओं का अनुक्रम भौगोलिक सूचना तन्त्र से सम्बन्धित कार्यों का अनुक्रम निम्नलिखित है 1. स्थानिक आँकड़ा निवेश- स्थानिक आँकड़ा निवेश के विभिन्न स्रोतों को निम्नलिखित दो वर्गों में संक्षेपित किया जाता है ⦁ आँकड़ा आपूर्तिदाता से आंकिक आँकड़ा समुच्चय का प्रग्रहण। 2. गुण न्यास की प्रविष्टि- गुण न्यास उन स्थानिक विशेषताओं को परिभाषित करता है, जिसे भौगोलिक सूचना तन्त्र में निपटाने की आवश्यकता होती है। 3. आँकड़ों का सत्यापन और सम्पादन- भौगोलिक सूचना तन्त्र में प्रग्रहित आँकड़ों का सत्यापन एवं सम्पादन अति आवश्यक है, क्योंकि इससे आँकड़ों की शुद्धता तथा त्रुटियों की पहचान होती है। इसे कम्प्यूटर की सहायता से किया जाता है। ⦁ स्थानिक आँकड़े अपूर्ण अथवा दोहरे हैं। 4. स्थानिक और गुण न्यास आँकड़ों की सहलग्नता– स्थानिक और गुण न्यास आँकड़ों की सहलग्नता का पूरा ध्यान रखना चाहिए, क्योंकि ये भौगोलिक सूचना तन्त्र के लिए अत्यन्त महत्त्वपूर्ण हैं। 5. स्थानिक विश्लेषण– भौगोलिक सूचना तन्त्र में स्थानिक विश्लेषण की क्षमता है उनकी विश्लेषणात्मक क्रियाएँ यथार्थ विश्व से सम्बन्धित प्रश्नों के उत्तर देने के लिए सूचनाधार में स्थानिक तथा गैर-स्थानिक गुणों का प्रयोग करती हैं। ⦁ अधिचित्रण |
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चित्ररेखाएंज एवं सदिश (वेक्टर) आँकड़ा मॉडल के मध्य अंतर। |
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Answer» चित्ररेखाएंज (रैस्टर) आँकड़े वर्गों के जाल के प्रारूप में आँकड़ों का ग्राफीय प्रदर्शन करते हैं जबकि सदिश (वेक्टर) आँकड़े वस्तु का प्रदर्शन विशिष्ट बिन्दुओं के बीच खींची गई रेखाओं के समुच्चय के रूप में करते हैं। |
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चित्ररेखाएंज संरचना के गुण व दोषों का वर्णन कीजिए। |
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Answer» चित्ररेखाएंज संरचना के गुण चित्ररेखाएंज संरचना के गुण निम्नलिखित हैं ⦁ इसे समझना व कार्यान्वित करना सरल होता है। चित्ररेखा{ज संरचना के दोष चित्ररेखाएंज संरचना के दोष निम्नलिखित हैं ⦁ प्रत्येक सेल केवल एक गुण का ही भण्डारण करता है। |
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रेखाएंज भौगोलिक सूचना तन्त्र की विशेषताएँ बताइए। |
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Answer» रेखाएंज भौगोलिक सूचना तन्त्र की विशेषताएँ (गुण) निम्नलिखित हैं ⦁ इसमें भौगोलिक सूचनाओं को कोष्ठिकाओं के माध्यम से दिखाया जाता है। |
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मनोविज्ञान का ज्ञान उपयोगी नहीं है(क) शिक्षा के क्षेत्र में(ख) उद्योग एवं व्यापार के क्षेत्र में(ग) चिकित्सा के क्षेत्र में(घ) नैतिकता का पाठ पढ़ाने में |
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Answer» (घ) नैतिकता का पाठ पढाने मे |
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मनोविज्ञान को आत्मा का ज्ञान नहीं कहा जा सकता, क्योंकि(क) आत्मा का स्वरूप स्पष्ट नहीं है।(ख) आत्मा तथा शरीर का सम्बन्ध स्पष्ट नहीं है।(ग) आत्मा के विभिन्न अर्थ प्रतिपादित किये जाते थे(घ) इन सभी कारणों से |
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Answer» सही विकल्प है (घ) इन सभी कारणों से |
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मनोविज्ञान एक विज्ञान है, क्योकि(क) यह वैज्ञानिक पद्धति को अपनाता है।(ख) इसका अध्ययन तथ्यात्मक है।(ग) यह कार्य-कारण सम्बन्धों का अध्ययन करता है ।(घ) उपर्युक्त सभी कारणों से |
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Answer» सही विकल्प है (घ) उपर्युक्त सभी कारणों से |
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व्यवहारवादी मनोवैज्ञानिक वाटसन द्वारा प्रतिपादित मनोविज्ञान की परिभाषा दीजिए। |
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Answer» “एक ऐसी मनोविज्ञान लिखना सम्भव है …… जिसकी ‘व्यवहार के विज्ञान के रूप में परिभाषा की जा सके। |
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मनोविज्ञान वैज्ञानिक अध्ययन है(क) व्यवहार को(ख) मन का(ग) आत्मा का(घ) पदार्थ को |
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Answer» सही विकल्प है (क) व्यवहार को |
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मनोविज्ञान को चेतना का विज्ञान मानने वाले मुख्य विद्वानों के नाम लिखिए। |
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Answer» विलियम वुण्ट, विलियम जेम्स तथा जेम्स सली। |
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मनोविज्ञान किस प्रकार का विज्ञान है? |
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Answer» मनोविज्ञान एक विधायक विज्ञान है। |
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मनोविज्ञान की उस शाखा को क्या कहते हैं जिसके अन्तर्गत व्यवहार के सामान्य पक्षों तथा उसके सैद्धान्तिक स्वरूपों का अध्ययन किया जाता है? |
