This section includes 7 InterviewSolutions, each offering curated multiple-choice questions to sharpen your Current Affairs knowledge and support exam preparation. Choose a topic below to get started.
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भारत की दलीय प्रणाली पर आपातकाल का किस तरह असर हुआ? अपने उत्तर की पुष्टि उदाहरणों से करें। |
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Answer» आपातकाल का भारतीय दलीय व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा क्योंकि अधिकांश विरोधी दलों को किसी प्रकार की राजनीतिक गतिविधियों की इजाजत नहीं थी। आजादी के समय से लेकर सन् 1975 तक भारत में वैसे भी कांग्रेस पार्टी का प्रभुत्व रहा तथा संगठित विरोधी दल उभर नहीं पाया, वहीं आपातकाल के दौरान विरोधी दलों की स्थिति और भी खराब हुई। आपातकाल के बाद सरकार ने जनवरी 1977 में चुनाव कराने का फैसला किया। सभी बड़े विपक्षी दलों ने मिलकर एक नयी पार्टी- “जनता पार्टी’ का गठन कर चुनाव लड़ा और सफलता पायी और सरकार बनाई। इस प्रकार कुछ समय के लिए ऐसा लगा कि राष्ट्रीय स्तर पर भारत की राजनीतिक प्रणाली द्वि-दलीय हो जाएगी। लेकिन 18 माह में ही जनता पार्टी का यह कुनबा बिखर गया और पुन: दलीय प्रणाली उसी रूप में आ गई। |
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मैं समझ गया! आपातकाल एक तरह से तानाशाही निरोधक टीका था। इससे दर्द हुआ और बुखार भी आया, लेकिन अन्ततः हमारे लोकतन्त्र के भीतर क्षमता बढ़ी। |
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Answer» भारत में जून 1975 में श्रीमती इन्दिरा गांधी द्वारा आपातकाल लागू करवाने की सिफारिश की गई और सम्पूर्ण देश में आपातकाल लागू कर दिया गया। तत्कालीन सरकार का दावा था कि वह.आपातकाल लागू करके कानून व्यवस्था को बहाल करना चाहती थी, कार्यकुशलता बढ़ाना चाहती थी और गरीबों के हित में कार्यक्रम लागू करना चाहती थी। लेकिन आलोचकों ने ध्यान दिलाया कि सरकार के ज्यादातर वायदे पूरे नहीं हुए तथा सरकार अपने वायदों की ओट लेकर ज्यादतियों से लोगों का ध्यान हटाना चाहती थी। आपातकाल के प्रमुख सबक निम्नलिखित हैं- ⦁ आपातकाल का प्रथम सबक तो यही है कि भारत से लोकतन्त्र को विदा कर पाना अत्यन्त कठिन है। इस प्रकार आपातकाल ने भारतीय प्रशासन व जनता को सबक सिखाया तथा लोकतान्त्रिक व्यवस्था की प्रामाणिकता को भी सिद्ध किया। |
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गरीब जनता पर सचमुच भारी मुसीबत आई होगी।आखिर गरीबी हटाओ के वादे का हुआ क्या? |
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Answer» श्रीमती गांधी ने सन् 1971 के आम चुनावों में ‘गरीबी हटाओ’ का नारा दिया था लेकिन इस नारे के बावजूद भी सन् 1971-72 के बाद के वर्षों में देश की सामाजिक-आर्थिक दशा में सुधार नहीं हुआ और यह नारा खोखला साबित हुआ। इसी अवधि में अन्तर्राष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में कई गुना बढ़ोतरी हुई। इससे विभिन्न चीजों की कीमतें तेजी से बढ़ी। सन् 1973 में चीजों की कीमतों में 23 प्रतिशत और सन् 1974 में 30 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। इस तीव्र मूल्य वृद्धि से लोगों को भारी कठिनाई हुई। बंगलादेश के संकट से भी भारत की अर्थव्यवस्था पर भारी बोझ पड़ा था। फलत: गरीबी हटाओ कार्यक्रम के लिए दिए जाने वाले अनुदान में कटौती कर दी गई और यह नारा पूर्णत: सफल साबित नहीं हो पाया। |
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आपातकाल लागू करने का तात्कालिक कारण क्या था? |
