This section includes 7 InterviewSolutions, each offering curated multiple-choice questions to sharpen your Current Affairs knowledge and support exam preparation. Choose a topic below to get started.
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निबन्ध:परिवार नियोजन |
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Answer» प्रस्तावना–परिवार-नियोजन का तात्पर्य है-परिवार को सीमित रखना, दूसरे शब्दों में कम सन्तान को जन्म देना या जनसंख्या पर रोक लगाना। भारतवर्ष बीसवीं-इक्कीसवीं सदी में जिस सबसे बड़े और • भयानक संकट के दौर से गुजर रहा है, वह है-जनसंख्या-विस्फोट। भारत की स्थिति-भारत की बढ़ती हुई जनसंख्या के आँकड़े चौंका देने वाले हैं। यहाँ की आबादी एक अरंब बीस करोड़ का आँकड़ा पार कर चुकी है। हर मिनट में कई बच्चे जन्म ले लेते हैं। इस प्रकार प्रतिवर्ष सवा करोड़ की वृद्धि होती चली जाती है। दूसरे शब्दों में, भारत में हर वर्ष एक नया ऑस्ट्रेलिया समा जाता है। जनसंख्या : समस्या क्यों ?–बढ़ती हुई जनसंख्या भारत के लिए सबसे बड़ा खतरा इसलिए है, क्योंकि भारत के पास बढ़ती हुई आबादी को खिलाने-पिलाने, काम देने और बसाने की सुविधाएँ नहीं हैं। बढ़ती आबादी और साधनों का सन्तुलन बुरी तरह टूट चुका है। भारत की आबादी विश्व की कुल आबादी का लगभग 17% है, जब कि भूमि केवल 2% ही है। इस भूमि को बढ़ाने का कोई तरीका हमारे पास नहीं है। दूसरी समस्या यह है कि देश में खाद्यान्न 4 +4 = 8 की दर से बढ़ते हैं तो जनसंख्या 4 x 4 = 16 की दर से। इस भाँति भूमि पर नित्य अभाव, गरीबी और भूख का दबाव बढ़ता चला जाता है। आजीविका के साधनों का भी यही हाल है। आजादी के बाद देश में कुछ लाख ही बेरोजगार थे, जिनकी संख्या बढ़कर आज कई करोड़ तक पहुँच चुकी है। जनसंख्या-विस्फोट से सारा देश भयाक्रान्त है। जहाँ भी जाइए लोगों की अनन्त भीड़ दिखायी देती है। महानगरों में तो लोग मधुमक्खी के छत्तों की भाँति मँडराते नजर आते हैं। इससे प्रत्येक प्राणी पर मानसिक तनाव बढ़ता है। लोगों के लिए पैदल चलना तक कठिन हो गया है। इसके अतिरिक्त बेकार लोगों की भीड़ चोरी, उपद्रव, अपराध आदि में रुचि लेती है। अधिक जनसंख्या से देश का जीवन-स्तर कदापि नहीं उठ सकता; क्योंकि जीवन-स्तर का सीधा सम्बन्ध समृद्धि से है। जनसंख्या-वृद्धि से परिवार की सम्पन्नता में वृद्धि की जगह बिखराव आता है। इसलिए खाते-पीते परिवार भी गरीब होते चले जाते हैं। भारत में जनसंख्या वृद्धि के कारण स्वास्थ्य, शिक्षा और आवास की समस्या दिनोंदिन बढ़ती चली जा रही है जिससे देश का आर्थिक ढाँचा बुरी तरह चरमरा रहा है। जनसंख्या-वृद्धि के कारण-जनसंख्या-विस्फोट का सबसे बड़ा कारण है जन्म-दर और मृत्यु-दर का सन्तुलन बिगड़ना। भारत की मृत्यु-दर निरन्तर कम होती जा रही है, जब कि जन्म-दर वहीं-की–वहीं है। मृत्यु-दर इसलिए कम हुई है, क्योंकि स्वास्थ्य-सेवाओं में पर्याप्त सुधार हुआ है। हैजा, टी० बी०, मलेरिया, चेचक आदि जानलेवा बीमारियों का शत-प्रतिशत उपचार हुँढ़ लिया गया है। वैज्ञानिक उन्नति के कारण बाढ़, सूखा, अकाल, प्राकृतिक प्रकोपों पर भी पर्याप्त नियन्त्रण कर लिया गया है, परन्तु । जन्म-दर को रोकने में उतनी अधिक सफलता नहीं मिली है। जनसंख्या-वृद्धि रोकने के उपाय-जनसंख्या-वृद्धि को रोकने का सबसे कारगर उपाय यह है कि नर-नारी को सीमित परिवार की शिक्षा दी जाए। शहरों में यह कार्य लगभग पूरा हो चुका है। शहरी आबादी सीमित परिवार के प्रति सचेत है, परन्तु ग्रामीण आबादी अभी भी इस विषय में लापरवाह है। जब तक सामाजिक संस्थाएँ सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर सीमित परिवार की चेतना नहीं जगाएँगी, तब तक जनसंख्या की बाढ़ आती रहेगी। शहरों में भी अभी लोग पुत्र-मोह के कारण दो लड़कियों के पश्चात् तीसरी-चौथी सन्तान पैदा कर देते हैं। अभी कुछ लोग ऐसे भी हैं, जो अन्धविश्वास के कारण सन्तान को रोकने में बुराई मानते हैं। इसका उपचार लगातार शिक्षा देने से ही हो सकता है। उपसंहार : शिक्षा तथा प्रोत्साहन-जनसंख्या को सीमित करने के लिए औपचारिक शिक्षा के साथ-साथ परिवार-नियोजन की शिक्षा भी दी जानी चाहिए। उन माता-पिताओं को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए, जिन्होंने परिवार को सीमित किया है। सरकार ने अपनी ओर से ऐसे अनेक उपाय किये हैं, परन्तु आवश्यकता इस बात की है कि परिवार को सीमित बनाने सम्बन्धी कठोर कानून बनाये जाएँ तभी हर मिनट बढ़ता हुआ खतरा रुक सकता है। इस विषय में यदि कोई जाति, धर्म या सम्प्रदाय आड़े भी आता है तो उसकी परवाह नहीं करनी चाहिए। अब तो जनसंख्या-वृद्धि जीवन और मरण का प्रश्न बन चुका है। डॉ० चन्द्रशेखर ने सच ही कहा है-“हम एक रात की भी प्रतीक्षा नहीं कर सकते। परिवार-नियोजन के बिना हर रात एक भयावह स्वप्ने की तरह है।’ |
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निबन्ध:नारी-शिक्षा |
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Answer» प्रस्तावना-एक समय था, जब कि भारतवर्ष जगद्गुरु कहलाता था। विश्व के कोने-कोने से शिक्षार्थी यहाँ के विश्वविद्यालयों में विद्या ग्रहण करने आते थे। परन्तु परिस्थितियों के चक्रवात में भारत ऐसा फैसा कि आज यहाँ अशिक्षा और अज्ञान का साम्राज्य व्याप्त हो गया है। आज विश्व के निरक्षरों का एक बड़ा प्रतिशत भारत में विद्यमान है। यहाँ की नारियों की स्थिति और भी दयनीय है। अक्षर-ज्ञान, स्कूली शिक्षा, तकनीकी शिक्षा आदि के क्षेत्र में वे बहुत पिछड़ी हुई हैं। स्त्री-शिक्षा का अतीत और वर्तमान-ऐसा नहीं है कि भारतीय नारियाँ सदा-से ही अशिक्षित रही हों। प्राचीन काल में स्त्रियों को भी पुरुषों के समान शिक्षा दी जाती थी। अनुसूया, गार्गी, लीलावती आदि विदुषियों ने अपने ज्ञान से समाज को प्रभावित किया था। आचार्य मण्डन मिश्र की पत्नी ने जगद्गुरु शंकराचार्य से शास्त्रार्थ करके स्त्रियों के गौरव को बढ़ाया था। परन्तु दुर्भाग्य से भारतवर्ष को शताब्दियों तक आक्रमणकारियों के युद्ध झेलने पड़े। अस्तित्व के लिए जूझने हमारे देश का शैक्षिक विकास रुक गया। भारतीय नारी को अपनी लाज बचाने के लिए घर की दहलीज में सीमित रहना पड़ा। परिणामस्वरूप अशिक्षा उसकी विवशता बन गयी। उल्लेखनीय बात यह है कि युगों तक विद्यालयी शिक्षा से वंचित रहने पर भी भारतीय नारी ने पुरुषसमाज को सुसंस्कारित करने का बीड़ा उठाया। शिवाजी को महान बनाने वाली जीजाबाई थीं। ‘तुलसीदास को ‘रामबोला’ बनाने वाली उनकी अर्धांगिनी रत्नावली’ थीं। सैकड़ों वर्षों के युद्धों में अपने धर्म और संस्कृति को बचाये रखने वाली भारत की नारियाँ ही थीं। इस कारण हम यहाँ की नारियों को अशिक्षित होते हुए भी असंस्कारित नहीं कह सकते। नारी-शिक्षा की आवश्यकता–नारी और पुरुष दोनों समाज रूपी रथ के दो पहिये हैं। दोनों का समान रूप से शिक्षित होना आवश्यक है। समाज के कुछ पुरातनपन्थी लोग स्त्री-शिक्षा के विरोधी हैं। वे स्त्री को ‘पराया-धन’ या ‘पाँव की जूती’ या ‘अनुत्पादक’ मानकर पुरुषों के समकक्ष नहीं आने देना चाहते। वे भूल जाते हैं कि मनुष्य-जीवन की सबसे मूल्यवान शक्ति नारी के हाथों में ही है। नारियाँ ही माँ बनकर बच्चों को पालती हैं, उन्हें गुणवान बनाती हैं। वे ही उस कच्ची मिट्टी को अपने कल्पित साँचे में ढालती हैं। वह उसे देवता भी बना सकती हैं और राक्षस भी। यदि नारी में ही विवेक न होगा तो उसकी सन्तानें कैसे विवेकवान होंगी। अतः सर्वप्रथम नारी को शिक्षित, संस्कारित एवं ज्ञान-समृद्ध बनाना आवश्यक है। अरस्तू के कथनानुसार, “नारी की उन्नति तथा अवनति पर ही राष्ट्र की उन्नति या अवनति निर्भर करती है।’ प्रसिद्ध दार्शनिक बर्नार्ड शॉ का कहना है कि “किसी व्यक्ति का चरित्र कैसा है, यह उसकी माता को देखकर बताया जा सकता है।” नारी-शिक्षा का रूप–प्रश्न यह है कि नारी-शिक्षा का स्वरूप क्या होना चाहिए ? क्या नारी और पुरुष की शिक्षा में कोई अन्तर होना चाहिए ? उत्तर है–हाँ, होना चाहिए। जब प्रकृति ने उन्हें स्वभावतया पुरुष से भिन्न बनाया है तो उनकी शिक्षा भी भिन्न होनी चाहिए। नारी स्वभाव से कोमल होती है। उसमें समस्त रचनात्मक क्षमताएँ होती हैं। जयशंकर प्रसाद ने नारी-हृदय के गुणों की महिमा का वर्णन करते हुए लिखा है दया माया ममता लो आज, मधुरिमा लो अगाध विश्वास। नारी में दया, ममता, मधुरिमा, विश्वास, स्वच्छता, समर्पण, त्याग आदि उदात्त वृत्तियाँ होती हैं। अतः उसकी शिक्षा भी ऐसी होनी चाहिए जिससे उसकी इन शक्तियों का उत्तरोत्तर विकास हो। एक नारी चिकित्सा, शिक्षा, सेवा, पालन-पोषण, सौन्दर्य-बोध, कला आदि क्षेत्रों में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। वह चिकित्सक, शिक्षिका, प्रशिक्षक, परिधान-विशेषज्ञ आदि के रूप में कुशल सिद्ध हो सकती है। ये कार्य उसकी शक्तियों और रुचियों के अनुरूप हैं। आधुनिक शिक्षा-आज की नारी पुरुषों के साथ कन्धे से कन्धा मिलाकर चलने की होड़ में इंजीनियरिंग, वाणिज्य, सेना, पायलट, पुलिस आदि सेवाओं में जा रही है। आज के इस समानता-समर्थक युग में इस दौड़ को उचित कहा जा रहा है, परन्तु ये क्षेत्र स्त्रियोचित नहीं हैं। सेना-पुलिस जैसे क्षेत्र पुरुषोचित हैं। इनके लिए चित्त की कठोरता और अनथक भागदौड़ की आवश्यकता होती है। स्त्री के लिए वैसी शिक्षा और नौकरी चाहिए जिससे उसका स्त्रैण स्वभाव अक्षुण्ण बना रहे। फिर भी यदि नारी-समाज का अल्पांश कानून, पुलिस, सेना, वाणिज्य जैसे क्षेत्रों में जाना चाहे तो उसे पुरुषवत् अधिकार दिये जाने चाहिए; क्योंकि रानी लक्ष्मीबाई, इन्दिरा गाँधी, सरोजिनी नायडू, किरण बेदी आदि प्रतिभाओं ने कठोर क्षेत्रों में आकर जनसमाज को क्रान्तिकारी दिशा प्रदान करने में सफलता प्राप्त की है। उपसंहार : भारत में नारी-शिक्षा की वर्तमान स्थिति-यद्यपि भारत में नारी-शिक्षा की स्थिति सन्तोषजनक नहीं है, किन्तु आशाजनक अवश्य है। सरकार और समाज के प्रयत्नों से नारी-शिक्षा को प्रोत्साहन दिया जा रहा है। हरियाणा में स्नातक स्तर तक ग्रामीण नारियों की शिक्षा मुफ्त कर दी गयी है। लड़कियों ने कला, चिकित्सा, विज्ञान, वाणिज्य, प्रशासनिक सेवा सभी क्षेत्रों में लड़कों को जबरदस्त चुनौती दी है। लड़कियों की उत्तीर्णता प्रतिशत और गुणवत्ता प्रतिशत लड़कों से अधिक है। इससे स्पष्ट है कि भारत नारी-शिक्षा और प्रतियोगिता के क्षेत्र में उत्तरोत्तर प्रगति कर रहा है। यह एक शुभ संकेत है। |
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निबन्ध :नारी तुम केवल श्रद्धा हो पर निबन्ध अँग्रेजी में लिखें। |
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Answer» Women Part Of Sincerity Summary in English: There is a respectable place for ladies in India. Since ancient days women have been respected with trust and devotion. The woman is in the form of a mother, sister, wife and in many other forms. A man’s life is incomplete without a woman. There is a good wherever a woman is respected. Since the time of Veda and Upanishad, a woman has learnt different Shastras mathematics and science. Our Indian rivers have been given women names like Ganga, Yamuna, Kaveri and Narmada. Thus a woman has been given maximum importance. But liberty has been taken away from her. A woman is under the shelter of her father in her childhood days and under the control of her husband and her children lastly. Now the situation has been changed and a woman is becoming equal to man in each and every field like science, education music, employment and politics. E.g. Sarojini Naidu became the first woman governor and showed Gandhi became the Primeminister of her India and showed her guts to the world. |
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निबन्ध:रोचक यात्रा का वर्णन |
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Answer» प्रस्तावना–प्राय: हर व्यक्ति के जीवन में एक निश्चित दिनचर्या बन जाया करती है। वह एक बँधीबँधाई दिनचर्या के अनुसार कार्य करते रहने पर कभी-कभी ऊब जाता है और अपने जीवन-चक्र में बदलाव चाहता है। हर प्रकार के परिवर्तन के लिए यात्रा का अत्यधिक महत्त्व है। यात्रा अथवा नये स्थानों पर भ्रमण से व्यक्ति के जीवन में आयी नीरसता समाप्त हो जाती है और वह अपने अन्दर एक नया उत्साह पाता है। इतना ही नहीं, इन यात्राओं से व्यक्ति के अन्दर आत्मविश्वास और साहस उत्पन्न होता है। इससे विभिन्न व्यक्तियों के बीच आत्मीयता भी बढ़ती है और हमारे व्यावहारिक ज्ञान की वृद्धि होती है। यात्रा की तैयारी और प्रस्थान-मई का महीना था। हमारी परीक्षाएँ अप्रैल में ही समाप्त हो चुकी थीं। मेरे कुछ साथियों ने आगरा घूमने का कार्यक्रम बनाया। मैंने अपने पिताजी और माताजी से इसके लिए स्वीकृति ले ली और विद्यालय के माध्यम से रियायत प्राप्त करके रेलवे के आरक्षित टिकट बनवा लिये थे। सभी साथी अपना-अपना सामान लेकर मेरे यहाँ एकत्रित हो गये। घर से सभी छात्र एक थ्री-व्हीलर द्वारा स्टेशन पहुँचे। प्लेटफॉर्म पर बहुत भीड़ थी। कुछ समय के पश्चात् गाड़ी आयी। हमने अपना सामान गाड़ी में चढ़ाया। प्लेटफॉर्म पर सामान बेचने वालों की आवाजों से बहुत शोर हो रहा था, तभी गाड़ी ने सीटी दे दी। गाड़ी के चलने पर ठण्डी हवा लगी तो सभी को राहत मिली। मार्ग के दृश्य-हम सभी अपनी-अपनी सीटों पर बैठ चुके थे। डिब्बे में इधर-उधर निगाह घुमायी तो देखा कि कुछ लोग बैठे हुए ताश खेल रहे हैं, तो कोई उपन्यास पढ़कर मन बहला रहा है। कुछ लोग बैठे हुए ऊँघ रहे थे। मैं भी अपने साथियों के साथ गपशप कर रहा था। खिड़की से बाहर झाँकने पर मुझे पेड़-पौधे तथा खेत-खलिहान पीछे की ओर दौड़ते नजर आ रहे थे। सभी दृश्य बड़ी तेजी से पीछे छूटते जा रहे थे। गाड़ी छोटे-बड़े स्टेशनों पर रुकती हुई अपने गन्तव्य की ओर निरन्तर बढ़ती ही जा रही थी। हमने कुछ समय ताश खेलकर बिताया। साथ लाये भोजन और फल मिल-बाँटकर खाते-पीते हम सब यात्रा का पूरा आनन्द ले रहे थे। एक स्टेशन पर गाड़ी रुकते ही अचानक कानों में आवाज पड़ी कि ‘पेठा, आगरे का मशहूर पेठा’। हम सब अपना-अपना सामान सँभालते हुए नीचे उतरे।। वांछित स्थान पर पहुँचना और वहाँ के दर्शनीय स्थलों का वर्णन–हम सभी साथी एक धर्मशाला में जाकर ठहर गये। धर्मशाला में पहुँचकर हमने मुँह-हाथ धोकर अपने को तरोताजा किया। शाम के सात बज चुके थे। इसलिए हम लोग शीघ्र ही भोजन करके धर्मशाला के आस-पास ही घूमने के लिए निकल गये। अगले दिन 11.00 बजे दिन में हम लोग सिटी बस द्वारा ताज देखने के लिए चल दिये। भारत के गौरव और संसार के गिने-चुने आश्चर्यों में से एक ताजमहल के अनूठे सौन्दर्य को देखकर हम सभी स्तम्भित रह गये। श्वेत संगमरमर पत्थरों से निर्मित ताज दिन में भी शीतल किरणों की वर्षा करता प्रतीत हो रहा था। ताजमहल का निर्माण मुगल सम्राट् शाहजहाँ ने अपनी बेगम मुमताज महल की स्मृति में कराया था। यह एक सफेद संगमरमर के ऊँचे चबूतरे पर बना हुआ है। इस चबूतरे के चारों कोनों पर चार मीनारें बनी हुई। हैं। मुख्य इमारत इस चबूतरे के बीचों-बीच बनी हुई है। इमारत के ऊपरी भाग में चारों ओर कुरान की आयतें खुदी हुई हैं। इस इमारत के चारों ओर सुन्दर बगीचे बने हुए हैं, जो इसके सौन्दर्य में चार चाँद लगा रहे हैं। वास्तव में यह भारतीय और यूनानी शैली में बनी अद्वितीय और अनुपम इमारत है, जिसे देखने के लिए दुनिया के विभिन्न भागों से प्रति वर्ष लाखों व्यक्ति आते हैं। वापसी-आगरा की आकर्षक और सजीव स्मृतियों को मन में सँजोये, पेठे और नमकीन की खरीदारी कर तथा काँच के चौकोर बक्से में बन्द ताज की अनुकृति लिये हुए हम लोग वापस लौटे। इस प्रकार हमारी यह रोचक यात्रा सम्पन्न हुई। उपसंहार—घर लौट आने पर मैं प्रायः सोचता कि कूप-मण्डूकता के विनाश के लिए समय-समय पर प्रत्येक व्यक्ति को विविध स्थलों की यात्रा अवश्य करनी चाहिए; क्योंकि इससे कल्पना और यथार्थ का भेद समाप्त होता है और जीवन की वास्तविकता से साक्षात्कार भी होता है। आगरा की यात्रा ने मुझे ढेर सारे नवीन अनुभवों तथा प्रत्यक्ष ज्ञान से साक्षात्कार कराया है। |
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निबन्ध:भारत की वैज्ञानिक प्रगति |
