This section includes 7 InterviewSolutions, each offering curated multiple-choice questions to sharpen your Current Affairs knowledge and support exam preparation. Choose a topic below to get started.
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जिले का सबसे बड़ा फौजदारी न्यायालय है(क) सेशन जज का न्यायालय(ख) मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट(ग) मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी(घ) न्याय पंचायत |
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Answer» सही विकल्प है (क) सेशन जज का न्यायालय |
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परिवार न्यायालय पर एक संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।यापरिवार न्यायालय के पक्ष में अपने तर्क दीजिए। |
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Answer» जनपदीय स्तर पर सरकार द्वारा परिवार न्यायालयों की स्थापना की गयी है। उत्तर प्रदेश में 2 अक्टूबर, 1986 ई० से परिवार न्यायालय कानून लागू किया गया है। अब तक दस परिवार न्यायालय उत्तर प्रदेश व उत्तराखण्ड राज्य में कार्य कर रहे हैं। इन न्यायालयों का उद्देश्य पारिवारिक विवादों (विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, भरण-पोषण, सम्पत्ति आदि) को शीघ्रता के साथ हल करना है। इस न्यायालय में मुकदमों का निपटारा आपसी समझौतों के आधार पर किया जाता है तथा दोनों पक्ष न्यायाधीश के सम्मुख आपस में बातचीत करते हैं। इन न्यायालयों की आज भारत में अत्यधिक आवश्यकता है। क्योंकि आज सामान्य न्यायालयों में करोड़ों की संख्या में वर्षों से लम्बित मुकदमे पड़े हैं। इसलिए अनेक पारिवारिक विवाद; जिन्हें शीघ्रातिशीघ्र हल हो जाना चाहिए था; वे भी वर्षों से लम्बित हैं। यही कारण है कि ऐसे न्यायालयों की हमारे देश में आवश्यकता है। |
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जिले के दीवानी न्यायालय का सविस्तार वर्णन कीजिए।याजिला स्तर की अदालतों के गठन पर प्रकाश डालिए और उनके किन्हीं दो कार्यों का उल्लेख कीजिए। |
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Answer» दीवानी न्यायालय जनपद में दीवानी या व्यवहार के मामलों से सम्बन्धित निम्नलिखित न्यायाधीशों के न्यायालय होते हैं 1. जिला न्यायाधीश का न्यायालय – जिला न्यायाधीश दीवानी के मामले में सबसे बड़ा न्यायाधीश होता है। जिला न्यायाधीश सभी प्रकार के दीवानी के मामलों की प्रारम्भिक सुनवाई करता है तथा पाँच लाख रुपये मूल्य तक के विवादों की अपील सुनता है। इस प्रकार इस न्यायालय में मुकदमों का निर्णय भी होता है और निचली अदालतों के निर्णय के विरुद्ध अपील भी सुनी जाती है। यह जिले के न्यायालयों पर नियन्त्रण रखती है। 2. सिविल जज का न्यायालय- सिविल जज दीवानी के मामलों में जिला न्यायाधीश के नीचे का न्यायाधीश होता है। सिविल जज को एक लाख रुपये मूल्य तक के विवादों की प्रारम्भिक सुनवाई का अधिकार प्राप्त है। आवश्यकता पड़ने पर उच्च न्यायालय के निर्देशों पर यह राशि पाँच लाख रुपये तक बढ़ाई जा सकती है। सिविल जज मुन्सिफ के निर्णयों के विरुद्ध उन अपीलों को भी सुनता है, जिन्हें जिला जज सुनवाई हेतु हस्तान्तरित करके उसके पास भिजवाता है। 3. मुन्सिफ का न्यायालय- सिविल जज के नीचे मुन्सिफ की अदालत होती है। इन अदालतों में साधारणतः दस हजार रुपये तक के तथा विशेष अधिकार मिलने पर 25,000 की मिल्कियते तक के मामले सुने जाते हैं एवं उन पर निर्णय सुनाये जाते हैं। इनके फैसले के विरुद्ध जिला न्यायाधीश की अदालत में अपील की जा सकती है। 4. खफीफा जज का न्यायालय- कहीं-कहीं छोटे मामलों में जल्दी तथा कम खर्च में निर्णय सुनाने के लिए खफीफा जज के न्यायालय होते हैं। मुन्सिफ के न्यायालय के नीचे खफीफा का न्यायालय होता है। इस न्यायालय में पाँच हजार रुपये तक के धन वसूली मामलों तथा १ 25,000 तक के मकानों व दुकानों के बेदखली विवादों की सुनवाई होती है। इनके निर्णयों के विरुद्ध अपील नहीं होती है। जिला न्यायाधीश के न्यायालय में पुनर्विचार (Revision) हो सकता है। इन न्यायालयों की स्थापना इसलिए की गयी है, जिससे बड़े-बड़े नगरों में छोटे-छोटे मुकदमों का शीघ्रतापूर्वक निर्णय किया जा सके। 5. न्याय पंचायत- दीवानी विवादों में सबसे निचले स्तर पर ग्रामीण क्षेत्रों में न्याय पंचायतें हैं। इन्हें 500 तक के धन-विवादों को सुनने को अधिकार है। इनके निर्णय के विरुद्ध अपील नहीं की जा सकती। इसकी एक विशेषता यह भी है कि कोई भी वकील इसमें मुकदमे की पैरवी नहीं कर सकता। ऐसा इसलिए किया गया है, जिससे ग्रामीण जनता को निष्पक्ष और सस्ता न्याय मिल सके। |
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जिला न्यायालय पर एक संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए। |
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Answer» जनपदीय (जिला) न्यायालय जनपदीय (जिला) न्यायालय राज्य के उच्च न्यायालय के अधीन होते हैं। प्रत्येक जनपद (जिले) में निम्नलिखित प्रकार के न्यायालय होते हैं 1.दीवानी न्यायालय– जिला न्यायाधीश का न्यायालय – जिला न्यायाधीश दीवानी के मामले में सबसे बड़ा न्यायाधीश होता है। जिला न्यायाधीश सभी प्रकार के दीवानी के मामलों की प्रारम्भिक सुनवाई करता है तथा पाँच लाख रुपये मूल्य तक के विवादों की अपील सुनता है। इस प्रकार इस न्यायालय में मुकदमों का निर्णय भी होता है और निचली अदालतों के निर्णय के विरुद्ध अपील भी सुनी जाती है। यह जिले के न्यायालयों पर नियन्त्रण रखती है। सिविल जज का न्यायालय- सिविल जज दीवानी के मामलों में जिला न्यायाधीश के नीचे का न्यायाधीश होता है। सिविल जज को एक लाख रुपये मूल्य तक के विवादों की प्रारम्भिक सुनवाई का अधिकार प्राप्त है। आवश्यकता पड़ने पर उच्च न्यायालय के निर्देशों पर यह राशि पाँच लाख रुपये तक बढ़ाई जा सकती है। सिविल जज मुन्सिफ के निर्णयों के विरुद्ध उन अपीलों को भी सुनता है, जिन्हें जिला जज सुनवाई हेतु हस्तान्तरित करके उसके पास भिजवाता है। मुन्सिफ का न्यायालय- सिविल जज के नीचे मुन्सिफ की अदालत होती है। इन अदालतों में साधारणतः दस हजार रुपये तक के तथा विशेष अधिकार मिलने पर 25,000 की मिल्कियते तक के मामले सुने जाते हैं एवं उन पर निर्णय सुनाये जाते हैं। इनके फैसले के विरुद्ध जिला न्यायाधीश की अदालत में अपील की जा सकती है। खफीफा जज का न्यायालय- कहीं-कहीं छोटे मामलों में जल्दी तथा कम खर्च में निर्णय सुनाने के लिए खफीफा जज के न्यायालय होते हैं। मुन्सिफ के न्यायालय के नीचे खफीफा का न्यायालय होता है। इस न्यायालय में पाँच हजार रुपये तक के धन वसूली मामलों तथा १ 25,000 तक के मकानों व दुकानों के बेदखली विवादों की सुनवाई होती है। इनके निर्णयों के विरुद्ध अपील नहीं होती है। जिला न्यायाधीश के न्यायालय में पुनर्विचार (Revision) हो सकता है। इन न्यायालयों की स्थापना इसलिए की गयी है, जिससे बड़े-बड़े नगरों में छोटे-छोटे मुकदमों का शीघ्रतापूर्वक निर्णय किया जा सके। न्याय पंचायत- दीवानी विवादों में सबसे निचले स्तर पर ग्रामीण क्षेत्रों में न्याय पंचायतें हैं। इन्हें 500 तक के धन-विवादों को सुनने को अधिकार है। इनके निर्णय के विरुद्ध अपील नहीं की जा सकती। इसकी एक विशेषता यह भी है कि कोई भी वकील इसमें मुकदमे की पैरवी नहीं कर सकता। ऐसा इसलिए किया गया है, जिससे ग्रामीण जनता को निष्पक्ष और सस्ता न्याय मिल सके। 