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This section includes 7 InterviewSolutions, each offering curated multiple-choice questions to sharpen your Current Affairs knowledge and support exam preparation. Choose a topic below to get started.

1.

भारत में आने वाली यूरोपीय शक्तियों की व्यापारिक तथा राजनीतिक गतिविधियों का संक्षेप में वर्णन कीजिए।याभारत में किन यूरोपीय देशों ने प्रभुत्व स्थापित किया ?याभारत में पुर्तगाली शक्ति के उत्थान और पतन का विवरण दीजिए।

Answer»

भारत में यूरोपीय शक्तियों का आगमन व्यापार के लिए हुआ था, किन्तु बाद में उन्होंने भारत में केन्द्रीय शक्ति के अभाव तथा इससे उपजी राजनीतिक अस्थिरता तथा दुर्बलता का लाभ उठाकर अपने उपनिवेश स्थापित करने में सफलता प्राप्त की। इन देशों में पुर्तगाल, हॉलैण्ड, इंग्लैण्ड तथा फ्रांस सम्मिलित थे।

1. पुर्तगाल – सर्वप्रथम भारत में पुर्तगाली आये और उन्होंने गोआ, दमन व दीव, सूरत बेसिन, सालसेट बम्बई (मुम्बई) आदि स्थानों पर अपना नियन्त्रण स्थापित कर लिया। उन्होंने स्थानीय भारतीयों को ईसाई बनाने का बहुत प्रयत्न किया। वे भारतीयों के साथ व्यापारिक समझौतों का भी पालन नहीं करते थे। इसलिए उनकी सफलता अधिक समय तक टिकी नहीं रह सकी। पुर्तगाल के 1580 ई० में स्पेन के साथ विलय से उसका पृथक् अस्तित्व समाप्त हो गया। सन् 1588 ई० में स्पेन के जहाजी बेड़े आरमेडा को इंग्लैण्ड द्वारा पराजित कर दिये जाने के पश्चात् एशिया के व्यापार पर पुर्तगाल का अधिकार समाप्त हो गया और इंग्लैण्ड तथा हॉलैण्ड इस व्यापार पर अपना प्रभाव स्थापित कर सके। पुर्तगालियों का प्रभाव केवल पश्चिमी समुद्र तट तक ही सीमित रह गया।

2. हॉलैण्ड – सन् 1595 ई० में कार्नीलियस हाउटमैन नामक डच व्यापारी भारत पहुँचा तथा 1597 ई० में बहुत-सा माल लेकर ऐम्स्टर्डम (हॉलैण्ड) वापस लौटा। उसकी यात्री ने डचों के लिए भारत से व्यापार करने का मार्ग खोल दिया। सन् 1602 ई० में डच ईस्ट इण्डिया कम्पनी की स्थापना हुई। डच कम्पनी का मुख्य उद्देश्य व्यापार करना था। इसलिए उन्होंने सबसे पहले मसालों के द्वीपों (जावा, सुमात्रा, बोर्नियो आदि) पर अपना प्रभुत्व स्थापित किया। फिर डचों ने भारत में अनेक स्थानों पर पुर्तगालियों को हराकर सूरत, चिनसुरा, कासिम बाजार, नेगापट्टम, कालीकट आदि स्थानों पर अपनी बस्तियाँ स्थापित कीं। अन्त में 1759 ई० में अंग्रेजों ने डचों को पराजित कर भारत में डच कम्पनी के प्रभाव का अन्त कर दिया।

3. इंग्लैण्ड – लन्दन के कुछ व्यापारियों की एक कम्पनी को 31 दिसम्बर, 1600 ई० को पूर्वी देशों से व्यापार करने का एकाधिकार (चार्टर) प्रदान किया गया। यही कम्पनी आगे चलकर ब्रिटिश ईस्ट इण्डिया कम्पनी के नाम से प्रसिद्ध हुई। सन् 1690 ई० में ईस्ट इण्डिया कम्पनी ने तीन हजार रुपये वार्षिक कर देकर बंगाल में व्यापार करना स्वीकार किया। सन् 1715 ई० में कम्पनी के एक शिष्टमण्डल ने जॉन सरमन की अध्यक्षता में मुगल सम्राट से भेंट की और उससे व्यापारिक सुविधाओं के लिए एक शाही फरमान (आदेश) प्राप्त किया। इस फरमान के फलस्वरूप अंग्रेजों को बंगाल में व्यापारिक करों तथा चुंगी की छूट मिल गयी। सन् 1717 ई० में अंग्रेजों ने इस छूट का लाभ निजी व्यापार के लिए उठाना शुरू कर दिया। यही 1757 ई० में अंग्रेजों तथा बंगाल के नवाब के झगड़े का भी प्रमुख कारण बना।

4. फ्रांस – फ्रांसीसी ईस्ट इण्डिया कम्पनी 1664 ई० में स्थापित हुई। इस कम्पनी ने भारत में सूरत (1668 ई०) और पॉण्डिचेरी (पुदुचेरी) में 1669 ई० में अपनी बस्तियाँ स्थापित कीं। बंगाल में चन्द्रनगर (1690-92 ई०) नामक स्थान पर फ्रांसीसियों ने अपना व्यापारिक केन्द्र स्थापित किया। बाद में माही (1725 ई०) तथा कराईकल पर फ्रांसीसियों का प्रभुत्व स्थापित हो गया। भारत में राजनीतिक सत्ता की स्थापना में मुख्य संघर्ष अंग्रेजों और फ्रांसीसियों के बीच हुआ। इस संघर्ष की मुख्य कड़ी कर्नाटक के युद्ध थे। इन युद्धों में अन्तिम विजय अंग्रेजों को मिली और भारत में फ्रांसीसी शक्ति का सूर्यास्त हो गया।

2.

इलाहाबाद की सन्धि का भारतीय इतिहास में क्या महत्त्व है ?

Answer»

अंग्रेजों ने बक्सर के युद्ध में विजय के बाद नाममात्र के मुगल सम्राट शाहआलम के साथ 1765 ई० में सन्धि कर ली, जो इलाहाबाद की सन्धि के नाम से प्रसिद्ध है। इस सन्धि के अनुसार मुगल सम्राट शाहआलम द्वितीय ने शाही फरमान द्वारा अंग्रेज कम्पनीको बंगाल, बिहार और उड़ीसा (ओडिशा) की दीवानी प्रदान कर दी। साथ-साथ अंग्रेजों ने सम्राट को र 26 लाख की वार्षिक पेंशन बाँध दी। दीवानी के अधिकार के बदले कम्पनी ने कड़ा और इलाहाबाद के किले अवध के नवाब से लेकर शाहआलम को दे दिये। नवाब ने कम्पनी को १ 50 लाख युद्ध का हर्जाना दिया। क्लाइव और अवध के नवाब के बीच यह भी समझौता हुआ कि दोनों भविष्य में आवश्यकता पड़ने पर मराठों के आक्रमणों के समय एक-दूसरे की सहायता करेंगे।

अतः स्पष्ट है कि दोनों युद्धों के पश्चात् जो लाभ अंग्रेजों को हुआ उसकी पुष्टि इलाहाबाद की सन्धि (1765) के द्वारा हो गयी।

3.

