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This section includes 7 InterviewSolutions, each offering curated multiple-choice questions to sharpen your Current Affairs knowledge and support exam preparation. Choose a topic below to get started.

1.

लक्ष्य-प्राप्ति में इन्द्रियाँ बाधक होती हैं इसके संदर्भ में अपने तर्क दीजिए।

Answer»

सच है, लक्ष्य प्राप्ति में इन्द्रियाँ बाधक होती है । क्योंकि इन्द्रियाँ सदैव अपने आपको तुष्ट करने का प्रयत्न करती हैं । मनुष्य उन्हें तुष्ट करने के फेर में अपना अधिकांश समय-शक्ति व्यर्थ ही गँवा देता है । कई बार तो उसे न करने जैसे कार्यों की ओर भी प्रवृत्त करती हैं । मनुष्य दिशा भ्रमित और पथभ्रष्ट हो जाता है । वह अपने लक्ष्यवेध को चूकता ही नहीं, वरन् भूलता ही जाता है । अतः इन्द्रियों को अपने वश या नियंत्रण में रखना आवश्यक नहीं अनिवार्य है । कायिक अर्थात् शारीरिक श्रम, मिताहार से भी इन्द्रियाँ नियंत्रण में रहती हैं।

2.

पठान सैनिकों ने कथा-नायक के साथ कैसा बर्ताव किया ?

Answer»

पठान सैनिकों ने कथा-नायक के साथ मित्रतापूर्ण बर्ताव किया।

3.

कौन-से त्यौहार के दिन कथा-नायक भारत-पाकिस्तान सीमारेखा देखने के लिए गए ?(क) मोहरम(ख) रमजान(ग) ईद(घ) बकरीद

Answer»

ईद के त्योहार के दिन कथा-नायक भारत-पाकिस्तान सीमारेखा देखने के लिए गए।

4.

कथा-नायक किसके साथ भारत और पाक के बीच की सीमारेखा देखने गया था ?(क) परिवार(ख) पत्नी(ग) बहन(घ) मित्रों

Answer»

कथा-नायक पत्नी के साथ भारत और पाक के बीच की सीमारेखा देखने गए थे।

5.

पठान सैनिक देखने में कैसे थे ?(क) रोबीले(ख) रसीले(ग) मृदु(घ) जोशीले

Answer»

पठान सैनिक देखने में रोबीले थे।

6.

पाकिस्तान की ओर से भारत की सीमा में किसका दल घुस आया ?(क) गायों का दल(ख) बकरियों का दल(ग) घोड़ों का दल(घ) खच्चरों का दल

Answer»

पाकिस्तान की ओर से भारत की सीमा में बकरियों का दल घुस आया।

7.

मैनों का झुण्ड क्यों आर्तनाद करने लगा ?

Answer»

एक दिन वह बिस्तर पर लेटा था और उसके मुंह पर मैना का एक चूजा आ गिरा। उसने उसे उठाकर आंगन में फेंक दिया, जिसे पास बैठी बिल्ली लेकर भाग गई। यह देखकर मैनों का झुंड आर्तनाद करने लगा।

8.

भारतीय कमांडर ने कथा-नायक के कान में क्या कहा ?

Answer»

कथा-नायक के साथ सीमा के पास भारत के अठारह सशस्त्र सैनिक और कमांडर थे। कमांडर ने उसके कान में कहा कि उधर के सैनिक उसे चाय के लिए बुला सकते हैं, पर वह वहाँ जाए नहीं। पता नहीं क्या हो जाए। क्योंकि अभी हाल में हमने उनके तस्कर भी मारे हैं।

9.

भारत-पाक एक दूसरे के प्रति शंकालु क्यों थे ?

Answer»

भारत-पाक दोनों कभी एक ही देश थे। बंटवारे के बाद दोनों पराए हो गए थे। इसलिए दोनों का एक-दूसरे पर उतना विश्वास नहीं रह गया था। इसलिए दोनों देश एक-दूसरे के प्रति शंकालु थे।

10.

कथा नायक के बेटे की मृत्यु कैसे हुई थी ?

Answer»

कथा-नायक के बेटे की मृत्यु साँप के काटने से हुई थी।

11.

नींद में लेखक के मुँह पर क्या गिरा ?

Answer»

नींद में लेखक के मुंह पर मैना पक्षी का एक बदसूरत चूजा गिरा।

12.

आशय स्पष्ट कीजिए:जी हाँ जनाब! हमारी हैं। जानवर हैं, फ़र्क करना नहीं जानते।

Answer»

भारतीय सीमा से बकरियों का एक दल पाक सीमा में । चला गया था। वह दल कुछ समय बाद कुलाचे भरता हुआ भारतीय सीमा में वापस आ गया। इस पर पाक सीमा का सैनिक भारतीय सीमा के सैनिक से पूछता है कि क्या बकरियाँ आपके देश की हैं। उसका आशय यह, था कि देखिए ये हमारे देश में आ गई थीं। इस पर भारतीय सैनिक विनम्रता से कहता है, हाँ हमारे देश की ही हैं। इनकी गलती नहीं हैं। ये जानवर हैं। इन्हें पता नहीं है कि आपकी ओर दूसरा देश है और हमारी ओर दूसरा देश।

13.

कथा-नायक को किस पीड़ा ने भीतर तक झकझोर दिया ?