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Answer» उक्त सामान्य मनोविज्ञान। |
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Describe the impact of modern current lifestyle on human health in detail. |
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Answer» Impact of Modem Lifestyle on Human Health : 1. Current lifestyle of a man has become very fast. 2. Man has increased his working capacity/capability. 3. New dimensions in the field of development have established. 4. New technologies have been discovered/invented in many areas. 5. Science has made a tremendous progress in the recent years. 6. Man has made himself financially more strong. 7. The distances in the world became less. New techniques in the field of medicine has advanced. Which has made man stand far away from the bad impact of diseases. Bad Impact of Modem Lifestyle on Health : Where the man has prospered a lot by adopting the modern lifestyle, many bad impacts have also surrounded him/his health. Now, we shall have a look on the bad effects of modern lifestyle on a man. Impact of Fast/Junk Food on Man’s Health : Today, fast food has become almost a part of man’s daily routine. It has a direct impact on the overall health. Highly processed fast foods contain large amounts of carbohydrates, added sugar, unhealthy fats, and salt. People consume this fast food and get devoid of all essential elements necessary for human development. The effects of drug may be poisonous to the human body and can lead to severe health problems. The habit of drug addiction has increased in the recent past in the society which has lead to many physical and mental disorders in man. Besides, it also leads to impotency in males, and infertility (in females). Effect of mobile phones on health : Though mobile phones have made communication very easy but the radiations emitted from these phones are very harmful for man, and the society, as a whole. |
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Non-vegetarian food versus health. Discuss. |
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Answer» Non-vegetarian food and health: Non-vegetarian food consists of lots of high fats and cholesterol which adversely affects man’s health. These foods are the major reason of high blood pressure. Non vegetarian foods are disease vector and carrier of various dangerous viruses. These food affect the emotions and thinking of individuals, for e.g., they propel anger, frustration, and other negative disorders on man’s health. |
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Describe the general features of traditional lifestyle. |
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Answer» Man grew in the hands of nature. He lead his lifestyle under nature’s shed and his eating habits were good and pure. The needs and desires of a man were less. Pure air, water, and food were available to him at all times. He studied also under nature’s lap and lead his life in spirituality. He followed traditional rituals and customs by leading a simple life along with his family members. He lead an active life by taking part in various sports and health activities and other co-curricular activities. |
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What adverse effects do the drugs have on human health? |
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Answer» The effects of drug may be poisonous to the human body and can lead to severe health problems. The habit of drug addiction has increased in the recent past in the society which has lead to many physical and mental disorders in man. Besides, it also leads to impotency in males, and infertility (in females). |
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औद्योगिक मनोविज्ञान से क्या आशय है? |
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Answer» औद्योगिक परिस्थितियों में होने वाले मानवीय व्यवहार का व्यवस्थित अध्ययन ही औद्योगिक मनोविज्ञान कहलाता है। |
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State the positive impacts of modern lifestyle on man’s health. |