भारत में राजनीतिक सत्ता की स्थापना हेतु अंग्रेज और फ्रांसीसियों के बीच संघर्ष का वर्णन कीजिए तथा इसके परिणाम लिखिए।याकर्नाटक युद्धों का संक्षेप में वर्णन कीजिए। इनके क्या परिणाम हुए ?

Answer»

अंग्रेजों तथा फ्रांसीसियों के मध्य भारत में राजनीतिक सत्ता की स्थापना के लिए मुख्यतः कर्नाटक में युद्ध हुए। इन युद्धों को ‘कर्नाटक युद्धों के नाम से जाना जाता है। सन् 1742 ई० में कर्नाटक के नवाब सफदर अली के चचेरे भाई मुर्तजा अली ने उसके विरुद्ध षड्यन्त्र रचकर उसकी हत्या कर दी और गद्दी पर कब्जा कर लिया। लेकिन अर्कोट की जनता ने मुर्तजा अली का स्वागत नहीं किया और विद्रोह का झण्डा खड़ा कर दिया तथा सफदर अली के एक नाबालिग पुत्र सैयद मुहम्मद को कर्नाटक की गद्दी पर बैठा : दिया। जब किसी ने उस नाबालिग की भी हत्या कर दी तो निजाम ने अनवरुद्दीन को कर्नाटक का नवाब घोषित कर दिया। इसी भूमिका में अंग्रेजों तथा फ्रांसीसियों के मध्य संघर्ष आरम्भ हो गया। इन दोनों में तीन युद्ध हुए।

कर्नाटक का प्रथम युद्ध (सन् 1744-48 ई०)

कर्नाटक के प्रथम युद्ध में अंग्रेजों तथा फ्रांसीसियों के बीच व्यापारिक प्रतिस्पर्धा की प्रमुख भूमिका थी। इस युद्ध का दूसरा मुख्य कारण 1740 ई० में ऑस्ट्रिया के उत्तराधिकार के प्रश्न पर इंग्लैण्ड तथा फ्रांस का परस्पर संघर्षरत होना था। यूरोप में ऑस्ट्रिया के युद्ध के साथ-साथ भारत में भी इन दोनों शक्तियों के मध्य युद्ध आरम्भ हो गया। युद्ध के प्रारम्भ में फ्रांसीसियों ने अंग्रेजी बेड़े को पराजित किया, फिर मद्रास (चेन्नई) पर घेरा डाल दिया तथा कर्नाटक के नवाब को मद्रास देने का वादा करके अपनी ओर मिला लिया। सन् 1746 ई० में फ्रांस ने मद्रास पर अधिकार कर लिया, किन्तु सन्धि के अनुसार नवाब को मद्रास देने से इन्कार कर दिया। इस पर नवाब और डूप्ले (फ्रांसीसियों) में संघर्ष छिड़ गया। सेण्ट थॉमस (अड्यार) नामक स्थान पर भारतीय सेना पराजित हो गयी। इसके बाद डूप्ले ने फोर्ट सेण्ट डेविड किले पर आक्रमण किया, किन्तु अंग्रेज अफसर लॉरेन्स की रणकुशलता के कारण वह सफल न हो सका। इसके प्रत्युत्तर में अंग्रेजों ने पॉण्डिचेरी (पुदुचेरी) जीतने का असफल प्रयास किया। सन् 1748 ई० में यूरोप में फ्रांस और इंग्लैण्ड में सन्धि होने के साथ भारत में भी दोनों के मध्य युद्ध बन्द हो गया। फ्रांस ने मद्रास (चेन्नई) अंग्रेजों को वापस लौटा दिया। प्रथम कर्नाटक युद्ध से भारत में फ्रांसीसियों की धाक जम गयी। डूप्ले अब खुलकर भारत की राजनीति में हस्तक्षेप करने लगा

कर्नाटक का द्वितीय युद्ध (सन् 1749-54 ई०)

अंग्रेज और फ्रांसीसी एक-दूसरे की शक्ति को नष्ट करना चाहते थे। सन् 1748 ई० में हैदराबाद के निजाम आसफशाह की मृत्यु होने पर उसके पुत्र मुजफ्फरजंग और दूसरे पुत्र नासिरजंग के मध्य उत्तराधिकार का युद्ध आरम्भ हो गया। इसी समय कर्नाटक में भी नवाब अनवरुद्दीन तथा भूतपूर्व नवाब दोस्त अली के दामाद चाँदा साहब के मध्य संघर्ष आरम्भ हो गया। तंजौर में राजा प्रतापसिंह से फ्रांसीसी गवर्नर ड्यूमा ने कराईकल की बस्ती प्राप्त की थी, जिससे अंग्रेज बहुत रुष्ट थे। अत: उन्होंने प्रतापसिंह के स्थान पर शाहजी को सहायता देकर उसे तंजौर की गद्दी पर बिठा दिया। बाद में धन के लालच में दूसरे पक्ष का समर्थन भी किया। डूप्ले, मुजफ्फरजंग और चाँदा साहब तीनों ने मिलकर कर्नाटक पर आक्रमण किया, जिसमें नवाब मारा गया। चाँदा साहब को कर्नाटक का नवाब बनाया गया। चाँदा साहब ने डूप्ले को पॉण्डिचेरी (पुदुचेरी) के निकट 80 गाँव जागीर में दिये।

हैदराबाद पर आक्रमण करके डूप्ले ने नासिरजंग को परास्त किया और उसके प्रथम पुत्र मुजफ्फरजंग को नवाब बनाया। मुजफ्फरजंग ने भी डूप्ले को एक जागीर प्रदान की। सन् 1751 ई० में अंग्रेजों ने मृतक निजाम असफशाह के तृतीय पुत्र सलावतजंग को गद्दी पर बैठा दिया।