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Answer» प्रस्तावना-सामान्य मनुष्य की मान्यता है कि सृष्टि का रचयिता सर्वशक्तिमान ईश्वर है, जो इस संसार का निर्माता, पालनकर्ता और संहारकर्ता है। आज विज्ञान ने इतनी उन्नति कर ली है कि वह ईश्वर के प्रतिरूप ब्रह्मा (निर्माता), विष्णु (पालनकर्ता) और महेश (संहारकर्ता) को चुनौती देता प्रतीत हो रहा है। कृत्रिम गर्भाधान से परखनली शिशु उत्पन्न करके उसने ब्रह्मा की सत्ता को ललकारा है, बड़े-बड़े उद्योगों की । स्थापना कर और लाखों-करोड़ों लोगों को रोजगार देकर उसने विष्णु को चुनौती दी है तथा सर्व-विनाश के लिए परमाणु बम का निर्माण कर उसने शिव को भी चकित कर दिया है। विज्ञान का अर्थ है—किसी भी विषय में विशेष ज्ञान। विज्ञान मानव के लिए कामधेनु की तरह है जो उसकी सभी कामनाओं की पूर्ति करता है तथा उसकी कल्पनाओं को साकार रूप देता है। जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में विज्ञान प्रवेश कर चुका है चाहे वह कला का क्षेत्र हो या संगीत और राजनीति का। विज्ञान ने समस्त पृथ्वी और अन्तरिक्ष को विष्णु के वामनावतार की भाँति तीन डगों में नाप डाला है। स्वतन्त्रता पूर्व और पश्चात् की स्थिति–बीसवीं शताब्दी को विज्ञान के क्षेत्र में अनेक प्रकार की उपलब्धियाँ हासिल करने के कारण विज्ञान का युग कहा गया है। आज संसार ने ज्ञान-विज्ञान के विभिन्न क्षेत्रों में बहुत अधिक प्रगति कर ली है। भारत भी इस क्षेत्र में किसी अन्य वैज्ञानिक दृष्टि से उन्नत कहे जाने वाले देशों से यदि आगे नहीं, तो बहुत पीछे या कम भी नहीं है। 15 अगस्त, सन् 1947 में जब अंग्रेजों की गुलामी का जुआ उतारकर भारत स्वतन्त्र हुआ था, तब तक कहा जा सकता है कि भारत वैज्ञानिक प्रगति के नाम पर शून्य से अधिक कुछ भी नहीं था। सूई तक का आयात इंग्लैण्ड आदि देशों से करना पड़ता था। लेकिन आज सूई से लेकर हवाई जहाज, जलयान, सुपर कम्प्यूटर, उपग्रह तक अपनी तकनीक और बहुत कुछ अपने साधनों से इस देश में ही बनने लगे हैं। विभिन्न क्षेत्रों में हुई कैज्ञाभिक प्रगति-डाक-तार के उपकरण, तरह-तरह के घरेलू इलेक्ट्रॉनिक सामान, रेडियो-टेलीविजन, कारें, मोटर-गाड़ियाँ, टूक, रेलवे इंजन और यात्री तथा अन्य प्रकार के डिब्बे, कल-कारखानों में काम आने वाली छोटी-बड़ी मशीनें, कार्यालयों में काम आने वाले सभी प्रकार के सामान, रबर-प्लास्टिक के सभी प्रकार के उन्नत उपकरण, कृषि कार्य करने वाले ट्रैक्टर,.पम्पिंग सेट तथा अन्य कटाई-धुनाई-पिसाई की मशीनें आदि सभी प्रकार के आधुनिक विज्ञान की देन माने जाने वाले साधन आज भारत में ही बनने लगे हैं। कम्प्यूटर, छपाई की नवीनतम तकनीक की मशीनें आदि भी आज भारत बनाने लगा है। इतना ही नहीं, आज भारत में अणु शक्ति से चालित धमन भट्ठियाँ, बिजलीघर, कल-कारखाने आदि भी चलने लगे हैं तथा अणु-शक्ति का उपयोग अनेक शान्तिपूर्ण कार्यों के लिए होने लगा है। आज भारतीय वैज्ञानिक अपने उपग्रह तक अन्तरिक्ष में उड़ाने तथा कक्षा में स्थापित करने में सफल हो चुके हैं। आवश्यकता होने पर संघातक अणु, कोबाल्ट और हाइड्रोजन जैसे बम बनाने की दक्षता भी भारतीय वैज्ञानिकों ने हासिल कर ली है। विज्ञान-साधित उपकरणों, शस्त्रास्त्रों का आज सैनिक दृष्टि से बहुत अधिक महत्त्व बढ़ गया है। धरती से धरती तक, धरती से आकाश तक मार कर सकने वाली कई तरह की मिसाइलें भारतीय वैज्ञानिकों द्वारा बनायी गयी हैं, जो आज भारतीय सेना के पास हैं। युद्धक टैंक, विमान, दूर-दूर तक मार करने वाली तोपें आदि भारत में ही बन रही हैं। विज्ञान ने भारतीयों के रहन-सहन और चिन्तन-शक्ति को पूर्णरूपेण बदल डाला है। भारत हवाई जहाज, समुद्र के वक्षस्थल को चीरने वाले जहाज, आकाश का सीना चीर कर निकल जाने वाले रॉकेट, कृत्रिम उपग्रह आदि के निर्माण में अपना अग्रणी स्थान रखता है। आधुनिक विज्ञान की सहायता से आज भारत ने चिकित्सा के क्षेत्र में बड़ी प्रगति की है। कठिन-से-कठिन माने जाने वाले ऑपरेशन आज भारतीय शल्य-चिकित्सकों के द्वारा सफलतापूर्वक सम्पादित किये जा रहे हैं। सभी प्रकार की प्राणरक्षक ओषधियों का निर्माण भी यहाँ होने लगा है। ऊर्जा के क्षेत्र में भी भारतीय वैज्ञानिकों की प्रगति सराहनीय है। इन्होंने नदियों की मदमस्त चाल को बाँधकर उनके जल का उपयोग सिंचाई और विद्युत निर्माण में किया। सौर ऊर्जा, पवनचक्कियाँ, ताप बिजलीघर, परमाणु बिजलीघर आदि ऊर्जा के क्षेत्र में हमारी प्रगति को दर्शाते हैं। महानगरों में गगनचुम्बी इमारतों का निर्माण, सड़कें, फ्लाईओवर, सब-वे आदि हमारी अभियान्त्रिकीय प्रगति को दर्शाते हैं। भारतीय वैज्ञानिकों ने पृथ्वी के भीतर से जल, अनेक खनिज और समुद्र को चीर कर तेल के कुएँ भी खोज निकाले हैं। कुछ-एक अपवादों को छोड़कर, भारत में अधिकांश कार्य हाथों के स्थान पर मशीनों से हो सकने सम्भव हो गये हैं। मानव का कार्य अब इतना ही रह गया है कि वह इन मशीनों पर नियन्त्रण रखे। विज्ञान ने मानव के दैनिक जीवन के लिए भी अनेक क्रान्तिकारी सुविधाएँ जुटायी हैं। डी० वी० डी० प्लेयर, दूरभाष, कपड़े धोने की मशीन, धूल-मिट्टी हटाने की मशीन, एयरकण्डीशनर आदि आरामदायक मशीनें भारत में ही बनने लगी हैं। घरों में लकड़ी-कोयले से जलने वाली अँगीठी का स्थान कुकिंग गैस ने और गाँवों में उपलों से जलने वाले चूल्हों का स्थान गोबर गैस संयन्त्र ने ले लिया है। कम्प्यूटर का प्रवेश और उसका विस्तार हमारी तकनीकी प्रगति की ओर इंगित करते हैं। उपसंहार—घर-बाहर, दफ्तर-दुकान, शिक्षा-व्यवसाय, आज कोई भी ऐसा क्षेत्र नहीं जहाँ विज्ञान का प्रवेश न हुआ हो। भारत का होनहार वैज्ञानिक हर दिशा, स्थल और क्षेत्र में सक्रिय रहकर अपनी निर्माण एवं नव-नव, अनुसन्धान-प्रतिभा का परिचय दे रहा है। इतना ही नहीं भारतीय वैज्ञानिकों ने विदेशों में भी अपनी प्रतिभा की धूम मचा रखी है। आज भारत में जो कृषि या हरित क्रान्ति, श्वेत क्रान्ति आदि सम्भव हो पायी है, उन सबका कारण विज्ञान और उसके द्वारा प्रदत्तं नये-नये उपकरण तथा ढंग ही हैं। विज्ञान को कार्यरत करने वाले कोई विदेशी नहीं, वरन् भारतीय वैज्ञानिक ही हैं। उन्हीं की लगन, परिश्रम और कार्य-साधना से हमारा देश भारत आज इतनी अधिक वैज्ञानिक प्रगति कर सका है। |
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निबन्ध:कम्प्यूटर : आधुनिक यन्त्र मानव |
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Answer» प्रस्तावना : कम्प्यूटर क्या है ?–कम्प्यूटर असीमित क्षमताओं वाली वर्तमान युग का क्रान्तिकारी साधन है। यह एक ऐसा यन्त्र-पुरुष है, जिसमें यान्त्रिक मस्तिष्कों का रूपात्मक और समन्वयात्मक योग तथा गुणात्मक घनत्व पाया जाता है। इसके परिणामस्वरूप यह कम-से-कम समय में तीव्र गति से त्रुटिहीन गणनाएँ कर लेता है। आरम्भ में, गणित की जटिल गणनाएँ करने के लिए ही कम्प्यूटर का विकास किया गया था। आधुनिक कम्प्यूटर के प्रथम सिद्धान्तकार चार्ल्स बैबेज़ (1779-1871 ई०) ने गणित और खगोल-विज्ञान की सूक्ष्म सारणियाँ तैयार करने के लिए ही एक भव्य कम्प्यूटर की योजना तैयार की थी। दूसरे महायुद्ध के दौरान पहली बार बिजली से चलने वाले कम्प्यूटर बने। इनका उपयोग भी गणनाओं के लिए ही हुआ। आज के कम्प्यूटर केवल गणनाएँ करने तक ही सीमित नहीं रह गये हैं वरन् अक्षरों, शब्दों, आकृतियों और कथनों को भी ग्रहण करने अथवा इससे भी अधिक अनेकानेक कार्य करने में समर्थ हैं। कम्प्यूटर के उपयोग-आज जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में कम्प्यूटरों का व्यापक उपयोग हो रहा है (क) प्रकाशन के क्षेत्र में सन् 1971 ई० में माइक्रोप्रॉसेसर का आविष्कार हुआ। इस • आविष्कार ने कम्प्यूटरों को छोटा, सस्ता और कई गुना शक्तिशाली बना दिया। माइक्रोप्रॉसेसर के आविष्कार के बाद कम्प्यूटर का अनेक कार्यों में उपयोग सम्भव हुआ। किसी पुस्तक की 500 पृष्ठों की पाण्डुलिपि का कुछ हजार पुस्तकों के रूप में पाठकों के सम्मुख आना कुछ घण्टों की बात हो गयी है। (ख) बैंकों में कम्प्यूटर का उपयोग बैंकों में भी किया जाने लगा है। खातों के संचालन और लेनदेन का हिसाब रखने वाले कम्प्यूटर भी बैंकों में स्थापित हो रहे हैं। आज कम्प्यूटर के द्वारा ही 24 घण्टे पैसों के लेन-देन की ए० टी० एम० (Automated Teller Machine) जैसी सेवाएँ सम्भव हो सकी हैं।। (ग) सूचनाओं के आदान-प्रदान में प्रारम्भ में कम्प्यूटर की गतिविधियाँ वातानुकूलित कक्षों तक ही सीमित थीं, किन्तु अब एक कम्प्यूटर हजारों किलोमीटर दूर के दूसरे कम्प्यूटरों के साथ बातचीत कर सकता है तथा उन्हें सूचनाएँ भेज सकता है। इण्टरनेट जैसी सुविधा से आज देश का प्रत्येक नगर सम्पूर्ण विश्व से जुड़ गया है। (घ) आरक्षण के क्षेत्र में–कम्प्यूटर नेटवर्क की अनेक व्यवस्थाएँ अब हमारे देश में स्थापित हो गयी हैं। इसके द्वारा अब सभी प्रमुख एयरलाइन्स की हवाई यात्राओं तथा देश के सभी प्रमुख शहरों में रेल-यात्रा के आरक्षण की व्यवस्था भी अस्तित्व में आ गयी है। (ङ) कम्प्यूटर ग्राफिक्स में कम्प्यूटर केवल अंकों और अक्षरों को ही नहीं, वरन् रेखाओं और आकृतियों को भी सँभाल सकते