2.फौजदारी न्यायालय- सत्र (सेशन) न्यायालय- उच्च न्यायालय की अधीनता में फौजदारी न्यायालय का कार्य करने वाले सबसे बड़े न्यायालय को ‘सत्र न्यायालय’ कहते हैं। इसके मुख्य न्यायाधीश को सत्र न्यायाधीश कहते हैं। इसे फौजदारी के साथ ही दीवानी के मुकदमों के निर्णय का भी अधिकार प्राप्त है। जब यह फौजदारी के मुकदमे सुनता है तो सेशन जज कहलाता है और जब दीवानी के मुकदमे सुनता है तो जिला जज कहलाता है। इसकी नियुक्ति उच्च न्यायालय की सम्मति से राज्यपाल द्वारा की जाती है। इस पद पर प्रायः दो भिन्न कोटि के व्यक्ति नियुक्त किये जा सकते हैं-प्रथम तो वे जो राजकीय जुडीशियल सर्विस के सदस्य हों, इसके अलावा सात वर्ष तक अधिवक्ता (वकील) का कार्य करने वाला व्यक्ति भी न्यायाधीश बनाया जा सकता है। न्यायिक पदों के लिए लोक सेवा आयोग द्वारा खुली प्रतियोगिताएँ आयोजित की जाती हैं। इन प्रतियोगिताओं में पास होने वाले योग्य व्यक्ति सर्वप्रथम मुन्सिफ के पद पर नियुक्त किये जाते हैं। कुछ समय बाद अपनी योग्यता, कार्यक्षमता एवं निष्पक्षता के बल पर आगे उन्नति करते हुए वे सत्र न्यायाधीश के पद पर पहुँच जाते हैं। सत्र न्यायाधीश को अपने अधीनस्थ मजिस्ट्रेटों द्वारा दिये गये निर्णय के विरुद्ध अपील भी सुनने का अधिकार है। ये न्यायालय मृत्यु-दण्ड दे सकते हैं, परन्तु मृत्युदण्ड पर उच्च न्यायालय की पुष्टि होनी आवश्यक है। यह जिले के अन्य न्यायाधीशों के कार्यों की देखभाल भी करता है। बड़े जिलों में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश एवं सहायक सत्र न्यायाधीश होते हैं। 3.न्याय पंचायत–फौजदारी क्षेत्र में सबसे निम्न स्तर पर न्याय पंचायतें होती हैं। न्याय पंचायतें है 250 तक जुर्माना कर सकती हैं, परन्तु वे कारावास का दण्ड नहीं दे सकतीं। 73वें संविधान संशोधन के बाद बनाए गए पंचायती राज अधिनियम में न्याय पंचायत की कोई व्यवस्था नहीं की गई है। 4.राजस्व न्यायालय–वर्तमान में उच्च न्यायालय के अधीन राजस्व परिषद्, कमिश्नर, जिलाधीश, परगनाधिकारी (S.D.M.), तहसीलदार और नायब तहसीलदार की अदालतें होती हैं। इन अदालतों में लगान, मालगुजारी आदि के मुकदमों की सुनवाई की जाती है। अन्य न्यायालय-उपर्युक्त न्यायालयों के अतिरिक्त कुछ विशेष मुकदमों का फैसला विशेष न्यायालयों में होता है; जैसे—आयकर सम्बन्धी मुकदमों का फैसला आयकर अधिकारी ही कर सकता है। उसके निर्णय के विरुद्ध आयकर आयुक्त और आयकर अधिकरण (Income Tax Tribunal) में अपील की जाती है। |
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जिले का सबसे बड़ा न्यायालय कौन-सा है ? |
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Answer» जिले का सबसे बड़ा न्यायालय जनपद न्यायालय है। |
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जिले का सबसे बड़ा दीवानी न्यायालय कौन-सा है?(क) जिला जज का न्यायालय(ख) सिविल जज का न्यायालय(ग) मुन्सिफ का न्यायालय(घ) न्याय पंचायत |
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Answer» सही विकल्प है (क) जिला जज का न्यायालय |
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लोक अदालतें क्यों महत्त्वपूर्ण हैं ? दो कारण बताइए।यालोक अदालतों की स्थापना के दो कारण बताइए। |
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Answer» भारत की वर्तमान न्याय-व्यवस्था इस प्रकार की है कि उसमें न्याय प्राप्त करने में अधिक समय लगता है तथा धन की अधिक आवश्यकता होती है। वर्तमान में भारत के समस्त न्यायालयों में लाखों की संख्या में मुकदमे विचाराधीन पड़े हैं। इस समस्या का समाधान करने तथा शीघ्र न्याय प्राप्त करने के लिए लोक अदालतें महत्त्वपूर्ण हैं। ये अदालतें देश के विभिन्न भागों में शिविर के रूप में लगाई जाती हैं। इनकी महत्त्वता के दो कारण निम्नलिखित हैं · न्यायिक व्यवस्था को सरल तथा सुविधाजनक बनाए जाने की आवश्यकता है। इसमें वकील करने की आवश्यकता नहीं है। . मुकदमे का निर्णय उसी दिन हो जाता है जिस दिन यह अदालत लगाई जाती है। इसके निर्णय । सामान्यतया आर्थिक दण्ड के रूप में होते हैं। |
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लोक अदालत पर एक लेख लिखिए।यालोक अदालत की विशेषताओं का वर्णन कीजिए।यालोक अदालत का क्या अभिप्राय है ? इसके किन्हीं दो कार्यों का उल्लेख कीजिए।यालोक अदालत क्या है? लोक अदालतों की विशेषताओं का उल्लेख कीजिए। क्या इसके निर्णय के विरुद्ध अपील हो सकती है ?यालोक अदालतों की स्थापना क्यों की गई थी ?यालोक अदालत गठित करने का उद्देश्य क्या है ? इसकी प्रमुख विशेषताओं का वर्णन कीजिए।यालोक अदालतों की किन्हीं दो विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।यालोक अदालतों के गठन एवं उसकी कार्यप्रणाली पर प्रकाश डालिए।याभारतीय न्याय-व्यवस्था में लोक अदालतों के महत्व का वर्णन कीजिए।याभारतीय न्याय-व्यवस्था में लोक अदालतों की भूमिका का परीक्षण कीजिए। |
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Answer» लोक अदालत आज न्यायालयों में लाखों की संख्या में विचाराधीन मुकदमे पड़े हैं। कार्य-भार के कारण दीवानी, फौजदारी और राजस्व न्यायालयों से न्याय पाने में बहुत अधिक समय लगता है तथा इस प्रक्रिया में धन भी अधिक व्यय होता है और अनेक अन्य परेशानियाँ भी उठानी पड़ती हैं। ऐसी स्थिति में न्याय-प्रक्रिया को और सरल बनाने के उद्देश्य से एक प्रस्ताव द्वारा भारत सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश श्री पी० एन० भगवती की अध्यक्षता में कानूनी सहायता योजना कार्यान्वयन समिति’ की नियुक्ति की। इस समिति द्वारा प्रस्तावित कार्यक्रम के अन्तर्गत उत्तर प्रदेश राज्य के विभिन्न भागों और देश के अन्य राज्यों के विभिन्न भागों में शिविर’ (Camp) के रूप में लोक अदालतें लगायी जा रही हैं। इन लोक अदालतों की कुछ प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं · इन अदालतों में मुकदमों का निपटारा आपसी समझौतों के आधार पर किया जाता है और | समझौता ‘कोर्ट फाइल’ में दर्ज कर लिया जाता है। · इनमें वादी और प्रतिवादी अपना वकील नहीं कर सकते वरन् दोनों पक्ष न्यायाधीश के सामने · इनमें वैवाहिक, पारिवारिक व सामाजिक झगड़े, किराया, बेदखली, वाहनों का चालान, बीमा आदि के सामान्य मुकदमों पर दोनों पक्षों को समझाकर समझौता करा दिया जाता है। · इन अदालतों में सेवानिवृत्त जज, राजपत्रित अधिकारी तथा समाज के प्रतिष्ठित व्यक्ति परामर्शदाता के रूप में बैठते हैं। · ये अदालतें ऐसे किसी व्यक्ति को रिहा नहीं कर सकतीं, जिसे शासन ने बन्दी बनाया है। ये अदालतें केवल समझौता करा सकती हैं, जुर्माना कर सकती हैं या चेतावनी देकर छोड़ सकती हैं। · लोक अदालत को सिविल कोर्ट के समकक्ष मान्यता प्राप्त है। इसके द्वारा दिया गया फैसला अन्तिम होता है, जिसे सभी पक्षों को मानना पड़ता है। इस फैसले के विरुद्ध किसी भी अदालत में अपील नहीं की जा सकती। भारत में सर्वप्रथम लोक अदालतें 1982 ई० में गुजरात राज्य में लगायी गयीं। तब से लेकर दिसम्बर, 1999 ई० तक देश के विभिन्न भागों में 40,000 से अधिक लोक अदालतें लगायी गयीं, जिनमें 92 लाख से अधिक मामले निबटाये गये। इससे लोक अदालतों की लोकप्रियता का पता चलता है। अब केन्द्र तथा राज्य सरकारें स्थायी एवं निरन्तर लोक अदालतें स्थापित करने का विचार कर रही हैं। सरकार के विभिन्न विभागों एवं सार्वजनिक क्षेत्र के प्रतिष्ठानों के लिए अलग-अलग लोक अदालतें स्थापित करने के प्रयास किये जा रहे हैं। लोक अदालतों को कानूनी रूप देने के लिए केन्द्र सरकार शीघ्र ही संसद में एक विधेयक पास करने जा रही है। जनपदीय स्तर पर सरकार ने परिवार न्यायालयों, उपभोक्ता संरक्षण न्यायालयों तथा विशेष महिला अदालतों की भी स्थापना की है। उत्तर प्रदेश में 2 अक्टूबर, 1986 ई० से परिवार न्यायालय कानून लागू किया गया है। अब तक 10 परिवार न्यायालय उत्तर प्रदेश व उत्तराखण्ड राज्यों में कार्यरत हैं। इन न्यायालयों का उद्देश्य पारिवारिक विवादों (विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, भरण-पोषण, सम्पत्ति आदि) को शीघ्रता के साथ हल करना है। विशेष महिला अदालत महिलाओं से सम्बन्धित विवादों की सुनवाई करती है। 10 फरवरी, 1996 ई० से इलाहाबाद में पहली विशेष महिला अदालत ने कार्य आरम्भ किया है। अब तक मथुरा, सहारनपुर आदि जनपदों में विशेष महिला अदालतें स्थापित हो चुकी हैं। इसी प्रकार जनपदों में उपभोक्ता संरक्षण न्यायालय भी उपभोक्ताओं के हितों को संरक्षण देने के लिए सफलतापूर्वक कार्य कर रहे हैं। |