Answer»

चार-पांच साल पहले कथा-नायक ने मैना के चूज़े को आँगन में फेंक दिया था। वहां से बिल्ली उसे झपट ले गई थी। चूज़े के शोक में मैना पक्षियों ने देर तक आर्तनाद किया था। वर्षों के बाद साँप के काटने से कथा-नायक के प्रिय पुत्र की मृत्यु हो गई। घर में रोना-पीटना शुरू हो गया और माता होशहवास खो बैठी।

यह देखकर कथा-नायक को चिड़िया के उस बच्चे का ध्यान आया जिसे उसने आंगन में फेंक दिया था और बिल्ली उसे झपट ले गई थी। कथा-नायक के घर में सब उसी तरह हो रहा था। जैसा मैना पक्षियों तथा छौने की माता के झुंड का आर्तनाद था। उस पीड़ा की दर्दनाक स्मृति ने लेखक को भीतर तक हिला दिया।

14.

मनुष्य की अपेक्षा परिंदे क्यों बेहतर होते हैं ?

Answer»

धर्म और राष्ट्रीयता के नाम पर मनुष्य एक-दूसरे से भेदभाव और शंका-अविश्वास करता है। परिंदों में मनुष्य जैसी सोच नहीं होती। वे मंदिर और मस्जिद में फर्क करना नहीं जानते। वे जिस पर चाहते हैं, उस पर बैठ जाते हैं। उनके लिए सभी धर्म और देश समान हैं। धर्म और राष्ट्रीयता के नाम पर वे लड़ते-झगड़ते नहीं हैं। इसलिए मनुष्य की अपेक्षा परिदे बेहतर हैं।

15.

पाकिस्तान पठान सैनिक के निमंत्रण को सुनकर कथा-नायक ने क्या कहा ?

Answer»

पाकिस्तानी पठान सैनिक ने कथा-नायक को अपनी सीमा में चाय पीने के लिए निमंत्रण दिया। भारतीय कमांडर कथा-नायक को पाकिस्तान की सीमा में न जाने की चेतावनी दे चुका था। उसी को ध्यान में रखकर कथा-नायक ने पठान सैनिक का शुक्रिया अदा करते हुए कहा कि उसे उसके साथ चाय पीकर बहत खुशी होती, लेकिन उसे आज ही वापस लौटना पड़ेगा। वक्त की कमी है, इसलिए वह माफी चाहता है।

16.

आशय स्पष्ट कीजिए:मुझे आप इतना मूर्ख कैसे समझते हैं? मैं इनसान हूँ, अपने-पराए में भेद करना मैं जानता हूँ। इतना विवेक मुझमें है।

Answer»

सीमारेखा को देखने आए उस व्यक्ति से भारतीय सीमा का सैनिक कहता है कि पाक सेना के सैनिक आपको चाय पीने के लिए बुलाएं, तो आप उस ओर मत जाइएगा। क्योंकि वहाँ कुछ भी हो सकता है। इस पर वह आदमी उसे जवाब देता है कि वह एक इनसान है। इनसान को अपने-पराए में भेद करना आता है। इतना विवेक उसमें है। अर्थात् पराए इनसान से होशियार रहना उसे अच्छी तरह आता है। जो लोग ऐसा नहीं करते, वे मूर्ख हैं।

17.

मझली बहू ने पत्र के अन्त में क्या निश्चर्य व्यक्त किया?

Answer»

मझली बहू ने पत्र के अन्त में मीराबाई की तरह सारे बन्धन तोड़कर विरक्त जीवन जीने का निश्चय व्यक्त किया।

18.

बिन्दू को दोबारा बलात् ससुराल भेजने का क्या परिणाम निकला?

Answer»

बिन्दू ने आग लगाकर आत्महत्या कर ली।

19.

बिन्दू का विवाह तय करते समय क्या धोखा किया गया?

Answer»

बिन्दू का विवाह धोखे से पागल लड़के से करा दिया गया।

20.

बिन्द को लेकर मझली बहू के घर वाले क्यों चिन्तित हो उठे?

Answer»

बिन्दू एक अनाथ लड़की थी। घर वाले उसके साथ रूखा व्यवहार करते थे और उसे अपने लिए बोझ समझते थे।

21.

कथन के भाव स्पष्ट कीजिए-माँ बनने का दर्द मैंने उठाया, पर माँ कहलाने का सुख न पा सकी?

Answer»

मझली बहू की नन्ही बच्ची मर गई थी।

22.

कथन के भाव स्पष्ट कीजिए-मुझे अपने आप पर भरोसा है, मैं जी सकती हूँ। मैं जीऊँगी।

Answer»

मझली बहू ने विरक्त होकर जीवन बिताने का निश्चय किया, क्योंकि गृहस्थी के झमेलों ने उसे झकझोर कर रख दिया था।

23.

कथन के भाव स्पष्ट कीजिए-मैं तुम्हारी चौखट लाँघ चुकी हूँ?

Answer»

मझली बहू घर छोड़कर तीर्थ करने चली गई थी।

24.

कथन के भाव स्पष्ट कीजिए-कविताएँ थीं तो मामूली लेकिन उनमें मेरी आवाज थी?

Answer»

कविताओं में गृहस्थ के रीति-रिवाज के विरुद्ध आन्तरिक विचार प्रकट होते थे।

25.

