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This section includes 7 InterviewSolutions, each offering curated multiple-choice questions to sharpen your Current Affairs knowledge and support exam preparation. Choose a topic below to get started.

1.

सर्वोत्तम शौच-गृह कौन-सा होता है ?

Answer»

जल-संवहन अथवा फ्लश विधि द्वारा संचालित शौच-गृह सर्वोत्तम होता है।

2.

घर के फर्नीचर की देखभाल और सफाई आप किस प्रकार करेंगी?यालकड़ी के फर्नीचर की देखभाल आप किस प्रकार करेंगी?

Answer»

घर का फर्नीचर प्रायः लकड़ी, लोहे अथवा ऐलुमिनियम का बना होता है। इसकी देखभाल व सफाई निम्न प्रकार से की जा सकती है

(1) लोहे का फर्नीचर-इसे नरम कपड़े से झाड़ा जाता है और गीले कपड़े व साबुन से साफ किया जा सकता है। वर्ष में एक बार इस पर पेन्ट अवश्य किया जाना चाहिए।

(2) ऐलुमिनियम का फर्नीचर-इसे गीले कपड़े व साबुन से साफ किया जा सकता है। बहुत गन्दा होने पर उबलते पानी में थोड़ा सिरका या नींबू का रस मिलाकर इसे साफ करना चाहिए। रगड़ने एवं खरोंचने वाली वस्तुओं का ऐलुमिनियम के फर्नीचर परे प्रयोग नहीं करना चाहिए।

(3) लकड़ी का फर्नीचर-पॉलिश की हुई लकड़ी को आधा लीटर गुनगुने पानी में एक चम्मच सिरका मिलाकर कपड़ा भिगोकर साफ करना चाहिए।सूखने पर फर्नीचर क्रीम का प्रयोग कर इसे चमकाया जा सकता है। वार्निश की हुई लकड़ी, एक लीटर पानी में एक बड़ी चम्मच पैराफीन डालकर, इसमें कपड़ा भिगोकर साफ की जा सकती है। सूखने पर आवश्यकता होने पर दोबारा इस पर वार्निश की जा सकती है। इनैमल पेन्ट की हुई लकड़ी प्रायः गीले कपड़े से पोंछने से साफ हो जाती है। चमक लाने के लिए साफ पानी में थोड़ा-सा सिरका मिलाकर धोना चाहिए तथा फिर सूखे कपड़े से पोंछ देना चाहिए।

3.

घर की सजावट के लिए किस वस्तु का प्रयोग किया जाता है?(क) ईंट(ख) बालू(ग) सीमेन्ट(घ) फूलदान

Answer»

सही विकल्प है (घ) फूलदान

4.

सजावट का क्या अर्थ है?(क) परदे लगाना(ख) चित्रों से घर सजाना(ग) फूलों से घर सजाना(घ) घर सुव्यवस्थित रखना

Answer»

सही विकल्प है (घ) घर सुव्यवस्थित रखना

5.

घर की सजावट के लिए सबसे अधिक आवश्यक है(क) सफाई(ख) मूल्यवान कालीन(ग) दुर्लभ कलाकृतियाँ(घ) विदेशी फर्नीचर

Answer»

सही विकल्प है (क) सफाई

6.

सजावट से पूर्व आवश्यक है(क) चित्र एकत्र करना(ख) कालीन खरीदना(ग) फूलों का चुनाव करना(घ) कमरे की सफाई करना

Answer»

सही विकल्प है (घ) कमरे की सफाई करना

7.

गृह-व्यवस्था किसे कहते हैं ?

Answer»

गृह के सभी कार्य पूर्ण रूप से होना, आय और व्यय में ताल-मेल बनाए रखना तथा घर की सफाई का भी ध्यान रखना गृह-व्यवस्था कहलाती है।

8.

लकड़ी के फर्नीचर की देख-रेख आप किस प्रकार करेंगी?

Answer»

इसकी वर्ष में एक बार मरम्मत होनी चाहिए। आवश्यकतानुसार पेन्ट, पॉलिश एवं वार्निश करने से लकड़ी के फर्नीचर पर चमक आती है तथा इसकी आयु बढ़ती है।

9.

कमरे में परदे लगाने के दो प्रमुख उद्देश्य लिखिए।

Answer»

कमरे में परदे लगाने के दो प्रमुख उद्देश्य निम्न है 

⦁   तेज रोशनी, लू एवं ठण्डी हवा से बचाव करना 

⦁   कमरे के अन्दर एकान्तता प्रदान करना और कमरे की सज्जा में वृद्धि करना

10.

फूलदान में फूल जल्दी न सूखे, इसके लिए आप क्या उपाय करेंगी?

Answer»

उम्र फूलों को अधिक समय तक ताजा रखने के लिए फूलदान का पानी प्रतिदिन बदल दिया जाना चाहिए तथा इस पानी में थोड़ा-सा नमक मिला देना चाहिए।

11.

संयुक्त स्नानघर से आप क्या समझती हैं?

Answer»

संयुक्त स्नानघर में स्नानघर व शौचालय साथ-साथ होते हैं। यह प्राय: कमरों से संलग्न होते हैं।

12.