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Answer» ⦁ प्रधानमन्त्री इन्दिरा गांधी (तत्कालीन) के लोकसभा हेतु निर्वाचन को इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा अवैध घोषित करना। |
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विरोधी दलों के विरोध तथा कांग्रेस की टूट ने आपातकाल की पृष्ठभूमि कैसे तैयार की? |
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Answer» आपातकाल की पृष्ठभूमि के कारण आपातकाल की पृष्ठभूमि के प्रमुख कारण निम्नलिखित थे- |
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क्या ‘प्रतिबद्ध न्यायपालिका’ और ‘प्रतिबद्ध नौकरशाही’ का मतलब यह है कि न्यायाधीश और सरकारी अधिकारी शासक दल के प्रति निष्ठावान हों? |
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Answer» प्रतिबद्ध नौकरशाही के अन्तर्गत नौकरशाही किसी विशिष्ट राजनीतिक दल के सिद्धान्तों से बँधी हुई होती है और उस दल के निर्देशन में कार्य करती है। प्रतिबद्ध नौकरशाही निष्पक्ष एवं स्वतन्त्र होकर कार्य नहीं करती बल्कि इसका कार्य किसी दल विशेष की योजनाओं को बिना किसी प्रश्न उठाए आँखें मूंदकर लागू करना होता है। |
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अरे! सर्वोच्च न्यायालय ने भी साथ छोड़ दिया। उन दिनों सबको क्या हो गया था? |
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Answer» आपातकाल के दौरान नागरिकों की स्वतन्त्रता पर प्रतिबन्ध लगा दिए गए तथा मौलिक अधिकार निष्प्रभावी हो गए। नागरिकों के पास अब यह अधिकार नहीं था कि वे अदालतों का दरवाजा खटखटा सकें। |
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आन्तरिक अशान्ति की दशा में उद्घोषित आपातकाल के कोई दो प्रभाव बताइए। |
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Answer» ⦁ संसद के सभी कार्य स्थगित रहते हैं। |
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निम्नलिखित अवतरण को पढ़ें और इसके आधार पर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दें 1977 के चुनावों के दौरान भारतीय लोकतन्त्र, दो-दलीय व्यवस्था के जितना नजदीक आ गया था उतना पहले कभी नहीं आया। बहरहाल अगले कुछ सालों में मामला पूरी तरह बदल गया। हारने के तुरन्त बाद कांग्रेस दो टुकड़ों में बँट गई…..जनता पार्टी में भी बड़ी अफरा-तफरी मची…..डेविड बटलर, अशोक लाहिड़ी और प्रणव रॉय। -पार्था चटर्जी(क)किन वजहों से 1977 में भारत की राजनीति दो-दलीय प्रणाली के समान जान पड़ रही थी?(ख) 1977 में दो से ज्यादा पार्टियाँ अस्तित्व में थीं। इसके बावजूद लेखकगण इस दौर को दो-दलीय प्रणाली के नजदीक क्यों बता रहे हैं?(ग) कांग्रेस और जनता पार्टी में किन कारणों से टूट पैदा हुई? |
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Answer» (क) सन् 1977 में भारत की राजनीति दो-दलीय प्रणाली इसलिए जान पड़ती थी क्योंकि उस समय केवल दो ही दल सत्ता के मैदान में थे-सत्ताधारी दल कांग्रेस एवं मुख्य विपक्षी दल जनता पार्टी। (ख) लेखकगण इस दौर को दो-दलीय प्रणाली के नजदीक इसलिए बता रहे हैं क्योंकि कांग्रेस कई टुकड़ों में बँट गई और जनता पार्टी में भी फूट हो गई परन्तु फिर भी इन दोनों प्रमुख पार्टियों के नेता संयुक्त नेतृत्व, साझे कार्यक्रम और नीतियों की बात करने लगे। इन दोनों गुटों की नीतियाँ एक जैसी थीं। दोनों में बहुत कम अन्तर था। वामपन्थी मोर्चे में सी०पी०एम०, सी०पी०आई०, फारवर्ड ब्लॉक, रिपब्लिकन पार्टी की नीति एवं कार्यक्रमों को इनसे अलग माना जा सकता है। (ग) सन् 1977 के चुनावों में कांग्रेस पार्टी की हार के कारण नेताओं में निराशा पैदा हुई और इस निराशा के कारण फूट पैदा हुई, क्योंकि अधिकांश कांग्रेसी नेता श्रीमती गांधी के चामत्कारिक नेतृत्व के मोहपाश से बाहर निकल चुके थे, दूसरी ओर जनता पार्टी के नेतृत्व को लेकर फूट पैदा हो गई थी। प्रधानमन्त्री पद के लिए उम्मीदवारों में आपसी होड़ मच गई। |