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Answer» Impact of Modem Lifestyle on Human Health : 1. Current lifestyle of a man has become very fast. 2. Man has increased his working capacity/capability. 3. New dimensions in the field of development have established. 4. New technologies have been discovered/invented in many areas. 5. Science has made a tremendous progress in the recent years. 6. Man has made himself financially more strong. 7. The distances in the world became less. |
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विज्ञापन की एक व्यवस्थित परिभाषा लिखिए। |
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Answer» आर० डब्ल्यू० हसबैण्ड के अनुसार, “विज्ञापन को प्रचार के रूप में परिभाषित किया जा सकता है जो कुछ वस्तुओं अथवा सेवाओं के अस्तित्व व गुणों की ओर ध्यान आकर्षित करता है। |
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श्रमिकों के आर्थिक लाभ सम्बन्धी श्रम-कल्याण कार्यों का उल्लेख कीजिए। |
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Answer» ⦁ ओवरटाइम की सुविधा |
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उद्योग में विज्ञापन के किन्हीं दो कार्यों के बारे में लिखिए। |
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Answer» (i) उद्योग में विज्ञापन के माध्यम से सम्बन्धित उत्पादनों को बहुपक्षीय जानकारी जनसामान्य तक पहुँचायी जाती है। सम्बन्धित उत्पाद के गुणों, उपयोगों तथा लाभों एवं सुविधाओं आदि की समुचित जानकारी उपलब्ध करायी जाती है। (ii) विज्ञापन द्वारा किया जाने वाला दूसरा मुख्य कार्य सम्बन्धित उपभोक्ता वर्ग को अपने उत्पादनों को खरीदने या अपनाने के लिए प्रेरित करना होता है। विज्ञापन का यह कार्य अधिक विश्यक एवं महत्त्वपूर्ण माना जाता है। |
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वर्तमान युग में विज्ञापन के प्रमुख साधनों का उल्लेख करते हुए उनके सापेक्षिक महत्त्व का विवेचन कीजिए। |
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Answer» आधुनिक युग में विज्ञापनों की बढ़ती हुई उपयोगिता के कारण इन्हें मानव-जीवन का एक अपरिहार्य अंग मान लिया गया है। हर रोज सुबह को समाचार-पत्रों में विज्ञापन के साथ दिनारम्भ होता है, समाचार-पत्रों में रखे विज्ञापन के पैम्फलेट, रेडियो या एफ०एम० पर विज्ञापन, सड़क और चौराहों के बोर्ड, टेलीविजन पर विज्ञान आदि-आदि, मनुष्य का जीवन हर तरफ विज्ञापनों से भरा पड़ा है। छोटी-से छोटी वस्तु के क्रय-विक्रय से लेकर आवश्यकताओं से सम्बन्धित तथा वैवाहिक विज्ञापन अपने महत्त्व एवं उपयोगिता को सिद्ध करते हैं। विज्ञापन और तकनीक की प्रगति ने विज्ञापन के क्षेत्र को भी विभिन्न नवीनतम प्रविधियों, यन्त्रों, माध्यमों तथा साधनों से सुसज्जित किया है। विज्ञापन के प्रमुख साधन अथवा माध्यम (Advertising Media) (1) समाचार-पत्र – समाचार-पत्र विज्ञापन का सर्वव्यापी एवं सर्वस्वीकृत साधन है। अधिकांश समाचार-पत्र प्रतिदिवस प्रात: प्रकाशित होते हैं। कुछ सन्ध्याकाल में या सप्ताहवार भी प्रकाशित किये जाते हैं। समाचार-पत्रों की आय का मुख्य साधन विज्ञापन है क्योंकि इन पत्रों के माध्यम से सन्देश को देश-विदेश में पहुँचाया जा सकता है। वस्तुतः दैनिक समाचार-पत्र जन-सम्पर्क के श्रेष्ठ साधन कहे जाते हैं। शिक्षित लोगों का एक बड़ा प्रतिशत तो निस्सन्देह, समाचार-पत्र पढ़ने को आदि है ही, लेकिन अनपढ़ लोग भी इसमें समुचित दिलचस्पी रखते हैं और शिक्षित लोगों से पूछताछ कर विज्ञापन आदि की जानकारी प्राप्त करते हैं। समाचार-पत्रों के कुछ पृष्ठ एवं विशिष्ट स्थान विज्ञापन के लिए ही निश्चित होते हैं। ये विज्ञापन प्रायः भावात्मक अपील के साथ सरल और सीधी भाषा-शैली में होते हैं। विज्ञापनों की निरन्तर पुनरावृत्ति से विज्ञापन की प्रभावकता में वृद्धि भी होती है। नवभारत टाइम्स, हिन्दुस्तान, जनसत्ता, दैनिक जागरण, अमर उजाला, पंजाब केसरी, आदि-आदि अनेक समाचार-पत्र विभिन्न स्थानों से प्रकाशित एवं प्रसारित होते हैं। इस प्रकार समाचार-पत्र नाना प्रकार के विज्ञापन का प्रमुख साधन है। |
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औद्योगिक क्षेत्र में विज्ञापन के महत्व को स्पष्ट कीजिए।याविज्ञापन तथा उद्योग के सम्बन्ध को स्पष्ट कीजिए। |