हैं। कम्प्यूटर ग्राफिक्स की इस व्यवस्था के अनेक उपयोग हैं। भवनों, मोटरगाड़ियों तथा हवाईजहाजों आदि के डिजाइन तैयार करने में कम्प्यूटर ग्राफिक्स का व्यापक उपयोग हो रहा है। वास्तुशिल्पी भी अब अपने डिजाइन कम्प्यूटर स्क्रीन पर तैयार करते हैं। (च) कला के क्षेत्र में कम्प्यूटर अब चित्रकार की भूमिका भी निभाने लगे हैं। चित्र तैयार करने के लिए अब रंगों, तूलिकाओं, रंग-पट्टिका और कैनवास की कोई आवश्यकता नहीं रह गयी है। चित्रकार अब कम्प्यूटर के सामने बैठता है और अपने नियोजित प्रोग्राम की मदद से अपनी इच्छा के अनुसार स्क्रीन पर रंगीन रेखाएँ प्रस्तुत कर देता है। (छ) संगीत के क्षेत्र में कम्प्यूटर अब सुर सजाने का काम भी करने लगे हैं। पाश्चात्य संगीत के स्वरांकन को कम्प्यूटर स्क्रीन पर प्रस्तुत करने में कोई कठिनाई नहीं होती, परन्तु वीणा जैसे भारतीय वाद्य की स्वरलिपि तैयार करने में कठिनाइयाँ आ रही हैं। लेकिन वह दिन दूर नहीं, जब भारतीय संगीत की स्वर-लहरियों को भी कम्प्यूटर स्क्रीन पर उभर कर प्रस्तुत किया जा सकेगा। (ज) खगोल-विज्ञान के क्षेत्र में कम्प्यूटरों ने वैज्ञानिक अनुसन्धान के अनेक क्षेत्रों का समूचा ढाँचा ही बदल दिया है। पहले खगोलविद् दूरबीनों पर रात-रात भर आँखें गड़ाकर आकाशीय पिण्डों का अवलोकन करते रहते थे, किन्तु अब किरणों की मात्रा के अनुसार ठीक-ठीक चित्र उतारने वाले इलेक्ट्रॉनिक उपकरण उपलब्ध हो गये हैं। (झ) चुनावों में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन भी एक सरल कम्प्यूटर ही है। मतदान के लिए ऐसी वोटिंग मशीनों का उपयोग अब हमारे देश में भी हो रहा है। (ञ) उद्योग-धन्धों में कम्प्यूटर उद्योग-नियन्त्रण के भी शक्तिशाली साधन हैं। बड़े-बड़े कारखानों के संचालन का काम अब कम्प्यूटर सँभालने लगे हैं। कम्प्यूटरों से जुड़कर रोबोट अनेक किस्म के औद्योगिक उत्पादनों को सँभाल सकते हैं। (ट) सैनिक कार्यों में आज भी प्रमुख रूप से महायुद्ध की तैयारी के लिए नये-नये शक्तिशाली सुपर कम्प्यूटरों का विकास किया जा रहा है। महाशक्तियों की ‘स्टारवार्स’ की योजना कम्प्यूटरों के नियन्त्रण पर आधारित है। (ठ) अपराध निवारण में अपराधों के निवारण में भी कम्प्यूटर की अत्यधिक उपयोगिता है। कई देशों में सभी अधिकृत वाहन मालिकों, चालकों, अपराधियों का रिकॉर्ड पुलिस के एक विशाल कम्प्यूटर में संरक्षित होता है। कम्प्यूटर द्वारा क्षणमात्र में अपेक्षित जानकारी उपलब्ध हो जाती है, जो कि अपराधियों को पकड़ने में सहायक सिद्ध होती है। किसी अपराधी का कैसा भी चित्र उपलब्ध होने पर कम्प्यूटर की सहायता से अपराधी के किसी भी उम्र और स्वरूप की तस्वीर प्रस्तुत की जा सकती है। कम्प्यूटर तकनीक से हानियाँ-जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में कम्प्यूटर तकनीक के निरन्तर बढ़ते जा रहे व्यापक उपयोगों ने जहाँ एक ओर इसकी उपयोगिता दर्शायी है, वहीं दूसरी ओर इसके भयावह परिणामों को भी अनदेखा नहीं किया जा सकता। यह स्पष्ट प्रतीत हो रहा है कि कम्प्यूटर हर क्षेत्र में मानव-श्रम को नगण्य बना रहा है, जिससे भारत सदृश जनसंख्या बहुल देशों में बेरोजगारी की समस्या विकराल रूप धारण कर चुकी है। बैंकों आदि में इस व्यवस्था के कुछ दुष्परिणाम भी सामने आये हैं। दूसरों के खातों के कोड नम्बर जानकर प्रतिवर्ष करोड़ों रुपयों से बैंकों को ठगना अब एक आम बात हो गयी है। कम्प्यूटर और मानव-मस्तिष्क-कम्प्यूटर के सन्दर्भ में ढेर सारी भ्रान्तियाँ जनसामान्य के मस्तिष्क में छायी हुई हैं। कुछ लोग इसे सुपर पावर समझ बैठे हैं, जिसमें सब कुछ करने की क्षमता है; किन्तु उनकी धारणाएँ पूर्णरूपेण निराधार हैं। वास्तविकता तो यह है कि कम्प्यूटर एकत्रित आँकड़ों को इलेक्ट्रॉनिक विश्लेषण प्रस्तुत करने वाली एक मशीन-मात्र है। यह केवल वही काम कर सकता है जिसके लिए इसे निर्देशित किया गया हो। यह कोई निर्णय स्वयं नहीं ले सकता और न ही कोई नवीन बात सोच सकता है। यह मानवीय संवेदनाओं, अभिरुचियों, भावनाओं और चित्त से रहित, मात्र एक यन्त्र-पुरुष है। जिसकी बुद्धि-लब्धि (Intelligence Quotient : I.O.) मात्र एक मक्खी के बराबर होती है, यानि बुद्धिमत्ता में कम्प्यूटर मनुष्य से कई हजार गुना पीछे है। उपसंहार-निष्कर्ष रूप में यह कहा जा सकता है कि कम्प्यूटर टेक्नोलॉजी के भी दो पक्ष हैं। इसको सोच-समझकर उपयोग किया जाए तो यह वरदान सिद्ध हो सकता है, अन्यथा यह मानव-जाति की तबाही का साधन भी बन सकता है। इसलिए कम्प्यूटर की क्षमताओं को ठीक से समझना आवश्यक है। इलेक्ट्रॉनिकी शिक्षा एवं साधन; कम्प्यूटर टेक्नोलॉजी की उपेक्षा नहीं कर सकते। लेकिन इनके लिए यदि बुनियादी शिक्षा की समुचित व्यवस्था की जाती, देश में टेक्नोलॉजी के साधन जुटाये जाते और पाश्चात्य संस्कृति में विकसित हुई इस टेक्नोलॉजी को देश की परिस्थितियों को ध्यान में रखकर धीरे-धीरे अपनाया जाता तो अच्छा होता। |
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निबन्ध-लिखिए : पुस्तकों का महत्व |
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Answer» विचार-बिंदुः लाभ – प्रभाव – पुस्तकें किसी देश की अमर निधि होती हैं – पुस्तकें अस्त्र हैं – मनुष्य का मित्र। प्रभावः संसार के इतिहास पर दृष्टिपात करने पर देखते हैं कि जितनी भी महान विभूतियाँ हुई हैं, उन पर किसी-न-किसी अंश में अच्छी पुस्तकों का प्रभाव था। महात्मा गाँधी भगवद्गीता, टालस्टाय तथा अमेरिका के संत थोरो के साहित्य से अत्यधिक प्रभावित थे। लेनिन में क्रांति की भावना मार्क्स के साहित्य को पढ़कर जगी थी। पुस्तकें किसी देश की अमर निधि होती हैं: किसी जाति के उत्कर्ष अथवा अपकर्ष का पता उसके साहित्य से चलता है। प्राचीन ग्रीक संस्कृति कितनी उच्च और महान थी, इसका पता हमें उसके साहित्य से चलता है। गुप्तकाल भारत का स्वर्णिम युग कहा जाता है क्योंकि उस काल में सर्वोत्कृष्ट पुस्तकों की रचना हुई। कालिदास इस युग के महान साहित्यकार थे। पुस्तकें अस्त्र हैं: विचारों के युद्ध में पुस्तकें ही अस्त्र हैं। पुस्तकों में लिखे विचार संपूर्ण समाज की काया पलट देते हैं। समाज में जब भी कोई परिवर्तन आता है अथवा क्रांति उपस्थित होती है, उसके मूल में कोई विचारधारा ही होती है। मनुष्य का मित्रः एक विद्वान की उक्ति है – “सच्चे मित्रों के चुनाव के पश्चात् सर्वप्रथम एवं प्रधान आवश्यकता है – उत्कृष्ट पुस्तकों का चुनाव।’ जो पुस्तकें हमें अधिक विचारने को बाध्य करती हैं, वे ही हमारी सबसे बड़ी सहायक हैं। वे मनुष्य को सच्चा सुख और शांति प्रदान करती हैं। थामस ए. केपिस ने एक बार कहा था – “मैंने प्रत्येक स्थान पर विश्राम खोजा, किंतु वह एकांत कोने में बैठकर पुस्तकें पढ़ने के अतिरिक्त कहीं प्राप्त न हो सका।” पुस्तक-प्रेमी सबसे अधिक सुखी होता है। |
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निबन्ध-लिखिए : राष्ट्रीय एकता। |
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Answer» आज हमारा भारत देश स्वतंत्र है। इस स्वतंत्रता को पाने के लिए हम सभी भारतवासियों ने एकता के सूत्र में बंधकर ही प्रयास किया था। क्योंकि एकता में बहुत बड़ी ताकत होती है। अलग-अलग पाँच लकड़ियों को मिनटों में तोड़ा जा सकता है, परन्तु उन्हीं पाँच लकड़ियों के एक गढे को तोड़ना नामुमकिन है। यह है एकता की शक्ति। व्यक्ति-व्यक्ति में एकता, समाज-समाज में एकता जैसे होती है, वैसे ही ‘राष्ट्रीय-एकता’ की बहुत आवश्यकता है। बिना एकता के कोई भी कार्य सफल नहीं हो सकता। बिना एकता के कोई संस्था अथवा संगठन भी खड़ा नहीं हो सकता। जिस देश में एकता नहीं होती है, वह कदापि विकास नहीं कर सकता, वह कदापि राष्ट्रोन्नति में सफल नहीं हो सकता। हमारे देश में करीब पाँच सौ वर्षों तक मुगलों ने और करीब दो सौ वर्षों तक अंग्रेजों ने राज्य किया। इसका कारण भी यही है कि हममें (भारतीयों में) उस समय एकता नहीं थी। उस अनेकता के कारण ही हम गुलाम रहे और हमने बहुत-कुछ खोया। जब हम जागृत हुए, हमारा सोया हुआ भारत जाग उठा . और हमने एकता का महामंत्र फूंका तो नतीजा यह हुआ कि शत्रु भाग खड़े हुए। एकता से आजादी मिली, एकता से हमने विकास किया, एकता से हम आगे बढे और एकता से ही हम फिर विश्वगुरु बनने के लिए अग्रसर हैं। संगठन में शक्ति होती है, यह समझकर ही हम ‘राष्ट्रीय एकता’ के प्रहरी बने हुए हैं। |
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निबन्ध-लिखिए :पर्यावरण प्रदूषण। |