चाँदा साहब ने फ्रांसीसी सेनाओं की सहायता से त्रिचनापल्ली पर घेरा डाल दिया, जहाँ कर्नाटक के नवाब अनवरुद्दीन का पौत्र मुहम्मद अली छिपा था। इस पर अंग्रेज सेनापति क्लाइव ने चाँदा साहब की राजधानी अर्काट पर अधिकार कर लिया और उसके बाद क्लाइव ने त्रिचनापल्ली पर आक्रमण कर दिया। इस भीषण युद्ध में चाँदा साहब की मृत्यु हो गयी। क्लाइव ने मुहम्मद अली को कर्नाटक का नवाब बना दिया। जनवरी, 1755 ई० में दोनों पक्षों में युद्ध विराम हो गया। पॉण्डिचेरी (पुदुचेरी) की सन्धि के अनुसार दोनों पक्षों (फ्रांस तथा इंग्लैण्ड) ने देशी राजाओं के आन्तरिक मामलों में हस्तक्षेप न करने का निर्णय लिया और मुगल सम्राट द्वारा प्रदत्त अधिकारों को त्याग दिया। मद्रास (चेन्नई), फोर्ट सेण्ट डेविड तथा देवी कोटा पर अंग्रेजों का अधिकार मान लिया गया।

कर्नाटक का तृतीय युद्ध (सन् 1756-63 ई०)

सन् 1754 ई० में डूप्ले के वापस लौटने के बाद फ्रांसीसी कम्पनी की आर्थिक दशा शोचनीय होती चली गयी। सन् 1756 ई० में यूरोप में फ्रांस तथा इंग्लैण्ड के बीच सप्तवर्षीय युद्ध आरम्भ हो गया। अत: भारत में भी दोनों पक्ष युद्ध की तैयारियों में लग गये।

अप्रैल, 1758 ई० में फ्रांसीसी सरकार ने काउण्ट डी-लैली को गवर्नर तथा प्रधान सेनापति बनाकर भारत भेजा। उसने मद्रास (चेन्नई) पर घेरा डाल दिया। सन् 1760 ई० में लैली ने अंग्रेजों के सेण्ट डेविड फोर्ट पर आक्रमण कर उसे अपने अधिकार में ले लिया। किन्तु 1760 ई० में वाण्डेवाश के युद्ध में अंग्रेज सेनापति आयरकूट ने फ्रांसीसी सेना को परास्त कर दिया। इसके बाद अंग्रेजों ने कराईकल पर अधिकार कर लिया और 1761 ई० में पॉण्डिचेरी (पुदुचेरी) पर घेरा डाल दिया। आंशिक युद्ध के बाद लैली ने आत्मसमर्पण कर दिया और पॉण्डिचेरी (पुदुचेरी) पर अंग्रेजों का अधिकार हो गया।सन् 1763 ई० की पेरिस सन्धि के साथ ही कर्नाटक के तीसरे युद्ध का अन्त हो गया। पॉण्डिचेरी (पुदुचेरी), माही तथा चन्द्रनगर के बन्दरगाह फ्रांस को लौटा दिये गये। हैदराबाद का निजाम और कर्नाटक का नवाब अंग्रेजों के प्रभाव में आ गये तथा सम्पूर्ण दक्षिण भारत पर अंग्रेजों का प्रभुत्व स्थापित हो गया।

4.

भारत के दो पुर्तगाली गवर्नरों के नाम लिखिए।

Answer»

भारत के दो पुर्तगाली गवर्नर थे –

1. डी-अल्मोडा तथा

2. अल्बुकर्क

5.

भारत में सर्वप्रथम किस यूरोपियन जाति ने प्रवेश किया ?

Answer»

भारत में सर्वप्रथम पुर्तगालियों ने प्रवेश किया।

6.

मोबाइल का बोलबाला सारांश अंग्रेज़ी में लिखिए ।

Answer»

From this lesson, children learn how their lifestyle is changing due to the use of electronic gadgets. It also discusses the importance and uses of mobile phones. In this lesson, we find a conversation between the telephone, mobile and the letter. The telephone complains that it has been rather discarded by people. They nowadays carry a smartphone (mobile phone) with them. They keep them close to their heart. They are carried wherever they go.

But telephones are a rejected lot today. We hardly see people using a telephone. While conversing so there comes the letter. Now the letter speaks of its place in today’s generation. Nowadays people hardly write letters. The message to be conveyed is sent through the mail from mobiles. Earlier boys and girls used to write letters. They used to place flower petals and sent the written letter to their beloved ones. But today people hardly write letters. While discussing so telephone hugs them both and pacifies them telling world changes day by day. What is there today, may not remain tomorrow. Life is a wonderful journey. Nobody knows what may happen tomorrow.

7.

निम्नलिखित वाक्यों में प्रयुक्त सर्वनाम शब्दों को रेखांकित कीजिए :1.   …………. औकात ही क्या है मेरे सामने ?2.   मुझसे …………. गलती हो गई क्या?3.   ……… तो मेरे अग्रज हैं।4.  अरे, यह आवाज़ तो दादी के बक्से से आ रही है।

Answer»

1.   तेरी औकात ही क्या है मेरे सामने ?

2.   मुझसे कोई गलती हो गई क्या?

3.   आप तो मेरे अग्रज हैं।

4.   अरे, यह आवाज़ तो दादी के बक्से से आ रही है।

8.

सही शब्द चुनकर खाली जगह भरिए :(एक-सा, राज, गिटर-पिटर, धूम, पूछ)1.   सदियों से उसका एकछत्र ……… था।2.   चारों ओर तुम्हारी ही …………. मची हुई है।3.   याद रखना समय सदा …………..नहीं रहता।4.   सब तुम पर ही बिल्कुल …………. करने लगे

Answer»

1.   सदियों से उसका एकछत्र राज था।

2.   चारों ओर तुम्हारी ही धुम मची हुई है।

3.   याद रखना समय सदा एक-सा नहीं रहता।

4.   सब तुम पर ही बिल्कुल गिटर-पिटर करने लगे।

9.

जोड़कर लिखिए :1.   हमारी कोई – तुम्हारा ही राज था।2.   इसमें हमारा – यह होना ही था।3.   सदियों से – बिल्कुल सच है।4.   एक-न-एक दिन – पूंछ नहीं रही।5.   बात तुम्हारी – क्या कसूर है।क्या कर सकता है

Answer»

1.   हमारी कोई – पूंछ नहीं रही।

2.   इसमें हमारा – क्या कसूर है।

3.   सदियों से – तुम्हारा ही राज था।

4.   एक-न-एक दिन – यह होना ही था।

5.   बात तुम्हारी – बिल्कुल सच है।

10.

निम्नलिखित वाक्यों में क्रिया शब्दों को भरिए :(सुने, मची, घूमते , करोगे , गिर )1.   सब तुम्हें अपनी छाती से लगाए ………… हैं।2.   तुम क्या …………….?3.   चारों ओर तुम्हारी ही धूम …………4.   अपनी आवाज़ ………… मुझे महीनों बीत जाते हैं।5.    मिट्टी मेरे सलोने मुख पर …………जाए।

Answer»

1.   घूमते

2.   करोगे

3.   मची

4.   सुने

5.   गिर

11.