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Answer» आज के वैज्ञानिक एवं औद्योगिक युग में विज्ञापन का महत्त्व बहुत बढ़ गया है। विश्व की विकसित एवं विकासशील अर्थव्यवस्थाएँ व्यापक स्तर पर विज्ञापन सम्बन्धी प्रविधियाँ तथा तकनीकों को अपनाती हैं। आर्थिक एवं व्यापारिक क्षेत्रों में प्रतियोगिता का बोलबाला है। बाजार में अनेकानेक फर्मे हैं और उनके ढेरों उत्पादन हैं। किसी एक वस्तु की खरीदारी के समय क्रेता बाजार में उस वस्तु के अनेक फर्मों द्वारा निर्मित स्वरूप देखता है। उदाहरण के लिए–साबुन खरीदते समय वह एक ही दुकान पर ढेर सारे साबुन; जैसे–लक्स, हमाम, रेक्सोना, लाइफबॉय, लिरिल, सिन्थॉल, मोती, मारवेल, गोदरेज, सरल तथा निरमा आदि-आदि देखता है। क्रेता के सामने इनमें से एक साबुन को चुनने की समस्या है और साथ-ही-साथ उसे अपनी जेब का ख्याल भी रखना है। यहाँ विज्ञापन उसे बताता है कि कम दामों में वह कैसे अपनी रुचि का अच्छे-से-अच्छा साबुन खरीद सकता है। इसका दूसरा पक्ष भी है – मान लीजिए, किसी नयी फर्म ने एक नहाने का साबुन बनाया जो गुणवत्ता में इन सबसे आगे है और दाम भी कम हैं; लेकिन खरीदार को यह कैसे पता चले कि इस नाम से एक साबुन उपलब्ध है; फिर उसकी विशेषताओं को भी बताना होगा, अन्य साबुनों की तुलना में उसका वजन और दाम भी खोलना होगा, यह भी बताना होगा कि खरीदार कम-से-कम दाम में बढ़िया-से-बढ़िया चीज खरीदकर ले जा रहा है; यही नहीं, उसे इसका विश्वास कैसे दिलाया जाए और उसकी रुचि के अनुसार उसमें उस साबुन के क्रय की इच्छा कैसे पैदा की जाए? ये सभी बातें विज्ञापन के अन्तर्गत आती हैं और विज्ञापन के माध्यम से सुगम बनायी जाती हैं। विज्ञापनों के माध्यम से उत्पादक, उत्पादित वस्तु तथा उपभोक्ताओं के मध्य एक अच्छा तालमेल स्थापित हो जाता है। उत्पादक घर बैठे ही उपभोक्ता से सम्पर्क साध लेता है और अपनी वस्तु उसके पास पहुँचा देता है। जो फर्म या व्यापारिक संस्था जितना अच्छे स्तर का विज्ञापन जुटा पाती है, उसकी बिक्री उतनी ही बढ़ जाती है। यही कारण है कि आज के समय में विज्ञापन एक कला, एक विज्ञान, एक उद्योग के रूप में प्रतिष्ठित हो चुका है। सभी बड़े-बड़े उद्योग अपने वार्षिक बजट का एक अच्छा प्रतिशत विज्ञापन पर खर्च करते हैं। बहुत-सी संस्थाएँ विज्ञापन पर करोड़ों तथा अरबों रुपया खर्च करती हैं और उनके माध्यम से उससे ज्यादा कमाती भी हैं। इसके लिए बड़े-बड़े साइनबोर्ड, इलेक्ट्रॉनिक्स के माध्यम से जगमगाते एवं गति करते बोर्ड, भाँति-भाँति के पोस्टर, पैम्फलेट, रेडियो, टी०वी०, सिनेमा तथा विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में विज्ञापन देकर प्रचार किया जाता है। आजकल हर एक वस्तु विज्ञापित हो सकती है, इसमें दैनिक उपयोग की वस्तुएँ, साहित्य, कला, राजनीतिक नेता, अभिनेता, वर-वधू के विज्ञापन, संस्थाओं तथा प्रतिष्ठानों के विज्ञापन तथा विज्ञापन-फर्मों के भी विज्ञापन सम्मिलित किये जाते हैं। निस्सन्देह विज्ञापन मानव जीवन के प्रत्येक पक्ष पर छा चुका है और उद्योगों व व्यापारिक संस्थानों के लिए तो यह एक वरदान सिद्ध हो चुका है। यही कारण है कि प्रगतिशील देशों में विज्ञापन के क्षेत्र में हर रोज एक-न-एक नयी खोज की जाती है जो प्रचार की दुनिया में बढ़ता हुआ एक नया कदम होता है। |
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विज्ञापन (Advertisement) से क्या आशय है? विज्ञापन के उद्देश्यों अथवा कार्यों का भी उल्लेख कीजिए। |
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Answer» औद्योगिक क्रान्ति के सूत्रपात ने विश्व के सभी देशों की औद्योगिक इकाइयों को आधुनिकतम तथा स्वचालित मशीनों से सजा दिया। इससे उत्पादन में गुणात्मक एवं मात्रात्मक वृद्धि हुई और वाणिज्य एवं आर्थिक क्षेत्रों की काया ही पलट हो गयी, लेकिन जनसंख्या-वृद्धि तथा मानव सम्पर्को की परिधि व्यापक होने के कारण एक नयी समस्या उभरी। यह समस्या औद्योगिक उत्पादनों की प्रमुखता की वजह से एक ही प्रकार के अनेकानेक उत्पादन बाजार में आने के कारण उत्पादकों के सम्मुख उत्पादित वस्तुओं की बिक्री की समस्या थी। वस्तुत: विज्ञान और तकनीकी की विकसित प्रविधियों की सहायता से एक ही वस्तु अनेक स्थानों पर बहुत-सी कम्पनियों द्वारा बनायी जाने लगी जिससे प्रतियोगिता बहुत बढ़ गयी। प्रगतिशील व्यापारियों एवं औद्योगिक संस्थानों ने बिक्री की समस्या के समाधान तथा अतिरिक्त उपभोक्ताओं को अपने उत्पादन के प्रति आकर्षित करने के विचार से ‘विज्ञापन (Advertisement) का सहारा लिया। विज्ञापन का अर्थ एवं परिभाषा (Meaning and Definition of Advertisement) आरडब्ल्यू० हसबैण्ड ने विज्ञापन को इस प्रकार परिभाषित किया है, “विज्ञापन को प्रचार के रूप में परिभाषित किया जा सकता है जो कुछ वस्तुओं अथवा सेवाओं के अस्तित्व व गुणों की ओर ध्यान आकर्षित करता है।” विज्ञापन के उद्देश्य अथवा कार्य अथवा विज्ञापन के मनोवैज्ञानिक आधार (Aims or Functions of Advertisement) (1) ध्यान आकृष्ट करना (To Attract Attention) – विज्ञापन का सर्वप्रथम उद्देश्य एवं कार्य लोगों का ध्यान वस्तु-विशेष की ओर आकृष्ट करना है। विज्ञापन के माध्यम से वस्तु के प्रति यह आकर्षण इतना अधिक उत्पन्न कर दिया जाता है कि लोगों की वस्तु में रुचि बढ़ जाती है तथा वे प्रेरित होकर उसे खरीद लेते हैं। इसके लिए आकर्षक शीर्षक, रंगबिरंगे चित्र, रेडियो पर रुचिकर मधुर ध्वनि तथा टी० वी० पर तस्वीर और आवाज का मनोहारी संगम प्रस्तुत किया जाता है। |
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औद्योगिक मनोविज्ञान की एक व्यवस्थित परिभाषा लिखिए। |