“अर्थव्यवस्था में राज्य की भूमिका पर जोर देकर भारतीय नीति-निर्माताओं ने गलती की। अगर शुरुआत से ही निजी क्षेत्र को खुली छूट दी जाती तो भारत का विकास कहीं ज्यादा बेहतर तरीके से होता।” इस विचार के पक्ष या विपक्ष में अपने तर्क दीजिए।

Answer»

अर्थव्यवस्था के मिश्रित या मिले-जुले मॉडल की आलोचना दक्षिणपन्थी तथा वामपन्थी दोनों खेमों में हुई। आलोचकों का मत था कि योजनाकारों ने निजी क्षेत्र को पर्याप्त जगह नहीं दी है। विशाल सार्वजनिक क्षेत्र ने ताकतवर निजी स्वार्थों को खड़ा किया है तथा इन स्वार्थपूर्ण हितों ने निवेश के लिए लाइसेंस व परमिट की प्रणाली खड़ी करके निजी पूँजी का मार्ग अवरुद्ध किया है। 

निजी क्षेत्र के पक्ष में तर्क इस प्रकार हैं-

पक्ष में तर्क-
(1) अर्थव्यवस्था में राज्य की भूमिका पर जोर भारत की आर्थिक नीति बनाने वाले विशेषज्ञों ने भारी गलती कर दी थी। सन् 1990 से ही भारत ने नई आर्थिक नीति को अपना लिया है तथा वह बहुत तेजी से उदारीकरण व वैश्वीकरण की ओर बढ़ रहा है। देश के कई बड़े नेता जो दुनिया में जाने-माने अर्थशास्त्री भी हैं, ये भी निजी क्षेत्र, उदारीकरण तथा सरकारी हिस्सेदारी को यथाशीघ्र सभी व्यवसायों, उद्योगों आदि में समाप्त करना चाहते हैं।
(2) विश्व की दो बड़ी संस्थाओं अन्तर्राष्ट्रीय मुद्राकोष तथा विश्व बैंक से भारत को ऋण और अधिकसे-अधिक निवेश तभी मिल सकते हैं जब बहुराष्ट्रीय कम्पनियों तथा विदेशी निवेशकों का स्वागत सत्कार हो और उद्योगों के विकास हेतु आन्तरिक सुविधाओं का बड़े पैमाने पर सुधार हो। इसके लिए सरकार पूँजी नहीं जुटा सकती है। यह कार्य अन्तर्राष्ट्रीय संस्थाएँ तथा बहुराष्ट्रीय कम्पनियाँ और बड़े-बड़े पूंजीपति कर सकते हैं जो बड़े-बड़े जोखिम उठाने हेतु तैयार हैं।
(3) अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रतियोगिता में भारत तभी ठहर सकता है जब निजी क्षेत्र में छूट दे दी जाए।
(4) निजी क्षेत्र का मुख्य उद्देश्य लाभ कमाना होता है। अत: इसके सभी निर्णय लाभ की मात्रा पर आधारित
होते हैं।
(5) अर्जित सम्पत्ति पर व्यक्ति का स्वयं का अधिकार होता है। वह इसका प्रयोग करने हेतु स्वतन्त्र होता है।
(6) राज्य का हस्तक्षेप न्यूनतम रहता है। सामाजिक उद्देश्यों की पूर्ति हेतु वह आर्थिक क्रियाओं में हस्तक्षेप करता है।
(7) प्रत्येक आर्थिक क्षेत्र में व्यक्ति को स्वतन्त्रता होती है।
(8) कीमत यन्त्र, स्वतन्त्रतापूर्वक कार्य करता है। व्यवसाय के क्षेत्र जैसे उत्पादन, उपभोग, वितरण में कीमत यन्त्र ही मार्ग निर्देशित करता है।
(9) इस क्षेत्र हेतु उत्पादन तथा मूल्य निर्धारण में प्रतिस्पर्धा पायी जाती है। माँग और पूर्ति की सापेक्षिक शक्तियाँ ही उत्पादन की मात्रा एवं मूल्य निर्धारित करती हैं।

विपक्ष में तर्क-
(1) सरकारी या सार्वजनिक क्षेत्र की भागीदारी का समर्थन करने वाले वामपन्थी विचारधारा के समर्थकों का मत है कि भारत को सुदृढ़ कृषि तथा औद्योगिक क्षेत्र में आधार सरकारी वर्चस्व और मिश्रित नीतियों से मिला है। यदि ऐसा नहीं होता तो भारत पिछड़ा ही रह जाता।
(2) भारत में विकसित देशों की तुलना में जनसंख्या अधिक है। यहाँ गरीबी है, बेरोजगारी है। यदि पश्चिमी देशों की होड़ में भारत में सरकारी हिस्से को अर्थव्यवस्था हेतु कम कर दिया जाएगा तो गरीबी फैलेगी तथा बेरोजगारी बढ़ेगी, धन और पूँजी कुछ ही कम्पनियों के हाथों में केन्द्रित हो जाएँगे जिससे आर्थिक विषमता और अधिक बढ़ जाएगी।
(3) हम जानते हैं कि भारत एक कृषिप्रधान देश है। वह संयुक्त राज्य अमेरिका जैसे देशों का कृषि उत्पादन में मुकाबला नहीं कर सकता। कुछ देश स्वार्थ के लिए पेटेण्ट प्रणाली को कृषि में लागू करना चाहते हैं तथा जो सहायता राशि भारत सरकार अपने किसानों को देती है वह उसे अपने दबाव द्वारा पूरी तरह खत्म करना चाहते हैं। जबकि भारत सरकार देश के किसानों को हर प्रकार से आर्थिक सहायता देकर अन्य विकासशील देशों को कृषि सहित अर्थव्यवस्था के प्रत्येक क्षेत्र में मात देना चाहती है।

26.

दिये गये मुहावरों के अर्थ बताते हुए वाक्य प्रयोग कीजिए-(क) चैन की साँस लेना(ख) फूटी आँख न सुहाना(ग) सीने पर साँप लोटना

Answer»

(क) चैन की साँस लेना = आराम अनुभव करना।

वाक्य प्रयोग-बिन्दू को मझली बहू के पास भेजकर जेठानी ने चैन की साँस ली।

(ख) फूटी आँख न सुहाना = अच्छा न लगना।

वाक्य प्रयोग-मझली बहू को बिन्दू के प्रति प्यार घरवालों को फूटी आँख ने सुहाता था।

(ग) सीने पर साँप लोटना = बहुत दुख अनुभव करना।

वाक्य प्रयोग-बिन्दू की आत्महत्या की खबर सुनकर मझली बहू के सीने पर साँप लोटने लगे।

27.