क्रान्ति का क्या अर्थ है ? क्रान्ति क्यों होती है ?

Answer»

क्रान्ति का सामान्य अर्थ एकाएक हुए या किये गये दूरगामी परिवर्तन से है। राजनीतिक निरंकुशता, सामाजिक तथा आर्थिक असमानताओं को दूर करने तथा सत्ता-परिवर्तन के लिए क्रान्ति होती है।

12.

किसको देखकर दोनों चौंक गए?

Answer»

चिट्ठी को देखकर दोनों चौंक गए।

13.

टेलीफोन मन-ही-मन मोबाइल के बारे में क्या कहा ?

Answer»

टेलीफोन मन ही मन मोबाइल के बारे में कहते हैं कि दिखावे में चूहे जैसाः न मूंछ, ना पूँछ, फिर भी इसकी इतनी पूछ? चल दूर हट मुझसे, आकर बैठ गया मेरे पास, तेरी औकात ही क्या है मेरे सामने।”

14.

टेलीफोन की बातें सुनकर मोबाइल ने क्या कहा ?

Answer»

टेलीफोन की बातें सुनकर मोबाइल ने कहा कि ‘क्या हुआ भाई? मैंने तो तुम्हें कुछ कहा भी नहीं तो गुस्सा क्यों हो रहे हो? मुझसे कोई गलती हो गई क्या? मैं माफी चाहता हूँ। तुम मेरे बड़े भाई हो ।

15.

सब लोग किसे अपनी छाती से लगाये घूमते हैं।

Answer»

सब लोग मोबाइल अपनी छाती से लगाये घूमते हैं।

16.

ड्राइंग रूम के कोने में कौन पड़ा था ?

Answer»

ड्राइंग रूम के कोने में टेलीफोन पड़ा था।

17.

5A × A = 399 then the value of A = ……………… A) 3 B) 7 C) 4 D) 6

Answer»

Correct option is (B) 7

5A \(\times\) A = (50+A) A

\(A^2+50A\)

\(\therefore\) 5A \(\times\) A = 399

\(\Rightarrow\) \(A^2+50A\) = 399

\(\Rightarrow\) \(A^2+50A-399=0\)

\(\Rightarrow\) \(A^2+57A-7A-399=0\)

\(\Rightarrow\) A(A+57) - 7(A+57) = 0

\(\Rightarrow\) (A-7) (A+57) = 0

\(\Rightarrow\) A - 7 = 0 or A+57 = 0

\(\Rightarrow\) A = 7 or A = -57

\(\Rightarrow\) A = 7 \((\because\) Middle digit in a number never be negative)

Correct option is  B) 7

18.

If 5 A × A = 399, then the value of A is(a) 3 (b) 6 (c) 7 (d) 9

Answer»

The correct answer is option (c) 7

Explanation:

In the 1’s place, the product of A and A gives 9

Here, A is a number whose multiplication gives the two digit number having 9 in its 1’s place.

So, the product of 7 and 7 gives 49, where 1’s place is 9.

19.

Fill in the blanks to make the statement true.20 × 3 is a multiple of 3 if the digit x is ______ or ______ or ______.

Answer»

1 or 4 or 7

Explanation:

It is known that, when a number is a multiple of 3, if the sum of digits in the number is a multiple of 3

By equating the closet multiple of 3 such as 6, 9, and 12, we get the digit

Either the digit x should be 1 or 4 or 7.

20.

If 6 A × B = A 8 B, then the value of A – B is(a) –2 (b) 2 (c) –3 (d) 3

Answer»

The correct answer is option (a) -2

Explanation:

Given that, 6 A × B = A 8 B

So, AB = B

Therefore A = 1

Now substitute A = 1 in the given equation

6B = A8

6B = 18

B = 18/6 = 3

Now, A – B = 1 -3 = -2

21.

Fill in the blanks to make the statement true.3134673 is divisible by 3 and ______.

Answer»

9

3134673 is divisible by 3 and 9 as sum of the digits, 3+1+3+4+6+7 + 3 = 27 is divisible by both 3 and 9.

22.

Which of the following numbers is divisible by 99(a) 913462 (b) 114345 (c) 135792 (d) 3572406

Answer»

The correct answer is option (b) 114345

Explanation:

If a number is divisible is 99, it should be divisible by both 9 and 11.

From the given option, option (b) 114345 is divisible by both 9 and 11.

All other numbers are either divisible by 9 or 11,but not both 9 and 11.

23.

Show that 954 – 459 is exactly divisible by 99.

Answer»

To show : 954 – 459 is exactly divisible by 3 99, where a = 9, b = 5, c = 4  abc = 100a + 10b + c 

=> 954 = 100 x 9 + 10 x 5 + 4 

=> 954 = 900 + 50 + 4 ………(i)

and 459 = 100 x 4+ 10 x 5 + 9 

=> 459 = 400 + 50 + 9 ……..(ii)

Subtracting (ii) from (i), we get 

954 – 459 = 900 + 50 + 4 – 400 – 50 – 9

=> 954 – 459 = 500 – 5 

=> 954 – 459 = 495 

=> 954 – 459 = 99 x 5

Hence, 954 – 459 is exactly divisible by 99 

Hence proved.

24.

For what value of digit x, is :1×5 divisible by 3 ?

Answer»

1×5 is divisible by 3 

=> 1 + x + 5 is a multiple of 3 

=> 6 + x = 0, 3, 6, 9,

=> x = -6, -3, 0, 3, 6, 9

Since, x is a digit

x = 0, 3, 6 or 9

25.

एक खाली अर्द्धगोलीय बर्तन के आन्तरिक व बाह्य व्यास क्रमशः 21 सेमी तथा 25.2 सेमी हैं। 1 सेमी2 सतह को पेंट करने में 10 पैसे लगते हैं। पूरे बर्तन को पेंट करने में कुल लागत ज्ञात कीजिए।

Answer»

अर्द्धगोलीय बर्तन के आन्तरिक व बाह्य व्यास क्रमशः 21 सेमी तथा 25.2 सेमी है।

तब, बर्तन की बाह्य त्रिज्या R = 25.2/2 = 12.6 सेमी

और बर्तन की आन्तरिक त्रिज्या r = 21/2 = 10.5 सेमी

अर्द्धगोलीय बर्तन का सम्पूर्ण पृष्ठ = 3πR2 + πr2

3 x 22/7 x 12.6 x 12.6 + 22/7 × 10.5 × 10.5

= 1496.88 + 346.5= 1843.38 सेमी

∵ 1 सेमी2 सतह को पेंट कराने की लागत = 10 पैसे

∴ 1843.38 सेमी2 सतह को पेंट कराने की कुल लागत = 1843.38 x 10= 18433.80 पैसे

= ₹18433.80/100 = ₹184.34

= ₹184.34

26.