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Answer» ब्लम के अनुसार, “मानवीय औद्योगिक समस्याओं से सम्बन्धित मनोवैज्ञानिक तथ्यों और सिद्धान्तों का विस्तारपूर्वक अध्ययन ही औद्योगिक मनोविज्ञान है।” |
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औद्योगिक क्षेत्र में मनोविज्ञान की भूमिका अथवा महत्त्व का उल्लेख कीजिए। |
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Answer» ⦁ कर्मचारियों के चुनाव में सहायक |
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मनोवैज्ञानिक परीक्षणों के आधार पर कर्मचारियों के चुनाव से लाभ हैं(क) औद्योगिक प्रबन्धकों की शान बढ़ती है।(ख) नियुक्त किये गये कर्मचारियों को अधिक वेतन देना पड़ता है(ग) नियुक्त किये गये कर्मचारी अधिक लगन, रुचि एवं परिश्रम से कार्य करते हैं।(घ) कर्मचारी निकम्मे होते हैं तथा उत्पादन घटता है। |
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Answer» (ग) नियुक्त किये गये कर्मचारी अधिक लगन, रुचि एवं परिश्रम से कार्य करते हैं |
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वर्तमान परिस्थितियों में कर्मचारी-विश्लेषण की सरल एवं उत्तम विधि है –(क) आवदेन-पत्र विधि(ख) शैक्षिक प्रमाण-पत्र विधि(ग) शारीरिक परीक्षण विधि(घ) सिफारिश का |
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Answer» सही विकल्प है (क) आवेदन-पत्र विधि |
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कर्मचारी-विश्लेषण के लिए अपनायी जाने वाली मुख्य विधियों का उल्लेख कीजिए। |
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Answer» ⦁ आवेदन-पत्र |
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निर्देशन की परिभाषा निर्धारित कीजिए। निर्देशन की आवश्यकता, उपयोगिता एवं महत्त्व का भी उल्लेख कीजिए।यानिर्देशन क्या होता है? |
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Answer» निर्देशन की संकल्पना एवं अर्थ (Concept and Meaning of Guidance) इस प्रक्रिया को निम्नलिखित बिन्दुओं के अन्तर्गत स्पष्ट किया जा सकता है – निर्देशन की परिभाषा (1) स्किनर के शब्दों में, “निर्देशने एक प्रक्रिया है जो कि नवयुवकों को स्वयं अपने से, दूसने से तथा परिस्थितियों से समायोजन करना सिखाती है।” निर्देशन के सन्दर्भ में वर्णित उपर्युक्त परिभाषाओं से यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि निर्देशन मनुष्य के कल्याण हेतु प्रदान की गयी एक प्रकार की सहायता है जिसमें कोई व्यक्ति अन्य को कुछ देता नहीं, अपितु सहायता प्राप्त करने वाले व्यक्ति को ही इस योग्य बना दिया जाता है कि वह व्यक्ति अपनी सहायता अपने आप करने में सक्षम हो सके। निर्देशन की आवश्यकता, महत्त्व एवं उपयोगिता (लाभ) (1) व्यक्ति के दृष्टिकोण से निर्देशन की आवश्यकता – मानव-जीवन की जटिलता ने पग-पग पर नयी-नयी समस्याओं और संकट-कालीन परिस्थितियों को जन्म दिया है। मनुष्य का कार्य-क्षेत्र विस्तृत हो रहा है और उसकी नित्यप्रति की आवश्यकताओं में वृद्धि हुई है। बढ़ती हुई आवश्यकताओं तथा आर्थिक विषमताओं ने मनुष्य को व्यक्तिगत, धार्मिक, सामाजिक, राजनीतिक, आर्थिक तथा सांस्कृतिक दृष्टि से प्रभावित किया है। जीवन के हर एक क्षेत्र में समस्याओं के मोर्चे खुले हैं जिनसे निपटने के लिए भौतिक एवं मानसिक दृष्टि से निर्देशन की अत्यधिक आवश्यकता है। |
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समाज में समुचित निर्देशन व्यवस्था के अभाव की स्थिति में होने वाली हानियों का सामान्य विवरण प्रस्तुत कीजिए। |
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Answer» निर्देशन का क्षेत्र अत्यधिक व्यापक और महत्त्वपूर्ण है। सम्यक् निर्देशन की सहायता से व्यक्ति का जीवन व्यवस्थित हो जाता है और अपनी समस्याओं को हल करके वह सुखी एवं सफल व्यक्ति के रूप में अपने उज्ज्वल भविष्य की रक्षा हेतु तत्पर होता है। इसके विपरीत, समुचित निर्देशन और परामर्श के अभाव में व्यक्ति का पूर्ण विकास नहीं हो पाता और वह अपनी क्षमताओं एवं योग्यताओं के अनुसार एक सफल नागरिक नहीं बन पाता है। समुचित निर्देशन के अभाव में हानियाँ (1) शारीरिक विकास एवं स्वास्थ्य सम्बन्धी दोष – उचित निर्देशन के अभाव में शरीर में घर कर गयीं अनेक बीमारियाँ बढ़ती जाती हैं जिसके परिणामस्वरूप शारीरिक बल तथा साहस का अभाव पाया जाता है। निर्देशन के अभाव में शारीरिक आकर्षण घटता जाता है। अत्यधिक लम्बे या छोटे कद के अतिरिक्त अनेक शारीरिक विकृतियों; यथा—हकलाना, तुतलाना, गूंगा-बहरा या अन्धापन, कुरूपता इत्यादि पर अंकुश न होने से ये बढ़ते ही जाते हैं। उपर्युक्त विवेचने से स्पष्ट होता है कि उचित निर्देशन के अभाव में व्यक्ति को अनेकानेक क्षेत्रों से सम्बन्धित दुष्कर समस्याओं का समाना करना पड़ता है, जिससे अपूरणीय हानि की सम्भावना बनी रहती है। |
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व्यावसायिक कुशलता और रुचि के सम्बन्ध को स्पष्ट कीजिए। |