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1977 के चुनावों के बाद पहली दफा केन्द्र में विपक्षी दल की सरकार बनी। ऐसा किन कारणों से सम्भव हुआ? |
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Answer» 1977 के चुनावों के बाद केन्द्र में पहली बार विपक्षी दल की सरकार बनने के पीछे अनेक कारण जिम्मेदार रहे, इनमें प्रमुख निम्नलिखित हैं- 1. बड़ी विपक्षी पार्टियों का एकजुट होना—आपातकाल लागू होने से आहत विपक्षी नेताओं ने आपातकाल के बाद हुए चुनाव के पहले एकजुट होकर ‘जनता पार्टी’ नामक एक नया दल बनाया। नए दल ने जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व को स्वीकार किया। कांग्रेस के कुछ नेता भी जो आपातकाल के विरुद्ध थे, इस पार्टी में शामिल हुए। |
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भारत के एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में आप आपातकाल की आलोचना किन आधारों पर करते हैं? |
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Answer» भारतीय लोकतन्त्र पर आपातकाल के दुष्प्रभाव भारतीय लोकतन्त्र पर आपातकाल के निम्नलिखित दुष्प्रभाव पड़े, जिनके कारण हम आपातकाल की आलोचना करते हैं 1. लोकतान्त्रिक कार्यप्रणाली का ठप्प होना-आपातकाल में लोगों को सार्वजनिक तौर पर सरकार के विरोध करने की लोकतान्त्रिक प्रणाली को ठप्प कर दिया गया। देश को बचाने के लिए बनाए गए संवैधानिक प्रावधान का दुरुपयोग इन्दिरा गांधी ने निजी ताकत को बचाने के लिए किया। |
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1975 में राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा करते हुए सरकार ने इसके क्या कारण बताए थे? |
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Answer» 1975 में राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा करते हुए सरकार ने इसके निम्नलिखित कारण बताए थे- (1) सरकार ने कहा कि विपक्षी दलों द्वारा लोकतन्त्र को रोकने की कोशिश की जा रही है तथा सरकार को उचित ढंग से कार्य नहीं करने दिया जा रहा है। इसलिए सरकार ने आपातकाल की घोषणा की। इस सन्दर्भ में श्रीमती गांधी के वाक्य थे-“लोकतन्त्र के नाम पर खुद लोकतन्त्र की राह रोकने की कोशिश की जा रही है। वैधानिक रूप से निर्वाचित सरकार को काम नहीं करने दिया जा रहा। आन्दोलनों से माहौल सरगर्म है और इसके नतीजतन हिंसक घटनाएं हो रही हैं। एक आदमी तो इस हद तक आगे बढ़ गया है कि वह हमारी सेना को विद्रोह और पुलिस को बगावत के लिए उकसा रहा है।” |
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25 जून, 1975 को आपातकाल की घोषणा के किन्हीं दो परिणामों को बताइए। |
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Answer» ⦁ मौलिक अधिकारों का हनन। |
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किन कारणों से 1980 के मध्यावधि चुनाव करवाने पड़े? |