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जिले में राजस्व न्यायालय के रूप में सर्वोच्च अधिकारी कौन होता है ? उसके निर्णय के विरुद्ध अपील कहाँ की जा सकती है ? |
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Answer» जिले में राजस्व न्यायालय का प्रमुख जिलाधिकारी होता है, जो जमीन, लगान आदि से सम्बन्धित मुकदमों की सुनवाई करता है। इसके नीचे परगनाधीश, तहसीलदार, नायब तहसीलदार होते हैं, जिनकी अलग-अलग अदालतें होती हैं। उसके निर्णय के विरुद्ध आयकर आयुक्त और आयकर (अधिकरण) ट्रिब्यूनल में अपील की जा सकती है। |
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जनपद न्यायालय का सर्वोच्च न्यायिक अधिकारी कौन होता है?(क) जिला न्यायाधीश(ख) जिलाधिकारी(ग) सिविल जज(घ) मुन्सिफ मजिस्ट्रेट |
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Answer» सही विकल्प है (क) जिला न्यायाधीश |
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लोक अदालत का एक लाभ एवं एक हानि लिखिए। |
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Answer» लाभ-इन अदालतों में मुकदमों का निपटारा आपसी समझौते द्वारा किया जाता है। इन अदालतों में वकीलों की आवश्यकता नहीं होती, जिससे खर्चा बचता है और मुकदमे की सुनवाई शीघ्रतापूर्वक हो जाती है। हानि-इन अदालतों के द्वारा दिये गये फैसले के विरुद्ध किसी और अदालत में याचिका दायर नहीं की जा सकती। |
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भारतीय जनता को सरल तथा सुविधाजनक न्याय प्रदान करने के लिए किस अदालत की स्थापना की गयी है ? |
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Answer» भारतीय जनता को सरल तथा सुविधाजनक न्याय प्रदान करने के लिए लोक अदालत की स्थापना की गयी है। |
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लोक अदालतों के सम्बन्ध में निम्नलिखित में से कौन-सा तथ्य सही नहीं है?(क) निर्णय आपसी सहमति के आधार पर होते हैं।(ख) इसमें वकील मुदकमें की पैरवी कर सकते हैं।(ग) इसमें निर्णय शीघ्र होते हैं।(घ) ये अदालतें जन-कल्याण हेतु कार्य करती हैं। |
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Answer» सही विकल्प है (ख) इसमें वकील मुदकमें की पैरवी कर सकते हैं। |
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दिल्ली में पहली लोक अदालत किस वर्ष गठित की गई थी?(क) 1985(ख) 1986(ग) 1985(घ) 1988 |
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Answer» सही विकल्प है (ख) 1986 |
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भारत के पड़ोसी देशों के साथ सम्बन्धों का वर्णन कीजिए।याभारत के निम्नलिखित पड़ोसी देशों के सम्बन्धों पर टिप्पणी लिखिए1. अफगानिस्तान, 2. म्यांमार, 3. भूटान।याभारत के उत्तरी तथा उत्तरी-पश्चिमी सीमा पर कौन-कौन से देश हैं? भारत से उनके सम्बन्धों का वर्णन कीजिए।याभारत-पाकिस्तान के मध्य विवाद का मुख्य कारण क्या है? संक्षेप में लिखिए। |
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Answer» भारत तथा पड़ोसी देश भारत की उत्तरी सीमा पर चीन, नेपाल और भूटान राष्ट्र स्थित हैं। पश्चिमोत्तर सीमा पर अफगानिस्तान तथा पाकिस्तान स्थित हैं। उत्तर-पूर्वी सीमा पर म्यांमार और बांग्लादेश स्थित हैं। भारत के विशाल क्षेत्रफल के कारण इसकी सीमाएँ बहुत विस्तृत हैं तथा अनेक पड़ोसी सम्प्रभु राष्ट्रों से मिलती हैं। पंचशील के सिद्धान्तों में अटूट विश्वास होने के कारण भारत ने सदैव यही प्रयास किया है कि पड़ोसी राज्यों के साथ उसके सम्बन्ध सौहार्दपूर्ण बने रहें। भारत ने उनके साथ मैत्रीपूर्ण सम्बन्धों का संचालन किया है तथा समय-समय पर उनके आर्थिक, वैज्ञानिक तथा तकनीकी विकास में भी सहयोग दिया है। दक्षेस (SAARC) इन तथ्यों का जीता-जागता उदाहरण है। भारत के उसके पड़ोसी देशों से सम्बन्धों को निम्नलिखित शीर्षकों के अन्तर्गत स्पष्ट किया जा सकता है– 1. नेपाल– नेपाल के साथ भारत के बहुत प्राचीन सम्बन्ध हैं। नेपाल के नागरिकों को भारत में अनेक सुविधाएँ प्राप्त हैं। भारत ने नेपाल की अनेक परियोजनाओं को पूर्ण करने के लिए पर्याप्त आर्थिक सहायता दी है। 13 अगस्त, 1971 ई० को भारत व नेपाल के बीच एक व्यापारिक सन्धि हुई। नेपाल अपने आन्तरिक संकट से जूझ रहा है, वहाँ राजनीतिक अस्थिरता बनी हुई है। 27 नवम्बर, 2011 को तत्कालीन वित्तमंत्री श्री प्रणब मुखर्जी ने नेपाल की यात्रा की। यात्रा के दौरान उन्होंने डॉ० रामबरन यादव, राष्ट्रपति तथा बाबूराम भट्टराई, प्रधानमंत्री से मुलाकात की। अपने नेपाली प्रतिरूप श्री बरसामन पुन से उन्होंने द्विपक्षीय सलाह की जहाँ उन्होंने द्विपक्षीय आर्थिक सहयोग की समीक्षा की तथा दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों का विस्तार करने के उपायों पर चर्चा की। नेपाल के प्रधानमंत्री की उपस्थिति में वित्तमंत्री ने संशोधित डबल टैक्सेशन एवायडेंस एग्रीमेंट (डीटीएए) पर हस्ताक्षर किए। भारत एवं नेपाल के सांसदों के मध्य परस्पर संपर्क बढ़ाने तथा बेहतर समझ एवं मित्रता का विकास करने के लिए 26-29 मार्च, 2011 को 6 युवा भारतीय सांसदों के दल ने नेपाल की यात्रा की। 7-13 अगस्त, 2011 के दौरान नेपाल के 15 महिला संविधान सभा सदस्यों/सांसदों ने भारत की यात्रा की। भारत नेपाल का सबसे बड़ा व्यापार भागीदार तथा विदेशी निवेश का सबसे बड़ा स्रोत एवं पर्यटकों का हब रहा है। वर्तमान में भारत-नेपाल आर्थिक सहयोग कार्यक्रम के तहत छोटे तथा बड़े लगभग 400 प्रोजेक्ट चल रहे हैं। नेपाल के आर्थिक विकास में सहयोग करने तथा नेपाल के तराई क्षेत्र में विकास की सुविधा प्रदान करने की दृष्टि से, भारत नेपाल को भारत से जुड़े उसके सीमावर्ती क्षेत्रों में समेकित चेक पोस्टों का विकास, क्रास बार्डर रेल लिंक तथा तराई क्षेत्र में फीडर रोड तथा पाश्विक सड़कों के विकास के जरिए आधारभूत संरचना का विकास करने में सहायता प्रदान कर रहा है। 2. श्रीलंका-श्रीलंका एवं भारत के सम्बन्ध प्राचीनकाल से ही मैत्रीपूर्ण एवं घनिष्ठ रहे हैं। सन् 1984 ई० में तमिल लोगों की समस्या को लेकर श्रीलंका सरकार का दृष्टिकोण भारत-श्रीलंका सम्बन्धों पर विपरीत प्रभाव डाल रहा था, परन्तु सन् 1988 ई० में कोलम्बो समझौते के बाद दोनों देशों के बीच सम्बन्ध अब सौहार्दपूर्ण हो गए हैं। 