This section includes 7 InterviewSolutions, each offering curated multiple-choice questions to sharpen your Current Affairs knowledge and support exam preparation. Choose a topic below to get started.
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कवि ने सच्चे प्रेमी की क्या कसौटी बताई है ? |
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Answer» कवि सच्चे प्रेमी की कसौटी बताते हुए कहते हैं कि उससे मिलने पर मन की विषरूपी सारी बुराइयाँ नष्ट हो जाती है और सद्भावनाएँ जाग्रत हो जाती हैं। |
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कबीर ने ईश्वर-प्राप्ति के लिए किन प्रचलित विश्वासों का खंडन किया है ? |
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Answer» कबीर ने ईश्वर-प्राप्ति के लिए निम्नलिखित प्रचलित विश्वासों का खंडन किया है –
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अंतिम दो दोहों के माध्यम से कबीर ने किस तरह की संकीर्णताओं की ओर संकेत किया है ? |
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Answer» अंतिम दो दोहों के माध्यम से कबीर ने निम्नलिखित संकीर्णताओं की ओर संकेत किया है –
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कबीर ने ईश्वर को ‘सब स्वाँसों की स्वाँस में’ क्यों कहा है ? |
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Answer» ईश्वर सभी प्राणियों में है। वह जब तक है तब ही जीव का अस्तित्व है इसीलिए कबीर ने ईश्वर को ‘सब स्वाँसों की स्वॉस’ कहा है। |
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इस संसार में सच्चा संत कौन कहलाता है ? |
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Answer» इस संसार में सच्चा संत वही है जो मोह-माया की भावना से दूर है और साम्प्रदायिक झगड़े में न पड़कर निश्चल भाव से प्रभु-भक्ति करता है। |
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कबीर ने ज्ञान के आगमन की तुलना सामान्य हवा से न करके आँधी से क्यों की है ? |
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Answer» कबीर ने ज्ञान के आगमन की तुलना सामान्य हवा से न कर आँधी से की है क्योंकि सामान्य हया में वह शक्ति नहीं होती है जो स्थितियों में परिवर्तन कर दे परन्तु आँधी अपने साथ तमाम छोटी-बड़ी वस्तुओं को उड़ा ले जाती है। इसी प्रकार जब ज्ञान की आँधी चलती है तो मनुष्य के मन की अज्ञानता और बुराइयों को अपने साथ उड़ा ले जाती है अर्थात् उसका मन माया मोह, स्वार्थ जैसी तमाम बुराइयों से मुक्त हो जाता है और उसका मन प्रभु-भक्ति में लीन हो जाता है। |
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| 7. |
तीसरे दोहे में कवि ने किस प्रकार के ज्ञान को महत्त्व दिया है ? |
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Answer» तीसरे दोहे में कवि ने सच्चे ज्ञान की प्राप्ति को महत्त्व दिया है। जिसे प्राप्त करने के बाद विनम्रता आ जाती है। लोगों की निंदा का असर नहीं होता है। |
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| 8. |
ज्ञान की आँधी का भक्त के जीवन पर क्या प्रभाव पड़ता है ? |
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Answer» ज्ञान की आँधी का भक्त के जीवन पर यह प्रभाव पड़ता है कि उसके मन का भ्रम दूर हो जाता है, अज्ञानता नष्ट हो जाती है। यह सांसारिक मोहमाया से मुक्त होकर प्रभु-भक्ति में लीन हो जाता है। |
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| 9. |
‘काबा फिरि कासी भया’ से क्या तात्पर्य है ? |
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Answer» ‘काबा फिरि कासी भया’ से यह तात्पर्य है कि मनुष्य के मन में राम-रहीम का भेदभाव नहीं रह गया। |
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| 10. |