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Answer» सन् 1980 के मध्यावधि चुनावों का मूल कारण जनता पार्टी की सरकार में पारस्परिक तालमेल का अभाव व राजनीतिक अस्थिरता को माना जाता है। सन् 1977 के चुनावों में जनता पार्टी को जनता ने स्पष्ट बहुमत प्रदान किया लेकिन जनता पार्टी के नेताओं में प्रधानमन्त्री के पद को लेकर मतभेद हो गया। आपातकाल का विरोध जनता पार्टी को कुछ दिनों के लिए ही एकजुट रख सका। जनता पार्टी के पास किसी दिशा, नेतृत्व अथवा साझे कार्यक्रम का अभाव था। पहले मोरारजी देसाई, बाद में कुछ समय के लिए चरणसिंह प्रधानमन्त्री बने। केवल 18 महीने में ही मोरारजी देसाई ने लोकसभा में अपना बहमत खो दिया जिसके कारण मोरारजी देसाई को त्यागपत्र देना पड़ा। मोरारजी देसाई के बाद चरणसिंह कांग्रेस पार्टी के समर्थन से प्रधानमन्त्री बने लेकिन बाद में कांग्रेस पार्टी ने समर्थन वापस ले लिया। इस प्रकार, चरणसिंह भी मात्र चार महीने ही प्रधानमन्त्री पद पर रह पाए। अत: सत्ता के लिए हुई उठा-पटक के कारण सन् 1980 में मध्यावधि चुनाव करवाए गए। |
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क्या राष्ट्रपति को मन्त्रिमण्डल की सिफारिश के बगैर आपातकाल की घोषणा करनी चाहिए थी? कितनी अजीब बात है! |
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Answer» भारतीय संविधान के अनुच्छेद 352, 356 तथा 360 में राष्ट्रपति की आपातकालीन शक्तियों का उल्लेख किया गया है। भारत में 1975 में अनुच्छेद 352 के तहत आपातकाल की घोषणा की गई जिसमें मन्त्रिमण्डल से सलाह करके आपातकालीन स्थिति की घोषणा का प्रावधान है। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि तत्कालीन प्रधानमन्त्री इन्दिरा गांधी ने बिना मन्त्रिमण्डल की सलाह के राष्ट्रपति को आपातकाल की घोषणा करने की सलाह दी थी, मन्त्रिमण्डल की बैठक इसके बाद हुई। इस प्रकार तत्कालीन परिस्थितियों में चाहे कुछ भी हुआ हो लेकिन लोकतान्त्रिक व्यवस्था में यदि देश में आपातकाल लागू करना है तो राष्ट्रपति को मन्त्रिमण्डल से पूरी तरह विचार-विमर्श करके तमाम हालातों को दृष्टिगत रखते हुए इसकी घोषणा करनी चाहिए। वर्तमान में आपातकाल के प्रावधानों में सुधार कर लिया गया है। अब आन्तरिक आपातकाल सिर्फ सशस्त्र विद्रोह की स्थिति में ही लगाया जा सकता है। इसके लिए भी आपातकाल की घोषणा की सलाह मन्त्रिपरिषद् को राष्ट्रपति को लिखित में देनी होगी। |
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सन् 1975 में श्रीमती इन्दिरा गांधी द्वारा लागू किए गए आपातकाल की घोषणा के प्रमुख कारणों का वर्णन कीजिए। |
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Answer» सन् 1975 के आपातकाल की घोषणा भारतीय राजनीति का सबसे विवादास्पद प्रकरण माना जाता है, जो 25 जून, 1975 को पहली बार आन्तरिक गड़बड़ी के आधार पर लागू किया गया। राष्ट्रपति ने प्रधानमन्त्री की सिफारिश के आधार पर सन् 1975 में राष्ट्रीय संकटकाल की घोषणा की। आपातकाल के कारण आपातकाल के प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं- 1. सन् 1971 के युद्ध में अत्यधिक व्यय-सन् 1975 में लागू किए गए आपातकाल की घोषणा का प्रमुख कारण सन् 1971 में हुए पाकिस्तान के साथ युद्ध को माना जाता है। इस युद्ध में भारत को बहुत अधिक धन व्यय करना पड़ा। इसके अलावा पूर्वी पाकिस्तान से आए करोड़ों शरणार्थियों का भार भी भारत पर पड़ा। इससे भारतीय अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा। श्रीमती गांधी का ‘गरीबी हटाओ’ का नारा धन के अभाव के कारण पूरी तरह सफल नहीं हो पाया, जिससे लोगों में असन्तोष फैला। |
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निम्नलिखित में से कौन-सा आपातकाल की घोषणा के सन्दर्भ में मेल नहीं खाता है-(क) “सम्पूर्ण क्रान्ति’ का आह्वान(ख) 1974 की रेल-हड़ताल(ग) नक्सलवादी आन्दोलन(घ) इलाहाबाद उच्च न्यायालय का फैसला(ङ) शाह आयोग की रिपोर्ट। |
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Answer» ग) नक्सलवादी आन्दोलन। |