3. म्यांमार (बर्मा)- म्यांमार एवं भारत के सम्बन्ध मैत्रीपूर्ण हैं। दोनों देशों में स्थल-सीमा के निर्धारण हेतु एक समझौता हो चुका है और दोनों देश गुट-निरपेक्ष नीति के समर्थक हैं। सभ्यतापरक जुड़ावों, भौगोलिक सामीप्य, संस्कृति, इतिहास तथा धर्म के सम्बन्धों से जुड़े भारत तथा म्यांमार के बीच काफी निकट सम्बन्ध रहे हैं। भारत तथा म्यांमार परस्पर 1600 किमी से अधिक की थल सीमा एवं बंगाल की खाड़ी की समुद्री सीमा साझा करते हैं। भारतीय मूल की एक बड़ी जनसंख्या (अनुमानतः 2.5 मिलियन) म्यांमार में निवास करती है। भारत तथा म्यांमार के सम्बन्धों में संतोषजनक वृद्धि एवं विविधता आई है तथा पिछले वर्ष इसमें बढ़ी हुई गति देखी गई। इस दौरान अक्टूबर, 2011 में म्यांमार के राष्ट्रपति की भारत यात्रा, विदेश मंत्री की जून, 2011 में म्यांमार यात्रा तथा म्यांमार के विदेश मंत्री की जनवरी, 2012 में यात्रा शामिल है। वर्ष 2011-12 को म्यांमार के राजनीतिक ढाँचे के बदलाव के रूप में चिह्नित किया गया, क्योंकि इस दौरान संसदीय प्रजातन्त्र ढाँचे को ग्रहण किया गया। एक विस्तृत तथा व्यापक आधारित तरीके से प्रजातन्त्र में परिवर्तित होने के म्यांमार के प्रयासों को भारत ने निरन्तर सहयोग दिया है। 4. भूटान- भारत-भूटान सम्बन्ध प्रारम्भ से ही मैत्रीपूर्ण रहे हैं। भारत प्रतिवर्ष भूटान को आर्थिक सहायता प्रदान करता है। अगस्त, 2011 में नई दिल्ली में आयोजित भारत-भूटान द्विपक्षीय व्यापार वार्ता में भारत ने भूटान के निवेदन पर सहमति जताते हुए डालू एवं घासूपारा लैन्ड कस्टम स्टेशनों का उपयोग भूटानी कार्यों के लिए तथा चार अतिरिक्त प्रवेश/निकास बिन्दु के नोटिफिकेशन पर सहमति । दी। 68 प्रमुख सामाजिक आर्थिक सेक्टर प्रोजेक्ट; यथा–कृषि, सूचना एवं संचार तकनीक (आईसीटी), मीडिया, स्वास्थ्य, शिक्षा, ऊर्जा, संस्कृति तथा आधारभूत संरचना में भारत द्वारा सहायता प्रदान की जा रही है। लघु विकास प्रोजेक्ट (एसडीपी) के अंतर्गत देश के 20 जिलों एवं 205 ब्लाकों में 1900 प्रोजेक्टों के लिए भारत द्वारा भूटान को अनुदान दिया जा रहा है। पुनतसांगचू-1 हाइड्रो इलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट (एचईपी) पूर्ण गति पर है तथा पुनतसांगचू-2 तथा मांगदेचू हाइड्रो इलेक्टूिड प्रोजेक्ट भी बेहतर तरीके से प्रगति पर है। इस प्रकार दोनों देश भूटान में वर्ष 2020 तक लगभग 10,000 मेगावाट बिजली के संयुक्त उत्पादन के लक्ष्य के करीब हैं, जिसका निर्यात भारत को किया जा सकेगा। 5, पाकिस्तान– पिछली शताब्दी में भारत तथा पाकिस्तान के बीच सम्बन्धों में काफी कटुता रही है, कई मुद्दों की गम्भीरता भी दोनों देशों को आपसी टकराव के कारण झेलनी पड़ी। लेकिन इक्कीसवीं सदी के प्रारम्भ होने पर इन देशों के नेताओं तथा सामान्य जनता ने भी सुधार लाने का प्रयत्न किया। प्रधानमन्त्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल में वाजपेयी व मुशर्रफ के बीच अनेक वार्ताएँ सौहार्दपूर्ण वातावरण में सम्पन्न हुईं। श्री मनमोहन सिंह की सरकार में पर-राष्ट्र मन्त्रालय के स्तर पर भी विदेश सेवा के उच्च अधिकारियों ने दोनों देशों के बीच सम्बन्धों को सामान्य बनाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका अदा की है। वीजा’ की शर्तों को अब कुछ आसान कर दिया गया है। दोनों देशों को उच्चायोगों के कर्मचारियों की संख्या में वृद्धि करने की भी छूट दी गई है। पाकिस्तान की जेलों में कैद अनेक भारतीय मछुआरों को उच्च हस्तक्षेप के परिणामस्वरूप रिहा कर दिया गया है। भूटान के नगर थिम्पू में हुए सार्क सम्मेलन में भारत-पाकिस्तान के प्रधानमन्त्रियों के बीच अनेक मुद्दों पर वार्ता हुई। इन सब बिन्दुओं को देखते हुए कहा जा सकता है कि भविष्य में दोनों देशों के मध्य विवादित पहलू समाप्त हो जाएँगे तथा सहयोग और मैत्री का नया आयाम विकसित होगा। 7. अफगानिस्तान- अफगानिस्तान एवं भारत के बीच व्यापारिक, सांस्कृतिक व तकनीकी सम्बन्ध स्थापित हुए हैं। हामिद करजाई अफगानिस्तान के राष्ट्रपति हैं। वे उच्च अध्ययन के लिए भारत में कुछ वर्ष व्यतीत कर चुके हैं। भारत के अफगानिस्तान से काफी मधुर सम्बन्ध हैं। भारत नवनिर्माण के लिए अफगानिस्तान को प्राथमिकता के आधार पर आर्थिक सहायता उपलब्ध करा रहा है। पुलों आदि के निर्माण में भी भारत ने अफगानिस्तान को तकनीकी विशेषज्ञ तथा इंजीनियरों का दल उपलब्ध कराया है। अक्टूबर, 2011 में राष्ट्रपति करजई की यात्रा के दौरान भारत तथा अफगानिस्तान ने सामरिक भागीदारी पर एक ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर किये। समझौते में दोनों देशों के बीच एक मजबूत, जोशपूर्ण तथा बहुमुखी सम्बन्धों पर जोर दिया गया है। 8. चीन- भारत-चीन सम्बन्ध वर्तमान में सामान्य और मधुर हैं, किन्तु इन सम्बन्धों को बहुत अधिक मधुर और मित्रतापूर्ण इसलिए नहीं कहा जा सकता क्योंकि भारत-चीन सीमा विवाद बहुत पुराना है। और उसे सुलझाने की दिशा में चीन की ओर से कभी गम्भीर प्रयास नहीं किए गए। भारत के सीमावर्ती राज्य अरुणाचल प्रदेश में भी चीन ने कुछ क्षेत्र अपना बताकर उस पर कब्जा कर लिया है। भारत द्वारा बार-बार विरोध व्यक्त किए जाने के बाद भी चीन की ओर से कोई निर्णयात्मक सहयोग नहीं मिल पा रहा है। वर्ष 2010 में भारत गणराज्य तथा चीन के बीच कूटनीतिक सम्बन्धों की स्थापना के 60 वर्ष पूरे हुए। वर्ष 2011 को भारत-चीन आदान-प्रदान वर्ष के रूप में मनाया गया तथा इस दौरान विशेषकर राज्य/प्रांत स्तर पर दोनों राष्ट्रों के बीच बढ़े हुए आदान-प्रदान देखे गये। दोनों देशों के मध्य नियमित उच्च स्तरीय राजनीतिक संपर्क की गति देखी गयी। बीआरआईसीएस सम्मेलन के दौरान अप्रैल 2011 में सान्या, चीन में भारतीय प्रधानमंत्री डॉ० मनमोहन सिंह ने चीन के राष्ट्रपति श्री हू जिन्ताओ से मुलाकात की। पूर्वी एशिया सम्मेलन के दौरान बाली, इंडोनेशिया में नवंबर, 2011 में उन्होंने चीनी प्रमुख श्री वेन जिआबाओ से मुलाकात की। सघन वार्ता ढाँचे के अंतर्गत महत्त्वपूर्ण द्विपक्षीय, क्षेत्रीय तथा अंतर्राष्ट्रीय मुद्दों पर दोनों पक्षों ने परस्पर आदान-प्रदान किया। दोनों देशों के मध्य व्यापार तथा आर्थिक संबंध में व्यापार विस्तार हुआ तथा एक सामरिक आर्थिक संवाद (एसईडी) का प्रारम्भ कर इस सम्बन्ध को और गहरा किया गया। एसईडी की पहली बैठक चीन में सितम्बर, 2011 में हुई। दोनों पक्ष सभी लंबित मुद्दों जिसमें भारत-चीन सीमा प्रश्न भी शामिल है, को एक शान्तिपूर्ण बातचीत से हल करने की प्रतिबद्धता जताई। नई दिल्ली में जनवरी, 2012 में भारत-चीन सीमा प्रश्न पर विशेष प्रतिनिधियों की वार्ता का 15वाँ चक्र सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर भारत-चीन सीमा मामले पर सलाह एवं समन्वय हेतु एक कार्यकारी तन्त्र की स्थापना परे समझौता हुआ। उपर्युक्त विवरण के आधार पर कहा जा सकता है कि भारत ने सदैव अपने पड़ेसी देशों की सम्प्रभुता तथा अखण्डता का सम्मान किया है तथा किसी भी राज्य के आन्तरिक मामलों में कोई हस्तक्षेप नहीं किया है। अपनी सुदृढ़ तथा शक्तिशाली सैन्य शक्ति होने पर भी भारत ने कभी भी अपने पड़ोसी राज्यों पर आक्रमण नहीं किया है, वरन् उनके साथ मैत्रीपूर्ण सम्बन्धों की स्थापना का प्रयास किया है। भारत ने अपने पड़ोसी राज्यों की विकास योजनाओं में आर्थिक सहयोग भी प्रदान किया है। |
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सार्क का सचिवालय कहाँ और किस देश में स्थित है ? |
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Answer» सार्क का सचिवालय काठमाण्डू (नेपाल) में स्थित है। |