हिंदू मूआ राम कहि, मुसलमान ख़ुदाइ।कहै कबीर सो जीवता, जो दुहुँ के निकटि न जाइ ।भावार्थ : कबीर निराकार ब्रह्म के उपासक हैं। वे उसकी उपासना की सीख देते हुए कहते हैं कि हिन्दू राम की और मुसलमान खुदा की उपासना करते हुए मर मिटते हैं। जबकि राम और खुदा तो एक ही हैं। अंत में वे कहते हैं कि जो इन दोनों के चक्कर में न पड़कर प्रभु-भक्ति करता है, वही इस संसार में सही अर्थ में जीवन जीता है।1. हिन्दू और मुसलमान प्रभु को किन नामों से पुकारते हैं ?2. कबीर किसके जीवन को सार्थक मानते हैं ?3. साखी में ‘दुहूँ’ शब्द का प्रयोग किसके लिए किया है ?4. प्रस्तुत सारनी की प्रासंगिकता बताइए। |
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Answer» 1. हिन्दू अपने प्रभु को ‘राम’ और मुसलमान ‘खुदा’ के नाम से पुकारते हैं। 2. कबीर उस व्यक्ति के जीवन को सार्थक मानते हैं जो राम-रहीम के चक्कर में नहीं पड़ता है। स्वयं को किसी धर्म-संप्रदाय के बंधन में नहीं बाँधता, बल्कि सच्चे ईश्वर (निराकार ब्रह्म) की उपासना करता है। 3. साखी में ‘दुहूँ’ शब्द राम और खुदा के लिए प्रयोग किया गया है। 4. प्रस्तुत सानी आज भी एकदम प्रासंगिक है। सारा समाज धर्म संप्रदाय में बँटा हुआ है। मनुष्य किसी न किसी संप्रदाय से – जुड़कर धार्मिक कट्टरता का शिकार बन जाता है। |
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| 11. |
मोकों कहाँ ढूँढे बंदे, मैं तो तेरे पास में।ना मैं देवल ना मैं मसजिद, ना काबे कैलास में।ना तो कौने क्रिया-कर्म में, नहीं योग बैराग में।खोजी होय तो तुरते मिलिहौं, पल भर की तालास में।कहैं कबीर सुनौ भई साधो, सब स्वाँसों की स्वाँस में।।भावार्थ : मनुष्य ईश्वर को पाने के लिए तरह-तरह के क्रिया-कर्म करता है, परन्तु उसे ईश्वर के दर्शन नहीं होते हैं। कबीर के अनुसार स्वयं निराकार ब्रह्म मनुष्य से कहते हैं कि हे मनुष्य ! तुम मुझे ढूँढ़ने के लिए कहाँ-कहाँ भटक रहे हो। मैं किसी मंदिरमस्जिद में तुम्हें नहीं मिलूँगा, और न किसी तीर्थस्थान पर। मैं किसी बाह्याडंबर से भी नहीं मिल सकता। योगी और बैरागी बनकर भी तुम मुझे नहीं पा सकते हो। जो मुझे सच्चे मन से खोजता है, उसे मैं तुरंत मिल जाता हूँ क्योंकि मैं तो प्रत्येक प्राणी की हर साँस में बसा हूँ। अतः अन्यत्र भटकने के बदले अपने मन में खोजो।1. क्रिया-कर्म से कबीर का क्या तात्पर्य है ?2. मनुष्य जीवनभर ईश्वर को कहाँ ढूँढता रहता है ?3. ईश्वर को पलभर में कौन प्राप्त कर सकता है ?4. कबीर ने किन बातों पर विशेष बल दिया है ? |
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Answer» 1. क्रिया-कर्म से तात्पर्य पूजा, जप, तप, हवन या अन्य किसी भी प्रकार के कर्मकांड से है। 2. मनुष्य जीवनभर ईश्वर को मंदिर, मस्जिद गुरुद्वारे जैसे धार्मिक स्थलों तथा काबा-काशी-कैलाश जैसे तीर्थस्थलों में ढूँढ़ता रहता है। वह कभी योग-साधना जैसी क्रियाएँ करता है तो कभी वैराग्य धारण करके ईश्वर को खोजता है। 3. खोजी व्यक्ति अर्थात् जो सच्चे मन से प्रभुभक्ति करता है, वह ईश्वर को पलभर में ही प्राप्त कर सकता है। 4. कबीर ने ईश्वर को अपने भीतर ही खोजने पर बल दिया है। उनका कहना है कि ईश्वर को मंदिर, मस्जिद या तीर्थस्थलों पर नहीं पाया जा सकता है। |
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ऊँचे कुल का जनमिया, जे करनी ऊँच न होई।सुबरन कलस सुरा भरा, साधू निंदा सोइ ।भावार्थ : कबीर कहते हैं कि ऊँचे कुल में जन्म लेने से कोई ऊँचा नहीं कहलाता। ऊँचा अर्थात् बड़ा बनने के लिए उसे अच्छे कर्म करने ही पड़ते हैं। उसमें कुल की कोई भूमिका नहीं होती है। दृष्टांत देते हुए वे कहते हैं कि जिस प्रकार शराब यदि सोने के पात्र में भरी हो तो सज्जनों के लिए पेय नहीं बन जाती है। सज्जन उसकी निन्दा ही करते हैं। ठीक उसी तरह ऊँचे कुल में जन्म लेकर यदि व्यक्ति नीच कर्म करता है तो वह निन्दा का ही पात्र है।1. कवि ने किसे ऊँचा कहा है ?2. सोने का पात्र कब निन्दनीय हो जाता है ?3. ऊँचे कुल से कवि का क्या आशय है ?4. दोहे में किसे महत्त्वपूर्ण बताया गया है ?5. सज्जन किसकी निन्दा करते हैं ?6. ‘सुबरन कलस सुरा भरा, साधू निंदा सोई’ पंक्ति में कौन-सा अलंकार है ? |