घरेलू फर्नीचर का मुख्यतम गुण है उसका(क) नक्काशीदार होना(ख) अधिक-से-अधिक सजावटी होना(ग) उपयोगी होना(घ) सस्ता होना

Answer»

सही विकल्प है (ग) उपयोगी होना

13.

फर्नीचर कितने प्रकार के होते हैं ?

Answer»

फर्नीचर अनेक प्रकार के होते हैं; जैसे-लकड़ी का फर्नीचर, पाइप का फर्नीचर, माइका लगा फर्नीचर, प्लास्टिक का फर्नीचर, फोम का फर्नीचर तथा रेक्सीन लगा फर्नीचर। अब फाइबर-ग्लास का भी फर्नीचर बनने लगा है।

14.

लकड़ी के फर्नीचर की देख-रेख कैसे करेंगी?

Answer»

उम्र लकड़ी के फर्नीचर की देख-रेख के लिए उन पर समय-समय पर पॉलिश तथा प्रतिदिन सफाई करनी अति आवश्यक है।

15.

घरेलू फर्नीचर कैसा होना चाहिए?

Answer»

घरेलू फर्नीचर आकर्षक होने के साथ-साथ मजबूत, टिकाऊ तथा आवश्यकतानुसार अधिक-से-अधिक उपयोगी होना चाहिए।

16.

बच्चों के कमरे में चित्र लगाने चाहिए|(क) फूलों के (ख) बालोपयोगी(ग) कलात्मक(घ) श्रृंगारिक

Answer»

सही विकल्प है (ख) बालोपयोगी

17.

गृह-सज्जा का प्रमुख साधन किसे माना जाता है?

Answer»

फर्नीचर को गृह-सज्जा का प्रमुख साधन माना जाता है।

18.

सामान्य रूप से घर के किस भाग की सज्जा को सर्वाधिक महत्त्व दिया जाता है?(क) रसोईघर की(ख) भोजन के कमरे की(ग) ड्राइंग-रूम की(घ) शयन-कक्ष की

Answer»

सही विकल्प है (ग) ड्राइंग-रूम की

19.

गृह-सज्जा के लिए अपनाई जाने वाली पुष्प-व्यवस्था की जापानी शैली को क्या कहते हैं?

Answer»

गृह-सज्जा के लिए अपनाई जाने वाली पुष्प-व्यवस्था की जापानी शैली को इकेबाना कहते है।

20.

गृह-सज्जा का आवश्यक तत्त्व है(क) उपयोगिता(ख) सुन्दरता(ग) अभिव्यक्ति(घ) ये सभी

Answer»

सही विकल्प है (घ) ये सभी

21.

‘इकेबाना’ पुष्प-सज्जा से आप क्या समझती हैं?

Answer»

उक्ट इस आधुनिक पुष्प-सज्जा में फूल-पत्तियों के साथ छोटी-छोटी सूखी टहनियों, घास-फूस एवं छोटी-छोटी कलात्मक वस्तुओं का भी प्रयोग किया जाता है। यह मूल रूप से पुष्प-सज्जा की एक जापानी शैली है।

22.

घर की उपयुक्त सजावट गृहिणी के किन गुणों की परिचायक है?

Answer»

घर की उपयुक्त सजावट गृहिणी की सूझ-बूझ, सुरुचि एवं सुघढ़ता की परिचायक होती है।

23.

शयन-कक्ष एवं अध्ययन-कक्ष का स्थान कैसा होना चाहिए?

Answer»

दोनों के लिए स्वच्छ एवं शान्त स्थान होना चाहिए।

24.

प्लास्टिक के फर्नीचर की देखभाल तथा सफाई का सामान्य विवरण प्रस्तुत कीजिए।

Answer»

वर्तमान युग प्लास्टिक का युग है। अब जीवनोपयोगी अधिकांश वस्तुएँ प्लास्टिक से ही बनाई जा रही हैं। इसी श्रृंखला में प्लास्टिक के फर्नीचर का भी अत्यधिक प्रचलन हो गया है। प्लास्टिक का फर्नीचर सस्ता तथा सुविधाजनक होता है। इस फर्नीचर की देखभाल तथा सफाई प्रायः आसान होती है। सामान्य रूप से प्लास्टिक के फर्नीचर को किसी भी कपड़े से झाड़-पोंछ कर साफ किया जा सकता है। इससे उसकी धूल-मिट्टी का निवारण हो जाता है।

यदि प्लास्टिक के फर्नीचर पर चिकनाई, मैले या धब्बे लग जाएँ तो उस स्थिति में गीले कपड़े एवं साबुन द्वारा इसे सरलता से साफ किया जा सकता है। गीली सफाई के उपरान्त सूखे कपड़े से पोंछकर सुखा देना ही पर्याप्त होता है। प्लास्टिक के फर्नीचर की सफाई के समान देखभाल भी सरल है। प्लास्टिक के फर्नीचर को तेज धूप एवं ताप से बचाना अति आवश्यक होता है। यह ज्वलनशील भी होता है। अत: आग से इसे सदैव दूर रखना चाहिए। इसके अतिरिक्त यह भी आवश्यक है कि प्लास्टिक के फर्नीचर पर अधिक दबाव एवं वजन न डाला जाए।

25.