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| 17. |
सार्क क्या है ? इसके कितने सदस्य देश हैं ? इसका सचिवालय कहाँ है ?यादक्षेस के सदस्य देशों के नाम बताइए। इसके गठन के उद्देश्यों पर प्रकाश डालिए।यादक्षेस (सार्क) की स्थापना कब और कहाँ हुई ? इसके किन्हीं दो उद्देश्यों को लिखिए।यासार्क से आप क्या समझते हैं ? इसके प्रमुख उद्देश्यों का वर्णन कीजिए।यासार्क के चार्टर में उल्लिखित किन्हीं तीन सिद्धान्तों का उल्लेख कीजिए।यादक्षेस का मुख्य न्यायालय कहाँ है? इसके सदस्य देशों के नाम लिखिए। इसके मुख्य उददेश्य क्या हैं?यादक्षेस की स्थापना व उद्देश्यों का वर्णन कीजिए। |
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Answer» सार्क (SAARC: South Asian Association for Regional Co-operation) विश्व का नवीनतम अन्तर्राष्ट्रीय संगठन है। हिन्दी में यह ‘दक्षेस’ (दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन) कहलाता है। इस संगठन की स्थापना 8 दिसम्बर, 1985 ई० को बांग्लादेश की राजधानी ढाका में दो-दिवसीय अधिवेशन में हुई। यह दक्षिण एशिया के आठ देशों को एक क्षेत्रीय संगठन है। इस संगठन के देश-भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका, नेपाल, भूटान, मालदीव और अफगानिस्तान हैं। सार्क ने इस क्षेत्र में आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक विकास में तेजी लाने और अखण्डता का सम्मान करते हुए परस्पर सहयोग से सामूहिक आत्मनिर्भरता में वृद्धि करने का लक्ष्य निर्धारित किया। सार्क के सभी सदस्य देशों की भू अथवा समुद्री सीमाएँ भारत से मिलती हैं। वैसे तो राष्ट्रीय और अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर विश्व में देशों के अनेक संगठन हैं; किन्तु दक्षिण एशिया के इन आठ देशों के क्षेत्रीय सहयोग पर आधारित इस संगठन का अपना ही महत्त्व है। पिछले कुछ वर्षों में इन देशों में परस्पर अविश्वास का जो माहौल बन गया है, . इस संगठन द्वारा उसे दूर करने में मदद मिलेगी। सार्क संगठन आठ देशों का एक परिवार है।
सार्क के चार्टर में 10 अनुच्छेद हैं, जिनमें सार्क के उद्देश्यों, सिद्धान्तों तथा वित्तीय व्यवस्थाओं का उल्लेख किया गया है। चार्टर के अनुच्छेद 1 में सार्क के निम्नलिखित उद्देश्य बताये गये हैं
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लोकसभा अध्यक्ष की स्थिति को स्पष्ट कीजिए। |
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Answer» लोकसभा के अध्यक्ष का चुनाव लोकसभा द्वारा अपने सदस्यों में से किया जाता है। इसे १ 4,00,000 प्रतिमाह वेतन दिया जाता है। लोकसभा अध्यक्ष के प्रमुख कार्य इस प्रकार हैं- ⦁ वह लोकसभा की बैठकों की अध्यक्षता करता है तथा सदन में शांति और व्यवस्था बनाए रखने का कार्य करता है। ⦁ यदि कोई सदस्य सदन की कार्यवाही में बाधा उत्पन्न करता है अथवा सदन में अनुचित शब्दों का प्रयोग करता है तो स्पीकर उसके विरुद्ध कार्यवाही कर सकता है। वह उसे सदन से बाहर जाने के लिए कह सकता है। ⦁ वह सदस्यों के लिए निवास तथा अन्य सुविधाओं की व्यवस्था करता है। ⦁ लोकसभा जब किसी बिल को पास कर देती है, तो वह स्पीकर के हस्ताक्षरों के बाद ही राज्यसभा अथवा राष्ट्रपति के पास भेजा जाता है। ⦁ सदन की बैठक में गड़बड़ होने की स्थिति में वह सदन की बैठक स्थगित कर सकता है। ⦁ सदन की विभिन्न समितियों की नियुक्तियों में स्पीकर का महत्त्वपूर्ण हाथ होता है। ⦁ यदि किसी बिल के बारे में यह मतभेद उत्पन्न हो जाए कि वह बिल वित्त-बिल है अथवा नहीं, तो उस संबंध में स्पीकर द्वारा किया गया निर्णय ही अंतिम माना जाएगा। ⦁ वह सदन में सदस्यों को बोलने की आज्ञा देता है। ⦁ सदन में जब किसी बिल पर वाद-विवाद समाप्त हो जाता है, तो वह उस पर मतदान करवाता है, मतों की गिनती करवाता है तथा परिणाम घोषित करता है। ⦁ साधारणतः स्पीकर सदन में मतदान में भाग नहीं लेता, परंतु किसी बिल पर समान मत पड़ने की स्थिति में वह निर्णायक मत दे सकता है। ⦁ स्पीकर सदन के नेता की सलाह से सदन का कार्यक्रम निर्धारित करता है। ⦁ वह लोकसभा के सदस्यों के अधिकारों की रक्षा करता है। ⦁ वह राष्ट्रपति तथा सदन के बीच कड़ी का काम करता है। ⦁ दोनों सदनों की संयुक्त बैठक की अध्यक्षता भी स्पीकर करता है। ⦁ स्पीकर ही इस बात का निर्णय करता है कि सदन की गणपूर्ति के लिए आवश्यक सदस्य उपस्थित हैं अथवा नहीं। |
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भारत और पाकिस्तान के मध्य तनाव का मुख्य कारण क्या है ? |
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Answer» भारत और पाकिस्तान के मध्य ‘कश्मीर-समस्या’ तनाव का प्रमुख कारण है। |
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| 20. |
दक्षेस की स्थापना हुई(क) 1985 ई० में(ख) 1987 ई० में(ग) 1988 ई० में(घ) 1986 ई० में |
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Answer» सही विकल्प है (क) 1985 ई० में |
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| 21. |
दक्षेस की उपलब्धियों का वर्णन कीजिए। |
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Answer» दक्षिण एशियाई क्षेत्र में इस संगठन का बहुत महत्त्वपूर्ण स्थान रहा। इसे इस क्षेत्र के इतिहास में ‘नयी सुबह की शुरुआत कहा जा सकता है। भूटान नरेश ने तो इसे सामूहिक बुद्धिमत्ता और राजनीतिक इच्छाशक्ति का परिणाम बताया है, किन्तु व्यवहार में इस संगठन की सार्थकता कम होती जा रही है। सार्क ने पिछले दस वर्षों में एक ही ठोस काम किया है और वह है-खाद्य कोष बनाना। कृषि, शिक्षा, संस्कृति, पर्यावरण आदि 12 क्षेत्रों में सहयोग के लिए सार्क के देश सिद्धान्ततः सहमत हैं। सार्क, सदस्य राष्ट्रों के आपसी सहयोग में वृद्धि करने की दिशा में पहला सशक्त प्रयास है। अत: सार्क की स्थापना का मूल उद्देश्य इन राष्ट्रों के पारस्परिक सम्बन्धों को सामान्य बनाना है, जिसके लिए आर्थिक और सांस्कृतिक सहयोग अति आवश्यक है। सार्क ने नशीले पदार्थों की तस्करी पर रोक, आतंकवाद का विरोध, जनसंख्या पर नियन्त्रण, निरशस्त्रीकरण आदि विषयों पर प्रभावकारी कार्य सम्पादित किया है और सदस्य राष्ट्रों के बीच आर्थिक और सांस्कृतिक वृद्धि में भी सहायता दी है। गरीबी उन्मूलन, पर्यावरण, गुट-निरपेक्षता आदि प्रश्नों पर भी सार्क के सदस्य राष्ट्रों ने गम्भीरतापूर्वक विचार-विमर्श किया है। सार्क देशों में भारत प्रमुख और सर्वाधिक शक्तिशाली देश है। इसलिए कुछ सार्क देश यह समझने लगे कि भारत इस क्षेत्र में अपनी चौधराहट स्थापित करना चाहता है, जब कि भारत का उद्देश्य तो मैत्रीपूर्ण सम्बन्ध स्थापित करना है। इसके बावजूद भारत के बांग्लादेश, नेपाल व श्रीलंका के साथ सम्बन्धों में दरार आ गयी। पाकिस्तान तो भारत के विरुद्ध विष उगलने लगा है। इसके अतिरिक्त सदस्य देशों की शासन-प्रणालियों और नीतियों में भिन्नता तथा द्विपक्षीय व विवादास्पद मामलों की छाया ने भी इस संगठन को निर्बल बनाये रखा है। इन कारणों और परस्पर अविश्वास के आधार पर यह संगठन केवल सैद्धान्तिक ढाँचा मात्र रह गया है, इसका कोई व्यावहारिक महत्त्व बने रहना सम्भव नहीं। |
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भारत-मालदीव के पारस्परिक सम्बन्धों पर एक टिप्पणी लिखिए। |