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पित्त रस किस ग्रन्थि में बनता है तथा कहाँ संचित रहता है? |
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Answer» पित्त रस यकृत में बनता है तथा पित्ताशय में संगृहीत होता है। |
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दाँत की सामान्य रचना स्पष्ट करते हुए उसके मुख्य भागों का उल्लेख कीजिए। |
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Answer» दाँत की रचना बाहरी रूप से दाँत भिन्न-भिन्न आकार के तथा भिन्न-भिन्न कार्य करने वाले होते हैं, परन्तु जहाँ तक दाँत की संरचना का प्रश्न है, सभी दाँतों की संरचना एक समान ही होती है। सभी दाँत एक बहुत अधिक मजबूत पदार्थ के बने होते हैं जिसे डेण्टाइन कहते हैं। यह पदार्थ हड्डी से भी अधिक मजबूत होता है। सभी दाँत अपने मूल वाले भाग से जबड़े की हड्डी में बने गड्डे जैसे स्थान पर जमे रहते हैं। दाँत को हड्डी के साथ मजबूती से जोड़ने के लिए एक सीमेण्ट जैसा पदार्थ सहायक होता है। दाँत को स्थिर रखने में मसूड़े भी महत्त्वपूर्ण योगदान प्रदान करते हैं। दाँत के तीन मुख्य भाग होते हैं । (i) शिखर (Crown): (ii) ग्रीवा (Neck): (iii) मूल (Root): |
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भोजन के पाचन तथा स्वांगीकरण में क्या अन्तर है? |
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Answer» भोजन को जिस रूप में ग्रहण करते हैं उसे हमारा शरीर तब तक नहीं स्वीकारता जब तक कि वह घुलनशील रूप में परिवर्तित न हो जाए। भोजन का उसके घुलनशील रूप में रक्त द्वारा अवशोषण होता है तथा इसके बाद रक्त परिभ्रमण के द्वारा वह शरीर के विभिन्न अंगों में वितरित होता है। पाचन प्रणाली के विभिन्न भागों में स्रावित पाचक रसों की प्रतिक्रिया के फलस्वरूप भोजन का घुलनशील तथा रक्त में अवशोषित होने योग्य हो जाना ही भोजन का पाचन कहलाता है। क्षुद्रान्त्र अथवा छोटी आँत में भोजन का अवशोषण होता है। क्षुद्रान्त्र की विलाई में पाई जाने वाली कोशिकाएँ जल, लवण, शर्करा व अमीनो अम्ल का अवशोषण करती हैं। यह अवशोषित भोजन छोटी आँत की श्लेष्मिक झिल्ली की कोशिकाओं द्वारा रक्त में पहुँचा दिया जाता है तथा वसा एवं ग्लिसरॉल आदि अवशोषित होकरे लसीका-वाहिनियों में पहुंचते हैं। इस प्रकार पचे हुए भोजन के आवश्यक तत्त्वों का रुधिर तथा लसीका तन्त्र में पहुँचने को स्वांगीकरण कहते हैं। स्वांगीकरण के परिणामस्वरूप ही शरीर ग्रहण किए गए आहार से लाभान्वित होता है। यदि किसी कारणवश आहार के स्वांगीकरण की प्रक्रिया बिगड़ जाए, तो उस स्थिति में पौष्टिक एवं सन्तुलित आहार ग्रहण करना भी व्यर्थ ही होता है। |
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पचे भोजन का अवशोषण आहारनाल के किस भाग में होता है? |
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Answer» पचे भोजन का अवशोषण आहारनाल के छोटी आँत नामक भाग में होता है। |
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मनुष्यों में कितने प्रकार के दाँत पाए जाते हैं? |
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Answer» मनुष्यों में चार प्रकार के दाँत पाए जाते हैं। |
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भोजन के पाचन से क्या तात्पर्य है? |
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Answer» भोजन के पाचन से तात्पर्य है किण्व की उपस्थिति में भोजन के अघुलनशील (अविलेय) अवयवों का घुलनशील (विलेय) अवस्था में परिवर्तित होना, जिससे कि वे रक्त में अवशोषित हो सकें। |
