1.

परम्परागत ऊर्जा संसाधन से आप क्या समझते हैं ? परम्परागत ऊर्जा संसाधनों के स्रोतों का वर्णन कीजिए।यापरम्परागत ऊर्जा के संसाधन क्या हैं? इनके दो प्रमुख संसाधनों का वर्णन भी कीजिए।

Answer»

परम्परागत ऊर्जा संसाधन

परम्परागत स्रोत ऊर्जा के वे स्रोत हैं, जो प्रयोग के पश्चात् समाप्त हो जाते हैं। इसलिए इन्हें अनव्यकरणीय, समापनीय या क्षयशील स्रोत भी कहा जाता है।

परम्परागत ऊर्जा संसाधन के स्रोत

ऊर्जा के परम्परागत साधनों अथवा स्रोतों में से प्रमुख का विवरण निम्नलिखित है
1. कोयला – भारत विश्व के कोयला उत्पादक देशों में छठा स्थान रखता है। अनुमानतः भारत में 250 अरब टन कोयले के सुरक्षित भण्डार हैं। क्षेत्र–भारत का समस्त कोयला गोण्डवाना क्षेत्र (पश्चिम बंगाल, बिहार, ओडिशा और मध्य प्रदेश) तथा टर्शियरी क्षेत्र (कच्छ, आन्ध्र प्रदेश, तमिलनाडु और राजस्थान) में पाया जाता है।
2. खनिज तेल ( पेट्रोलियम) – आज के भौतिक युग की मुख्य संचालन-शक्ति पेट्रोलियम ही है। क्षेत्र–खनिज तेल के उत्पादन में भारत का विश्व में बारहवाँ स्थान है। यहाँ संसार का केवल 0.5% खनिज तेल ही उत्पन्न किया जाता है। भारत में मुख्य रूप से असोम, गुजरात तथा बॉम्बे-हाई में तेल-क्षेत्र स्थित हैं। वर्तमान समय में भारत में तेल की 18 तेलशोधक इकाइयाँ (रिफाइनरी) कार्यरत,
3. जल-विद्युत शक्ति – भारत में शक्ति के साधनों में जल-विद्युत का विशेष महत्त्व है। यहाँ जल-शक्ति का असीमित भण्डार उपलब्ध है। अनुमान है कि जल-शक्ति के द्वारा भारत में 4 करोड़ किलोवाट से भी अधिक विद्युत शक्ति उत्पन्न की जा सकती है।
क्षेत्र – भारत में जल-विद्युत शक्ति उत्पादक क्षेत्रों का विवरण निम्नलिखित है

  • महाराष्ट्र – यह जल-विद्युत उत्पादन में अग्रणी है। टाटा जलविद्युत (तीन शक्ति-गृह), भिवपुरी, खोपोली, मीरा, कोयना, पूर्णा, वैतरणा, भटनगर-बीड़ आदि मुख्य जल-विद्युत केन्द्र हैं।
  • कर्नाटक – विद्युत शक्ति का उत्पादन सर्वप्रथम इसी राज्य में हुआ था। कावेरी पर शिवसमुद्रम्, शिमला, जोग, तुंगभद्रा, शरावती आदि प्रमुख जल-विद्युत योजनाएँ हैं।
  • तमिलनाडु – पायकारा, कावेरी पर मैटूर, ताम्रपर्णी पर पापानासम्, मोयार, कुण्डा, पेरियार, परम्बिकुलम्, अलियार प्रमुख परियोजनाएँ हैं।
  • पंजाब हिमाचल प्रदेश मण्डी, गंगुछाल, कोटला, भाखड़ा तथा II, बैरासिडल, चमेरा आदि।
  • केरल – पल्लीवासल, सेंगुलम्, शोलयार, पोरिंगलकुथु, नेरियामंगलम्, पोन्नियार, शबरीगिरि, इडुक्की, कट्टियाडी आदि प्रमुख जलविद्युत परियोजनाएँ हैं।
  • उत्तर प्रदेश ऊपरी गंग नहर पर ‘गंगा इलेक्ट्रिक ग्रिड’ महत्त्वपूर्ण है, जिसके अन्तर्गत पथरी, मुहम्मदपुर, निरगाजनी, चितौरा, सलावा, भोला, पल्हेड़, सुमेरा आदि स्थानों पर कृत्रिम बाँध बनाकर जल- विद्युत का विकास किया गया है। रिहन्द, माताटीला, यमुना हाइडिल, रामगंगा जल विद्युत परियोजनाएँ भी उल्लेखनीय हैं।
  • जम्मू-कश्मीर – सिन्ध, झेलम, सलाल, चेनानी, दुलहस्री आदि मुख्य जल-विद्युत परियोजनाएँ हैं।

4. अणु शक्ति या परमाणु बिजली – जिन खनिजों में रेडियोधर्मी तत्त्व पाये जाते हैं, उन्हें ‘परमाणु खनिज’ कहते हैं; जैसे-यूरेनियम, थोरियम, प्लूटोनियम, रेडियम आदि। इन खनिजों में परमाणुओं तथा अणुओं के विघटन से एक प्रकार का ताप या शक्ति उत्पन्न होती है, जिसे ‘परमाणु शक्ति’ कहा जाता है।
क्षेत्र भारत में अणु शक्ति केन्द्र निम्नलिखित हैं—

  • ट्रॉम्बे अणु शक्ति केन्द्र
  • तारापुर परमाणु शक्ति केन्द्र
  • कोटा परमाणु शक्तिगृह
  • इन्दिरा गांधी अणु शक्ति केन्द्र, कलपक्कम (चेन्नई)
  • नरौरा परमाणु शक्ति केन्द्र
  • काकरापारा परमाणु शक्ति केन्द्र (गुजरात)।


Discussion

No Comment Found

Related InterviewSolutions