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Answer» भारत और मालदीव ने आधिकारिक तौर पर और सौहार्दपूर्ण ढंग से 1976 में अपनी समुद्री सीमा का फैसला किया है। हालाँकि एक मामूली राजनयिक घटना 1982 में हुई जब मालदीव के राष्ट्रपति मॉमून अब्दुल गयूम के भाई ने यह घोषणा की कि पड़ोसी मिनीकॉय द्वीप जो भारत के अधिकार क्षेत्र में था, मालदीव का एक हिस्सा है। मालदीव ने जल्दी और आधिकारिक तौर पर इस द्वीप पर अपने दावे से इन्कार किया। भारत और मालदीव ने 1981 में एक व्यापक व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किए। दोनों ही देश क्षेत्रीय सहयोग संगठन (सार्क) के लिए दक्षिण एशियाई एसोसिएशन के संस्थापक हैं। इन दोनों देशों ने दक्षिण एशियाई आर्थिक संघ और दक्षिण एशिया मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर भी किए हैं। भारत और | मालदीव के नेताओं ने क्षेत्रीय मुद्दों पर उच्चस्तरीय संपर्क और विचार-विमर्श को बनाए रखा है। |
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सार्क के सदस्य देश कितने हैं? उसका मुख्यालय कहाँ पर है? |
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Answer» सार्क के सदस्य देश आठ हैं–भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका, नेपाल, भूटान, मालदीव और अफगानिस्तान। इसका मुख्यालय काठमाण्डू (नेपाल) में है। |
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बांग्लादेश की स्थापना में किस देश का महत्त्वपूर्ण योगदान रहा ? |
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Answer» बांग्लादेश की स्थापना में भारत का महत्त्वपूर्ण योगदान रहा। |
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भारत और बांग्लादेश के बीच शान्ति और मैत्री सन्धि पर हस्ताक्षर हुए|(क) 1972 ई० में(ख) 1971 ई० में(ग) 1950 ई० में(घ) 1973 ई० में |
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Answer» सही विकल्प है (क) 1972 ई० में |
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बांग्लादेश का जन्म हुआ(क) 1971 ई० में(ख) 1972 ई० में(ग) 1973 ई० में(घ) 1970 ई० में |
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Answer» सही विकल्प है (क) 1971 ई० में |
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भारत में प्रादेशिक सेना कब प्रारम्भ की गयी ?(क) 1948 ई० में(ख) 1949 ई० में(ग) 1950 ई० में(घ) 1951 ई० में |
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Answer» सही विकल्प है (ग) 1950 ई० में |
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कार्यपालिका से आप क्या समझते हैं? |
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Answer» व्यक्तियों का ऐसा निकाय जिसके पास देश के संविधान और कानून के आधार पर नीति-निर्माण करने, निर्णय करने और उन्हें क्रियान्वित करने का अधिकार होता है, न्यायपालिका कहते हैं। |
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न्यायपालिका के बारे में निम्नलिखित में से कौन-सा बयान गलत है?(क) संसद द्वारा पारित प्रत्येक कानून को सर्वोच्च न्यायालय की मंजूरी की जरूरत होती है।(ख) अगर कोई कानून संविधान की भावना के खिलाफ है तो न्यायपालिका उसे अमान्य घोषित कर सकती है।(ग) न्यायपालिका कार्यपालिका से स्वतंत्र होती है।(घ) अगर किसी नागरिक के अधिकारों का हनन होता है तो वह अदालत में जा सकता है। |
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Answer» (क) संसद द्वारा पारित प्रत्येक कानून का सर्वोच्च न्यायालय की मंजूरी की जरूरत होती है। |
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धन-विधेयक को परिभाषित कीजिए। |
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Answer» कोई भी विधेयक जब निम्नलिखित विषयों से सम्बन्धित होता है तो उसे धन-विधेयक कहते हैं- ⦁ किसी भी धन को भारत की संचित निधि से दिए जाने की घोषणा करना या उसमें से धन खर्च करना। ⦁ धन के आय तथा व्यय के बारे में कोई अन्य विषय। ⦁ कोई कर लगाना अथवा उसे समाप्त करना। ⦁ भारत सरकार द्वारा लिया गया ऋण या उससे संबंधित विषय। ⦁ भारत की संचित निधि तथा आकस्मिक निधि की रक्षा तथा उसमें धन डालना अथवा निकालना। |
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गठबन्धन सरकार किसे कहते हैं? |
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Answer» जब विधायिका में किसी एक दल को बहुमत प्राप्त नहीं होता है तो ऐसी दशा में दो या दो से अधिक राजनीतिक दल आपस में मिलकर जो सरकार बनाते हैं, उसे गठबन्धन सरकार कहते हैं। |
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न्यायिक समीक्षा का वर्णन कीजिए। |
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Answer» न्यायिक समीक्षा उच्चतम न्यायालय की वह शक्ति है जिसके माध्यम से वह विधायिका द्वारा पारित कानून अथवा कार्यपालिका द्वारा की गयी कार्रवाई की समीक्षा यह जानने के लिए कर सकता है कि उक्त कार्रवाई या कानून संविधान के अनुकूल है या प्रतिकूल। यदि न्यायालय को ऐसा लगता है कि कोई कानून अथवा आदेश संविधान के प्रावधानों का उल्लंघन करता है तो वह ऐसे कानून या आदेश को रद्द कर सकता है| |
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संसदीय लोकतंत्र की तीन प्रमुख संस्थाओं का उल्लेख कीजिए। |
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Answer» संसदीय लोकतंत्र की तीन प्रमुख संस्थाएँ-विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका होती है। इसमें विधानमंडल कानून बनाता है, कार्यपालिका उन कानूनों को लागू करती है और न्यायपालिका विवादों का समाधान करती है। |
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लोकतांत्रिक देश में संसद का महत्त्व बताइए। |
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Answer» प्रायः सभी लोकतांत्रिक देशों में निर्वाचित प्रतिनिधियों की सभी जनता के प्रतिनिधि के रूप में सर्वोच्च राजनैतिक सत्ता का प्रयोग करती है। इस तरह जनता द्वारा निर्वाचित राष्ट्रीय सभा को संसद कहते हैं। राज्य स्तर पर इसे विधानसभा कहते हैं। लोकतांत्रिक देशों में संसद के महत्त्व को हम निम्न रूप में प्रस्तुत कर सकते हैं- ⦁ संसद सरकार के पास उपलब्ध धन को भी नियंत्रित करती है। |
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संस्थाओं से क्या आशय है? |
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Answer» सरकार के विभिन्न कार्यों को करने के लिए देश में अनेक व्यवस्थाएँ की जाती हैं। इन व्यवस्थाओं को ही संस्थाएँ कहते हैं। इन संस्थाओं की संरचना एवं कार्यों का वर्णन संविधान में किया गया होता है। |
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सरकार से आप क्या समझते हैं? |
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Answer» संस्थाओं का ऐसा समूह जिसके पास देश में व्यवस्थित जन-जीवन सुनिश्चित करने के लिए कानून बनाने, लागू करने और उसकी व्याख्या करने का अधिकार होता है। व्यापक अर्थ में सरकार किसी देश के लोगों और संसाधनों को नियंत्रित और उनकी निगरानी करती है। |
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भारत के राष्ट्रपति की चुनाव प्रक्रिया का वर्णन कीजिए। |
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Answer» राष्ट्रपति का चुनाव जनता द्वारा प्रत्यक्ष रूप से नहीं किया जाता है। संसद के सभी सदस्य अर्थात् सांसद तथा राज्य विधानसभाओं के सभी सदस्य अर्थात् विधायक उसका चुनाव करते हैं। राष्ट्रपति पद के किसी उम्मीदवार को चुनाव जीतने के लिए बहुमत प्राप्त करना होता है। ऐसा यह सुनिश्चित करने के लिए किया जाता है कि भारत का राष्ट्रपति पूरे देश का प्रतिनिधित्व करता दिखाई दे। |