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Answer» 1. अच्छा कर्म करनेवाले को कवि ने ऊँचा कहा है। 2. सोने के पात्र में जब शराब भर दी जाती है तब वह निन्दनीय हो जाता है। 3. ऊँचे कुल से कवि का आशय है – सुख-समृद्धि से भरपूर सज्जन परिवार, जिसकी समाज में प्रतिष्ठा हो। 4. दोहे में अच्छे कर्म को महत्त्वपूर्ण बताया गया है। 5. ऊँचे कुल में जन्म लेकर उच्च कर्म न करनेवालों की सज्जन निन्दा करते हैं। 6. ‘सुबरन कलस सुरा भरा, साधू निंदा सोइ’ पंक्ति में अनुप्रास अलंकार है। |
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| 13. |
श्रीकृष्ण किसके समान निर्मल हैं? |
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Answer» श्रीकृष्ण गंगा के समान निर्मल हैं। |
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सुमन से खुशबू कौन लेकर आता है? |
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Answer» सुमन से पवन खुशबू लेकर आता है। |
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ससंदर्भ भाव स्पष्ट कीजिए :चोरी करत कान्ह धरि पाए।निसि-बासर मोहिँ बहुत सतायौ अब हरि अरि हाथहिँ आए।माखन-दधि मेरौ सब खायौ, बहुत अचगरी कीन्ही।अब तो घात परे हौ लालन, तुम्है भलै मैं चीन्ही।दोउ भुज पकरि, कहयौ कहँ जैहौ माखन लेउँ मँगाइ। |
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Answer» प्रसंग : प्रस्तुत पद्यांश हमारी पाठ्य पुस्तक ‘साहित्य गौरव’ के ‘सूरदास के पद’ से लिया गया है, जिसके रचयिता सूरदास जी हैं। संदर्भ : उपरोक्त पद्यांश में एक ग्वालिन बाल कृष्ण को माखन चोरी करते हुए रंगे हाथों पकड़ लेती है और उन पर क्रोध प्रकट करती है। व्याख्या : सूरदास इस पद में कृष्ण के माखन चोरी पर रूष्ट ग्वालिन के भावों का वर्णन करते हैं। कृष्ण की रोज़-रोज़ की माखन चोरी से एक गोपी बहुत परेशान थी। कई दिनों से इंतजार में थी कि किसी प्रकार कृष्ण को रंगे हाथों पकड़ा जाय। आज कृष्ण पकड़ में आ गए तो गोपी कहने लगी – हे कृष्ण, तुमने रात-दिन मुझे बहुत सताया है, रोज-रोज चोरी करके भाग जाते हो, किसी तरह आज पकड़ में आए हो। मेरा सारा दही मक्खन खा लिया और शरारत अलग से की कि सारे बर्तन फोड़कर चले गए। मैं अब-तक सही चोर को पहचान नहीं पाई थी, पर अब मेरे हाथ लगे हो। मैंने भी इस माखन चोर को भलीभाँति पहचान लिया है। इसके बाद गोपी ने कृष्ण के दोनों हाथ पकड़कर कहा – बोलो, अब कहाँ जाओंगे? कहो तो तुम्हारी माँ से सारा दही-मक्खन मँगवा लूँ, जितना तुमने खाया है। विशेष : ब्रज भाषा। वर्णनात्मक शैली का उपयोग। ‘वात्सल्य रस। |
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श्रीकृष्ण के प्रेम में कौन मग्न हो जाती हैं? |
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Answer» श्रीकृष्ण के प्रेम में गोपिकाएँ मग्न हो जाती हैं। |
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श्रीकृष्ण ने कौन-से रंग का वस्त्र धारण किया हैं? |
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Answer» श्रीकृष्ण ने पीले रंग के वस्त्र धारण किये हैं। |
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श्रीकृष्ण की आँखें कैसी हैं? |
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Answer» श्रीकृष्ण की आँखें कमलनयन के समान हैं। |
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नंद-नंदन कहाँ पर देखे गये? |
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Answer» नंद-नंदन यमुना तट पर देखे गये। |
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कौन अंतर की बात जानने वाले हैं? |
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Answer» सूरदास के प्रभु कृष्ण अंतर की बात जानने वाले हैं। |
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श्रीकृष्ण से सकुचाते हुए कौन मिलती हैं? |
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Answer» श्रीकृष्ण से ब्रजनारियाँ सकुचाते हुए मिलती हैं। |
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श्रीकृष्ण के तन से किसकी खुशबू आ रही हैं? |