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Answer» मनुष्य अपनी सुख-सुविधाओं के लिये प्रकृति से छेड़छाड़ कर रहा है। इससे प्रकृति का संतुलन बिगड़ता जा रहा है और प्रदूषण फैलता जा रहा है। प्रदूषण का अर्थ है – दूषित वातावरण । पर्यावरण के तीन अंग हैं – वायु, जल और भूमि। इनके अतिरिक्त ध्वनि प्रदूषण भी आजकल एक समस्या हो गई है। महानगरों में आज अत्यधिक वायु-प्रदूषण हो रहा है। वायु-प्रदूषण के दो मुख्य कारण हैं – एक तो यह कि कारखानों और वाहनों से निकलने वाला धुआँ। इसमें कार्बनमोनोक्साइड गैस होती है। यह शुद्ध हवा में मिलकर उसे प्रदूषित कर देती है। कारखानों से निकलने वाला विषैला जल, शुद्ध जल को प्रदूषित कर देता है। जनसंख्या की अभिवृद्धि के कारण घरों की गंदी नालियों का पानी भी नालों व नदियों में मिल जाता है। गाँवों के लोग तालाबों आजकल किसान अपने खेतों में अधिक फसल प्राप्त करने की लालच में अनेक प्रकार के रासायनिक खादों को छिड़कते हैं। परिणामतः भूमि प्रदूषण होता है। शहरों में कारखानों के भोंपू, वाहनों तथा लाऊडस्पीकरों की तेज ध्वनियों से ध्वनि-प्रदूषण भी होता है। इससे कभी-कभी लोगों के बहरे होने का खतरा भी पैदा होता है। नये-नये वैज्ञानिक प्रयोगों के कारण आज धरती पर अत्यधिक गर्मी होने लगी है। हाल ही में उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में जो उथल-पुथल मची थी, बादल फटे थे, भूकंप आया था और बाढ़ का जो भयंकर प्रकोप देखा गया था, वह सब इसी असंतुलन के कारण हुआ था। यदि मनुष्य ने ठीक समय पर समझदारी से काम नहीं लिया तो सब-कुछ तबाह हो जायेगा। अतः हमें सचेत हो जाना चाहिए। वृक्षारोपण को अधिक महत्व देना चाहिए। गंदे पानी की नालियों को नदी में नहीं मिलने देना चाहिए। अनावश्यक शोरगुल को रोकने का प्रयास करना चाहिए। पेड़ों को नहीं काटना चाहिए। परमाणु-विस्फोट आदि को रोकने का प्रयास होना चाहिए। तभी हम प्रदूषण की समस्या को हल कर पायेंगे। |
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स्वास्थ्य और व्यायाम पर निबन्ध लिखें। |
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Answer» मानसिक सुख को प्राप्त करने का मुख्य साधन शारीरिक स्वास्थ्य है। मानव जीवन में स्वास्थ्य ही सर्वस्व हैं। शरीर को स्वस्थ रखने के लिए लोग अनेक उपाय करते हैं पर उनमें सबसे अधिक सरल और सुगम उपाय व्यायाम है। जीवन व्यायाम के बिना कभी स्फूर्तिमय नहीं रहता। इसलिए व्यायाम मानव जीवन के लिए अत्यधिक आवश्यक है। शारीरिक अंगों द्वारा समुचित ढंग से परिश्रम करने को व्यायाम कहते हैं। व्यायाम के विभिन्न भेद हैं। भिन्न-भिन्न प्रकार के आसन, दण्ड-बैठक, खुले मैदान में दौड़ना, घूमना, प्राणायाम करना, कुश्ती लड़ना, तैरना, हॉकी, फुटबाल, वालीबाल, क्रिकेट, टेनिस, कबड्डी, बेडमिन्टन खेलना आदि सभी को व्यायाम के अन्तर्गत रख सकते हैं। इन व्यायामों में शरीर के विभिन्न अंगों से समुचित काम लिया जाता है जिससे मांस-पेशियों में बल आता है और उनका विकास समुचित तरीके से होता है। हड्डियों में मजबूती आती है तथा परिश्रम करने से पसीना अधिक निकलता है जिससे रक्त का संचार ठीक ढंग से होता है और वह साफ हो जाता है। मानव-जीवन में व्यायाम का विशेष स्थान है। जिस प्रकार रेल के इंजन को चलाने के लिए कोयले और पानी की आवश्यकता होती है, उसी प्रकार शरीर को क्रियाशील बनाये रखने के लिए व्यायाम रूपी कोयले की आवश्यकता होती है। व्यायाम से सारा शरीर सुडौल, सुगठित एवं दृढ़ बन जाता है। रक्त संचार ठीक तरह तथा तीव्र गति से होता है। हृदय की गति में वेग पैदा हो जाता है तथा पाचक शक्ति भी अपना कार्य ठीक तरह से करती है। सभी इन्द्रियाँ ठीक तरह से अपना कार्य करती रहती हैं। हृदय में उत्साह, आत्म-विश्वास तथा निडरता रहती है। मन भी कभी अप्रसन्न नहीं होता। रोग तो व्यायामशील व्यक्ति के पास फटक ही नहीं सकते। व्यायाम का सबसे अधिक प्रभाव व्यक्ति के मस्तिष्क पर पड़ता है। व्यायाम द्वारा मस्तिष्क का विकास होता है। अंग्रेजी में कहावत है – ‘Healthy mind in a healthy body’ अर्थात् स्वस्थ शरीर में स्वस्थ मस्तिष्क होता है। व्यायाम द्वारा शरीर में एक अनुपम स्फूर्ति का श्रोत बहने लगता है। आज के वैज्ञानिक युग में व्यायाम अत्यंत आवश्यक है। व्यायाम के लिए खुली हवा और खुली जगह आवश्यक होती है ताकि श्वास लेने के लिए स्वच्छ वायु मिल सके। शरीर के लिए व्यायाम अत्यंत आवश्यक है। जीवन में अधिक समय तक सुखी और निरोग रहने का एक मात्र साधन व्यायाम ही है। |
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निबन्ध-लिखिए : स्वच्छ भारत अभियान। |
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Answer» स्वस्थ जीवन जीने के लिए स्वच्छता का विशेष महत्व है। आरोग्य को नष्ट करने के जितने भी कारण हैं, उनमें गन्दगी प्रमुख है। बीमारियाँ गन्दगी में ही पलती हैं। जहाँ कूड़े-कचरे के ढेर जमा रहते हैं, मल-मूत्र सड़ता है, नालियों में कीचड़ भरी रहती है, सीलन और साड़न बनी रहती है, वहीं मक्खी, पिस्सू, खटमल जैसे बीमारियाँ उत्पन्न करने वाले कीड़े उत्पन्न होते हैं। कहना न होगा कि हैजा, मलेरिया, दस्त, पेट के कीड़े, चेचक, खुजली, रक्त-विकार जैसे कितने ही रोग इन मक्खी, मच्छर जैसे कीड़ों से ही फैलते हैं। महात्मा गांधी ने अपने आसपास के लोगों को स्वच्छता बनाए रखने संबंधी शिक्षा प्रदान कर राष्ट्र को एक उत्कृष्ट संदेश दिया था। उन्होंने ‘स्वच्छ भारत’ का सपना देखा था। वे चाहते थे कि भारत के सभी नागरिक एक साथ मिलकर देश को स्वच्छ बनाने के लिए कार्य करें। महात्मा गांधी के स्वच्छ भारत के स्वप्न को पूरा करने के लिए, प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने 2 अक्टूबर 2014 को स्वच्छ भारत अभियान शुरू किया है। इस अभियान का उद्देश्य अगले पांच वर्ष में स्वच्छ भारत का लक्ष्य प्राप्त करना है ताकि बापू की 150 वीं जयंती को इस लक्ष्य की प्राप्ति के रूप में मनाया जा सके। शहरी क्षेत्रों के लिए स्वच्छ भारत मिशन का उद्देश्य 1.04 करोड़ परिवारों को लक्षित करते हुए 2.5 लाख समुदायिक शौचालय, 2.6 लाख सार्वजनिक शौचालय, और प्रत्येक शहर में एक ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की सुविधा प्रदान करना है। ग्रामीण क्षेत्रों के लिए स्वच्छ भारत मिशन का उद्देश्य पांच वर्षों में भारत को खुला शौच से मुक्त बनाना है। अभियान के तहत देश में लगभग 11 करोड़ 11 लाख शौचालयों के निर्माण के लिए एक लाख चौंतीस हज़ार करोड़ रुपए खर्च किये जाएंगे। स्वच्छ भारत अभियान का उद्देश्य केवल आसपास की सफाई करना ही नहीं है अपितु नागरिकों की सहभागिता से अधिक-सेअधिक पेड़ लगाना, कचरा मुक्त वातावरण बनाना, शौचालय की सुविधा उपलब्ध कराकर एक स्वच्छ भारत का निर्माण करना है। देश में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए स्वच्छ भारत का निर्माण करना अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। सरकार जन समुदाय की सक्रिय भागीदारी के बिना किसी भी अभियान में सफलता प्राप्त नहीं कर सकती। इसके लिए व्यापक जन चेतन कार्यक्रम चलाना होगा। स्कूली विद्यार्थीयों को अपने घर तथा पड़ोस के सभी घरों में शौचालय का होना तथा इसका उपयोग सुनिश्चित करना चाहिए। उनको अपने घर तथा आस पड़ोस में अच्छी आदतों को फैलाना चाहिए। घर, गली, स्कूल तथा अन्य सभी सार्वजनिक स्थानों पर गन्दगी नहीं फैलाना चाहिए तथा कचरा पात्र में ही कचरा डालना चाहिए। खुले में शौच नहीं जाना चाहिए। अस्वच्छ भारत की तस्वीरें भारतीयों के लिए अक्सर शर्मिंदगी की वजह बन जाती है। इसलिए स्वच्छ भारत के निर्माण एवं देश की छवि सुधारने का यह समय और अवसर है। यह अभियान न केवल नागरिकों को स्वच्छता संबंधी आढ़तें अपनाने बल्कि हमारे देश की छवि स्वच्छता के लिए तत्परता से काम कर रहे देश के रूप में बनाने में भी मदद करेगा। |
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राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी पर निबंध लिखिए। |