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Answer» मनुष्य के जीवन में जीविकोपार्जन की समस्या महत्त्वपूर्ण है। जीविकोपार्जन का प्रत्यक्ष, स्थायी एवं महत्त्वपूर्ण सम्बन्ध ‘व्यावसायिक कुशलता (Job Efficiency) से है। व्यावसायिक दृष्टि से कुशल व्यक्ति ही अपनी आजीविका कमाने में सफलता प्राप्त करता है। व्यावसायिक कुशलता का रुचि से गहरा सम्बन्ध है। डेवर के अनुसार, “रुचि किसी प्रवृत्ति का क्रियात्मक रूप है।” कार्य में रुचि रहने से कार्य अत्यन्त सरलता से किया जा सकता है, कठिन कार्य भी काफी सरल महसूस होता है। और व्यक्ति का ध्यान (अवधान) सम्बन्धित व्यवसाय में लगा रहता है। रुचि परिवर्तनशील कही जाती है क्योंकि किसी खास व्यवसाय या कार्य में व्यक्ति की रुचि न होने पर भी बाद में उसकी रुचि पैदा की जा सकती है। यदि व्यक्ति में आवश्यक रुचियों के अंकुर पहले से हों तो वे कार्य से सम्बन्धित अन्य योग्यताओं के साथ मिलकर व्यावसायिक चयन की प्रक्रिया को सहज बना देते हैं। इन परिस्थितियों में यह निर्णय लेना ही श्रेयस्कर होगा कि व्यक्ति को उस व्यवसाय में जाना चाहिए जिसके प्रति पहले से रुचि हो और उसके लिए अन्य आवश्यक गुण भी मौजूद हों। निष्कर्षतः रुचि के कारण व्यावसायिक कुशलता पुष्ट एवं विकसित होती है। |
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कार्य के स्वरूप की दृष्टि से व्यवसायों का एक वर्गीकरण प्रस्तुत कीजिए। |
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Answer» कार्य के स्वरूप को ध्यान में रखकर व्यवसायों के निम्नलिखित वर्ग या प्रकार निर्धारित किये गये हैं (i) पढ़ने-लिखने तथा मौलिक विचारों से सम्बन्धित व्यवसाय – इन व्यवसायों में सूक्ष्म बातों की खोज करके नवीन विचारों का प्रतिपादन किया जाता है। साहित्यकार, कवि, निबन्धकार, कथाकार, लेखक, नाटककार, वैज्ञानिक तथा दार्शनिक आदि सभी प्रकार के व्यवसाय इसी कोटि में आते हैं। (ii) सामाजिक व्यवसाय – इस प्रकार के व्यवसायों में सामाजिक सम्पर्को व सम्बन्धों को आधार बनाया जाता है। डॉक्टर, वकील, नेता, दुकानदार, जीवन बीमा निगम के एजेण्ट आदि सभी के व्यवसाय सामाजिक सम्बन्धों पर आधारित होते हैं। (iii) कार्यालय से सम्बन्धित व्यवसाय – आय-व्यय का हिसाब रखना, फाइलों को समझना उन पर टिप्पणी लिखना तथा व्यावसायिक-पत्रों के उत्तर देने आदि कार्यों का समावेश इस प्रकार के व्यवसायों में होता है। क्लर्क, मुनीम, कार्यालय अधीक्षक, मैनेजर, एकाउन्टेन्ट आदि इस वर्ग के व्यवसाय हैं। (iv) हस्त-कौशल सम्बन्धी व्यवसाय – इन व्यवसायों में विभिन्न यन्त्रों की सहायता से किसी-न-किसी चीज का निर्माण किया जाता है; जैसे-लोहार, मिस्त्री, बढ़ई, चर्मकार, जिल्दसाज, ओवरसियर व इन्जीनियर आदि। |
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मायर्स द्वारा प्रतिपादित निर्देशन का वर्गीकरण प्रस्तुत कीजिए। |
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Answer» मायर्स (Myers) के अनुसार समस्याओं के आधार पर निर्देशन के आठ प्रकार बताये गये हैं, जो निम्नलिखित हैं – ⦁ शैक्षिक निर्देशन–निर्देशन की यह शाखा व्यक्ति को शिक्षा सम्बन्धी समस्याओं के समाधान में सहायता करती है। |
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भारत में निर्देशन की समस्याओं का वर्णन कीजिए। |
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Answer» वर्तमान औद्योगिक एवं नगरीय जीवन में विभिन्न प्रकार के निर्देशन की अत्यधिक आवश्यकता है। निर्देशन की व्यापक व्यवस्था को अनिवार्य माना जा रहा है तथा इसके लिए बहुपक्षीय प्रयास भी किये जा रहे हैं, परन्तु जन-साधारण निर्देशन सेवाओं से समुचित लाभ प्राप्त नहीं कर पा रहा। वास्तव में निर्देशन-क्षेत्र में कुछ समस्याएँ प्रबल हो रही हैं जिनके कारण अंभीष्ट परिणाम प्राप्त नहीं हो रहे। इस क्षेत्र की कुछ मुख्य समस्याओं का विवरण निम्नवर्णित है – ⦁ हमारे विद्यालय में कुछ शिक्षकों का दृष्टिकोण पारम्परिक तथा रूढ़िवादी है। इस वर्ग के शिक्षक केवल पारम्परिक ढंग से शिक्षण कार्य ही करते हैं। वे आवश्यक परामर्श एवं निर्देशन की गतिविधियों को कोई महत्त्व नहीं देते। |
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व्यावसायिक निर्देशन देने के लिए व्यक्ति के विषय में जानकारी के साथ-साथ निम्नलिखित में से किसकी जानकारी आवश्यक होती है –(क) व्यक्ति की शिक्षा का स्तर(ख) व्यक्तित्व के गुण(ग) व्यवसाय जगत(घ) प्रयोग विधि। |
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Answer» सही विकल्प है (ग) व्यवसाय जगत |
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व्यावसायिक निर्देशन की आवश्यकता को स्पष्ट कीजिए। |
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Answer» व्यावसायिक निर्देशन की आवश्यकता का संक्षिप्त विवरण निम्नलिखित है – ⦁ व्यावसायिक निर्देशन की आवश्यकता के लिए सबसे अधिक उत्तरदायी एवं मौलिक कारक व्यक्तिगत भिन्नता है। किसी व्यक्ति-विशेष के लिए कौन-सा व्यवसाय उपयुक्त होगा, इसके लिए व्यवसाय निर्देशन का कार्यक्रम अपेक्षित एवं अपरिहार्य है। |