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आहारनाल के अतिरिक्त पाचन-तन्त्र के अन्य सहायक अंगों का उल्लेख कीजिए। |
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Answer» आहारनाल के अतिरिक्त पाचन-तन्त्र के अन्य सहायक अंग हैं—यकृत, पित्ताशय तथा क्लोम या अग्न्याशय। |
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रेनिन आहारनाल के किस भाग में मिलता है तथा इसका क्या कार्य है? |
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Answer» यह आमाशय के जठर रस में पाया जाता है तथा दूध को फाड़कर इसके केसीन (ठोस भाग) को पृथक् कर देता है। |
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एक वयस्क मनुष्य के कितने दाँत होते हैं?(क) 28(ख) 30(ग) 32(घ) 34 |
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Answer» सही विकल्प है (ग) 32 |
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दाँतों के कौन-कौन से तीन भाग होते हैं? |
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Answer» प्रत्येक दाँत के तीन भाग होते हैं
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स्वांगीकरण का क्या अर्थ है? |
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Answer» भोजन का कोशिकाओं में पहुँचकर जीवद्रव्य का अंश बन जाना स्वांगीकरण कहलाता है। |
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आहारनाल के मुख्य अंगों या भागों का उल्लेख कीजिए। |
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Answer» आहारनाल के मुख्य अंग या भाग हैं
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पाचन-तन्त्र से क्या आशय है? |
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Answer» आहार के पाचन एवं शोषण में प्रत्यक्ष रूप से भाग लेने वाले तथा इस कार्य में अप्रत्यक्ष रूप से सहायता प्रदान करने वाले सभी अंगों को सम्मिलित रूप से पाचन-तन्त्र कहा जा सकता है। |
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आहारनाल या आहार मार्ग से क्या आशय है? |
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Answer» शरीर के अन्दर मुख से लेकर मल-द्वार तक के मार्ग को आहारनाल या आहार मार्ग कहा जाता है। |
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टिप्पणी लिखिए-प्लीहा या तिल्ली। |
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Answer» प्लीहा या तिल्ली हमारे शरीर में पाई जाने वाली एक ग्रन्थि है। इसका रंग बैंगनी तथा आकार सेम के बीज के समान होता है। यह ग्रन्थि हमारे शरीर में आमाशय के बाईं ओर पसलियों के बीच में तथा क्लोम ग्रन्थि के दाहिनी ओर स्थित होती है। इसकी लम्बाई 12 सेमी तथा वजन 375 ग्राम होता है। यह आँत तथा वृक्क से भी मिली हुई रहती है। यह ग्रन्थि मुलायम और पिलपिली-सी होती है। इसके भीतर की ओर एक दबा हुआ गड़ा-सा होता है, जो इसका द्वार है। इस द्वार से ही रक्त-नलिकाएं इसेमें प्रवेश करती हैं और बाहर निकलती हैं। यद्यपि प्लीहा का पाचन-संस्थान से कोई सीधा सम्बन्ध नहीं होता, तथापि यह मानव शरीर का एक आवश्यक अंग है और पाचन क्रिया में भी कुछ सहायता करता है। इसके बढ़ जाने पर भोजन ठीक प्रकार से नहीं पचता और प्रायः पेट में पीड़ा होती है। यह अपने अन्दर रक्त को शोषित करके संचित कर लेती है। इस प्रकार तिल्ली रक्त-कोषागार का कार्य करती है तिल्ली के मुख्य कार्य हैं-रक्त जमा करना, रक्त बनाना, पुराने एवं घिसे हुए रक्त कणों को नष्ट करना, यूरिया बनाने में सहायता करना तथा शरीर को सुरक्षित रखना। |
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मनुष्य के मुख में कौन-सा रस बनता है? उसका भोजन पर क्या प्रभाव पड़ता है? |