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Answer» गाँधीजी इस युग के महानतम व्यक्ति है। उन्होंने भारत को ही नहीं, अपितु विश्व की सम्पूर्ण पीड़ित मानवता को सत्य और अहिंसा का अमोघ शस्त्र देकर विश्व को शान्ति का पाठ पढ़ाया। आज विश्व में ऐसा कौन सा मानव हैं, जिसने महात्मा गाँधी का नाम न सुना हो। उनका पूरा नाम मोहनदास करमचन्द गाँधी था। इनका जन्म 2 अक्टूबर, 1869 को काठियावाड़ प्रदेश के पोरबन्दर नामक स्थान में एक उच्च परिवार में हुआ था। पिता करमचन्द पहले पोरबन्दर, पीछे राजकोट और फिर बीकानेर के दीवान रहे। आपकी माता पुतलीबाई बहुत साधु स्वभाव और पूजा-पाठ तथा व्रत-उपवास में विश्वास रखने वाली महिला थी। आपकी शिक्षा अधिकतर राजकोट में ही हुई। 17 वर्ष की आयु में आपको बैरिस्टरी की शिक्षा प्राप्त करने के लिए इंग्लैण्ड भेजा गया। सन् 1888 में आप बैरिस्टरी पास करके भारतवर्ष लौट आये। गाँधीजी के जीवन के बीस वर्ष दक्षिण अफ्रीका के आंदोलन में व्यतीत हुए। दक्षिण अफ्रीका में अपने कार्य में सफलता प्राप्त करके सन् 1914 में वे भारतवर्ष लौटे। भारत आने पर कुछ दिनों तक आप श्री गोपालकृष्ण गोखले के साथ रहे। 1920 के असहयोग आन्दोलन में आपकी अग्रणी भूमिका थी। आपने विदेशी वस्त्र आदि का बहिष्कार किया तथा खादीप्रचार, अछूतोद्धार, मादक द्रव्य-निषेध, हिन्दू-मुस्लिम एकता का चतुर्मुखी कार्यक्रम काँग्रेस के समक्ष रखा। सन् 1930 में आपने नमक कानून का विरोध किया तथा भारतीयों के अधिकारों की रक्षा की। 1942 में उन्होंने जो ‘भारत छोड़ो आन्दोलन’ छेड़ा, उससे अंग्रेजों ने समझ लिया कि अब हमें भारत से जाना ही होगा। इनके ही प्रयत्नों से 15 अगस्त सन् 1947 को देश स्वतन्त्र हुआ। आपकी मृत्यु 30 जनवरी सन् 1948 को हुई। गाँधीजी नेता, विचारक और अध्यात्मिक पुरुष थे। भारत को एक महान् राष्ट्र बनाने वाले गाँधीजी ही थे। इसीलिए वे ‘राष्ट्रपिता’ अथवा ‘बापू’ कहलाए। |
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किताब-घर, एवेन्यू रोड़, बेंगलूर, इनके नाम पर ‘रामचरित मानस’ और गुरुनाथ जोशी कृत ‘हिन्दी-कन्नड़ कोश’ मँगाते हुए एक पत्र लिखिए। |
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Answer» प्रेषक, सेवा में, मान्य महोदय, विषय : किताबों के लिए पत्र सेवा में निवेदन है कि मुझे नीचे लिखी किताबों की आवश्यकता है। अतः इस पत्र के पहुंचते ही उन किताबों को वी.पी.पी. द्वारा भेजने की कृपा कीजिए। धन्यवाद। भवदीय |
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निबन्ध:विज्ञान : वरदान या अभिशाप |
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Answer» प्रस्तावना-आज का युग वैज्ञानिक चमत्कारों का युग है। मानव-जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में आज विज्ञान ने आश्चर्यजनक क्रान्ति ला दी है। मानव-समाज की सारी गतिविधियाँ आज विज्ञान से परिचालित हैं। दुर्जेय प्रकृति पर विजय प्राप्त कर आज विज्ञान मानव का भाग्यविधाता बन बैठा है। अज्ञात रहस्यों की खोज में उसने आकाश की ऊँचाइयों से लेकर पाताल की गहराइयाँ तक नाप दी हैं। उसने. हमारे जीवन को सभी ओर से इतना प्रभावित कर दिया है कि विज्ञान-शून्य विश्व की आज कोई कल्पना तक नहीं कर सकता। इस स्थिति में हमें सोचना पड़ता है कि विज्ञान को वरदान समझा जाए या अभिशाप। अतः इन दोनों पक्षों पर समन्वित दृष्टि से विचार करके ही किसी निष्कर्ष पर पहुँचना उचित होगा। विज्ञान : वरदान के रूप में-आधुनिक मानव का सम्पूर्ण पर्यावरण विज्ञान के वरदानों के आलोक से आलोकित है। प्रात: ज़ागरण से लेकर रात्रि-शयने तक के सभी क्रिया-कलाप विज्ञान द्वारा प्रदत्त साधनों के सहारे ही संचालित होते हैं। जितने भी साधनों का हमें अपने दैनिक जीवन में उपयोग करते हैं, वे सब विज्ञान के ही वरदान हैं। इसीलिए तो कहा जाता है कि आज का अभिनव मनुष्य विज्ञान के माध्यम से प्रकृति पर भी विजय पा चुका है आज की दुनिया विचित्र नवीन, विज्ञान के इन विविध वरदानों की उपयोगिता प्रमुख क्षेत्रों में निम्नलिखित है (क) यातायात के क्षेत्र में प्राचीन काल में मनुष्य को लम्बी यात्रा तय करने में बरसों लग जाते थे, किन्तु आज रेल, मोटर, जलपोत, वायुयान आदि के आविष्कार से दूर-से-दूर स्थानों पर अति शीघ्र पहुंचा जा सकता है। यातायात और परिवहन की उन्नति से व्यापार की भी कायापलट हो गयी है। (ख) संचार के क्षेत्र में—बेतार के तार ने संचार के क्षेत्र में क्रान्ति ला दी है। आकाशवाणी, दूरदर्शन, दूरभाष (टेलीफोन, मोबाइल फोन) आदि की सहायता से कोई भी समाचार क्षण-भर में विश्व के एक छोर से दूसरे छोर तक पहुँचाया जा सकता है। कृत्रिम उपग्रहों ने इस दिशा में और भी चमत्कार कर दिखाया है। (ग) दैनन्दिन जीवन में-विद्युत् के आविष्कार ने मनुष्य की दैनन्दिन सुख-सुविधाओं को बहुत बढ़ा दिया है। वह हमारे कपड़े धोती है, उन पर प्रेस करती है, भोजन पकाती है, सर्दियों में गर्म और गर्मियों में शीतल जल उपलब्ध कराती है तथा गर्मी-सर्दी दोनों से समान रूप से हमारी रक्षा करती है। (घ) स्वास्थ्य एवं चिकित्सा के क्षेत्र में मानव को भयानक और संक्रामक रोगों से पर्याप्त सीमा तक बचाने का श्रेय विज्ञान को ही है। एक्स-रे, अल्ट्रासाउण्ड टेस्ट, ऐन्जियोग्राफी, कैट स्कैन आदि परीक्षणों के माध्यम से शरीर के अन्दर के रोगों का पता सरलतापूर्वक लगाया जा सकता है। यही नहीं, विज्ञान से नेत्रहीनों को नेत्र, कर्णहीनों को कान और अंगहीनों को अंग देना भी सम्भव हो सका है। (ङ) औद्योगिक क्षेत्र में भारी मशीनों के निर्माण ने बड़े-बड़े कल-कारखानों को जन्म दिया है, जिससे श्रम, समय और धन की बचत के साथ-साथ प्रचुर मात्रा में उत्पादन सम्भव हुआ है। इससे विशाल जनसमूह को आवश्यक वस्तुएँ सस्ते मूल्य पर उपलब्ध करायी जा सकी हैं। (च) कृषि के क्षेत्र में-—125 करोड़ से अधिक की जनसंख्या वाला हमारा देश आज यदि कृषि के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर हो सका है तो यह भी विज्ञान की ही देन है। विज्ञान ने किसान को उत्तम बीज, प्रौढ़ एवं विकसित तकनीक, रासायनिक खादे, कीटनाशक, ट्रैक्टर, ट्यूबवेल और बिजली प्रदान की है। छोटे-बड़े बाँधों का निर्माण कर नहरें निकालना भी विज्ञान से ही सम्भव हुआ है। (छ) शिक्षा के क्षेत्र में—मुद्रण-यन्त्रों के आविष्कार ने बड़ी संख्या में पुस्तकों को प्रकाशन सम्भव बनाया है। इसके अतिरिक्त समाचार-पत्र, पत्र-पत्रिकाएँ आदि भी मुद्रण-क्षेत्र में हुई क्रान्ति के फलस्वरूप घर-घर पहुँचकर लोगों का ज्ञानवर्द्धन कर रही हैं। (ज) मनोरंजन के क्षेत्र में चलचित्र, आकाशवाणी, दूरदर्शन आदि के आविष्कार ने मनोरंजन को सस्ता और सुलभ बनाकर मनुष्य को उच्चकोटि का मनोरंजन सुलभ कराया है। विज्ञान : अभिशाप के रूप में विज्ञान का एक और पक्ष भी है। विज्ञान एक असीम शक्ति प्रदान करने वाला तटस्थ साधन है। मानव चाहे जैसे इसका इस्तेमाल कर सकता है। सभी जानते हैं कि मनुष्य में दैवी प्रवृत्ति भी है और आसुरी भी। सामान्य रूप से जब मनुष्य की दैवी प्रवृत्ति प्रबल रहती है तो वह मानव-कल्याण के कार्य करता है, परन्तु किसी भी समय मनुष्य की आसुरी प्रवृत्ति प्रबल होते ही कल्याणकारी विज्ञान एकाएक प्रबलतम विध्वंसक एवं संहारक शक्ति का रूप ग्रहण कर सकता है। गत विश्व युद्ध से लेकर अब तक मानव ने विज्ञान के क्षेत्र में अत्यधिक उन्नति की है; अतः कहा जा सकता है। कि आज विज्ञान की विध्वंसक शक्ति पहले की अपेक्षा बहुत बढ़ गयी है। सुख-सुविधाओं की अधिकता के कारण मनुष्य आलसी और आरामतलब बनता जा रहा है, जिससे उसकी शारीरिक शक्ति का ह्रास हो रहा है, अनेक नये-नये रोग उत्पन्न हो रहे हैं तथा उसमें सर्दी और गर्मी सहने की क्षमता घट गयी है। चारों ओर का कृत्रिम आडम्बरयुक्त जीवन इस विज्ञान की ही देन है। विज्ञान के इस विनाशकारी रूप को दृष्टि में रखकर महाकवि दिनकर मानव को चेतावनी देते हुए कहते हैं सावधान, मनुष्य ! यदि विज्ञान है तलवार । उपसंहार-विज्ञान सचमुच तलवार है, जिससे व्यक्ति आत्मरक्षा भी कर सकता है और अनाड़ीपन में अपने अंग भी काट सकता है। इसमें दोष तलवार का नहीं, उसके प्रयोक्ता का है। विज्ञान ने मानव के सम्मुख असीमित विकास का मार्ग खोल दिया है, जिससे मनुष्य संसार से बेरोजगारी, भुखमरी, महामारी आदि को समूल नष्ट कर विश्व को अभूतपूर्व सुख-समृद्धि की ओर ले जा सकता है, किन्तु यह तभी सम्भव है, जब मनुष्य में आध्यात्मिक दृष्टि का विकास हो, मानव-कल्याण की सात्विक भावना जागे। अत: स्वयं मानव को ही यह निर्णय करना है कि वह विज्ञान को वरदान रहने दे या अभिशाप बना दे। |
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| 15. |
निबन्ध-लिखिए :स्वतंत्रता-दिवस। |
