This section includes 7 InterviewSolutions, each offering curated multiple-choice questions to sharpen your Current Affairs knowledge and support exam preparation. Choose a topic below to get started.
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लेखक ने लखनवी अंदाज पाठ में नवाबी परम्परा पर करारा व्यंग्य किया है।’ स्पष्ट कीजिए। |
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Answer» लेखक इस पाठ के द्वारा यह बताना चाहते हैं कि नवाब लोग अपनी नवाबी दिखाने के लिए झूठा आडंबर रचते हैं। प्रस्तुत पाठ में नवाब साहब मात्र सूंघकर उदर पूर्ति का ढोंग रचते हैं और सूंघने मात्र से ही उनकी भूख शांत हो गई और वे डकार भी लेते हैं। वास्तविकता यह है कि व्यक्ति की भूख भोजन की प्रशंसा करने या सूघने मात्र से शांत नहीं होती। कल्पना करने से उदर-पूर्ति नहीं हो सकती। उनकी नवाबी शान अब नहीं रही यह इस बात से पता चलता है कि वे सेकन्ड क्लास में यात्रा कर रहे थे। फिर भी न जाने क्यों नवाब लोग अपनी नवाबी अंदाज या परंपरा का दिखावा करते हैं। लेखक ने इस पर करारा व्यंग्य करते हुए कहा कि यदि बिना खाये व्यक्ति की भूख शांत हो सकती है, तो बिना विचार, घटना और पात्र के कहानी भी लिखी जा सकती है। |
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आराम से सेकन्ड क्लास में जाने के लिए यात्रियों को क्या करना पड़ता है?(क) कम दाम देना पड़ता है।(ख) अधिक दाम देना पड़ता है।(ग) रुपये नहीं देना पड़ता है।(घ) टिकट लेना पड़ता है। |
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Answer» (ख) अधिक दाम देना पड़ता है। |
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लखनवी अंबाज कहानी का संदेश अपने शब्दों में लिखिए। |
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Answer» ‘लखनवी अंदाज’ कहानी में लेखक ने नवाबी परम्परा पर करारा व्यंग्य किया है। नवाब साहब की नवावी तो चली गई किन्तु अभी भी वे वास्तविकता से दूर है। वे सेकन्ड क्लास की यात्रा तो करते हैं साथ में उम्मीद करते हैं कि उन्हें ऐसा करते कोई न देखे। वे खीरे को मात्र सूंघकर पेट भरने का दिखावा करते हैं और उदर-पूर्ति का दिखावा करने के लिए झूठा डकार भी निकालते हैं। जबकि वास्तविकता यह है कि भूख केवल सूंघने से शांत नहीं होगी। उसके लिए भोजन आवश्यक है। लेखक बताना चाहते हैं कि व्यक्ति को यथार्थ में जीना चाहिए। हमें बनावटीपूर्ण जीवन-शैली या झूठा दिखावा करने की आदत छेड़ देनी चाहिए। हमें हर मनुष्य को समान मानकर उसके साथ मित्रतापूर्ण व्यवहार करना चाहिए। ऐसा व्यवहार नहीं करना चाहिए कि हम दूसरों के उपहास के पात्र बने। लेखक यही संदेश इस पाठ के द्वारा देना चाहते हैं। |
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लेखक ने खीरा खाने से इंकार क्यों किया? |
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Answer» पहली बार जब नवाब साहब ने खीरा खाने के लिए पूछा तो लेखक ने इन्कार कर दिया था अत: जब दूसरी बार पूछा गया तो आत्मसम्मान की रक्षा के लिए उन्होंने खीरा खाने से मना कर दिया। |
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लेखक को नवाब के किन-किन हाव-भावों से महसूस हुआ कि वे उनसे बातचीत करने के लिए तनिक भी उत्सक नहीं है? |
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Answer» लेखक जब सेकंड क्लास के डिब्बे में चढ़े तो उनको देखकर नवाब साहब के चेहरे पर असंतोष का भाव छा गया। उन्हें लगा कि उनके एकान्तवास में खलेल पड़ गयी हो । वे अनमने होकर खिड़की के बाहर झांकते रहे और लेखक को न देखने का नाटक करने लगे। नवाब साहब के इन हाव-भावों को देखकर लेखक अनुमान लगा रहा था कि वे बातचीत करने के लिए तनिक भी उत्सुक नहीं है। |