80 मी लम्बे तथा 50 मीटर चौड़े एक आयताकार टैंक में 500 व्यक्तियों को डुबाया जाता है। यदि प्रत्येक व्यक्ति द्वारा पानी के स्तर में 0.04 मीटर3 की वृद्धि की जाती है तो टैंक के पानी के स्तर में कुल बढ़ोतरी ज्ञात कीजिए।

Answer»

आयताकार टैंक की लम्बाई l = 80 मीटर, चौड़ाई b = 50 मीटर

माना, पानी के स्तर में बढ़ोत्तरी = h मीटर

तब, प्रश्नानुसार, 

आयताकार टैंक  में ऊपर उठे पानी का आयतन = 500 × 0.04 मीटर3

l x b x h = 20 मी3

80 × 50 × h = 20

h = 20/80x50 = 1/4x50 = 1/200 = 0.005 मीटर

h = 0.005 × 100 = 0.500 = 0.5 सेमी

27.

25 वृत्तीय प्लेटों, जिनमें प्रत्येक की त्रिज्या 10.5 सेमी तथा मोटाई 1.6 सेमी है, को एक के ऊपर एक ठोस वृत्तीय बेलन के रूप में रखा गया है। प्राप्त बेलन के वक्र पृष्ठ का क्षेत्रफल और आयतन ज्ञात कीजिए।

Answer»

वृत्तीय प्लेट की त्रिज्या r = 10.5 सेमी तथा मोटाई h = 1.6 सेमी

माना, 

ठोस बेलन की त्रिज्या R = 10.5 सेमी तथा ऊँचाई H = 1.6 × 25, H = 40 सेमी

बेलन का वक्रपृष्ठ = 2πRH = 2 x 22/7 x 10.5 x 40 = 2640 सेमी2

तथा बेलन का आयतन = πr2h = 22/7 x 10.5 x 40 = 13860 सेमी3

28.

2 सेमी व्यास के ठोस बेलन की लम्बाई ज्ञात कीजिए जिससे 16 सेमी लम्बाई, बाह्य व्यास 20 सेमी तथा मोटाई 2.5 मिमी से एक खोखला बेलन बनाया जा सके।

Answer»

माना, 

ठोस बेलन की लम्बाई l सेमी है।

ठोस बेलन का व्यास = 2 सेमी

ठोस बेलन की त्रिज्या r = 2/2 = 1 सेमी

खोखले बेलन की लम्बाई H = 16 सेमी

खोखले बेलन का बाह्य व्यास  = 20 सेमी

खोखले बेलन की बाह्य त्रिज्या r1 = 20/2 = 10 सेमी

तथा मोटाई = 2.5 मिमी = 2.5/10 सेमी = 0.25 सेमी

खोखले बेलन की भीतरी त्रिज्या r2 = 10 – 0.25 = 9.75 सेमी

तब, प्रश्नानुसार, 

ठोस बेलन का आयतन = खोखले बेलन का आयतन

πr2h = π(r12 – r22)H

(1)2 x h = [(10)2 – (9.75)2] x 16

1 x h = [100 – 95.0625] x 16 = 4.9375 x 16

h = 79 सेमी

29.

1 सेमी आन्तरिक त्रिज्या वाले वत्ताकार पाईप से 80 सेमी/सेकण्ड की दर से एक खाली बेलनाकार टैंक जिसके आधार की त्रिज्या 40 सेमी है, में पानी भर रहा है। आधे घण्टे में टैंक में पानी का स्तर कितना ऊँचा उठेगा?

Answer»

वृत्ताकार पाईप की आन्तरिक त्रिज्या r = 1 सेमी

तथा वृत्ताकार पाईप से पानी निकलने की रफ्तार = 80 सेमी/सेकण्ड

अर्थात् 1 सेकण्ड में पानी की ऊँचाई h = 80 सेमी

तथा बेलनाकार टैंक के आधार की त्रिज्या R = 40 सेमी

माना, बेलनाकार टैंक में पानी के स्तर की ऊँचाई H सेमी है।

तब, प्रश्नानुसार,

बेलनाकार टेंक में ऊपर उठे पानी का आयतन = 1/2 घण्टे (1800 सेकण्ड) में वृत्ताकार पाईप द्वारा भरे पानी का आयतन

πR2H = πr2h × 1800

π x 40 x 40 x H = π x 1 x 1 x 80 x 1800

H =80 x 1800 / 40 x 40

= 5 x 18 = 90 सेमी

30.

साबुन की 6 टिकिया 81 रुपए में मिलती है। ऐसी ही 27 टिकिया खरीदने के लिए कितने रुपए चाहिए?

Answer»

∵ 6 टिकिया आती हैं = 81 रु० में

∴ 1 टिकिया आएगी = \(\frac{81}{6}\) रु.

∴ 27 टिकिया आएँगी = \(\frac{81}{6}\) x 27 = 364.50 रु.

31.

पानी की एक टंकी 1.5 मीटर लम्बी, 50 सेमी चौड़ी तथा 75 सेमी ऊँची है। टंकी का आयतन ज्ञात करो।

Answer»

टंकी का आयतन = 150 x 50 x 75 = 562500 घन सेमी.

32.

निम्नलिखित का आयतन ज्ञात करो –(क) घन की एक भुजा 2.5 सेमी है।(ख) घनाभ की लम्बाई 1.25 मी, चौड़ाई 0.75 मी तथा ऊँचाई 35 सेमी है।

Answer»

(क) 

घन की एक भुजा = 2.5 सेमी

घन का आयतन = 2.5 x 2.5 x 2.5 = 15.625 घन सेमी

(ख)

घनाभ की लम्बाई = 1.25 मी, चौड़ाई = 0.75 मी, ऊँचाई = 35 सेमी = 0.35 मी

घनाभ का आयतन = 1.25 x 0.75 x 0.35 = 0.328125 घन मी = 3281.25 घन सेमी

33.

1 लीटर के बर्तन को पानी से भरने के लिए-(क) 50 मिली के बर्तन से कितनी बार में भरेंगे?(ख) 250 मिली के बर्तन से 3 बार भरने के बाद, 50 मिली के बर्तन से पानी भरने पर बर्तन कितनी बार में पूरा-पूरा भर जाएगा?(ग) यदि 50 मिली के बर्तन से 12 बार पानी डालें तो शेष भाग 200 मिली के बर्तन से कितनी बार में भर जाएगा?