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Answer» स्वतंत्रता दिवस अर्थात् 15 अगस्त हमारे देश के इतिहास का यह स्वर्णिम-दिन है। इसी दिन हमारा देश अंग्रेजों की गुलामी से छुटकारा पाकर स्वतंत्र हुआ था। लालकिले पर देश के प्रथम प्रधानमंत्री पं. नेहरू जी ने तिरंगा झंडा फहराया था। देश की आजादी के लिए भारतीयों ने एक लम्बी लड़ाई लड़ी थी। हजारों-लाखों के बलिदान के पश्चात् हमें यह आजादी मिली है। इस स्वतंत्रता के लिए 1857 को सबसे पहले क्रांति हुई थी। उसी से प्रेरणा लेकर, आगे लोकमान्य तिलक, दादाभाई नौरोजी, गोपालकृष्ण गोखले, लाला लाजपतराय, महात्मा गाँधी जैसे अनेकानेक देशभक्तों ने 1947 तक आन्दोलन किये। यद्यपि कुछ हद तक गाँधीजी के नेतृत्व में यह सत्य और अहिंसा की लड़ाई थी, फिर भी आजादी की लड़ाई में बहुत-बड़ी संख्या में देशभक्त शहीद हुए हैं। इस बात को हमें नहीं भूलना चाहिए। इस लड़ाई के संदर्भ में अंग्रेजों ने भारतीयों पर बहुत-बड़े अत्याचार किए थे, लाठियाँ बरसाई, देशभक्तों को जेलों में ढूंस दिया और गोलियाँ भी बरसाई गई। अंत में अंग्रेजों को हार माननी पड़ी और वे 15 अगस्त 1947 को अपना बोरिया-बिस्तर समेटकर चले गए। तब से प्रतिवर्ष 15 अगस्त को सम्पूर्ण देश में स्वतंत्रता दिवस मनाया जाता है। देश के प्रधानमंत्री दिल्ली में राष्ट्रध्वज फहराते हैं। नगर-नगर, गाँव-गाँव में प्रभात-फेरियाँ निकलती हैं। देशभक्ति के गीतों की गूंज हर कहीं सुनाई देती हैं। नेताओं के भाषण होते हैं। सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन होते हैं। बलिदानियों को स्मरण कर, उन्हें श्रद्धांजलि दी जाती है। हमारा कर्तव्य है कि हम इस आजादी को बनाये रखें। देश-द्रोहियों को करारा जवाब दें। |
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पर्यावरण की रक्षा पर निबंध लिखिए। |
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Answer» जनसंख्या वृद्धि एवं बढ़ते हुए फैशन के कारण – मनुष्य ने जंगलों का या वृक्षों का उपयोग ज्यादा करने लगा है। उपकरणों एवं ईधन के रूप में इतना अधिक करना प्रारंभ कर दिया कि प्रकृति का भी अस्तित्व संकट में पड़ जाएगा। इसलिए आज ‘पर्यावरण की रक्षा करना सबसे बड़ी समस्या बन गई है।’ वायु हमारे प्राणों का आधार है। इसलिए वायु को शुद्ध रखना बहुत ज़रूरी है। वायु को शुद्ध रखने के लिए आम, नीम, बरगद, तुलसी, आंवला और पीपल का वृक्ष आदि लगना ज़रूरी है। जंगल को काटने से बचाना है। अगर हम किसी एक वृक्ष को काटना है तो उसकी जगह पर दूसरा वृक्ष लगाना चाहिए। वृक्षों की संख्या ज्यादा रहने से समय के अनुसार वर्षा भी अच्छी तरह से होती है। जंगलों के संरक्षण एवं संवर्धन के द्वारा वायु प्रदूषण को रोका जा सकता है। जल मनुष्य की बुनियादी आवश्यकता है। इसलिए कुआँ, तालाब और नदी का जल सफाई के साथ सुरक्षित रखा जाए। रासायनिक क्रियाओं के द्वारा परिशोधन किया जाए तो जल प्रदूषण को रोका जा सकता है। सरकार ने इस दिशा में प्रयास प्रारंभ कर दिया है। प्रदूषण का निवारण तभी हो सकता है ‘जब जनता एवं सरकार का एक साथ प्रयास – इस दिशा में निरंतर होता रहे। |
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समय का सदुपयोग पर निबंध लिखिए। |
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Answer» समय सब से ज्यादा मूल्य है। क्योंकि धन आता जाता रहता है, लेकिन बीता हुआ समय वापस कभी नहीं आता है। समय गतिशील है। इसे कोई भी रोक नहीं पाता और बाँधा नहीं जा सकता। इसलिए समय के बारे में कबीरदास ने इस प्रकार कहा है – ‘कल का काम आज करना चाहिए और आज का काम अभी शुरू कर देना चाहिए।’ इसलिए समय का उपयोग, सही उपयोग, सदुपयोग करना बहुत आवश्यक है। समय का उपयोग हमारे काम और सोच-विचार पर निर्भर है। दिन में चौबीस घण्टे होते हैं। उनमें से नित्य कर्म का समय निकाल देने के बाद जो समय बचता है, उसे सही योजना बनाकर उपयोग में लाना ही समय का सदुपयोग है। समय पर उठना, समय पर सोना बहुत आवश्यक है। जो जल्दी उठते हैं, वे दिन भर के सभी काम समय पर ही पूरे कर सकते हैं। प्रत्येक काम को समय के साथ करना। हमें भी समय के साथ-साथ निरंतर गतिशील रहना चाहिए। समय को अच्छी तरह से योजना बनाकर एक पल भी नष्ट किए बिना काम-काज करना है। वही आदमी समाज में आगे बढ़ सकता है। वह सुखी और स्वच्छंद से जीवन बीत सकता है। जो समय को महत्व नहीं देकर कामकाज ठीक तरह से नहीं करता है वह कभी भी समाज में आगे नहीं बढ़ सकता है। वह हर कदम-कदम पर ठोकर खाता-रहता है। इसलिए आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है कि हम समय का सही उपयोग करें। |
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ब्रीफकेस में क्या था? |
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Answer» ब्रीफकेस में कुछ कागजात थे। |
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इंटरनेट क्रांति का असर किस पर पड़ा है? |
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Answer» इंटरनेट क्रांति क असर बड़े – भूढों से लेकर छोटे बच्चों तक सब पर असर पड़ा है। |
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Name the four main categories of Communication Styles. |
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Answer» Verbal, Non - Verbal, Written and Visual |
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List an activities that help in stress management. |
Answer»
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...... is acts as an interface between user and computer. |
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Answer» Operating system |
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....... is also called firrfi ware. |
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Answer» ROM is also called firrfi ware. |
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What is the role of students in e-Waste disposal? |
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Answer» Students’ role in e-Waste disposal 1. Stop buying unnecessary electronic equipments 2. Repair Faulty electronic equipments instead of buying a new one. 3. Give electronic equipments to recycle 4. Buy durable, efficient, quality, toxic free, good warranty products 5. check the website or call the dealer if there is any exchange scheme 6. Buy rechargeable battery products. |
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What are antivirus? Name any 2 antiviruses. |
Answer»
Examples:
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Explain how e-Waste creates environmental issues. Usually there are four methods for e-Waste dispoal. Which one is the most effective? Why? Write a slogan to aware the public about e-Waste hazards. |
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Answer» e-Waste disposal methods: 1. Reuse: Reusability has an important role of e-Waste management and can reduce the volume of e-Waste 2. Incineration: It is the process of burning e-Waste at high temperature in a chimney 3. Recycling of e-Waste: It is the process of making new products from this eWaste. 4. Land filling: It is used to level pits and cover by thick layer of soil. |
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Why is waste considered one of the major environmental issues? |
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Answer» The environmental problem concerning waste worsens with industrial development and the global growth of consumption societies in the 20th and 21st centuries, factors that cause the immense volume of residuals produced by mankind in the last decades. The increased waste generation raises the issue about what to do with waste since nature is not able to degrade and resorb with adequate speed and efficiency most of the residuals. Therefore the various kinds of waste accumulate, polluting the environment and creating danger to humans and nature. (The present destination of waste has been public waste depositories where the waste volume is compressed and buried underground, an environmentally risky method. Another method has been incineration, with the grave consequence of causing air pollution.) |