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बिना विचार, घटना और पात्रों के भी क्या कहानी लिखी जा सकती हैं ? यशपाल के इस विचार से आप कहां तक सहमत हैं? |
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Answer» ‘लखनवी अंदाज’ के माध्यम से यशपाल का कहना है कि जब खीरा को सूंघकर व्यक्ति तृप्ति का डकार ले सकता है तो बिना विचार, घटना और पात्रों के कहानी लिखी जा सकती है। मैं यशपालजी के इस विचार से सहमत नहीं हूँ। हर कहानी का कोई न कोई उद्देश्य होता है, उसमें पात्र और घटनाओं विचारों की प्रस्तुति होती है। उसमें किसी चरित्र का वर्णन होता है, इन सभी के कारण कहानी में रोचकता आती है, पाठकों को पढ़ने की जिज्ञासा होती है। कहानी में यह सब न होने पर वह कपोल कल्पना मात्र बन जाएगी। इसलिए मेरे अनुसार कहानी में विचार घटना, पात्र का होना आवश्यक है। तभी कहानी रोचक होगी। |
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डिब्बे में घुसते ही लेखक ने क्या देखा? |
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Answer» लेखक ने दौड़कर ट्रेन पकड़ा। जैसे ही वे डिब्बे में घुसे उन्होंने देखा कि एक बर्थ पर लखनऊ की नवाबी नस्ल के एक भद्र व्यक्ति पालथी मारकर बैठे हैं। उनके सामने दो ताजे चिकने खोरे तौलिए पर रखे थे। |
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नवाब साहब को लेखक के सामने झिझक क्यों हो रही थी? |
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Answer» लेखक का आना नवाब साहब को अच्छा नहीं लगा। वे यह नहीं चाहते थे कि कोई सफेदपोश उन्हें मझले दर्जे में सफर करते देखे। नवाब को खीरे जैसे अपदार्थ खाते कोई देखे तो उनकी नवाबी शान धूल में मिल जाएगी। इसलिए नवाब को लेखक के सामने झिझक हो रही थी। |
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लेखक ने सेकन्ड क्लास का टिकट क्यों लिया ? |
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Answer» लेखक अपनी नई कहानी के संबंध में सोच सकने और खिड़की से प्राकृतिक दृश्य देख सकने के लिए उन्होंने सेकंड क्लास का टिकट लिया। यद्यपि इसमें सफर करने के लिए दाम अधिक देने पड़ते हैं। |
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आप इस निबंध को और क्या नाम देना चाहेंगे? |
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Answer» मेरे अनुसार इस निबंध का और नाम हो सकता है –
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लेखक को कौन-सी पुरानी आदत हैं?(क) कल्पना करते रहने की पुरानी आदत है।(ख) लिखने रहने की पुरानी आदत है।(ग) सोते रहने की पुरानी आदत है।(घ) ट्रेन में सफर करने की पुरानी आदत है। |
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Answer» (क) कल्पना करते रहने की पुरानी आदत है। |
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नवाब साहब के खीरे खाने के नये तरीका का वर्णन कीजिए। |
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Answer» नवाब साहब ने खाने के लिए खीरे को धोकर काटा और उसे करीने से सजा दिया। उसके बाद वे खीरे को होंठ तक लाए, खीरे की सुगन्ध और स्वाद की कल्पना से संतुष्ट हो उन्होंने खीरे की एक एक फांकों को खिड़की के बाहर फेंक दिया। अर्थात् खीरे को खाने के बजाय सूंघकर स्वाद की कल्पना करके फेंक देना उनका नया तरीका था। |
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लेखक ने खीरा खाने से क्यों इन्कार कर दिया?(क) खीरा खाना पसन्द नहीं था।(ख) खीरा देखकर उनके मुंह में पानी आ रहा था।(ग) आत्मसम्मान की रक्षा के लिए।(ग) पेट खराब होने के कारण। |