नियोजन का अर्थ बताइए तथा उसके महत्त्व की विवेचना कीजिए। अथवा नियोजन से आप क्या समझते हैं? नियोजन की आवश्यकता एवं उद्देश्यों का उल्लेख कीजिए। अथवा नियोजन का अर्थ, आवश्यकता एवं महत्त्व की व्याख्या कीजिए।

Answer»

नियोजन का अर्थ-नियोजन का अर्थ है-उचित रीति से सोच-विचार कर कदम उठाना। अर्थात् इसका अर्थ ‘पूर्व दृष्टि’ या आगे की ओर देखने से है ताकि यह स्पष्ट पता चल जाए कि क्या काम किया जाना है।
भारतीय योजना आयोग के अनुसार, “नियोजन साधनों के संगठन की एक विधि है जिसके माध्यम से साधनों का अधिकतम लाभप्रद उपयोग निश्चित सामाजिक उद्देश्यों की पूर्ति के लिए किया जाता है।”
भारत में नियोजन की आवश्यकता-वर्तमान युग नियोजन का युग है और विश्व के लगभग सभी देश अपने विकास और उन्नति के लिए आर्थिक नियोजन से जुड़े हुए हैं। भारत ने कई कारणों से नियोजन की आवश्यकता महसूस की—

⦁    देश की निर्धनता,
⦁    बेरोजगारी की समस्या,
⦁    औद्योगीकरण की आवश्यकता,
⦁    विभाजन से उत्पन्न आर्थिक असन्तुलन तथा अन्य समस्याएँ,
⦁    सामाजिक तथा आर्थिक विषमताएँ,
⦁    देश का पिछड़ापन, धीमी गति से विकास, विस्फोटक जनसंख्या आदि। ये सब समस्याएँ एक-दूसरे से सम्बन्धित हैं अतः इनके निवारण व देश के समुचित विकास के लिए नियोजन ही एकमात्र विकल्प है।

नियोजन के उद्देश्य
भारत में नियोजन के उद्देश्य निम्नलिखित हैं-
1. पूर्ण रोजगार-भारत में बेरोजगारी एक अत्यन्त गम्भीर समस्या है। अतः इस समस्या को दूर कर लोगों को पूर्ण रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना नियोजन का प्रमुख उद्देश्य है।
2. गरीबी का उन्मूलन-निर्धनता की समस्या का निवारण दीर्घकालीन योजनाओं के माध्यम से ही किया जा सकता है। व्यक्ति की दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति व जीवकोपार्जन के साधन उपलब्ध कराना नियोजन का दूसरा प्रमुख उद्देश्य है।
3. सामाजिक समानता की स्थापना करना—नियोजन आर्थिक संसाधनों के समान वितरण हेतु आवश्यक है। नियोजन के माध्यम से राज्य ऐसे कदम उठाता है जिससे धन का समान वितरण हो।
4. उपलब्ध संसाधनों का उचित प्रयोग-नियोजन के माध्यम से उपलब्ध संसाधनों का अधिकतम लाभप्रद उपयोग निश्चित सामाजिक उद्देश्यों की पूर्ति हेतु किया जाता है।
5. सन्तुलित क्षेत्रीय विकास-सम्पूर्ण राष्ट्र के जीवन स्तर में समानता स्थापित करने के लिए राष्ट्र के अविकसित तथा अर्द्धविकसित क्षेत्रों को राष्ट्र के अन्य उन्नत क्षेत्रों के समान करना भी नियोजन का एक प्रमुख ध्येय होता है, अर्थात् नियोजन के माध्यम से ही क्षेत्रीय असन्तुलन को दूर किया जा सकता है।
6. राष्ट्रीय आय व प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि करना-नियोजन का अन्य उद्देश्य कृषि उद्योग क्षेत्र मे वृद्धि व आयात-निर्यात में सन्तुलन स्थापित करके राष्ट्रीय आय में अधिकाधिक वृद्धि करना है। इसके अलावा लोगों के लिए आय व रोजगार के साधनों में वृद्धि करके प्रति व्यक्ति आय को बढ़ाना है।
7. सामाजिक उद्देश्य-नियोजन के सामाजिक उद्देश्यों में वर्ग रहित समाज की स्थापना का लक्ष्य शामिल है। श्रमिक व उद्योगपति दोनों को उत्पत्ति का उचित अंश मिलना चाहिए, पिछड़ी जातियों को शिक्षा में सुविधाएँ देना, सरकारी सेवाओं में प्राथमिकता प्रदान करना तथा अन्य पिछड़ी जातियों को समान स्तर पर लाना नियोजन का ध्येय है।

इस प्रकार नियोजन आधुनिक युग की नूतन प्रवृत्ति है। इसके अभाव में राष्ट्र सामाजिक, आर्थिक व राजनीतिक क्षेत्र में प्रगति नहीं कर सकता।

28.

भारत में नियोजन के महत्त्व एवं उपयोगिता का वर्णन कीजिए।

Answer»

भारत में नियोजन का महत्त्व एवं उपयोगिता भारत में नियोजन के महत्त्व के सम्बन्ध में निम्नलिखित तर्क दिए जा सकते हैं-

⦁    नियोजन में आर्थिक विकास का दायित्व राज्य ग्रहण कर लेता है तथा एक सामूहिक गतिविधि के रूप में योजनाओं के माध्यम से आर्थिक विकास का प्रारम्भ तथा उसका निर्देशन करता है।
⦁    आधुनिक लोक-कल्याणकारी राज्य में आर्थिक संसाधनों के समानतापूर्ण वितरण में नियोजन की महत्त्वपूर्ण भूमिका है।
⦁    नियोजन खुले बाजार वाली अर्थव्यवस्थाओं में अस्थिरता की सम्भावनाओं को दूर करने में सहायक है।
⦁    विदेशी व्यापार की दृष्टि से भी नियोजन उपयोगी है। नियोजन से विदेशी व्यापार को अपने देश के हितों की शर्तों पर किया जा सकता है।
⦁    प्रभावी नियोजन द्वारा अर्थव्यवस्था में संरचनात्मक परिवर्तन लाया जा सकता है।

29.