Answer»

(क) 50 मिली के बर्तन से 20 बार में भरेंगे।

(ख) 250 मिली के बर्तन से 3 बार भरने के बाद पानी = 3 x 250 = 750 मिली

शेष पानी = 1000 – 750 = 250 मिली

50 मिली के बर्तन से शेष पानी भरा जाएगा =\(\frac{250}{50}\)= 5 बार में

(ग) 50 मिली के बर्तन से 12 बार भरने के बाद पानी = 12 x 50 = 600 मिली

शेष पानी = 1000 – 600 मिली

200 मिली के बर्तन से शेष पानी भरा जाएगा = \(\frac{400}{200}\) = 2 बार में

34.

सरल करो (करके)-(क) 8078 x 307(ख) 2891 x 269(ग) 8490249 ÷ 679(घ) 9576081 + 77896 + 891279(ड़) 9054000 – 7598796 

Answer»

(क) 2479946

(ख) 777679

(ग) 12504,शेषफल = 33

(घ) 10545256

(ड़) 1455204

35.

पानी की एक टंकी 3 मीटर लम्बी, 2 मीटर चौड़ी तथा 1.5 मीटर गहरी है। बताओ उसमें कितना लीटर पानी आएगा, जबकि 1 घन मीटर = 1000 लीटर।

Answer»

टंकी की लम्बाई = 3 मीटर, चौड़ाई = 2 मीटर तथा गहराई = 1.5 मीटर

टंकी का आयतन = 3 x 2 x 1.5 = 9 घन मीटर

चूँकि 1 घनमीटर में पानी आएगा = 1000 लीटर

इसलिए 9 घनमीटर में पानी आएगा = 1000 x 9 = 9000 ली

36.

भारत में वचनबद्ध न्यायपालिका की धारणा को उदाहरणों से समझाइए।

Answer»

भारत में वचनबद्ध न्यायपालिका के उदाहरण

भारत में वचनबद्ध न्यायपालिका के प्रमुख उदाहरण निम्नलिखित हैं-

⦁    न्यायाधीशों की नियुक्ति में वरिष्ठता की अनदेखी-श्रीमती गांधी ने वचनबद्ध न्यायपालिका के लिए न्यायाधीशों की नियुक्ति में वरिष्ठता की अनदेखी की। श्रीमती गांधी ने श्री ए० एन० रे को तीन वरिष्ठ न्यायाधीशों की वरिष्ठता की अनदेखी करके सर्वोच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया।
⦁    न्यायाधीशों का स्थानान्तरण–श्रीमती गांधी ने वचनबद्ध न्यायपालिका के लिए न्यायाधीशों के स्थानान्तरण का सहारा लिया। इन्होंने सन् 1981 में मद्रास उच्च न्यायालय के न्यायाधीश इस्माइल को केरल उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश बनाकर भेजा।
⦁    रिक्त पदों को भरने से मना करना-सरकार ने वचनबद्ध न्यायपालिका के लिए कई बार रिक्त पदों को भरने से भी मना कर दिया।
⦁    अन्य पदों पर नियुक्तियाँ सरकार ने सेवानिवृत्त न्यायाधीशों में से उन्हें राज्यपाल, राजदूत, मन्त्री या किसी आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया, जो सरकार के प्रति वफादार थे।

37.

वचनबद्ध न्यायपालिका की अवधारणा को समझाइए।

Answer»

वचनबद्ध न्यायपालिका वचनबद्ध न्यायपालिका से तात्पर्य न्यायपालिका का सरकार के प्रति प्रतिबद्ध होना या सरकार की नीतियों का आँख मूंदकर पालन करने से है।
सन् 1973 में श्रीमती गांधी ने सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश पद पर तीन वरिष्ठ न्यायाधीशों श्री जे० एम० शैलट, श्री के० एस० हेगड़े तथा श्री ए० एन० ग्रोवर की उपेक्षा करके ए० एन० रे को नियुक्त किया। इस नियुक्ति से उस समय एक राजनीतिक विवाद पैदा हो गया। श्री ए० एन० रे की नियुक्ति के विरोध में तीनों वरिष्ठ न्यायाधीशों ने त्यागपत्र दे दिया। इससे यह प्रश्न उठने लगा कि क्या न्यायपालिका सरकार के प्रति वचनबद्ध होनी चाहिए अथवा स्वतन्त्र।

वचनबद्ध न्यायपालिका के लिए सरकार द्वारा प्रयोग किए गए उपाय-तत्कालीन प्रधानमन्त्री श्रीमती गांधी की सरकार ने न्यायपालिका की वचनबद्धता के लिए निम्नलिखित उपाय किए थे-

1. न्यायाधीशों की नियुक्ति में वरिष्ठता के सिद्धान्त की अनदेखी-श्रीमती गांधी ने वचनबद्ध न्यायपालिका के लिए न्यायाधीशों की नियुक्ति में वरिष्ठता की अनदेखी की तथा उन न्यायाधीशों को पदोन्नत किया, जो सरकार के प्रति वफादार थे।

उदाहरणार्थ- श्री जे० एम० शैलट, के० एस० हेगड़े तथा ए० एन० ग्रोवर की वरिष्ठता की अनदेखी करके श्री ए० एन० रे को सर्वोच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त करवाया। अतः तीनों वरिष्ठ न्यायाधीशों को अपने पद से त्यागपत्र दे दिया। सन् 1977 में पुनः श्री एच० आर० खन्ना की वरिष्ठता की अनदेखी करके श्री एम० एच० बेग को सर्वोच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त करवाया गया।
2. न्यायाधीशों का स्थानान्तरण-श्रीमती गांधी ने वचनबद्ध न्यायपालिका के लिए न्यायाधीशों के स्थानान्तरण का सहारा भी लिया। इन्होंने सन् 1981 में मद्रास उच्च न्यायालय के न्यायाधीश इस्माइल को केरल उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश बनाकर भेजा तथा पटना उच्च न्यायालय के न्यायाधीश वी० एन० सिंह को मद्रास उच्च न्यायालय स्थानान्तरित करवाया।
3. रिक्त पदों को भरने से मना करना-सरकार ने वचनबद्ध न्यायपालिका के लिए कई बार रिक्त पदों को भरने से मना कर दिया, अथवा असमर्थता व्यक्त की।
4. न्यायपालिका की आलोचना-न्यायाधीशों द्वारा लिए जाने वाले निर्णयों की प्राय: अधिकारियों द्वारा आलोचना की जाती थी, जबकि ऐसा किया जाना संविधान के विरुद्ध था।
5. अस्थायी न्यायाधीशों की नियुक्ति-वचनबद्ध न्यायपालिका का एक अन्य उपाय अस्थायी न्यायाधीशों की नियुक्ति करना था। सरकार अस्थायी तौर पर नियुक्त करके न्यायाधीशों की कार्यप्रणाली एवं व्यवहार का अध्ययन करती थी कि वह सरकार के पक्ष में कार्य कर रहा है अथवा विपक्ष में।
6. अन्य पदों पर नियुक्तियाँ-सरकार ने सेवानिवृत्त न्यायाधीशों में से उन्हें राज्यपाल, राजदूत या किसी आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया, जो सरकार के प्रति वफादार थे अथवा सरकार की नीतियों के अनुसार चलते थे।
7. कम वेतन-न्यायाधीशों को अन्य विभागों के मुकाबले कम वेतन मिलता था।
8. कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश का प्रावधान-कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के संवैधानिक प्रावधानों को भी वचनबद्ध न्यायपालिका के लिए प्रयोग किया गया।