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Answer» मनुष्य के मुख में तीन जोड़ी लार ग्रन्थियाँ पाई जाती हैं। ये लार स्रावित करती हैं। लार प्रारम्भिक पाचक रस है जो कि मुखगुहा में भोजन के पाचन में सहायता करता है। लार भोजन को गीला एवं चिकना कर निगलने में सहायता करती है। लार द्वारा लेई के समान बना चिकना भोजन सहज ही ग्रसनी में प्रवेश कर जाता है। लार भोजन को घोलकर उसके विभिन्न तत्त्वों का स्वाद बोध कराती है। इसमें टायलिन नामक किण्व होती है। टायलिन भोजन के श्वेतसार को अंगूरी शर्करा में परिवर्तित करती है। यही कारण है कि श्वेतसारयुक्त भोजन मुंह में चबाने के पश्चात् मीठा लगने लगता है। |
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शरीर में अग्न्याशय के कार्यों का वर्णन कीजिए। |
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Answer» अग्न्याशय के कार्य अग्न्याशय एक बाह्य ग्रन्थि है जो आहारनाल के आमाशय तथा पक्वाशय के मध्य स्थित होती है। यह एक संयुक्त ग्रन्थि है तथा दो प्रकार के प्रमुख कार्य करती है
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पाचन तन्त्र का प्रमुख कार्य है ।(क) प्राणी की भूख को शान्त करना(ख) ग्रहण किए गए आहार के स्वाद का आनन्द लेना(ग) आहार को ग्रहण करना, उसका पाचन तथा पोषक तत्वों का अवशोषण करना(घ) उपर्युक्त में से कोई नहीं। |
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Answer» सही विकल्प है (ग) आहार को ग्रहण करना, उसका पाचन तथा पोषक तत्वों का अवशोषण करना |
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वमन या उल्टी क्यों होती है? |
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Answer» जब मस्तिष्क में वमन केन्द्र उत्तेजित हो जाता है तथा जी मिचलाने लगता है तो ऐसी दशा में ग्रासनली का द्वार खुल जाता है और पेशियों के संकुचन में उल्टियाँ हो जाती हैं। |
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वसा के पाचन में सहायक पाचक रसों के नाम लिखिए। |
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Answer» वसा के लिए पाचक रस मुख्यतः पित्त रस की उपस्थिति में अग्न्याशिक रस है, जिसमें लाइपेस नामक किण्व होता है। इसके अतिरिक्त यह किण्व आन्त्र रस में भी होता है। |
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भोजन का पाचन आहारनाल में कहाँ-कहाँ होता है? |
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Answer» भोजन का पाचन आहारनाल में मुखगुहा, आमाशय तथा छोटी आँत में होता है। |
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जठर रस में कौन-सा अम्ल पाया जाता है? |
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Answer» जठर रस में नमक का अम्ल पाया जाता है। |
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एन्जाइम क्या हैं? पाचन में इनका क्या कार्य है? |
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Answer» एन्जाइम या किण्व वे जटिल प्रोटीन्स हैं जो कि उत्प्रेरक के समान कार्य करती हैं। ये श्वेतसार, प्रोटीन्स तथा वसा आदि से क्रिया कर इन्हें शरीर द्वारा स्वीकार योग्य, छोटे-छोटे घुलनशील अणुओं में परिवर्तित कर पाचन क्रिया में महत्त्वपूर्ण योगदान देती हैं। |
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पाचन प्रणाली में पाए जाने वाले विभिन्न पाचक रसों के नाम व उनके कार्यों का वर्णन कीजिए।यापाचन क्रिया में भाग लेने वाले किन्हीं दो सहायक रसों के विषय में बताइए तथा उनके कार्यों का वर्णन कीजिए। |