हरित क्रान्ति क्या थी? हरित क्रान्ति के दो सकारात्मक और दो नकारात्मक परिणामों का उल्लेख करें।

Answer»

हरित क्रान्ति का अर्थ— “हरित क्रान्ति से अभिप्राय कृषिगत उत्पादन की तकनीक को सुधारने तथा कृषि उत्पादन में तीव्र वृद्धि करने से है।”

हरित क्रान्ति के तत्त्व हरित क्रान्ति के तीन तत्त्व थे-
⦁    कृषि का निरन्तर विस्तार,
⦁    दोहरी फसल का उद्देश्य,
⦁    अच्छे बीजों का प्रयोग।

इस तरह हरित क्रान्ति का अर्थ है-सिंचित और असिंचित कृषि क्षेत्रों में अधिक उपज देने वाली किस्मों को आधुनिक कृषि पद्धति से उगाकर उत्पादन बढ़ाना।

हरित क्रान्ति के दो सकारात्मक परिणाम
⦁    हरित क्रान्ति में धनी किसानों और बड़े भू-स्वामियों को सबसे ज्यादा लाभ हुआ। हरित क्रान्ति से खेतिहर पैदावार में सामान्य किस्म का इजाफा हुआ (ज्यादातर गेहूँ की पैदावार बढ़ी) और देश में खाद्यान्न की उपलब्धता में वृद्धि हुई।
⦁    हरित क्रान्ति के कारण कृषि में मँझोले दर्जे के किसानों यानी मध्यम श्रेणी के भू-स्वामित्व वाले किसानों को लाभ हुआ। इन्हें बदलावों से फायदा हुआ था और देश के अनेक हिस्सों में यह प्रभावशाली बनकर उभरे।

हरित क्रान्ति के नकारात्मक परिणाम
⦁    इस क्रान्ति से गरीब किसानों और भू-स्वामियों के बीच का अन्तर मुखर हो उठा। इससे देश के विभिन्न हिस्सों में वामपन्थी संगठनों के लिए गरीब किसानों को लामबन्द करने के लिहाज से अनुकूल परिस्थितियाँ बन गईं।
⦁    इससे समाज के विभिन्न वर्गों और देश के अलग-अलग इलाकों के बीच ध्रुवीकरण तेज हुआ जबकि बाकी इलाके खेती के मामले में पिछड़े रहे।

30.

विकास की प्रक्रिया में किन बातों को शामिल किया जाता था?

Answer»

विकास की बात आते ही लोग ‘पश्चिम’ का हवाला देते थे कि ‘विकास’ का पैमाना ‘पश्चिमी’ देश हैं। विकास का अर्थ था अधिक-से-अधिक आधुनिक होना और आधुनिक होने का अर्थ था, पश्चिमी औद्योगिक देशों की तरह होना। विकास के लिए प्रत्येक देश को पश्चिमी देशों की तरह आधुनिकीकरण की प्रक्रिया से गुजरना होगा। आधुनिकीकरण को संवृद्धि, भौतिक प्रगति और वैज्ञानिक तर्कबुद्धि का पर्यायवाची माना जाता था।

31.

भारत में नियोजन की आवश्यकता को स्पष्ट कीजिए।

Answer»

सामान्यतः प्रशासकीय कार्यों के उद्देश्यों को निर्धारित करना तथा उनकी प्राप्ति के साधनों पर सुनियोजित ढंग से विचार करना नियोजन है। भारत में नियोजन की आवश्यकता मुख्यतः निम्नलिखित कारणों से अनुभव की जाती है-

⦁    नियोजन के द्वारा आर्थिक तथा सामाजिक जीवन के विभिन्न अंगों में समन्वय स्थापित करके समाज की उन्नति की जा सकती है।
⦁    नियोजन द्वारा सामाजिक एवं आर्थिक न्याय की स्थापना की जा सकती है।
⦁    देश में व्याप्त आर्थिक असन्तुलन को समाप्त करने तथा राष्ट्रीय आय में वृद्धि करने व लोगों के जीवन स्तर को ऊँचा उठाने की दृष्टि से नियोजन का अत्यधिक महत्त्व समझा गया।
⦁    आर्थिक नियोजन का महत्त्व इस दृष्टि से भी था कि समाजवादी लक्ष्यों को प्राप्त किया जाए।
⦁    साधनों के उचित प्रयोग, वैज्ञानिक साधनों के प्रयोग तथा राष्ट्रीय पूँजी का सही मात्रा में सदुपयोग की दृष्टि से भी नियोजन की अत्यधिक आवश्यकता थी।

32.

भारत में सार्वजनिक क्षेत्र की कोई दो समस्याएँ बताइए।

Answer»

भारत में सार्वजनिक क्षेत्र की दो प्रमुख समस्याएँ निम्नलिखित हैं-

⦁    सार्वजनिक क्षेत्र में लाल फीताशाही और नौकरशाही का बोलबाला है जिस कारण से सार्वजनिक क्षेत्र की कार्यकुशलता निजी क्षेत्र की अपेक्षा बहुत कम है।
⦁    भारत में सार्वजनिक क्षेत्र की प्रमुख समस्या प्रबन्ध व्यवस्था का कुशल न होना है।

33.