निष्कर्ष-उपर्युक्त विवरण से स्पष्ट है कि भारत में न्यायपालिका की प्रतिबद्धता पहले की अपेक्षा कम हुई है लेकिन अभी भी वह पूर्ण रूप से स्वतन्त्र नहीं है। स्वच्छ प्रशासन के लिए न्यायपालिका का स्वतन्त्र होना पहली शर्त है।

38.

जगजीवन राम का संक्षिप्त परिचय दीजिए।

Answer»

जगजीवन राम-जगजीवन राम भारत के महान् स्वतन्त्रता सेनानी और बिहार राज्य के उच्च कोटि के कांग्रेसी नेता थे। इनका जन्म सन् 1908. में हुआ। ये स्वतन्त्र भारत के पहले केन्द्रीय मन्त्रिमण्डल में श्रम मन्त्री बने। सन् 1952 से सन् 1977 तक इन्होंने अनेक मन्त्रालयों की जिम्मेदारी निभाई। वे देश की संविधान सभा के सदस्य थे। वे सन् 1952 से लेकर सन् 1986 तक सांसद रहे। सन् 1977 से सन् 1979 तक देश के उप-प्रधानमन्त्री पद पर रहे। इन्होंने अपना सम्पूर्ण जीवन दलितों की सेवा में बिताया और उनकी सेवा के लिए हमेशा तैयार रहते थे। सन् 1986 में इनका निधन हो गया।

39.

जनता के संसद मार्च का नेतृत्व कब व किसने किया?

Answer»

सन् 1975 में जनता के संसद मार्च का नेतृत्व जयप्रकाश नारायण ने किया।

40.

आपातकाल में संवैधानिक एवं उत्तर-संवैधानिक पक्षों का वर्णन कीजिए।

Answer»

आपातकाल के संवैधानिक एवं उत्तर-संवैधानिक पक्ष
आपातकाल के समय कुछ संवैधानिक एवं उत्तर-संवैधानिक पक्ष भी सामने आए। श्रीमती गांधी ने संविधान में 39वाँ संवैधानिक संशोधन किया। इस संशोधन द्वारा राष्ट्रपति, उप-राष्ट्रपति, प्रधानमन्त्री एवं स्पीकर के चुनाव से सम्बन्धित मुकदमों की सुनवाई की सर्वोच्च न्यायालय की शक्ति समाप्त कर दी गई। 39वें संविधान संशोधन की उपधारा-4 के अन्तर्गत उपर्युक्त पदों से सम्बन्धित चुनावों को न्यायालयों में चुनौती देने की शक्ति को समाप्त कर दिया गया। इस संशोधन को पास करने का मुख्य उद्देश्य श्रीमती गांधी को इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा दिए गए निर्णय से राहत दिलाना था।
विरोधी पक्ष ने 39वें संशोधन को संविधान के मूल ढाँचे के विरुद्ध बताया परन्तु उच्च न्यायालय की पीठ के पाँच में से चार न्यायाधीशों ने 39वें संशोधन को वैध ठहराया तथा इस संशोधन के आधार पर श्रीमती गांधी के निर्वाचन को पूर्ण रूप से वैध ठहराया। इस प्रकार श्रीमती गांधी के निर्वाचन को वैध ठहराने के लिए इलाहाबाद उच्च न्यायालय से लेकर सर्वोच्च न्यायालय तक बड़ी कवायद की गई।

41.

निम्नलिखित में से नक्सलवादी आन्दोलन से किसका सम्बन्ध है-(a) सुरेश कलमाड़ी(b) चारु मजूमदार(c) ममता बनर्जी(d) जयललिता।

Answer»

सही विकल्प है (b) चारु मजूमदार।

42.

अनुच्छेद 352 क्या है?

Answer»

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 352 में देश में आपातकाल की घोषणा की जा सकती है। सन् 1962, सन् 1971 एवं सन् 1975 में की गई आपातकाल की घोषणा अनुच्छेद 352 के अन्तर्गत ही की गई थी।

43.

भारत में वचनबद्ध न्यायपालिका की धारणा का उदय कैसे हुआ?

Answer»

भारत में वचनबद्ध न्यायपालिका का उदय-केशवानन्द भारती मुकदमे की सुनवाई सर्वोच्च न्यायालय की एक 13 सदस्यीय संविधान पीठ ने की। 13 में से 9 न्यायाधीशों ने यह निर्णय दिया कि संसद मौलिक अधिकारों सहित संविधान में संशोधन कर सकती है, परन्तु संविधान के मूलभूत ढाँचे में परिवर्तन नहीं कर सकती। इस निर्णय से सरकार एवं न्यायपालिका में मतभेद बढ़ गए, क्योंकि सन् 1973 में सरकार का नेतृत्व श्रीमती इन्दिरा गांधी कर रही थीं। अत: यह विवाद श्रीमती इन्दिरा गांधी एवं न्यायालय के मध्य हुआ जिसमें जीत न्यायालय की हुई क्योंकि न्यायालय ने संसद की संविधान में संशोधन करने की शक्ति को सीमित कर दिया। इसी कारण श्रीमती गांधी ने वचनबद्ध न्यायपालिका की धारणा को आगे बढ़ाया। सन् 1975 में आपातकाल के समय वचनबद्ध न्यायपालिका का सिद्धान्त कार्यपालिका का सिद्धान्त बन गया।

44.

