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This section includes 7 InterviewSolutions, each offering curated multiple-choice questions to sharpen your Current Affairs knowledge and support exam preparation. Choose a topic below to get started.

1.

मिट्टी कितने प्रकार की होती है ?

Answer»

मिट्टी मुख्य रूप से तीन प्रकार की होती है-

  • काली मिट्टी
  • लाल मिट्टी
  • लैटराइट मिट्टी
2.

ऑक्सीजन का जीवन में क्या महत्त्व है?

Answer»

ऑक्सीजन का जीवन में बहुत अधिक महत्त्व है। किसी भी प्राणी को जीवित रखने के लिए, ऑक्सीजन अनिवार्य है इसलिए इसे प्राण वायु भी कहा जाता है। यह आग जलाने के लिए भी आवश्यक है।

3.

साहस, वीरता, आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता के महत्व पर दो – दो वाक्य लिखिए।

Answer»

साहस :

  • मानव जीवन में साहस एक अदभुत शक्ति है।
  • साहस के बिना हम कोई काम नहीं कर सकते।
  • साहस से ही हमें किसी काम में विजय मिलता है। वीरता
  • मानव जीवन में साहस के साथ – साथ वीरता का भी होना चाहिए।
  • वीरता एवं साहस दोनों एक साथ रहते हैं।
  • जिसमें साहस है उसी में वीरता का दर्शन होता है।
  • हम वीरता से ही वीर बनते हैं।

आत्मविश्वास :

  • हम जो भी काम करते हैं उसे आत्मविश्वास के साथ करना चाहिए।
  • आत्मविश्वास के साथ किये गये कार्य सफल होते हैं।
  • आत्मविश्वास सफलता की कुंजी है।

आत्मनिर्भरता :

  • आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता दोनों हर एक में होना बहुत आवश्यक है।
  • जिसमें आत्मविश्वास अधिक है उसी में आत्मनिर्भरता भी अधिक होती है।
4.

आपकी नज़र में आदर्श शासक के लक्षण क्या हो सकते हैं?

Answer»

मेरी नज़र में तो आदर्श शासक का लक्षण यह है कि उसे अधिकार में क्षमा गुण होना चाहिए।

5.

शासक को विपत्ति की हालत में कैसे काम लेना चाहिए?

Answer»

शासक को विपत्ति की हालत में धैर्य और समयस्फूर्ति से काम लेना चाहिए।

6.

स्वतंत्रता की प्राप्ति के लिए लक्ष्मीबाई तरसती थी, पठित पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए।

Answer»

रानी लक्ष्मीबाई कहती हैं कि जीत हो या हार, मुझे किसी बात की चिंता नहीं। चिंता केवल इस बात की है, हमारी वीरता कलंकित न होने पाये। हम सब मिलकर या तो स्वराज्य प्राप्त करके रहेंगे या स्वराज्य की नींव का पत्थर बनेंगे। इन पंक्तियों में रानी लक्ष्मीबाई की स्वतंत्रता की तड़प स्पष्ट दिखाई देती है। लेकिन साथ ही वह एक ऐसे स्वतंत्र भारत की कल्पना करती थीं जहाँ समाज में भेदभाव न हो। लक्ष्मीबाई मातृभूमि को माता के समान मानती हैं। वे मातृभूमि को अंग्रेजों के हाथों अपवित्र नहीं होने देना चाहतीं। वे भारत माता को गुलाम होते नहीं देख सकतीं। इसी कारण उन्हें मातृभूमि की स्वतंत्रता के लिए लड़ते हुए अपने प्राण त्याग दिये।

7.

सुव्यवस्थित शासन के गुण क्या हो सकते हैं?

Answer»

सबका बराबर ध्यान रखना, विपत्ति में धैर्य और समयस्फूर्ति होना। कानून और नियमों का समान रूप से अनुकरण करना और अधिकार में क्षमा गुण ये सब आदर्श शासक के लक्षण हैं।

8.

रानी लक्ष्मीबाई का जीवन नारी जगत के लिए प्रेरणादायक है । स्पष्ट कीजिए।

Answer»

लक्ष्मीबाई का जीवन नारी जगत के लिए प्रेरणादायक है । क्योंकि नारी को अबला समझा जाता है। रानी लक्ष्मीबाई ने प्रथम स्वतंत्रता संग्राम का नेतृत्व करके यह सिद्ध कर दिया कि नारी अबला नहीं सबला है। इसी प्रकार हमारी महिला बहनों और माताओं को भी स्वयं को कमज़ोर नहीं समझना चाहिए। उन्हें घर और परिवार मात्र में कैद नहीं रहना चाहिए। उन्हें भी अपने अस्तित्व का विकास करना चाहिए। समाज में नाम कमाने का प्रयास करना चाहिए।

9.

लक्ष्मीबाई किससे बातें कर रही हैं?

Answer»

लक्ष्मीबाई अपनी सहेली कर्नल जूही से बातें कर रही हैं।

10.

उन्हें किस बात की चिंता सता रही है?

Answer»

लक्ष्मीबाई को इस बात की चिंता सता रही है कि वह झाँसी, कालपी और ग्वालियर के स्वराज्य के लिए युद्ध कर रही थी लेकिन अब तक उसे जीत नहीं मिली।

11.