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Answer» श्रीकृष्ण के तन से चंदन की खुशबू आ रही हैं। |
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श्रीकृष्ण के अनुसार किसने सब माखन खा लिया? |
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Answer» श्रीकृष्ण के अनुया ‘ नान सखा ने सब माखन खा लिया हैं। |
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गोपिकाओं को किनकी आँखों से लगाव है? |
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Answer» गोपिकाओं को ऊधौ की आँखों से लगाव है। |
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वाणी कहाँ रह गई? |
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Answer» वाणी मुखद्वार तक आकर रुक गई। |
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अंग-अंग में किसका संचार हुआ? |
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Answer» अंग-अंग में आनंद का संचार हुआ। |
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कान्हा क्या करते हुए पकड़े गये? |
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Answer» कान्हा माखन चोरी करते हुए पकड़े गये। |
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कामधेनु क्या है?A. स्वर्ग की नदीB. स्वर्ग की गायC. स्वर्ग का बगीचाD. स्वर्ग की अप्सरा |
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Answer» B. स्वर्ग की गाय |
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श्रीकृष्ण की झूलती हुई लटें कैसी लग रही हैं? |
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Answer» श्रीकृष्ण की झूलती हुई लटे ऐसी लग रही हैं जैसे मधु पीकर भौंरे मदोन्मत्त हो रहे हो। |
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सही विकल्प चुनकर रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए :बालकृष्ण के हाथ ………. लिए शोभा दे रहे हैं। (पुष्प, नवनीत)श्रीकृष्ण के नेत्र ……….. है। (विशाल, चंचल)श्रीकृष्ण के शरीर पर …….. लगी है। (धूल, गुलाल)जहाज का पंछी उड़कर पुनः ………. पर ही आता है। (वृक्ष, जहाज)श्रीकृष्ण के सिर के दोनों ओर ………. लटक रही है। (लटे, मालाएं) |
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Answer» 1. नवनीत 2. विशाल 3. धूल 4. जहाज 5. लटें |
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सूरदास किसकी शोभा पर बलि जाते हैं? |
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Answer» सूरदास कृष्ण और गोपी की शोभा पर बलि जाते हैं। |
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अपने आपको कौन भाग्यशालिनी समझ रही हैं? |
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Answer» अपने आपको गोपिकाएँ भाग्यशालिनी समझ रही हैं। |
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श्रीकृष्ण के सिर के दोनों ओर क्या लटक रही हैं? |
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Answer» श्रीकृष्ण के सिर के दोनों ओर लटे लटक रही हैं। |
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सूरदास ने श्रीकृष्ण को किसके समान बताया है? |
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Answer» सूरदास ने श्रीकृष्ण को कामधेनु के समान बताया है। |
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सूरदास का मन कहाँ सुख पाता है? |
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Answer» सूरदास का मन केवल श्रीकृष्ण की भक्ति में सुख पाता है। |
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श्रीकृष्ण के कान में किस आकार का कुंडल है? |
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Answer» श्रीकृष्ण के कान में मकर के आकार का कुंडल है। |
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सूरदास के अनुसार सौ कल्प जीने की आवश्यकता क्यों नहीं है? |