भारत में सार्वजनिक क्षेत्र की उत्पत्ति के कोई चार कारण बताइए।

Answer»

भारत में सार्वजनिक क्षेत्र की उत्पत्ति के चार प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं-

⦁    राज्य में जनता के कल्याण के लिए सार्वजनिक क्षेत्र की स्थापना।
⦁    बहु-उद्देशीय परियोजनाएँ सार्वजनिक क्षेत्र में ही स्थापित की जा सकती हैं।
⦁    समाजवादी समाज की स्थापना करने के लिए सार्वजनिक क्षेत्र को अपनाना अति आवश्यक है।
⦁    क्षेत्रीय आर्थिक असमानता सार्वजनिक क्षेत्र के उदय का महत्त्वपूर्ण कारण है।

34.

भारत में सार्वजनिक क्षेत्र की प्रमुख समस्याओं का उल्लेख कीजिए।

Answer»

भारत में सार्वजनिक क्षेत्र की प्रमुख समस्याएँ-

⦁    कार्यकुशलता का अभाव-सार्वजनिक क्षेत्र में व्यापक पैमाने पर लाल फीताशाही और अफसरशाही पायी जाती है। यही कारण है कि सार्वजनिक क्षेत्र की कार्यकुशलता निजी क्षेत्र से कम रह जाती है।
⦁    अनुशासनहीनता-सार्वजनिक क्षेत्र में प्रबन्ध की कमी के कारण प्रशासन में अनुशासनहीनता और भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलता है।
⦁    प्रतिस्पर्धा का अभाव-स्वस्थ प्रतिस्पर्धा वस्तुओं की गुणवत्ता में सुधार के लिए आवश्यक है लेकिन सार्वजनिक क्षेत्र में एकाधिकार के कारण वस्तुओं की कीमतें तो बढ़ा दी जाती हैं लेकिन गुणवत्ता नहीं।
⦁    लाभ का अंश बहुत कम-सार्वजनिक उद्यमों के पिछले सभी आँकड़े देखने में यह तथ्य उजागर हुआ है कि रेलवे, डाक-तार व अन्य कई सार्वजनिक प्रतिष्ठान भारी घाटे में चल रहे हैं। इनकी लाभ प्रत्याशा बहुत ही निम्न रही है।

35.

पी० सी० महालनोबिस कौन थे?

Answer»

पी० सी० महालनोबिस अन्तर्राष्ट्रीय स्तर के विख्यात वैज्ञानिक एवं सांख्यिकीविद् थे। इन्होंने सन् 1931 में भारतीय सांख्यिकी संस्थान की स्थापना की थी। वे दूसरी पंचवर्षीय योजना के योजनाकार थे तथा तीव्र औद्योगीकरण और सार्वजनिक क्षेत्र की सक्रिय भूमिका के समर्थक थे।

36.

जे० पी० कुमारप्पा कौन थे?

Answer»

जे० पी० कुमारप्पा का जन्म सन् 1892 में हुआ था। इनका वास्तविक नाम जे० सी० कार्नेलियस था। ये महात्मा गांधी के अनुयायी थे। इनकी कृति ‘इकोनॉमी ऑफ परमानैंस’ को बड़ी ख्याति मिली। योजना आयोग के सदस्य के रूप में भी इनको ख्याति प्राप्त हुई।

37.

मिश्रित अर्थव्यवस्था के मॉडल के दोषों का उल्लेख कीजिए।

Answer»

मिश्रित अर्थव्यवस्था के मॉडल के दोष-भारत में अपनाए गए विकास के मिश्रित अर्थव्यवस्था के मॉडल के दोषों का दक्षिणपन्थी और वामपन्थी दोनों खेमों ने उल्लेख किया है-

⦁    योजनाकारों ने निजी क्षेत्र को पर्याप्त जगह नहीं दी है और न ही निजी क्षेत्र की वृद्धि के लिए कोई उपाय किया गया है।
⦁    विशाल सार्वजनिक क्षेत्र ने ताकतवर निहित स्वार्थों को खड़ा किया है और इन हितों ने निवेश के लिए लाइसेन्स तथा परमिट की प्रणाली खड़ी करके निजी पूँजी की राह में रोड़े अटकाए हैं।
⦁    सरकार ने अपने नियन्त्रण में जरूरत से ज्यादा चीजें रखीं। इससे भ्रष्टाचार और अकुशलता बढ़ी है।
⦁    सरकार ने केवल उन्हीं क्षेत्रों में हस्तक्षेप किया जहाँ निजी क्षेत्र जाने को तैयार नहीं थे। इस तरह सरकार ने निजी क्षेत्र को मुनाफा कमाने में मदद की।

38.

मिश्रित अर्थव्यवस्था प्रमुख रूप से है-(a) पूँजीवादी अर्थव्यवस्था(b) साम्यवादी अर्थव्यवस्था(c) निजी एवं सार्वजनिक क्षेत्रों का उत्पादन में सहयोग(d) कृषि एवं उद्योगों पर आधारित अर्थव्यवस्था।

Answer»

(c) निजी एवं सार्वजनिक क्षेत्रों का उत्पादन में सहयोग।

39.

आजादी के समय विकास के सवाल पर प्रमुख मतभेद क्या थे? क्या इन मतभेदों को सुलझा लिया गया?