‘घर की सफाई तथा ‘गृह-सज्जा’ के सम्बन्ध को स्पष्ट कीजिए।

Answer»

‘घर की सफाई’ तथा ‘गृह-सज्जा’ का परस्पर घनिष्ठ सम्बन्ध है। गृह-सज्जा के लिए अनिवार्य है कि घर में सफाई भी हो। सफाई से आशय है-गन्दगी का अभाव, जबकि सजावट का अर्थ है-घर की वस्तुओं की सुन्दर एवं कलात्मक व्यवस्था। सजावट के अभाव में भी घर की सफाई रह सकती है, परन्तु घर की सफाई के अभाव में घर को सुसज्जित नहीं माना जा सकता। इस प्रकार कहा जा सकता है कि सजावट के अभाव में सफाई रह सकती है, परन्तु सफाई के अभाव में सजावट सम्भव नहीं है।

26.

सजावट की कला के प्रमुख सिद्धान्त कौन-कौन से हैं?

Answer»

सजावट की कला के तीन प्रमुख सिद्धान्त हैं

⦁    अनुरूपता
⦁    सन्तुलन
⦁    समानुपात

27.

टिप्पणी लिखिए-घर के बरामदे का महत्त्व एवं सजावट।

Answer»

भारतीय घरों में बरामदे का अधिक उपयोग होता है। ग्रीष्म ऋतु में सुबह और शाम तथा वर्षा ऋतु में बरामदे में बैठना बड़ा रुचिकर लगता है। सर्दियों में दिन के समय कमरे बहुत ठण्डे रहते हैं। अत: बरामदा धूप और प्रकाश के कारण अधिक भाता है। बरामदा एक बहुउद्देशीय कक्ष या अनौपचारिक बैठक का काम करता है। बहुधा आगन्तुकों एवं मित्र वर्ग के साथ गप्पे मारने का भी यही स्थान होता है। इसीलिए बेंत को हल्का फर्नीचर व दो-चार गमले बरामदे में अवश्य लगाने चाहिए। बरामदे में क्रोटन, पाम, डिफनबेकिया तथा मनी-प्लाण्टे के गमले भी रखे जा सकते हैं। इनके अतिरिक्त दीवार पर एक-दो चित्र भी लगाए जा सकते हैं।

28.

“घर की अच्छी सजावट अर्थव्यवस्था से नहीं, परन्तु गृहिणी की अभिरुचि से होती है।” स्पष्ट कीजिए।याअधिक धन के खर्च के बिना घर की सजावट कैसे कर सकते हैं ?

Answer»

आदर्श गृहिणी मितव्ययिता के साथ अपनी कलात्मक अभिरुचि के आधार पर घर की अच्छी सजावट कर सकती है।

29.

गृह-सज्जा के कलात्मक सिद्धान्तों का वर्णन कीजिए।यासजावट के मूलभूत आधार क्या हैं? सजावट में रंग-व्यवस्था का क्या महत्त्व है? स्पष्ट कीजिए।यागृह-सज्जा के मूलभूत कलात्मक सिद्धान्त कौन-से हैं? किन्हीं दो सिद्धान्तों का वर्णन कीजिए।

Answer»

गृह-सज्जा के कलात्मक सिद्धान्त (आधार) कला किसी सुन्दर विषय-वस्तु के प्रति मनुष्य की अपनी भावनाओं की अभिव्यक्ति है। इसके उदाहरण हैं–प्रकृति, संगीत, गीत, मूर्ति निर्माण, चित्रकला, सुन्दर-सुन्दर भवनो के निर्माण इत्यादि। जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में कला का अपना अलग महत्त्व है। कला के निर्माण के चार मुख्य तत्त्व हैं-रेखाएँ, आकार, बनावट की विधियाँ तथा रंग। गृह-सज्जा में कला के इन मूल तत्त्वों के आधार पर कुछ मूलभूत सिद्धान्तों का पालन किया जाता है।

गृह-सज्जा के प्रमुख मूलभूत सिद्धान्त निम्नलिखित हैं-

⦁    समानुपात
⦁    लय
⦁    सबलता या क्रम
⦁    सन्तुलन 
⦁    अनुकूलन
 
(1) समानुपात-गृह-सज्जा का एक प्रमुख सिद्धान्त है-समानुपात का सिद्धान्त। कमरे में फर्नीचर व्यवस्थित करने, पुष्प एवं चित्र लगाने, दीवारों की सजावट इत्यादि में वस्तु एवं पृष्ठभूमि में समानुपात का ध्यान रखना चाहिए। समानुपात डिजाइन बनाने का एक महत्त्वपूर्ण सिद्धान्त है। इसमें किसी वस्तु की लम्बाई, चौड़ाई एवं ऊँचाई के तुलनात्मक सम्बन्धों का ध्यान रखना होता है। उदाहरण के लिए—मकान के कमरों व उनके दरवाजो एवं खिड़कियों की लम्बाई, चौड़ाई व ऊँचाई समानुपात के नियमों के अनुसार रखने पर उनकी शोभा बढ़ जाती है। एक बड़े कमरे में उसी अनुपात में रखा बड़ी सोफा तथा उसके पीछे दीवार पर समानुपात मे लगा बड़े आकार का चित्र अधिक अच्छे लगते हैं। इसी प्रकार फूलदान व फूलों में नियमित समानुपात रखने पर पुष्प-सज्जा अधिक आकर्षक प्रतीत होती है।