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लोकसभा सदस्य बनने के लिए व्यक्ति में कौन-सी योग्यताएँ होनी चाहिए। |
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Answer» व्यक्ति को लोकसभा का सदस्य बनाने के लिए व्यक्ति में निम्न योग्यताएँ होनी चाहिए। ⦁ वह भारत का नागरिक हो। |
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तीन दोस्त एक ऐसी फिल्म देखने गए जिसमें हीरो एक दिन के लिए मुख्यमंत्री बनता है और राज्य में बहुत से बदलाव लाता है। इमरान ने कहा कि देश को इसी चीज की जरूरत है। रिजवान ने कहा कि इस तरह का, बिना संस्थाओं वाले व्यक्ति का राज खतरनाक है। शंकर ने कहा कि यह तो एक कल्पना है।कोई भी मंत्री एक दिन में कुछ भी नहीं कर सकता। ऐसी फिल्मों के बारे में आपकी क्या राय है? |
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Answer» इस प्रकार की फिल्म का कथानक कल्पना पर आधारित है यथार्थ से इसका कोई सम्बन्ध नहीं है। एक व्यक्ति का शासन सदैव खतरनाक होता है। शासन का संचालन नियमों के अनुसार ही चलाया जा सकता है। मुख्यमंत्री की नियुक्ति निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया के उपरांत की जाती है। साथ ही सुधारों के लिए अत्यधिक योजना बनाने की जरूरत होती है। मैं भी शंकर से सहमत हूँ। राज्य में बदलाव लाने के लिए केवल एक दिन काफी नहीं होता |
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आरक्षण पर आदेश का उदाहरण पढ़कर तीन विद्यार्थियों की न्यायपालिका पर अलग-अलग प्रतिक्रिया थी। इसमें से कौन-सी प्रतिक्रिया, न्यायपालिका की भूमिका को सही तरह से समझती है?(क) श्रीनिवांस का तर्क है कि चूंकि सर्वोच्च न्यायालय सरकार के साथ सहमत हो गई है लिहाजा वह स्वतंत्र नहीं(ख) अंजैया का कहना है कि न्यायपालिका स्वतंत्र है क्योंकि वह सरकार के आदेश के खिलाफ फैसला सुना सकती थी। सर्वोच्च न्यायालय ने सरकार को उसमें संशोधन का निर्देश दिया।(ग) विजया का मानना है कि न्यायपालिका न तो स्वतंत्र है न ही किसी के अनुसार चलने वाली है बल्कि वह विरोधी समूहों के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाती है। न्यायालय ने इसे आदेश के समर्थकों और विरोधियों के बीच बढ़िया संतुलन बनाया। आपकी राय में कौन-सा विचार सही है? |
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Answer» इन तीनों विचारों में से- (ख) अंजैया का विचार सही है, न्यायपालिका स्वतंत्र है। सर्वोच्च न्यायालय सरकार के निर्णय को रद्द भी कर सकता है और उसे बदलने का आदेश भी दे सकता है। अतः सर्वोच्च न्यायालय ने सरकार को अपने आदेश में संशोधन करने का आदेश दिया। |
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राज्य किसे कहते हैं? |
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Answer» राज्य किसी निश्चित क्षेत्र में फैली राजनैतिक इकाई, जिसके पास संगठित सरकार हो और घरेलु तथा विदेशी नीतियों को बनाने का अधिकार हो। सरकारें परिवर्तित हो सकती हैं पर राज्य बना रहता है। बोलचाल की भाषा में देश, राष्ट्र और राज्य को समानार्थी के रूप में प्रयोग किया जाता है। राज्य’ शब्द का एक अन्य प्रयोग किसी देश के अंदर की प्रशासनिक इकाइयों का प्रांतों के लिए भी होता है। इस अर्थ में राजस्थान, झारखण्ड, त्रिपुरा आदि भी राज्य कहे जाते हैं। |
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न्यायपालिका किसे कहते हैं? |
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Answer» एक राजनैतिक संस्था जिसके पास न्याय करने एवं कानूनी विवादों के निपटारे का समाधान होता है, उसे न्यायपालिका कहते हैं। देश की सभी अदालतों को न्यायपालिका के नाम से संबोधित किया जाता है। |
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राष्ट्रपति की योग्यताएँ एवं कार्यकाल बताइए।। |
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Answer» एक व्यक्ति में भारत का राष्ट्रपति चुने जाने के लिए निम्नलिखित योग्यताएँ होनी चाहिए- ⦁ वह भारत का नागरिक हो। कार्यकाल – राष्ट्रपति का कार्यकाल 5 वर्ष निश्चित किया गया है, परंतु संसद महाभियोग द्वारा उसे इस कार्यकाल के समाप्त होने से पहले भी पद से हटा सकती है। |
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एक शिक्षिका छात्रों की संसद के आयोजन की तैयारी कर रही थी। उसने दो छात्राओं को अलग-अलग पार्टियों के नेताओं की भूमिका करने को कहा। उसने उन्हें विकल्प भी दिया। यदि वे चाहें तो राज्यसभा में बहुमत प्राप्त दल की नेता हो सकतीं थीं और अगर चाहें तो लोकसभा के बहुमत प्राप्त दल की। अगर आपको यह विकल्प दिया जाए तो आप क्या चुनेंगे और क्यों? |
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Answer» मैं लोकसभा में बहुमत प्राप्त दल का नेता बनना चाहूँगा क्योंकि व्यावहारिक रूप से लोकसभा-राज्यसभा से अधिक शक्तिशाली होता है। धन विधेयक लोकसभा में ही प्रस्तुत किया जाता है। इसे लोकसभा ही पारित कर सकती है। राज्यसभा इसे मात्र 14 दिन तक रोक सकती है और यदि राज्यसभा इस विधेयक को वापस लोकसभा को नहीं लौटाती है तब भी इस विधेयक को पास मान लिया जाएगा। लोकसभा मंत्रिमण्डल को नियंत्रित करती है। लोकसभा के सदस्य मतदाताओं द्वारा प्रत्यक्ष रूप से चुने जाते हैं जबकि राज्यसभा सदस्यों का चुनाव अप्रत्यक्ष रूप से होता है| |
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आन्तरिक सुरक्षा के पारम्परिक साधनों को संक्षेप में लिखिए। |
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Answer» आन्तरिक सुरक्षा के पारम्परिक साधनों में प्रमुख हैं–पुलिस बल; त्वरित कार्यबल (आर०ए० एफ०); असम राइफल्स; गृहरक्षा वाहिनी (होमगार्ड) आदि। इन सभी बलों पर देश की आन्तरिक सुरक्षा की जिम्मेदारी होती है। पुलिस के पास आम कानून व्यवस्था बनाये रखने, अपराधों को रोकने एवं उनकी जाँच करने का दायित्व है। संविधान के तहत आम कानून व्यवस्था और पुलिस राज्य सरकार का विषय है। इसलिए पुलिस पर राज्य सरकार का नियन्त्रण होता है। राज्य में पुलिस बल पर प्रमुख पुलिस महानिदेशक या पुलिस महानिरीक्षक होता है। राज्य को सुविधानुसार कई खण्डों में बाँटा जाता है, जिन्हें ‘क्षेत्र’ कहा जाता है और हर पुलिस क्षेत्र उपमहानिरीक्षक के प्रशासनिक नियन्त्रण में होता है। एक क्षेत्र में कई जिले होते हैं। जिला पुलिस का विभाजन पुलिस डिवीजनों, अंचलों और पुलिस थानों में किया गया है। राज्यों के पास नागरिक पुलिस के अलावा अपनी सशस्त्र पुलिस, अलग खुफिया शाखा, अपराध शाखा आदि होती हैं। |
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‘होमगार्ड’ पर टिप्पणी लिखिए। |
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Answer» यह एक स्वयंसेवी बल है, जिसका गठन दिसम्बर, 1946 ई० में नागरिक अशान्ति और साम्प्रदायिक दंगों के नियन्त्रण में पुलिस को सहयोग देने के उद्देश्य से किया गया था। इसका काम हवाई हमले,अग्निकाण्ड, चक्रवात, भूकम्प, महामारी आदि आपात स्थितियों में पुलिस की सहायता करना, आवश्यक सेवाएँ बहाल कराना, साम्प्रदायिक सौहार्द बनाना, कमजोर वर्ग के लोगों की रक्षा में प्रशासन का साथ देना, सामाजिक-आर्थिक और कल्याण के कार्यों में हिस्सा लेना तथा नागरिक सुरक्षा का ध्यान रखना है। आन्तरिक सुरक्षा के इन पारम्परिक साधनों के अलावा अपारम्परिक साधनों का प्रयोग भी आवश्यक है। अपारम्परिक साधनों से तात्पर्य वंचित, अपेक्षित लोगों को विकास की मुख्यधारा में सम्मिलित करने वाले उपायों से है। अल्पसंख्यकों, महिलाओं, विकलांगों, पिछड़े क्षेत्रों के लिए सामाजिक-आर्थिक सुरक्षा हेतु रोजगार, व्यापार आदि पर बल देना चाहिए। |