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निर्देशन विधि के आधार पर किया गया निर्देशन का वर्गीकरण प्रस्तुत कीजिए। |
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Answer» निर्देशन प्रदान करने की विधि के आधार पर निर्देशन दो प्रकार का है – (i) वैयक्तिक निर्देशन (Individual Guidance) – सर्वोत्तम समझे जाने वाले इस निर्देशन का प्रयोग व्यक्ति विशेष की गम्भीरतम समस्याओं को हल करने में किया जाता है। इसके अन्तर्गत निर्देशक समस्यायुक्त व्यक्ति से व्यक्तिगत सम्पर्क साधता है, उसका बारीकी से अध्ययन करता है, उसकी समस्याओं को स्वयं समझने का प्रयास करता है और इसके बाद व्यक्ति को इस योग्य बनाता है। कि वह अपनी समस्याओं का समाधान स्वयं ही प्रस्तुत कर सके। व्यक्ति की समस्याओं का ज्ञान प्राप्त करने हेतु मनोवैज्ञानिक परीक्षण एवं साक्षात्कार के प्रयोग के अतिरिक्त उसकी पारिवारिक, सामाजिक, धार्मिक, आर्थिक तथा सांस्कृतिक पृष्ठभूमि का भी अध्ययन किया जाता है। प्राप्त सूचनाओं के आधार पर एक प्रोफाइल (Profile) तैयार की जाती है। इस प्रकार के निर्देशन में मनोवैज्ञानिक या विशेषज्ञ एक बार में केवल एक व्यक्ति पर ध्यान दे पाता है। इस कारणवश यह निर्देशन धन और समय की दृष्टि से महँगा पड़ता है। इसके अतिरिक्त मनोवैज्ञानिक/विशेषज्ञ के अभाव में इसका प्रयोग करना सम्भव नहीं है। अतः वैयक्तिक निर्देशन उसी समय प्रदान किया जाता है जबकि व्यक्ति से सम्बन्धित समस्या की प्रकृति जटिल हो गयी हो और वह सांवेगिक रूप से अत्यधिक उलझ गया हो। (ii) सामूहिक निर्देशन (Group Guidance) – कभी-कभी एक समूह के समस्त व्यक्तियों की समस्या एक ही या एकंसमान होती है। उस दशा में व्यक्तियों के एक समूह को एक साथ निर्देशन प्रदान किया जाता है जिसे सामूहिक निर्देशन का नाम दिया जाता है। प्रसिद्ध विद्वान् ए० जे० जोन्स ने लिखा है, “सामूहिक निर्देशन वह प्रक्रिया है जो समूह में प्रत्येक व्यक्ति को इस प्रकार व्यक्तिगत सहायता प्रदान करती है जिससे वह अपनी समस्याओं को सुलझा सके तथा समायोजन स्थापित कर सके।” पाठ्य-विषयों के चुनाव से सम्बन्धित शैक्षिक निर्देशन एवं व्यावसायिक निर्देशन में यह विधि अत्यन्त उपयोगी सिद्ध होती है। |
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शैक्षिक निर्देशन तथा व्यावसायिक निर्देशन का सम्बन्ध स्पष्ट कीजिए। |
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Answer» शैक्षिक निर्देशन और व्यावसायिक निर्देशन एक-दूसरे के पूरक हैं और दोनों में घनिष्ठ सम्बन्ध है। शैक्षिक निर्देशन के बाद व्यावसायिक निर्देशन की आवश्यकता होती है, क्योंकि मानव-जीवन की सफलता इसी निर्देशन पर निर्भर करती है। शिक्षा ग्रहण करते समय विद्यार्थी उन्हीं विषयों का चयन करता है, जिनका ज्ञान उसके व्यावसायिक जीवन के लिए आवश्यक होता है। इस प्रकार स्पष्ट है कि शैक्षिक तथा व्यावसायिक निर्देशन की समान उपयोगिता और महत्त्व है। |
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व्यावसायिक सूचना के विभिन्न स्रोतों को सामान्य परिचय दीजिए।याभारत में व्यवसाय सम्बन्धी सूचनाओं के स्रोत का वर्णन कीजिए। |
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Answer» व्यावसायिक सूचना के मुख्य स्रोत व्यावसायिक निर्देशन एवं व्यवसाय-चयन के सम्बन्ध में महत्त्वपूर्ण बात यह है कि व्यक्ति को अपनी रुचियों तथा क्षमताओं को ध्यान में रखते हुए अनुकूल व्यवसाय की खोज करनी चाहिए। इसके लिए उसे विभिन्न व्यवसायों के विषय में सूचनाएँ एकत्र करनी चाहिए। अपने व्यवसाय और जीवन को गम्भीरता से लेने वाले व्यक्ति स्वयं के अनुकूल व्यवसाय को चयन करने हेतु अनेकानेक स्रोतों से आवश्यक सूचनाएँ एकत्र करते हैं और विभिन्न क्षेत्रों में सफल व्यक्तियों, उच्च पदाधिकारियों तथा संस्थाओं में कार्यरत प्रभावशाली लोगों से सम्पर्क साधते हैं। इसके अलावा समाचार-पत्रों, पत्रिकाओं, पुस्तकों, संचार-साधनों द्वारा प्रकाशित व प्रचारित व्यावसायिक सूचनाओं का तल्लीनता से अवलोकन भी करते है। व्यवसाय से सम्बद्ध ऐसी सूचनाएँ प्रदान करने में व्यावसायिक सूचना कक्ष’ महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। व्यावसायिक सूचना के मुख्य स्रोतों का सामान्य परिचय अग्रलिखित है – (1) समाचार-पत्र – विविध समाचार-पत्रों में रोजगार सम्बन्धी सूचनाएँ प्रकाशित होती हैं जो व्यवसाय के इच्छुक व्यक्ति के लिए आवश्यक तथा उपयोगी हैं। समाचार-पत्र दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक तथा मासिक हो सकते हैं। इसके अतिरिक्त, सिर्फ रोजगार से सम्बन्धित सूचनाएँ प्रकाशित करने वाले समाचार-पत्र भी प्रकाशित होते हैं। |
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यदि श्रमिक औद्योगिक कार्यों में सहयोग देना बन्द कर दें तो उसे कहा जाता है –(क) नाराजगी(ख) हड़ताल(ग) तालाबन्दी(घ) अवकाश पर जाना। |