(2) लय-आकृतियों, नापों, रेखाओं तथा रंगों के सम्बन्ध को लय कहते हैं। इसका गति से घनिष्ठ सम्बन्ध होता है। इसमें रेखाओं, आकृतियों व रंगों आदि का प्रयोग बार-बार एक निश्चित क्रम में किया जाता है। घर की सजावट में प्रत्येक स्थान पर लय का होना आवश्यक है।

(3) सबलता या क्रम-दृश्य-कला; जैसे—चित्र, मूर्ति, कशीदाकारी, आदि; में कुछ अंश प्रमुख होते हैं। ये आकर्षण बिन्दु होते हैं तथा सबल अंश कहलाते हैं। सबलता का यह सिद्धान्त गृह-सज्जा में भी प्रयुक्त होता है। घर के किसी भी कमरे में खिड़की के परदे, अच्छे चित्र, दरी-कालीन आदि में से कोई भी एक आकर्षण का केन्द्र हो सकता है, परन्तु कमरे की सजावट में आकर्षण बिन्दु एक अथवा . दो से अधिक नहीं होने चाहिए।

(4) सन्तुलन--विभिन्न आकारों, डिजाइनों व रंगों इत्यादि के मध्य व्यवस्थित सम्बन्ध सन्तुलन कहलाता है। सन्तुलन दो प्रकार का होता है–

(अ) औपचारिक-यह नियमित सन्तुलन होता है। इसमें प्रमुख केन्द्रबिन्दु के दोनों ओर समान भार व समान आकृतियों की वस्तुओं को समान दूरी पर व्यवस्थित किया जाता है।
(ब) अनौपचारिक–यह अनियमित सन्तुलन अधिक प्रभावशाली माना जाता है। इसमें किसी असमान भार वाली वस्तुओं को केन्द्र-बिन्दु के दोनों ओर असमान दूरियों पर व्यवस्थित किया जाता है।
 
(5) अनुकूलन-जब वस्तुओं में पर्याप्त आपसी समानता दिखाई देती है तो इसे अनुकूलन अथवा अनुरूपता कहते हैं। गृह-सज्जा में अनुकूलता के सिद्धान्त को कला के चारों प्रमुख तत्त्वों; रेखा, आकार, बनावट तथा रंग; के प्रयोग में लागू कर सकते हैं।

 गृह-सज्जा में रंग व्यवस्था का महत्त्व उचित रंग कमरे की शोभा को जहाँ चार-चाँद लगा सकते हैं, वहीं अनुचित रंग उसको भद्दा भी बना सकते हैं। बढ़िया कपड़े का परदा कलात्मक दृष्टि से किसी काम का नहीं यदि उसका रंग कमरे के अनुकूल नहीं बैठता। कभी-कभी साधारण-सी वस्तु से उपयुक्त रंग के कारण कमरे की सज्जा का प्रभाव कहीं अधिक बढ़ जाता है।

30.

घर में बच्चों के कमरे की उचित सजावट आप किस प्रकार करेंगी? या स्कूल जाने वाले बालक के कमरे की व्यवस्था आप किस प्रकार करेंगे?

Answer»

पढ़ने वाले बच्चों का कमरा खुला, हवादार, प्रकाशमय तथा गृहिणी के कमरे के पास होता है। यह बच्चों के अध्ययन के लिए उपयुक्त रहता है। इस कमरे की सजावट एवं व्यवस्था करते समय निम्नलिखित बातों को ध्यान में रखा जाता है

⦁    बच्चों के लिए अलग-अलग आवश्यक ऊँचाई की डेस्क व कुर्सियों की व्यवस्था।
⦁     बिजली के बल्ब, ट्यूब व टेबल लैम्प द्वारा उपयुक्त प्रकाश की व्यवस्था।
⦁     समय देखने के लिए तथा सुबह उठने के लिए अलार्म घड़ी।
⦁    दिनांक देखने के लिए कमरे में एक कैलेण्डर होना चाहिए।
⦁    कमरे के दरवाजे और खिड़कियों आदि पर उचित रंग के परदे होने चाहिए।
⦁    दीवारों पर शिक्षाप्रद चित्र तथा बच्चों की रुचि के अनुसार प्रसिद्ध खिलाड़ियों के चित्र होने चाहिए।
⦁    पुस्तकें तथा स्कूल बैग रखने के लिए अलमारी की व्यवस्था।
⦁    कपड़े रखने की अलमारी की व्यवस्था।
⦁    सोने के लिए पलंग व बिस्तर आदि की व्यवस्था।

31.