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Name any Antivirus S/W. |
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Answer» Norton Antivirus, McAfee, Avira, AVG |
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Name the two classifications of output devices. |
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Answer» Hard copy and soft copy |
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Name any three pointing devices |
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Answer» Mouse, Touchpad and light pen. |
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Write the full form of Cc and Bcc (used in emailcommunication). Explain the difference between them. |
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Answer» Cc : Carbon Copy: every recipient can check who else has received the mail. Bcc : Blind Carbon Copy: no recipient can check who else has received the mail. |
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Sarvesh, a student of Class X, is not able to understand the difference between web client and web-server. Help him in understanding the same by explaining their role and giving suitable example of each. |
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Answer» Web-Client: An application (Web Browser, Chatting Program, etc.) that requests for services from a webserver. Example: Web Browsers, Chatting Applications Web-Server: Web-server is a software (or any dedicated computer running this software) that serves the request made by web-clients. Example: Apache Server |
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Sarvesh, Sriniketan and Srinivas are partners in the ratio of 5:3: 2. If Sriniketan’s share of profit at the end of the year amounted to ₹1,50,000, what will be Sarvesh’s share of profits?(A) ₹5,00,000.(B) ₹1,50,000.(C) ₹3,00,000.(D) ₹2,50,000. |
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Answer» Correct answer is: (D) ₹2,50,000. |
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Asha and Nisha are partner’s sharing profits in the ratio of 2:1. Kashish was admitted for 1/4 share of which 1/8 was gifted by Asha. The remaining was contributed by Nisha.Goodwill of the firm is valued at ₹ 40,000. How much amount for goodwill will be credited to Nisha’s Capital account?(A) ₹2,500.(B) ₹5,000.(C) ₹20,000.(D) ₹ 40,000. |
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Answer» Correct answer is: (B) ₹5,000. |
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Angle and Circle ware partners in a firm. Their Balance Sheet showed Furniture at ₹2,00,000; Stock at ₹1,40,000; Debtors at ₹1,62,000 and Creditors at ₹60,000. Square was admitted and new profit-sharing ratio was agreed at 2:3:5. Stock was revalued at ₹1,00,000, Creditors of ₹15,000 are not likely to be claimed, Debtors for ₹2,000 have become irrecoverable and Provision for doubtful debts to be provided @ 10%.Angle’s share in loss on revaluation amounted to ₹30,000. Revalued value of Furniture will be:(A) ₹2,17,000(B) ₹1,03,000(C) ₹3,03,000(D) ₹1,83,000 |
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Answer» Correct answer is: (D) ₹1,83,000 Option D = 1,83,000 |
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How does one make allowance for doubting? Why is this important. |
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Answer» One can make allowance for doubting by keeping the balance of mind. The person should not lose his temper. He should have self-confidence. This is important to be successful in life. If one keeps reacting to everybody’s point, one would not be able to concentrate on his aim. |
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Govt decided to conduct a test that contains all objective type questions. Which device is most suitable for evaluation. |
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Answer» OMR is most suitable for evaluation. |
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I am an input device. I have a stick with two but-tons called triggers on the top. Who am I? |
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Answer» The answer is Joy stick. |
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Govt, decided to conduct a test that contains all objective type questions. Which device is most suitable for evaluation. |
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Answer» OMR is most suitable for evaluation. |
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......... is used mostly for computer games. |
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Answer» Joy stick is used mostly for computer games. |
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Most commonly used input device is ....... |
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Answer» Keyboard or mouse |
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Copy the exclamation form the play(At least 5) |
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Answer» Exclamations are used for indicating high levels of emotion in a sentence. The Exclamation mark (!) is used to show where exactly the emotion is felt. There are many kinds of Exclamation words for eg: Oh! Bravo! How nice! Hurray! etc. |
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What is my job?I put out fires. |
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Answer» Correct answer is firefighter |
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Find the most appropriate match.1. 1GBA. 230bytes2. 220bytesB. 230KB3. 230KBC. 1 MB4. 1 Tera ByteD. 210MB |
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Answer» 1 – D 2 – C 3 – A 4 – B |
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What is my job?I take care of sick animals. |
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Answer» Correct answer is veterinarian |
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“Not all primary memory is volatile”. Justify this statement. |
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Answer» Primary Memory (Main memory) is classified into two RAM and ROM. Out of this RAM is volatile but ROM is non-volatile. |
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In portable computers which pointing device is suitable? |
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Answer» Touchpad is suitable. |
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Write down the full form of the following. a) VDU b) OMR |
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Answer» a) VDU – Visual, Display Unit b) OMR – Optical Mark Reader. |
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I am a pointing device. I am a stationary device. Who am I? |
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Answer» The answer is Touchpad. |
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What is my job?You pay me when you buy something at the store. |
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Answer» Correct answer is clerk or salesperson |
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