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Answer» (ग) आत्मसम्मान की रक्षा के लिए |
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लेखक ने नवाब साहब द्वरा खीरे खाने के आग्रह को क्यों नकार दिया होगा ? तर्क सहित उत्तर लिखिए। |
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Answer» लेखक जब सेकन्ड क्लास के डिब्बे में चढ़ा, जहाँ नवाब साहब सामने की बर्थ पर बैठे थे, उन्होंने लेखक के आने पर उन्हें नजरअंदाज कर दिया। और खिड़की के बाहर देखने लगे। उनके हाव-भाव से लगा कि लेखक का आना उन्हें अच्छा नहीं लगा। लेखक भी स्वाभिमानी थे। वे भला नवाबों के सामने कहाँ झुकनेवाले थे। जब प्रथम बार नवाब साहब ने खीरे खाने का आग्रह किया तो उन्होंने इन्कार कर दिया। नवाब साहब ने लेखक के आने पर न जिज्ञासा दिखाई कि वे कौन हैं और न उनसे बातचीत करने की कोशिश की। इसीके कारण लेखक ने नवाब साहब द्वारा खीरे खाने के आग्रह को नकार दिया होगा। |
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लेखक और नवाब साहब दोनों में से आप किसके स्वभाव को अच्छा कहेंगे? क्यों ? |
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Answer» मेरे अनुसार लेखक और नवाब साहब दोनों में से मैं नवाब साहब को ही अच्छा कहूँगा क्योंकि नवाब साहब अपनी नवाबी अंदाज में दिखावा अवश्य करते हैं किन्तु लेखक से बातचीत की पहल वही करते हैं। लेखक का समाज में नाम-प्रतिष्ठा सब कुछ है किन्तु उन्होंने सामने से नवाब साहब से बातचीत करने की कोई चेष्टा नहीं की। वे भी गर्व से पूर्ण शक्ति का दिखावा ही करते हैं। वे चाहते तो खुद पहल करके नवाब साहब से बातचीत प्रारंभ कर शिष्टाचार का परिचय दे सकते थे। किन्तु उन्होंने तो बातचीत करने के बजाय आखें चुरा ली। नवाब साहब दो बार उनसे खीरा खाने का आग्रह करते हैं, यहाँ पर भी लेखक के भावों में कोई परिवर्तन नहीं आता और वे इन्कार कर देते हैं। यहाँ पर लेखक अपने घमण्डी स्वभाव का प्रदर्शन करता है। अत: मेरे अनुसार नवाब साहब का स्वभाव लेखक से अच्छा है। |
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नवाब साहब ने बहुत ही यल से खीरा काटा, नमक-मिर्च बुरका अंततः सूंघकर खिड़की के बाहर फेंक दिया । उन्होंने ऐसा क्यों किया होगा ? उनका ऐसा करना उनके कैसे स्वभाव को इंगित करता है? |
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Answer» नवाबों की आदत है अपनी शान-शौकत का प्रदर्शन करना । उन्होंने प्रदर्शन करने के लिए ही खीरा काटा, नमक-मिर्च बुरका अतत: सूंघकर खिड़की के बाहर फेंक दिया। वास्तव में वे अपनी नवाबी का प्रदर्शन करने के लिए ही उन्होंने खीरे को सूंघकर बाहर फेंक दिया। उनके अनुसार खीरा जैसी तुच्छ वस्तु खाकर अपना तौहीन नहीं करवाना चाहते थे। खीरा खाकर पेट भरना आम लोगों की बात है। उनका ऐसा करना नवाबी झाड़ना अर्थात् अमीरी का प्रदर्शन करने की ओर संकेत करता है। |
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नवाब साहब ने खीरे का क्या किया? |
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Answer» नवाब साहब ने खीरे को धो-पोछकर छीलकर उसे काट कर करीने से तौलिए पर सजा दिया। एक-एक फाँक सूंघकर खिड़की से बाहर फेंक दिया। |
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नवाब साहब ने नमक-मिर्च लगी खीरें की फांकों का क्या किया?(क) लेखक को दे दिया(ख) नवाब साहब खुद खा गए(ग) खिड़की के बाहर फेंक दिया |
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Answer» (ग) खिड़की के बाहर फेंक दिया। |
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