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Answer» सही विकल्प है (ख) हड़ताल |
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व्यावसायिक निर्देशन के मुख्य उद्देश्य लिखिए। |
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Answer» व्यावसायिक निर्देशन स्वयं में उपयोगी एवं आवश्यक प्रक्रिया है। व्यावसायिक निर्देशन का मुख्य उद्देश्य सम्बन्धित व्यक्ति को उसकी योग्यता एवं क्षमता के अनुसार व्यवसाय चुनने में सहायता प्रदान करना है। इसके अतिरिक्त इसका एक अन्य उद्देश्य प्रत्येक कार्य के लिए योग्य व्यक्ति के चुनाव में सहायता प्रदान करना भी है। व्यावसायिक निर्देशन से समाज एवं राष्ट्र की उन्नति एवं प्रगति भी एक उद्देश्य है। |
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व्यावसायिक सूचना के मुख्य स्रोतों का उल्लेख कीजिए। |
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Answer» ⦁ समाचार पत्र-पत्रिकाएँ |
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निर्देशन का एक सामान्य वर्गीकरण प्रस्तुत कीजिए। |
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Answer» निर्देशन का एक सामान्य वर्गीकरण प्रस्तुत किया गया है। इस वर्गीकरण के अन्तर्गत मुख्य रूप से निर्देशन के क्षेत्र को ध्यान में रखा गया है। इस वर्गीकरण के अन्तर्गत निर्देशन के मुख्य रूप से तीन प्रकारों या वर्गों का उल्लेख किया गया है जो कि निम्नलिखित हैं – (i) शैक्षिक निर्देशन (Educational Guidance) – शिक्षा जीवन-पर्यन्त चलने वाली प्रक्रिया होने के बावजूद भी विशेष तौर पर मानव-जीवन के एक विशिष्ट काल और स्थान से सम्बन्ध रखती है। शैक्षिक जगत् में मनुष्य की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि उसने अपने अध्ययन के लिए किन विषयों या विशिष्ट क्षेत्र का चयन किया है। शैक्षिक निर्देशन के अन्तर्गत बालक की योग्यताओं व क्षमताओं के अनुसार उपयुक्त अध्ययन-क्षेत्र या विषयों का चुनाव किया जाता है तथा शैक्षिक समस्याओं के समाधान में सहायता प्रदान की जाती है। |
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शैक्षिक निर्देशन के लाभ अथवा उपयोगिता का उल्लेख कीजिए। |
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Answer» शैक्षिक निर्देशन के लाभ (उपयोगिता अथवा महत्त्व) [Merits (Utility or Importance) of Educational Guidance) (1) पाठ्य-विषयों का चयन – माध्यमिक विद्यालयों में विभिन्न व्यवसायों से सम्बन्धित विविध पाठ्य-विषयों के अध्ययन की व्यवस्था है। निर्देशन की सहायता से विद्यार्थी अपने बौद्धिक स्तर, क्षमताओं, योग्यताओं तथा रुचियों के अनुसार पाठ्य-विषयों का चुनाव कर सकता है। इस भाँति वह अपने मनोनुकूल व्यवसाय की प्राप्ति कर सुखी जीवन व्यतीत कर सकता है। |
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शैक्षिक निर्देशन से किसी विद्यार्थी को क्या लाभ होता है? |
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Answer» शैक्षिक निर्देशन केवल विद्यार्थियों के लिए ही आयोजित किया जाता है। शैक्षिक निर्देशन से विद्यार्थियों को पाठ्य-विषयों के चुनाव में सहायता प्राप्त होती है तथा भावी शिक्षा के स्वरूप को निर्धारित करने में सहायता प्राप्त होती है। शैक्षिक निर्देशन प्राप्त करके छात्र विद्यालय के वातावरण में अच्छे ढंग से समायोजित हो जाते हैं। शैक्षिक निर्देशन से छात्र एक हद तक अनुशासित बने रहते हैं, इससे अनेक लाभ होते हैं। शैक्षिक निर्देशन से छात्र-छात्राओं के परीक्षा में सफल होने की दर बढ़ जाती है। इससे अपव्यय एवं अवरोधन की समस्या घटती है। शैक्षिक निर्देशन छात्रों को जीविका-उपार्जन के क्षेत्र में भी सहायता प्रदान करता है। |
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कानून किसलिए होते है ? |
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Answer» धन्धे के विकास को गति मिले तथा समाज को उनके अच्छे परिणाम मिले तथा उनके दुष्परिणाम समाज को भोगना न पड़े, इसके लिए कानून होते है । |
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निर्देशन से आप क्या समझते हैं ? निर्देशन की आवश्यकता, महत्त्व एवं उपयोगिता का विवरण प्रस्तुत कीजिए। |
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Answer» निर्देशन का अर्थ निर्देशन की परिभाषा ⦁ स्किनर के शब्दों में, “निर्देशन एक प्रक्रिया है जो कि नवयुवकों को स्वयं अपने से, दूसरे से तथा परिस्थितियों से समायोजन करना सिखाती है। निर्देशन की आवश्यकता, महत्त्व एवं उपयोगिता 1. व्यक्ति के दृष्टिकोण से निर्देशन की आवश्यकता : |
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मनुष्य की ………………… आवश्यकताएँ हैं । |
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Answer» सही उत्तर है : अमर्यादित |
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