Answer»

आजादी के समय विकास के सवाल पर प्रमुख मतभेद निम्नांकित थे-

(1) विकास का अर्थ समाज के प्रत्येक वर्ग हेतु अलग-अलग होता है। कुछ अर्थशास्त्री तथा रक्षा व पर्यावरण विशेषज्ञों का मत था कि पश्चिमी देशों की तरह पूँजीवाद व उदारवाद को महत्त्व दिया जाए जबकि अन्य लोग विकास के सोवियत मॉडल का समर्थन कर रहे थे। पूँजीवादी मॉडल औद्योगीकरण का समर्थक था जबकि साम्यवादी मॉडल कृषिगत विकास एवं ग्रामीण क्षेत्र को गरीबी को दूर करने पर बल देता था।
(2) विकास के क्षेत्र में आर्थिक समृद्धि हो तथा सामाजिक न्याय भी मिले इसे सुनिश्चित करने के लिए सरकार कौन-सी भूमिका निभाए? इस सवाल पर मतभेद थे।
(3) कुछ लोग औद्योगीकरण को विकास का सही रास्ता मानते थे जबकि कुछ अन्य लोग यह मानते थे कि कृषि का विकास करके ग्रामीण क्षेत्र की गरीबी दूर करना ही विकास का प्रमुख मानदण्ड होना चाहिए।
(4) कुछ अर्थशास्त्री केन्द्रीय नियोजन के पक्ष में थे जबकि कुछ अन्य विकेन्द्रित नियोजन को विकास के लिए आवश्यक मानते थे।
(5) कुछ राज्य सरकारों ने केन्द्रीकृत नियोजन के विपरीत अपना अलग ही विकास मॉडल अपनाया; जैसे-केरल राज्य में ‘केरल मॉडल’ के अन्तर्गत शिक्षा, स्वास्थ्य, भूमि सुधार, कारगर खाद्य वितरण तथा गरीबी उन्मूलन पर बल दिया गया।

इस तरह भारत ने साम्यवादी मॉडल व पूँजीवादी मॉडल को न अपनाकर इनमें से कुछ महत्त्वपूर्ण बातों को लेकर अपने देश में इन्हें मिले-जुले रूप में लागू किया। भारत ने इस समस्या का हल आपसी बातचीत एवं सहमति से बीच का रास्ता अपनाते हुए मिश्रित अर्थव्यवस्था को अपनाकर किया। इस प्रकार भारत ने विकास से सम्बन्धित अधिकांश मतभेदों को सुलझा दिया लेकिन कुछ मतभेद आज भी प्रासंगिक हैं; जैसे— भारत जैसी अर्थव्यवस्था में कृषि और उद्योग के बीच किस क्षेत्र में ज्यादा संसाधन लगाए जाने चाहिए। इसके अतिरिक्त अर्थव्यवस्था में निजी क्षेत्र व सार्वजनिक क्षेत्र को कितनी मात्रा में हिस्सेदारी दी जाए, इस पर भी मतभेद हैं।

40.

उड़ीसा में पोस्को लौह-इस्पात संयन्त्र की स्थापना का वहाँ के आदिवासियों ने क्यों विरोध किया था?

Answer»

आदिवासियों को इस बात का डर था कि यदि यहाँ उद्योगों की स्थापना हो गयी तो उन्हें अपने घर-बार से विस्थापित होना पड़ेगा तथा आजीविका छिन जाएगी।

41.

मिश्रित अर्थव्यवस्था का अर्थ एवं विशेषताएँ बताइए।

Answer»

मिश्रित अर्थव्यवस्था का अर्थ-भारत के विकास के लिए पूँजीवादी मॉडल और समाजवादी मॉडल दोनों ही मॉडल की कुछ एक बातों को ले लिया और उन्हें अपने देश में मिले-जुले रूप में लागू किया। इसी कारण भारतीय अर्थव्यवस्था को मिश्रित अर्थव्यवस्था कहा जाता है।

मिश्रित अर्थव्यवस्था की विशेषताएँ-
⦁    इसमें खेती, किसानी, व्यापार और उद्योगों का एक बड़ा भाग निजी क्षेत्र के हाथों में रहा।
⦁    राज्य ने अपने हाथ में भारी उद्योग रखे और उसने आधारभूत ढाँचा प्रदान किया।
⦁    राज्य में व्यापार का नियमन किया तथा कृषि क्षेत्र में कुछ बड़े हस्तक्षेप किए।

42.

भारत में नियोजित अर्थव्यवस्था चलाने का विचार ग्रहण किया गया था-(i) बॉम्बे प्लान से(ii) सोवियत खेमे के देशों के अनुभवों से(iii) समाज के बारे में गांधीवादी विचार से(iv) किसान संगठनों की माँगों से।(क) सिर्फ (ii) और (iv)(ख) सिर्फ (i) और (ii)(ख) सिर्फ (iv) और (iii)(घ) उपर्युक्त सभी।

Answer»

सही विकल्प है (घ) उपर्युक्त सभी।

43.

‘बॉम्बे प्लान’ किसे कहा जाता था?

Answer»

भारत में सन् 1944 में उद्योगपतियों का एक वर्ग एकजुट हुआ। इस समूह ने देश में नियोजित अर्थव्यवस्था चलाने का एक संयुक्त प्रस्ताव तैयार किया। इसे ‘बॉम्बे प्लान’ कहा जाता है। ‘बॉम्बे प्लान’ की मंशा थी कि सरकार औद्योगिक और अन्य आर्थिक निवेश के क्षेत्र में बड़े कदम उठाए।

44.

हरित क्रान्ति के विषय में कौन-कौन सी आशंकाएँ थीं? क्या यह आशंकाएँ सच निकलीं?