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Answer» सूरदास मानते हैं कि श्रीकृष्ण की दुर्लभ छवि के एक पल के लिए दर्शन भी हमें धन्य बना देते हैं। ऐसे दर्शन हो जाएं तो फिर सौ कल्प जीने की आवश्यकता नहीं है। |
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निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक-एक शब्द में लिखिए :श्रीकृष्ण का शरीर धूल लगने से कैसा हो गया है?श्रीकृष्ण के मस्तक पर किसका तिलक लगा है? |
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Answer» 1. और भी सुंदर 2. गोरोचन का |
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बालकृष्ण के मुख पर किसका लेप किया हुआ है? |
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Answer» बालकृष्ण के मुख पर मक्खन का लेप किया हुआ है। |
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तत्सम रूप दीजिए :अनतपंछीमहातमपियासौदुरमतिलटमधुहिँकेहरि |
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Answer» 1. अन्यत्र 2. पक्षी 3. माहात्म्य 4. प्यासा 5. दुर्मति 6. केशगुच्छ 7. मद्य 8. केसरी |
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श्रीकृष्ण के शरीर पर क्या लगी है?A. घासB. धूलC. राखD. शक्कर |
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Answer» सही विकल्प है B. धूल |
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श्रीकृष्ण के नेत्र कैसे हैं?A. चंचलB. लालC. मधुरD. विशाल |
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Answer» सही विकल्प है A. चंचल |
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गोपिकाएँ किसे संबोधित करते हुए बातें कर रही हैं? |
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Answer» गोपिकाएँ उद्धव को संबोधित करते हुए बातें कर रही हैं। |
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बालकृष्ण के हाथ …………. लिए शोभा दे रहे हैं।A. दहीB. पुष्पC. नवनीतD. दुग्धपान |
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Answer» सही विकल्प है C. नवनीत |
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निम्नलिखित शब्दों के विरोधी शब्द लिखिए।सुखदेवप्यासचारुदुर्मतिकडुआ |
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Answer» 1. दुःख 2. दानव 3. तृप्ति 4. भद्दा 5. सुमति 6. मोठा |
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सूरदास के मधुकर को करील फल क्यों नहीं भाता? |
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Answer» सूरदास के (मन) मधुकर को करील फल नहीं भाता, क्योंकि उसने कृष्णभक्ति का अंबुज-रस चख लिया है। |
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निम्नलिखित प्रत्येक वाक्य में से विशेषण पहचानकर लिखिए :पीले वस्त्रों में सुसज्ज श्रीकृष्ण मोहक लगते थे।बबूल के वृक्ष की कटीली डालियों को देखकर उस पर कौन चढ़ेगा?कोई प्यासा व्यक्ति पवित्र गंगाजल को छोड़कर अपनी प्यास बुझाने कुआं क्यों खुदवाएगा?श्रीकृष्ण के अनन्य भक्त सूरदासजी ने उनके लिए अत्यंत मनोहर पदों की रचनाएं कीं। |
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Answer» 1. पीले 2.केटीली 3. प्यासा 4. अनन्य |
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समानार्थी शब्द लिखें :पक्षीअंबुजकूपमधुकरधेनुछेरीनवनीतलोचनकंठनख |
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Answer» 1. खग 2. जलज 3. कुआँ 4. भ्रमर 5. गाय 6. बकरी 7. मक्खन 8. नयन 9. गला 10. नाखून |
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मधुकर किस रस को चखता है?A. फलों केB. वनस्पतियों केC. कमल केD. किसी के नहीं |
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Answer» सही विकल्प है C. कमल के |
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निम्नलिखित शब्दों के पर्यायवाची शब्द लिखिए :कररेनुचारुकपोलदधिलोल |
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Answer» 1. हाथ 2. धूल 3. सुंदर 4. गाल 5. दही 6. चंचल |
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