रंग-व्यवस्था से आप क्या समझती हैं? स्पष्ट कीजिए।याघर की सजावट में रंगों का महत्त्व लिखिए।

Answer»

रंगों का परस्पर तालमेल अथवा समन्वय रंग-व्यवस्था कहलाता है। रंग-व्यवस्था के सामान्य लक्षण निम्नलिखित हैं-

⦁     कुछ रंग एक-दूसरे की निकटता से शोभा बढ़ाने में सहायक सिद्ध होते हैं। इन्हें सहयोगी रंग कहते हैं; जैसे पीला व नारंगी, लाल व नारंगी, नीला व हरा तथा हरा व पीला इत्यादि।

⦁    कुछ रंग एक-दूसरे के विरोधी माने जाते हैं; जैसे—लाल व हरा, पीला व नीला इत्यादि।

⦁     कुछ रंग गर्म प्रकृति के होते हैं; जैसे—लाल, नारंगी तथा पीला।

⦁     कुछ रंग; जैसे कि हरा व नीला; ठण्डी प्रकृति के होते हैं।

⦁     प्रकाशयुक्त कमरों को सदैव गहरे रंग से पेन्ट कराना चाहिए।

⦁    कम प्रकाश वाले या अँधेरे कमरों को सफेद अथवा हल्के रंगों से पेन्ट कराना चाहिए।

⦁    कुछ रंगों में सफेद रंग का टिण्ट देने से उनके आकर्षण में वृद्धि होती है। रंग-व्यवस्था का उपयुक्त ज्ञान घर की रंगों द्वारा सजावट करने के लिए अति आवश्यक है।

32.

घर की सजावट के मूलभूत सिद्धान्त कौन-कौन से हैं? संक्षेप में वर्णन कीजिए।याघर की आन्तरिक सजावट के क्या सिद्धान्त हैं? इनकी क्या उपयोगिता है?याघर की आन्तरिक सजावट से क्या तात्पर्य है? घर की सजावट के लिए किन-किन सिद्धान्तों को ध्यान में रखना चाहिए और क्यों?याभीतरी सजावट के प्रमुख सिद्धान्त लिखिए।

Answer»

घर की सजावट के सिद्धान्त जैसा कि हम जानते हैं कि गृह-सज्जा अपने आप में एक व्यवस्थित कला एवं विज्ञान है; अतः गृह-सज्जा का कुछ सिद्धान्तों पर आधारित होना स्वाभाविक है। विद्वानों ने गृह-सज्जा के तीन मुख्य
गृह-सज्जा (घर की सजावट) 55 सिद्धान्तों का उल्लेख किया है। ये सिद्धान्त क्रमश:
इस प्रकार हैं–
⦁    सुन्दरता,
⦁    अभिव्यक्ति तथा
⦁    उपयोगिता।

गृह-सज्जा के इन तीनों सिद्धान्तों का संक्षिप्त परिचय निम्नवर्णित है-

(1) सुन्दरता--गृह-सज्जा का मूलभूत तथा मुख्य सिद्धान्त है–सुन्दरता। आदिकाल से ही व्यक्ति सुन्दरता का उपासक है। व्यक्ति स्वभाव से ही सौन्दर्यप्रिय है तथा अपनी प्रत्येक वस्तु एवं पर्यावरण को सुन्दर एवं आकर्षक देखना चाहता है। इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए कहा जा सकता है। कि गृह-सज्जा को उद्देश्य घर को सुन्दर एवं आकर्षक बनाना होता है। सुन्दरता के अभाव में किसी भी घर को सुसज्जित नहीं माना जा सकता, भले ही घर में असंख्य बहुमूल्य वस्तुएँ क्यों न एकत्र कर दी जाएँ।

सैद्धान्तिक रूप से यह स्वीकृत है कि सुसज्जित गृह को सुन्दर एवं आकर्षक होना चाहिए, पत। प्रश्न यह उठता है कि सुन्दरता से क्या आशय है? सुन्दरता के अर्थ को प्रस्तुत करना इतना सरल नई है। यह एक जटिल प्रश्न है तथा भिन्न-भिन्न दृष्टिकोणों से इसकी व्याख्या की जाती रही है। भिन्न-भिन्न कालों में सुन्दरता के प्रतिमान बदलते रहे हैं।
 
इस कठिनाई के होते हुए भी सुन्दरता को परिभाषित करने के प्रयास सदैव होते रहे हैं। ए० एच० रट (A. H. Rutt) के शब्दों में, “सुन्दरता गुणों का वह संयोजन है, जो पारखी आँखों या कानों को सुखद लगे।” इसी से मिलती-जुलती परिभाषा सुन्दरराज ने इन शब्दों में प्रस्तुत की है, “सुन्दरता वह तत्त्व अथवा गुण है, जो इन्द्रियों को आनन्दित करता है तथा आत्मा को उच्च अनुभूति देता है।” इस कथन के आधार पर कहा जा सकता है कि सुन्दरता का सम्बन्ध हमारे शरीर तथा आत्मा दोनों से होता है। सुन्दरता सदैव आनन्ददायक होती है तथा उसका प्रभाव प्रत्येक व्यक्ति पर पड़ता है। गृह-सज्जा में निहित सुन्दरता का अच्छा प्रभाव घर में रहने वाले समस्त व्यक्तियों पर पड़ता है।