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Answer» भोजन में प्राय: कार्बोहाइड्रेट्स, प्रोटीन्स एवं वसा होते हैं। पाचन प्रणाली में इनका पचन सामान्यत: मुखगुहा, आमाशय तथा छोटी आँत में होता है। पाचन तन्त्र के इन तीन अंगों में विभिन्न प्रकार के पाचक रस पाचन क्रिया में अपना-अपना योगदान देते हैं। मानव पाचन प्रणाली में प्रायः चार निम्नलिखित प्रकार के पाचक रस पाए जाते हैं
(1) लार एवं लार ग्रन्थियाँ: (क) कर्ण पूर्व अथवा पेरोटिड ग्रन्थियाँ: ( ख) जिह्वाधर अथवा सबलिंगुअल ग्रन्थियाँ: (ग) अधोहनु अथवा सबमैक्सिलरी ग्रन्थियाँ: लार के कार्य:
(2) आमाशयिक रस: (3) पित्त रस: (4) क्लोम अथवा अग्न्याशय रस:
ऐमिलॉप्सिन भोजन में बिना पचे हुए स्टार्च को शक्कर में बदल देता है। ट्रिप्सिन नामक खमीर भोजन के प्रोटीन को पेप्टोन में परिवर्तित कर देता है तथा लाइपेस नामक किण्व के प्रभाव से आहार की वसा क्रमश: ग्लिसरॉल तथा वसी-अम्ल में परिवर्तित हो जाती है। |
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हमें लार से क्या लाभ हैं? |
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Answer» लार भोजन को चिकना व लेई के समान बनाती है। इसमें पाई जाने वाली टायलिन नामक किण्व श्वेतसीर को अंगूरी शर्करा में बदल देती है। |
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यकृत के कोई दो महत्त्वपूर्ण कार्य बताइए। |
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Answer» (1) यकृत पित्त रस का निर्माण करता है। |
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मनुष्यों में कितनी लार ग्रन्थियाँ पाई जाती हैं? |
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Answer» मनुष्य में तीन जोड़ी (कुल छह) लार ग्रन्थियाँ पाई जाती हैं। |
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मुँह में कितनी लार ग्रन्थियाँ होती हैं?(क) छः(ख) आठ(ग) दसघ) दो |
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Answer» सही विकल्प है (क) छः |
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यकृत को भार होता है(क) 1.5 किलोग्राम(ख) 2.5 किलोग्राम(ग) 0.5 किलोग्राम(घ) 5.0 किलोग्राम |
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Answer» सही विकल्प है (क) 1.5 किलोग्राम |
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यकृत अतिरिक्त शर्करा को किस वस्तु में परिवर्तित कर देता है?(क) ग्लाइकोजन में(ख) सेलुलोस में(ग) एन्जाइम में(घ) ग्लिसरॉल में |
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Answer» सही विकल्प है (क) ग्लाइकोजन में |
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लार में टायलिन नामक किण्व नहीं पाई जाती है(क) महिलाओं में(ख) पुरुषों में(ग) छः मासे तक के शिशुओं में(घ) छः वर्ष के बच्चों में |
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Answer» सही विकल्प है (ग) छः मास तक के शिशुओं में |
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रेनिन नामक किण्व पाया जाता है(क) केवल महिलाओं में(ख) केवल बच्चों में(ग) केवल पुरुषों में(घ) इन सभी में |
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Answer» सही विकल्प है (ख) केवल बच्चों में |
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स्टार्च को माल्टोज शर्करा में परिवर्तित करने वाला किण्व है(क) ट्रिप्सिन(ख) स्टीएप्सिन(ग) इरेप्सिन(घ) एमिलप्सिन |
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Answer» सही विकल्प है (घ) एमिलप्सिन |
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