चौधरी चरणसिंह के जीवन पर संक्षिप्त नोट लिखिए।

Answer»

चौधरी चरणसिंह का जन्म सन् 1902 में हुआ। ये महान् स्वतन्त्रता सेनानी थे और प्रारम्भ में उत्तर प्रदेश की राजनीति में सक्रिय रहे। ये ग्रामीण एवं कृषि विकास की नीति और कार्यक्रमों के कट्टर समर्थक थे। सन् 1967 में कांग्रेस पार्टी को छोड़कर इन्होंने भारतीय क्रान्ति दल का गठन किया। वे दो बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमन्त्री बने। ये जयप्रकाश नारायण के क्रान्ति आन्दोलन से जुड़े और सन् 1977 में जनता पार्टी के संस्थापकों में से एक थे। सन् 1977 से सन् 1979 तक ये भारत के उप-प्रधानमन्त्री और गृह-मन्त्री रहे। इन्होंने लोक दल की स्थापना की। ये कुछ महीनों के लिए जुलाई 1979 से जनवरी 1980 के बीच भारत के प्रधानमन्त्री रहे। चौधरी चरणसिंह का निधन सन् 1987 में हुआ।

45.

हमारी राजव्यवस्था के निम्नलिखित पक्ष पर आपातकाल का क्या असर हुआ-(i) नागरिक अधिकारों की दशा और नागरिकों पर इसका असर।(ii) कार्यपालिका और न्यायपालिका के सम्बन्ध।(iii) जनसंचार माध्यमों के कामकाज।(iv) पुलिस और नौकरशाही की कार्रवाइयाँ।

Answer»

(i) आपातकाल के दौरान नागरिक अधिकारों को निलम्बित कर दिया गया तथा श्रीमती गांधी द्वारा ‘मीसा कानून’ लागू किया गया जिसमें किसी भी नागरिक को बिना कारण बताए कानूनी हिरासत में लिया जा सकता था।
(ii) आपातकाल में कार्यपालिका एवं न्यायपालिका एक-दूसरे के सहयोगी हो गए, क्योंकि सरकार ने सम्पूर्ण न्यायपालिका को सरकार के प्रति वफादार रहने के लिए कहा तथा आपातकाल के दौरान कुछ हद तक न्यायपालिका सरकार के प्रति वफादार भी रही। इस प्रकार आपातकाल के दौरान न्यायपालिका कार्यपालिका के आदेशों का पालन करने वाली संस्था बन गई थी।
(iii) आपातकाल के दौरान जनसंचार पर प्रतिबन्ध लगा दिया गया था, कोई भी समाचार-पत्र सरकार के खिलाफ कोई भी खबर नहीं छाप सकता था तथा जो भी खबर अखबार द्वारा छापी जाती थी उसे पहले सरकार से स्वीकृति प्राप्त करनी पड़ती थी।
(iv) आपातकाल के दौरान पुलिस और नौकरशाही, सरकार के प्रति वफादार बनी रही, यदि किसी पुलिस अधिकारी या नौकरशाही ने सरकार के आदेशों को मानने से मना किया तो उसे या तो निलम्बित कर दिया गया या गिरफ्तार कर लिया गया।

46.

भारतीय संविधान में न्यायपालिका की स्वतन्त्रता हेतु किए गए कोई दो प्रावधान लिखिए।

Answer»

⦁    न्यायाधीशों को केवल महाभियोग द्वारा ही पद से हटाया जा सकता है।
⦁    न्यायाधीशों की योग्यता का संविधान में वर्णन किया गया है।

47.

अगर उत्तर और दक्षिण के राज्यों में मतदाताओं ने इतने अलग ढर्रे पर मतदान किया, तो हम कैसे कहें कि 1977 के चुनावों का जनादेश क्या था?

Answer» सन् 1977 के चुनावों में आजादी के बाद पहली बार कांग्रेस लोकसभा का चुनाव हारी। कांग्रेस को लोकसभा की मात्र 154 सीटें मिलीं। 3 से 35 प्रतिशत से भी कम वोट प्राप्त हुए। जनता पार्टी और उसके साथी दलों को 330 सीटें प्राप्त हुईं।
लेकिन तत्कालीन चुनावी नतीजों पर प्रकाश डालें तो यह एहसास होता है कि कांग्रेस देश में हर जगह चुनाव नहीं हारी थी। महाराष्ट्र, गुजरात और उड़ीसा में उसने कई सीटों पर अपना कब्जा बरकरार रखा था और दक्षिण भारत के राज्यों में तो उसकी स्थिति काफी मजबूत थी। लेकिन इन चुनावों की सबसे महत्त्वपूर्ण बात यह थी कि उत्तर भारत में राजनीतिक प्रतिद्वन्द्विता की प्रकृति में दूरगामी बदलाव आए। उत्तर भारत में मध्य वर्ग का जनादेश कांग्रेस के हाथ से दूर जाने लगा और मध्यम वर्ग के कई तबके जनता पार्टी को एक मंच के रूप में पाकर इससे आ जुड़े।
48.

वचनबद्ध नौकरशाही को समझाइए।

Answer»

वचनबद्ध नौकरशाही का अर्थ है कि सरकार की नीति व कार्यक्रमों के प्रति वचनबद्ध अधिकारीगण (अफसर) आँखें मूंद करके शासक दल की नीतियों को लागू करेंगे, चाहें उनका परिणाम कुछ भी क्यों न हो। वचनबद्ध नौकरशाही में राज्य का महत्त्व बढ़ जाता है, राज्य का क्षेत्र व्यापक हो जाता है।

49.

प्रतिबद्ध नौकरशाही की अवधारणा को स्पष्ट कीजिए।

Answer»

प्रतिबद्ध नौकरशाही की अवधारणा
पतिबदनौकाशाटी की प्रतिबद्ध नौकरशाही का अर्थ है कि नौकरशाही किसी विशिष्ट राजनीतिक दल के सिद्धान्तों एवं नीतियों से बँधी हुई रहती है और उस दल के निर्देशन में ही कार्य करती है। प्रतिबद्ध नौकरशाही निष्पक्ष एवं स्वतन्त्र होकर कार्य नहीं करती। इसका कार्य किसी दल विशेष की योजनाओं को बिना कोई प्रश्न उठाए आँखें मूंद कर लागू करना होता है। लोकतान्त्रिक देशों में नौकरशाही प्रतिबद्ध नहीं होती। परन्तु साम्यवादी देशों में जैसे कि चीन में वचनबद्ध नौकरशाही पायी जाती है। भारत में प्रतिबद्ध नौकरशाही से आशय किसी दल के सिद्धान्तों के प्रति वचनबद्ध न होकर संविधान के प्रति वचनबद्धता है।

50.

वचनबद्ध न्यायपालिका से क्या आशय है?

Answer»

ऐसी न्यायपालिका जो एक दल विशेष या सरकार विशेष के प्रति वफादार हो तथा उसके निर्देशों एवं आदेशों के अनुसार ही चले, उसे वचनबद्ध न्यायपालिका कहा जाता है।