घर की आन्तरिक सुन्दरता व्यक्ति एवं परिवार को सुख देने में सहायक होती है। अब प्रश्न उठता है कि गृह-सज्जा में सौन्दर्य का समावेश कैसे हो? इस विषय में रट महोदय का कहना है कि गृह-सज्जा में सौन्दर्य का विकास अध्ययन, निरीक्षण तथा अनुभव द्वारा किया जा सकता है। आजकल प्राय: सभी पत्र-पत्रिकाओं में गृह-सज्जा सम्बन्धी अनेक लेख प्रकाशित होते रहते हैं। इसी प्रकार दूरदर्शन तथा फिल्मों के माध्यम से भी गृह-सज्जा में सौन्दर्य के तत्त्व को जाना जा सकता है। गृहिणी अपने अनुभवों द्वारा भी गृह-सज्जा को अधिक सुन्दर एवं आकर्षक बना सकती है। वर्तमान समय में दूरदर्शन के प्रायः सभी धारावाहिक अपने मूल  कथानक के प्रदर्शन के साथ-ही-साथ गृह-सज्जा एवं उत्तम जीवन-शैली को भी दर्शाया करते हैं।

(2) अभिव्यक्ति-गृह-सज्जा का एक सिद्धान्त अभिव्यक्ति या अभिव्यंजकता भी है। गृह-सज्जा के माध्यम से कुछ-न-कुछ स्पष्ट अभिव्यक्ति होती है। इसी अभिव्यक्ति के आधार पर गृह-सज्जा का मूल्यांकन किया जाता है। अभिव्यक्ति एक व्यक्तिगत विशेषता मानी जा सकती है, जो गृह-सज्जा द्वारा प्रकट होती है। इस तथ्य को सुन्दरराज ने इन शब्दों में स्पष्ट किया है, “यह वह गुण है, जो एक घर को दूसरे से भिन्न बनाता है। यह घर में रहने वाले सदस्यों के व्यक्तित्व को स्पष्टतः प्रतिबिम्बित करता है।”

अब प्रश्न उठता है कि गृह-सज्जा के सन्दर्भ में अभिव्यक्ति का क्या स्थान एवं महत्त्व है? इस विषय में टी० एफ० हेमलिन (T. F. Hamlin) ने स्पष्ट किया है, “प्रत्येक भवन, प्रत्येक सुनियोजित कक्ष में यह सामर्थ्य होनी चाहिए कि वह हमें आनन्द, शान्ति अथवा शक्ति का सन्देश दे सके।” स्पष्ट है कि गृह-सज्जा से भावनाओं एवं विचारों की अभिव्यक्ति होती है। गृह-सज्जा के माध्यम से विश्रांति, जीवन्तता, स्वाभाविकता, आत्मीयता, औपचारिकता तथा दृढ़ता आदि भावनाएँ प्रकट होती हैं।

इस प्रकार की भावनाओं को अभिव्यक्त करने वाली गृह-सज्जा को उत्तम गृह-सज्जा माना जाता है। इससे भिन्न यदि किसी गृह-सज्जा से भड़कीलापन या सुरुचि एवं स्वच्छता की कमी अभिव्यक्त होती हो तो उस गृह-सज्जा को उत्तम नहीं माना जाएगा। उत्तम गृह-सज्जा से औपचारिकता, अनौपचारिकता, स्वाभाविकता तथा आधुनिकता के गुणों की भी अभिव्यक्ति होनी चाहिए।
 
(3) उपयोगिता-गृह-सज्जा का एक मूल सिद्धान्त है–गृह-सज्जा का उपयोगी होना। भवननिर्माण के सन्दर्भ में एक अमेरिकी वास्तुकार लुई सलीवन का कथन है कि भवन की आकृति को
व्यावहारिक होना चाहिए। इस मान्यता के अनुसार गृह-सज्जा को उपयोगी होना चाहिए। निरर्थक एवं कोरी सजावट उचित नहीं होती। इस सिद्धान्त के अनुसार घर का निर्माण तथा उसकी सज्जा वैज्ञानिक तथा एक सुनिश्चित दृष्टिकोण के अनुसार होनी चाहिए।

जिस प्रकार किसी यन्त्र या उपकरण से हम अधिकतम कार्यशीलता की अपेक्षा करते हैं, उसी प्रकार घर से भी अधिकतम सुविधा तथा उपयोगिता की अपेक्षा की जाती है। यह तभी सम्भव है, जब कि गृह-सज्जा में उपयोगिता के सिद्धान्त का समावेश हो। इस सिद्धान्त को महत्त्व देते हुए यह ध्यान रखा जाता है कि गृह-सज्जा के लिए केवल उन्हीं वस्तुओं एवं उपकरणों को चुना जाए जो उपयोगी हों। जो वस्तुएँ या उपकरण उपयोगी नहीं होते, उन्हें एकत्र करना उचित नहीं माना जाता। इस मान्यता के अनसार घर के प्रत्येक कक्ष में उपयोगिता को ध्यान में रखकर ही वस्तुओं को रखा जाता है। गृह-सज्जा के लिए अपनाई जाने वाली प्रत्येक वस्तु की उपयोगिता की भली – भाँति परख कर लेनी चाहिए।

उदाहरण के लिए-सोफा एवं सोफे का कवर ऐसा । होना चाहिए, जो अधिक मजबूत, टिकाऊ एवं सुविधाजनक हो। अनावश्यक मीनाकारी, कढ़ाई एवं कृत्रिम सुन्दरता को कोई महत्त्व नहीं दिया जाता। इसी प्रकार परदे तथा कालीन भी मजबूत एवं पक्के रंग के होने चाहिए। जो वस्तुएँ किसी प्रकार की असुविधा उत्पन्न करती हों, उन्हें गृह-सज्जा में स्थान नहीं दिया जाना चाहिए।
यहाँ यह स्पष्ट कर देना अनिवार्य है कि उपयोगिता के सिद्धान्त को मानते हुए गृह-सज्जा में सुन्दरता एवं आकर्षकता के तत्त्व की पूर्ण अवहेलना नहीं की जानी चाहिए। वास्तव में सुन्दरता तथा उपयोगिता, कला तथा विज्ञान का समन्वय होना चाहिए। गृह-सज्जा में समन्वयात्मक सिद्धान्त को ही अपनाया जाना चाहिए, जिसमें सुन्दरता, अभिव्यक्ति तथा उपयोगिता का समुचित समावेश हो।

33.