Answer»

सामान्यत: हरित क्रान्ति के विषय में दो भ्रान्तियाँ थीं-

(1) हरित क्रान्ति से अमीरों तथा गरीबों में विषमता बढ़ जाएगी क्योंकि बड़े जमींदार ही इच्छित अनुदानों का क्रय कर सकेंगे और उन्हें ही हरित क्रान्ति का लाभ मिलेगा तथा वे और अधिक धनी हो जाएँगे। निर्धनों को हरित क्रान्ति से कोई लाभ प्राप्त नहीं होगा।
(2) उन्नत बीज वाली फसलों पर जीव-जन्तु आक्रमण करेंगे। दोनों भ्रान्तियाँ सच नहीं हुई हैं क्योंकि सरकार ने छोटे किसानों को निम्न ब्याज दर पर ऋणों की व्यवस्था की और रासायनिक खादों पर आर्थिक सहायता दी ताकि वे उन्नत बीज तथा रासायनिक खाद सरलता से खरीद सकें और उनका उपयोग कर सकें। जीव-जन्तुओं के आक्रमणों को भारत सरकार द्वारा स्थापित अनुसन्धान संस्थाओं की सेवाओं से कम कर दिया गया।

45.

भारत ने शुरुआती दौर में विकास की जो नीति अपनाई उसमें निम्नलिखित में से कौन-सा विचार शामिल नहीं था(क) नियोजन(ख) उदारीकरण(ग) सहकारी खेती(घ) आत्मनिर्भरता।

Answer»

सही विकल्प है (ख) उदारीकरण।

46.

‘बॉम्बे प्लान’ के बारे में निम्नलिखित में कौन-सा बयान सही नहीं है-(क) यह भारत के आर्थिक भविष्य का एक ब्लू-प्रिण्ट था।(ख) इसमें उद्योगों के ऊपर राज्य के स्वामित्व का समर्थन किया गया था।(ग) इसकी रचना कुछ अग्रणी उद्योगपतियों ने की थी।(घ) इसमें नियोजन के विचार का पुरजोर समर्थन किया गया था।

Answer»

(ख) इसमें उद्योगों के ऊपर राज्य के स्वामित्व का समर्थन किया गया था।

47.

क्या आप यह कह रहे हैं कि आधुनिक’ बनने के लिए ‘पश्चिमी’ होना जरूरी नहीं है? क्या यह सम्भव है?

Answer»

आधुनिक बनने के लिए पश्चिमी होना जरूरी नहीं है। प्रायः आधुनिकीकरण का सम्बन्ध पाश्चात्यीकरण से माना जाता है लेकिन यह सही नहीं है, क्योंकि आधुनिक होने का अर्थ मूल्यों एवं विचारों में समस्त परिवर्तन से लगाया जाता है और यह परिवर्तन समाज को आगे की ओर ले जाने वाले होने चाहिए। आधुनिकीकरण में परिवर्तन केवल विवेक पर ही नहीं बल्कि सामाजिक मूल्यों पर भी आधारित होते हैं। इसमें वस्तुत: समाज के मूल्य साध्य और लक्ष्य भी निर्धारित करते हैं कि कौन-सा परिवर्तन अच्छा है और कौन-सा बुरा है; कौन-सा परिवर्तन आगे की ओर ले जाने वाला है और कौन-सा अधोगति में पहुँचाने वाला है।

पाश्चात्यीकरण भौतिकवाद है। अनेक बार इसके भौतिकवाद में उपयोगितावाद का अभाव होने से यह मात्र आडम्बरी, दिखावटी और शुष्क बनकर रह जाता है। इसमें परिवर्तन होते हैं परन्तु उनमें मूल्यों या साध्यों का सर्वथा अभाव रहता है। पाश्चात्यीकरण मूल्य मुक्तता पर बल देता है, इसका न कोई क्रम होता है और न कोई दिशा। इस प्रकार आधुनिक बनने के लिए पश्चिमी होना जरूरी नहीं है।

48.

अरे! मैं तो भूमि सुधारों को मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने की तकनीक समझता था।

Answer»

भूमि सुधार का तात्पर्य मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने की तकनीक तक ही सीमित नहीं है बल्कि इसके अन्तर्गत अनेक तत्त्वों को सम्मिलित किया जाता है-

⦁    जमींदारी एवं जागीरदारी व्यवस्था को समाप्त करना।
⦁    जमीन के छोटे-छोटे टुकड़ों को एक-साथ करके कृषिगत कार्य को अधिक सुविधाजनक बनाना।
⦁    बेकार एवं बंजर भूमि को उपजाऊ बनाने हेतु व्यवस्था करना।
⦁    भू-जल के निकास की उचित व्यवस्था करना।
⦁    कृषिगत भू-जोतों की उचित व्यवस्था करना।
⦁    सिंचाई के साधनों का विकास व सस्ती दरों पर किसानों को सिंचाई के साधन उपलब्ध कराना।
⦁    अच्छे खाद व उन्नत बीजों की व्यवस्था करना।
⦁    किसानों की समस्याओं के समाधान हेतु स्थायी सहायता केन्द्रों की व्यवस्था करना।
⦁    किसानों द्वारा उत्पन्न खाद्यान्नों की उचित कीमत दिलाने का प्रयास करना।
⦁    राज्य सरकारों व केन्द्र सरकार द्वारा किसानों को समय-समय पर विभिन्न प्रकार के ऋण व विशेष अनुदानों की व्यवस्था करना आदि।

इस प्रकार भूमि सुधार का क्षेत्र केवल मिट्टी की गुणवत्ता की जाँच करने तक ही सीमित नहीं बल्कि इसका क्षेत्र बहुत व्यापक है।

49.

सड़क दुर्घटना होने के दो कारण लिखिए।

Answer»

सड़क दुर्घटना होने के दो कारण निम्नलिखित हैं –

1.बहुत तेज गति से वाहन चलाना।

2.गलत तरीके से ओवर टेकिंग करना।

50.

भारत में वर्ष 2011 में सड़क दुर्घटना में कितने लोगों की मृत्यु हुई?

Answer»

भारत में वर्ष 2011 में सड़क दुर्घटना में 1,42,485 लोगों की मृत्यु हुई।