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भारत की आन्तरिक सुरक्षा से सम्बन्धित किन्हीं दो समस्याओं के नाम लिखिए। |
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Answer» अलगाववाद तथा आतंकवाद। |
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भारत की सुरक्षा तैयारी पर एक निबन्ध लिखिए।या“भारतीय सशस्त्र सेना शत्रुओं को पराजित करने में सक्षम है।” इस कथन की पुष्टि में दो तर्क दीजिए। |
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Answer» भारत की सुरक्षा तैयारी भारत एक विशाल देश है। इसकी विस्तृत सीमाएँ 22,000 किमी से भी अधिक लम्बी हैं। दुर्भाग्य से सभी सीमाओं के पार शत्रु राष्ट्र भी हैं। विश्व के अन्य बहुत-से राष्ट्र भी भारत से द्वेष रखते हैं; अत: भारत अपनी सुरक्षा की तैयारी में विशेष रूप से संलग्न रहता है। भारत की सुरक्षा की तैयारी के सन्दर्भ में निम्नलिखित तर्क दिये जा सकते हैं 1. राष्ट्रीय स्तर पर सुरक्षा की भावना का विकास- भारत की जनता राष्ट्रप्रेम की भावना से ओत-प्रोत है। सरकार और सामाजिक कल्याण से सम्बन्धित संस्थाओं के द्वारा भी जनता में राष्ट्रीय स्तर पर सुरक्षा की भावना जगाने के प्रयास किये जाते हैं। फलस्वरूप भारतीयों में सुरक्षा की भावना का उत्तरोत्तर विकास हुआ है। बाह्य आक्रमण होने पर अब सम्पूर्ण भारतवासी एकजुट होकर शत्रु के दमन में लग जाते हैं। 2. आर्थिक और औद्योगिक विकास– सुरक्षा के लिए पर्याप्त धन की आवश्यकता होती है तथा औद्योगिक विकास के आधार पर ही सुरक्षा के संसाधनों को जुटाया जा सकता है। इसलिए सुरक्षा के कार्यों की पूर्ति हेतु हमारी सरकार ने देश के आर्थिक और औद्योगिक विकास पर विशेष ध्यान दिया है। तथा रक्षा-बजट में वृद्धि कर सुरक्षा को सुदृढ़ किया है। 3. खाद्यान्नों की उपज में वृद्धि और भण्डारण की व्यवस्था- युद्धकाल में आवश्यक वस्तुओं, विशेषतः खाद्यान्नों की बहुत अधिक आवश्यकता होती है; अतः खाद्यान्नों और अन्य वस्तुओं के उत्पादन तथा भण्डारण की समुचित व्यवस्था की ओर भारत सरकार ने विशेष ध्यान दिया है। इससे सुरक्षा की तैयारियों में विशेष सहायता मिली है। 4. रक्षा-उत्पादों में आत्मनिर्भरता- रक्षा-उत्पादों में भारत सरकार ने आत्मनिर्भर होने के लिए विशेष प्रयास किये हैं। देशभर में लगभग 33 ऑर्डिनेन्स फैक्ट्रियाँ हैं, जो विविध रक्षा-उत्पादों का निर्माण कर रही हैं। इनमें लगभग दो लाख व्यक्ति कार्यरत हैं। अब उन हजारों वस्तुओं का उत्पादन भारत में ही 5. अनुसन्धान और विकास- रक्षा-उत्पादनों में तेजी लाने और उनकी गुणवत्ता में सुधार करने के लिए रक्षा मन्त्रालय के अधीन 7 मई, 1980 ई० को ‘रक्षा अनुसन्धान एवं विकास संगठन’ के नाम से एक नया विभाग बनाया गया। यह विभाग रक्षा-उत्पादों के लिए नये अनुसन्धान कर सुरक्षा की तैयारी की दिशा में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। 6. सैन्य प्रशिक्षण– भारत में सैन्य प्रशिक्षण की ओर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। सरकार ने योग्य सैनिकों की भर्ती करने तथा उनको उत्कृष्ट प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए विभिन्न नगरों में सैनिको के समुचित प्रशिक्षण के लिए अनेक सैनिक प्रशिक्षण केन्द्र और प्रशिक्षणशालाएँ स्थापित की हैं। ये सैनिक प्रशिक्षण केन्द्र योग्य, सक्षम एवं कुशल सैनिक अधिकारियों को तैयार करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। 7. नागरिक सुरक्षा प्रशिक्षण- युद्धकाल में आक्रमण के समय नागरिक किस प्रकार अपनी सुरक्षा करें, इसके लिए सरकार विभिन्न प्रचार केन्द्रों के माध्यम से नागरिकों को प्रशिक्षण देती है। आन्तरिक सुरक्षा की तैयारी की दृष्टि से यह भी एक प्रशंसनीय कार्य है। 8. सेना का विकास और आधुनिकीकरण – सुरक्षा की तैयारी हेतु दिन-प्रतिदिन सभी प्रकार की सेनाओं का अनवरत रूप से विकास और सभी दृष्टियों से आधुनिकीकरण भी किया जा रहा है। अत्याधुनिक अस्त्र-शस्त्रों और अन्य युद्ध-सामग्री से सेना को सुसज्जित किया जा रहा है। हवाई और समुद्री सेना को भी पहले की अपेक्षा अधिक शक्तिशाली, सुदृढ़ एवं सक्षम बनाया गया है। 9. परमाणु शक्तिसम्पन्न– भारत पहला परमाणु परीक्षण पोखरन में सन् 1974 ई० में और दूसरा सन् 1998 ई० में कर चुका है। भारतीय सेना के पास पृथ्वी, अग्नि, आकाश, त्रिशूल, नाग, ब्रह्मोस आदि मिसाइलें, अर्जुन टैंक, उन्नत किस्म के राडार, परमाणु पनडुब्बियाँ तथा जंगी जहाज हैं। भारत कई उपग्रह–आर्यभट्ट, भास्कर I व II, रोहिणी आदि–अन्तरिक्ष में भेज चुका है। उपर्युक्त विवरण से यह स्पष्ट हो जाता है कि भारत सुरक्षा के मामले में पूर्णरूपेण आत्मनिर्भर है। हमारे पास अत्याधुनिक अस्त्र-शस्त्रों से सुसज्जित एवं पूर्ण रूप से प्रशिक्षित सेना है तथा भारत एक परमाणु शक्तिसम्पन्न राष्ट्र भी है; अतः अब वह किसी भी प्रकार की चुनौती का सामना करने की पूर्ण .. क्षमता रखता है तथा शत्रुओं को मुंहतोड़ जवाब देने में पूर्णतया समर्थ है। |
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भारतीय सीमाओं का उल्लेख कीजिए।याभारत के किन चार राज्यों की सीमाएँ पाकिस्तान की सीमा को स्पर्श करती हैं?याभारत के उत्तर-पूर्वी तथा उत्तर-पश्चिमी सीमा पर स्थित देशों के नाम लिखिए। |
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Answer» भारत की सीमाएँ दो प्रकार की हैं 1. स्थल सीमाएँ तथा 2. समुद्री सीमाएँ। 1. स्थल सीमाएँ- हमारी स्थल सीमाएँ 15,200 किमी लम्बी हैं। उत्तरी सीमा पर चीन, नेपाल तथा भूटान देश स्थित हैं। इन देशों के साथ जम्मू एवं कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखण्ड, उत्तर प्रदेश, बिहार, पं० बंगाल, सिक्किम तथा अरुणाचल प्रदेश राज्यों की सीमाएँ लगती हैं। · उत्तर-पश्चिमी सीमा पर पाकिस्तान तथा अफगानिस्तान देश स्थित हैं। पाकिस्तान के साथ गुजरात, राजस्थान, पंजाब तथा जम्मू-कश्मीर राज्यों की सीमाएँ लगती हैं। · उत्तर-पूर्वी सीमा पर चीन, नेपाल, म्यांमार तथा बांग्लादेश स्थित हैं। म्यांमार के साथ अरुणाचल प्रदेश, नागालैण्ड, मणिपुर तथा त्रिपुरा राज्यों की सीमाएँ लगती हैं। बांग्लादेश के साथ प० बंगाल, असम, मेघालय, त्रिपुरा तथा मिजोरम राज्यों की सीमाएँ लगती हैं। 2. समुद्री सीमाएँ- भारत की समुद्री सीमो 7516.5 किमी है। भारतीय प्रायद्वीप के पश्चिम में अरब सागर में स्थित लक्षद्वीप, पूर्व में बंगाल की खाड़ी में स्थित अण्डमान-निकोबार द्वीप समूह तथा दक्षिण । में हिन्द महासागर स्थित है। भारत के दक्षिण-पूर्व में श्रीलंका स्थित है। पाक स्ट्रेट तथा मन्नार की खाड़ी भारत एवं श्रीलंका को पृथक् करते हैं। । भारत के मुख्य स्थल की तटरेखा 6,100 किमी लम्बी है। |
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थल सेना की प्रमुख शाखाएँ लिखिए। |
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Answer» थल सेना में कई प्रकार की सेनाएँ सम्मिलित हैं। इनमें
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