खाने के कमरे (डाइनिंग रूम) की सजावट आप कैसे करना पसन्द करेंगी और क्यों?यादेशी तथा विदेशी शैली के अनुसार खाने के कमरे (भोजन-कक्ष) की साज-सज्जा आप किस प्रकार करेंगी?याभारतीय तथा पाश्चात्य शैली के भोजन-कक्ष में क्या अन्तर है? विस्तारपूर्वक लिखिए। भोजन-कक्ष की सजावट की विधि लिखिए।

Answer»

मानव जीवन में भोजन ग्रहण करने का विशेष महत्त्व है। व्यक्ति भोजन जुटाने के लिए ही अनेक परेशानियाँ उठाता है। एक समय था, जब लोग पाकशाला या रसोईघर में ही बैठकर शान्त भाव से भोजन ग्रहण किया करते थे। उस समय जीवन सादा एवं सरल तथा कर्म व्यस्त था। आज जीवन बदल गया है। आज पाकशाला में बैठकर भोजन ग्रहण करने की सुविधा नहीं है। आधुनिक घरों में प्रायः रसोईघर काफी छोटे होते हैं; अत: वहाँ बैठकर भोजन ग्रहण करना कठिन होता है। इसके अतिरिक्त जीवन व्यस्त होने के कारण अनेक बार जूते-मोजे तथा पैंट-कोट पहने हुए ही भोजन ग्रहण करना पड़ता है। इस दशा में रसोईघर में बैठकर भोजन नहीं किया जा सकता। इन समस्त परिस्थितियों पर विचार करते हुए आजकल प्रायः सभी घरों में भोजन को अलग कमरा बनाया जाता है। इस कमरे को ही भोजन का कमरा’ या ‘डाइनिंग रूम’ (Dining room) कहा जाता है।

खाने के कमरे की सजावट

खाने के कमरे की सजावट में सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण तत्त्व है-सफाई। खाने का कमरा हर प्रकार से स्वच्छ होना चाहिए। इस कमरे में संवातन तथा प्रकाश की भी समुचित व्यवस्था होनी चाहिए। खाने के कमरे की सजावट की मुख्य शैलियों या विधियों का संक्षिप्त विवरण निम्नवर्णित है

(1) परम्परागत देशी शैली-भारतीय शैली में भोजन ग्रहण करने के लिए चौकी, पटरी अथवा आसन का उपयोग किया जाता है। देशी शैली में भोजन-कक्ष में सुविधाजनक चौकी, पटरी अथवा आसन की व्यवस्था की जाती है। चौकियों पर सुन्दर-सुन्दर मेजपोश बिछाए जाते हैं। भोजन करते समय रेक्सिन अथवा प्लास्टिक के कपड़े चौकियों पर बिछाए जाते हैं। ये सुन्दर तथा आकर्षक डिजाइनों व रंगों के होते हैं और भोजन गिरने पर स्थायी रूप से गन्दे नहीं होते। दीवारों की सजावट बैठक के कमरे की अपेक्षा साधारण होती है। भोजन कक्ष में रेफ्रिजेरेटर या पानी रखने का कोई अन्य साधन भी रखा जाता है। भोजन-कक्ष प्रायः रसोईघर से जुड़ा होता है, ताकि भोजन लाने-ले-जाने की सुविधा रहे। देशी शैली में भोजन थालियों एवं कटोरियों में परोसा जाता है; अत: भोजन-कक्ष में बर्तन रखने के लिए अलमारी भी रखी जा सकती है।

(2) विदेशी शैली—इस शैली में भोजन-कक्ष में एक बड़ी मेज (डाइनिंग टेबल) तथा इसके चारो ओर बिना हत्थे वाली चार अथवा छ: कुर्सियाँ (डाइनिंग चेयर्स) लगाई जाती हैं। डाइनिंग टेबल की ऊपरी सतह पर रेक्सिन, शीशा अथवा सनमाइका लगी होती है। इसका लाभ यह होता है कि भोजन इत्यादि गिरने पर डाइनिंग टेबल को सरलतापूर्वक साफ किया जा सकता है। रेफ्रिजरेटर अथवा पानी के किसी अन्य साधन की व्यवस्था भी भोजन-कक्ष में ही की जानी चाहिए।

(3) भोजन-कक्ष निश्चित रूप से रसोईघर से जुड़ा होना चाहिए। भोजन-कक्ष में एक ओर हाथ-मुँह धोने के लिए एक वाशबेसिन लगा होना चाहिए। इसमें साबुन व स्वच्छ तौलिए की व्यवस्था होनी चाहिए। भोजन-कक्ष के दरवाजे एवं खिड़कियों पर साधारण, परन्तु स्वच्छ एवं आकर्षक परदे लगे होने चाहिए। भोजन-कक्ष की खिड़कियों पर लोहे के तार की जाली लगानी आवश्यक है। यह भोजन-कक्ष में मक्खियों को प्रवेश नहीं करने देती। दीवारों पर अच्छे-अच्छे चित्र व डाइनिंग टेबल पर पुष्पों से सज्जित फूलदान भोजन प्राप्त करने वालों के मन को प्रसन्न करते हैं।

34.

