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‘मियाँ नसीरुद्दीन के चेहरे पर किसी दबे हुए अंधड़ के आसार देखकर यह मज़मून न छेड़ने का फैसला किया’ – इसके पहले और बाद के प्रसंग का उल्लेख करते हुए इसे स्पष्ट कीजिए।

Answer»

लेखिका मियाँ नसीरुद्दीन के खानदान और उनसे संबंधित सभी जानकारी प्राप्त करना चाहती थी । लेकिन मियाँ लेखिका के सवालों से ऊब चुके थे । उन्हें लगता था कि पत्रकार लोग निठल्ले होते हैं । बादशाहवाले प्रसंग में लेखिका के यह पूछने पर कि उन्होंने बादशाह को कौन-सा पकवान बना कर खिलाया था ? मियाँ ने बातचीत को टाल दिया । उनकी आवाज में रुखाई आ गई।

लेखिका ने जब यह पूछा कि कौन से बादशाह के यहाँ काम करते थे ? तो मियाँ खीझ उठे । उन्होंने अपने कारीगर को आवाज़ लगाई और बोले – ‘अरे ओ बब्बन मियाँ, भट्टी सुलगा लो तो काम से निबटें ।’ लेखिका उनके बेटे-बेटियों के बारे में पूछना चाहती थीं लेकिन मियाँ के चेहरे में आये भाव से उन्हें समझ में आ गया कि अगर वो इससे ज्यादा कुछ ओर पूडेंगी तो शायद वो उन्हें जाने के लिए कह देंगे । इसीलिए उन्होंने इस मज़मून को न छेड़ना ही उचित समझा।



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