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गैर-परम्परागत ऊर्जा से आप क्या समझते हैं? भारत में गैर-परम्परागत ऊर्जा के संसाधनों का वर्णन कीजिए।यागैर-परम्परागत ऊर्जा स्रोतों का क्या अभिप्राय है? इन स्रोतों के दो महत्त्व लिखिए।याकिन्हीं दो गैर-परम्परागत ऊर्जा स्रोतों का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।याऊर्जा के गैर-परम्परागत साधनों का महत्त्व लिखिए।यागैर-परम्परागत ऊर्जा के दो स्रोत बताइए।

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गैरपरम्परागत ऊर्जा संसाधन

गैर-परम्परागत स्रोत ऊर्जा के वे स्रोत हैं जिनका प्रयोग बार-बार किया जा सकता है। इसलिए इन्हें नव्यकरणीय या असमापनीय स्रोत भी कहा जाता है।

गैर-परम्परागत ऊर्जा संसाधन के स्रोत

ऊर्जा के गैर-परम्परागत साधनों अथवा स्रोतों में से प्रमुख का विवरण निम्नलिखित है

1. सौर ऊर्जा यह प्रदूषण मुक्त है। इसमें सूर्य के प्रकाश को ऊर्जा में बदला जाता है। सौर ऊर्जा का प्रयोग खाना बनाने, पानी गर्म करने, फसल सुखाने व गाँवों में विद्युतीकरण करने में किया जाता है। 31 मार्च, 1998 ई० तक 3.80 लाख वर्ग मीटर क्षेत्र में सौर ऊर्जा उपलब्ध करायी जा चुकी थी। सौर ऊर्जा के उपयोग से प्रति वर्ष 15 करोड़ किलोवाट घण्टे ऊर्जा की बचत हो रही है।

2. पवन ऊर्जा – भारत में पवन ऊर्जा की अनुमानित क्षमता 2 हजार मेगावाट है। ऊर्जा मन्त्रालय की । रिपोर्ट के अनुसार 31 मार्च, 1999 ई० तक देश में पवन ऊर्जा की स्थापित क्षमता 1,025 मेगावाट थी। पवन ऊर्जा के उत्पादन में भारत का विश्व में चौथा स्थान है। गुजरात, महाराष्ट्र, ओडिशा एवं तमिलनाडु राज्य इस ऊर्जा उत्पादन के लिए प्रसिद्ध हैं।

3. बायो गैस देश में मार्च, 1999 ई० तक 2,850 लाख बायो गैस संयन्त्र स्थापित किये जा चुके थे, जो प्रत्येक वर्ष 410 लाख टन जैविक खाद का निर्माण कर रहे हैं। बायो गैस उत्पादन की तकनीक का प्रशिक्षण देने के लिए कोयम्बटूर, पूसा आदि में प्रशिक्षण केन्द्र खोले गये हैं।

4. भूतापीय ऊर्जा – भूतापीय ऊर्जा प्राकृतिक गर्म पानी के झरने या तालाब से संयन्त्र लगाकर प्राप्त की जाती है। हिमाचल प्रदेश में कुल्लू जिले के मणिकर्ण नामक स्थान पर भूतापीय ऊर्जा की पायलट परियोजना सफल सिद्ध हुई है।

5. नगरीय तथा औद्योगिक कूड़े-कचरे से ऊर्जा – नगरीय तथा औद्योगिक कूड़ा-कचरा पर्यावरण को दूषित करता है। इससे दिल्ली तथा मुम्बई जैसे महानगरों में ऊर्जा तैयार की जाती है।

6. ज्वारीय ऊर्जा – अनुमान है कि देश में ज्वारीय शक्ति से 8,000 से 9,000 मेगावाट क्षमता की ऊर्जा प्राप्त हो सकती है। खम्भात की खाड़ी, कच्छ की खाड़ी तथा सुन्दरवन इसके सम्भावित ऊर्जा क्षेत्र हैं।

7. लहर ऊर्जा समुद्री लहरों से देश में 40,000 मेगावाट क्षमता की ऊर्जा प्राप्त करने की सम्भावना का आकलन किया गया है। केरल में तिरुवनन्तपुरम के निकट विजिंगम स्थान पर 150 मेगावाट क्षमता का संयन्त्र (प्लाण्ट) लगाया गया है।

महत्त्व
ऊर्जा के गैर-परम्परागत संसाधनों का महत्त्व निम्नलिखित कारणों से है–

  • भारत एक उष्ण कटिबन्धीय देश है। यहाँ वर्ष के अधिकांश भाग में उच्च तापमान रहते हैं। अतः सौर ऊर्जा के विकास की अच्छी सम्भावनाएँ विद्यमान हैं। इसका प्रयोग घरों तथा सड़कों पर | प्रकाश-व्यवस्था, पानी गर्म करने, खाना पकाने, फसलें सुखाने आदि में किया जा सकता है।
  • भारत की तटरेखा विस्तृत है। यहाँ ज्वारीय तथा लहर ऊर्जा का विकास सम्भव है। तटीय भागों में इस ऊर्जा का उपयोग किया जा सकता है।
  • कृषि उत्पादन अधिक होने से बायो गैस ऊर्जा का विकास सम्भव है। गन्ने की खोई तथा चावल के भूसे | को ऊर्जा-स्रोत के रूप में परिणत किया जा सकता है।
  • सघन एवं जनसंख्या होने के कारण देश में गोबर, मलमूत्र, कूड़े-कचरे आदि की अधिकता है। महानगरों में इसका व्यापक प्रयोग सम्भव है।


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