कन्नड साहित्य की त्रिमूर्ति किसे कहते हैं ?

Answer»

कवि पंपा, पोन्ना और रन्ना प्रारंभिक कन्नड़ साहित्य की त्रिमूर्ति कहलाती है ।

35.

निम्नलिखित शब्दों के दो-दो पयार्यवाची शब्द लिखें:पत्नी = ————कर्षक = ————सागर = ————उत्सव। = ————

Answer»

शब्द – पर्यायवाची शब्द

पत्नी – भार्या, अर्धांगिनी, गृहिणी, वधू।

कर्षक – किसान, कृषक, खेतीहर, हलवाहा, कृषिजीवी।

सागर – समुद्र, सिंधु, जलधि, रत्नाकर।

उत्सव – समारोह, पर्व, त्योहार, धूमधाम।

36.

निम्नलिखित भिन्नार्थक शब्दों के अर्थ लिखकर वाक्य बनाइएँ:अन्न = ————अन्य = ————उदार = ————उधार। = ————

Answer»

अन्न – अनाज-किसान अन्न पैदा करने के कारण अन्नदाता कहलाता है।

अन्य – दूसरा-इस पर नहीं किसी अन्य विषय पर बात करें।

उदार – दानी-कर्ण बहुत ही उदार राजा था।

उधार – ऋण-क्या आप मुझे एक सौ रुपए उधार दे सकते हैं?

37.

‘हम राज्य लिए मरते हैं’ में उर्मिला राज्य के कारण होने वाले किस कलह की बात कहना चाहती है?

Answer»

उर्मिला राज्य के लिए श्री राम को वनवास दिए जाने तथा भरत को राज्य देने से उत्पन्न कलह की बात कहना चाहती है।

38.

राजघराने की अपेक्षा किसका जीवन सहज है(क) प्रहरी का(ख) विद्वान् का(ग) किसान का(घ) न्यायाधीश का।

Answer»

(ग) किसान का

39.

‘हम राज्य लिए मरते हैं’ कविता कवि की किस मूल रचना और सर्ग से ली गई है?

Answer»

‘हम राज्य लिए मरते हैं’ शीर्षक कविता मैथिलीशरण गुप्त के द्वारा रचित ‘साकेत’ के नवम् सर्ग से ली गई है

40.

किसान व्यर्थ के वाद-विवाद को छोड़कर किस धर्म का पालन करते हैं?

Answer»

किसान व्यर्थ के वाद-विवाद को छोड़कर धर्म की मूल बात को समझकर उसका पालन करते हैं।

41.

हर अवसर पर समारोह तथा उत्सव कौन मनाते हैं?

Answer»

सही उत्तर है किसान

42.

‘सहनशीलता के आगार’ कौन हैं(क) विद्वान्।(ख) किसान(ग) राजा(घ) प्रहरी।

Answer»

सही उत्तर है (ख) किसान

43.

प्रस्तुत गीत में उर्मिला किस की प्रशंसा कर रही है?

Answer»

प्रस्तुत गीत में उर्मिला किसानों के सरल एवं शांतिपूर्ण जीवन की प्रशंसा कर रही है।

44.

‘शाखामयी बुद्धि’ कैसी बातें होती हैं(क) तर्क पूर्ण(ख) आध्यात्मिक(ग) व्यर्थ की(घ) पारलौकिक।

Answer»

सही उत्तर है (ग) व्यर्थ की

45.

विद्वान् क्या करते हैं?

Answer»

विद्वान् हर बात में दोष निकाल कर व्यर्थ में तर्क-वितर्क करते हैं।

46.

किसान संसार को समृद्ध कैसे बनाते हैं?

Answer»

किसान अन्न पैदा कर के संसार को समृद्ध करते हैं।

47.

किसान के पास कौन-सा धन है ?

Answer»

किसान के पास गाय रूपी धन है।

48.

बैलगाड़ीवाले ने बैलों को कहाँ खोला?

Answer»

बैलगाडीवाले ने तिराहे के बीच में बरगद के पेड़ के नीचे बैलों को खोला।

49.

सरस्वतीचन्द्र के पीछे सवारों को किसने भेजा था?(क) कुमुदसुन्दरी(ख) गुणसुन्दरी(ग) विद्याचतुर(घ) बुद्धिधन

Answer»

सही विकल्प है (क) कुमुदसुन्दरी

50.

अंधकार में बिगुल बजने पर सुरसंग ने कैसा विचित्र स्वर निकाला?(क) सियार(ख) भालू(ग) शेर(घ) कुत्ते

Answer»

सही विकल्प है (क) सियार