स्वतंत्रता आन्दोलन की नींव रखने में झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई सफल हुई – इस पर व्याख्या कीजिए।

Answer»

पाठ का नाम : “स्वराज्य की नींव”
लेखक का नाम : “विष्णु प्रभाकर”

  • लक्ष्मीबाई बडी वीरांगना है।
  • उसने यह साबित किया कि अबला हमेशा अबला नहीं रहती । आवश्यकता पड़ने पर वह सबला भी बन सकती है।
  • उसने झाँसी की स्वतंत्रता तथा स्वराज्य के लिए अंग्रेज़ी सरकार का बड़ी वीरता के साथ सामना किया।
  • उसने झाँसी, कालपी और ग्वालियर के लिए युद्ध किया। वह नूपुरों की झंकार के स्थान पर तोपों का गर्जन सुनना चाहती थीं।
  • अबला होने पर भी तलवार हाथ में लेकर युद्ध करती रही ।
  • लक्ष्मीबाई सेवा, बलिदान और तपस्या की देवी है।
  • रण – भूमि में अपनी जान की बलि देकर स्वतंत्रता की सच्ची आधारशिला बनी।
  • स्वराज्य को प्राप्त करने के लिए अपनी बलि देकर भी आनेवाली पीढी के लिए मार्ग दिखाना और प्रेरणा देना ही उसका मुख्य लक्ष्य रहा।
  • उनकी बातों से प्रेरित होकर तात्या, नाना साहेब, मुंदर, जूही तथा देश की जनता भी स्वराज्य की प्राप्ति के लिए मर मिटने तैयार हुये।
  • इसलिए हम कह सकते हैं कि स्वतंत्रता आन्दोलन की नींव रखने में झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई सफल हुई।
12.

झांसी के बारे में रानी लक्ष्मीबाई क्या निश्चय करती हैं?

Answer»

रानी लक्ष्मीबाई ने अपनी झाँसी अंग्रेजों को नहीं देने की प्रतिज्ञा की थी, लेकिन वह उनके हाथ से निकल गई। परंतु वे हिम्मत नहीं हारती और झांसी को फिर से लेने का निश्चय करती हैं।

13.

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक-एक शब्द में लिखिए :झाँसी अपना कौन-सा राज्य अंग्रेजों से वापस लेने का निश्चय करती हैं?रानी लक्ष्मीबाई की दो सखियों के नाम बताइए।जूही युद्ध के समय कौन-सी जिम्मेदारी संभालती थी?रानी लक्ष्मीबाई किस बात से तात्या पर नाराज़ थी?

Answer»

1. कालपी और ग्वालियर

2. जूही और मुंदर

3. तोपखाने की

4. अनुशासनहीनता से

14.

लक्ष्मीबाई तात्या से क्यों नाराज़ थीं? तात्या ने उन्हें क्या आश्वासन दिया ?

Answer»

लक्ष्मीबाई तात्या से इसलिए नाराज़ थी कि वह समझती है कि वह राव साहब के साथ विलासिता में डूबे हैं। रानी की बातों से तात्या को अपनी भूल महसूस हुई। तात्या लक्ष्मीबाई को आश्वासन देता है कि वह देशभक्तों की आवश्यकता को पूरा करने देशभक्त होकर युद्ध में भाग लेता हैं। उसकी हर आज्ञा का
पालन करता है।

15.

मार्ग में हिमालय के अड़ने, डरावनी लहरों के थपेड़े मारने, नाविकों के सो जाने से क्या अभिप्राय है?

Answer»

इसका अभिप्राय यह है कि झाँसी लक्ष्मीबाई ने झाँसी, कलापी और ग्वालियर आदि राज्यों के स्वराज्य के लिए अंग्रेजों और रघुनाथराव से लड रही है। परंतु मंजिल हर बार पास आकर दूर चली जाती है। लक्ष्मीबाई स्वराज्य को पाते देखती है लेकिन मार्ग में हिमालय जैसी अंग्रेजी सेना अड जाती है वह सेना जो है वह महासागर की जैसे डरावनी लहरें थपेडे मारने लगती हैं। यदि लक्ष्मीबाई उन्हें जूझती तो नाविक रूपी सेना सो जाते हैं। इसका मतलब यह है कि नाविक रूपी सेना में हराने की शक्ति नहीं है।

16.

जूही के अनुसार रानी को निराश नहीं होना चाहिए, क्योंकि …(अ) वे बहादुर थीं।(ब) उनके साथ कई वीर थे।(क) वे गीता पड़ती थीं।

Answer»

जूही के अनुसार रानी को निराश नहीं होना चाहिए, क्योंकि वे गीता पढ़ती थी।

17.

“स्वराज्य की नींव एकांकी के आधार पर लक्ष्मीबाई का चरित्र-चित्रण कीजिए।

Answer»

‘स्वराज्य की नींव’ के एकांकीकार श्री विष्णु प्रभाकर जी हैं। इनका जन्म सन् 1912 में हुआ। भारत सरकार ने इन्हें “पद्म भूषण” सम्मान से सम्मानित किया है।

  • प्रस्तुत एकांकी प्रथम स्वतंत्रता संग्राम पर आधारित है। इसमें महारानी लक्ष्मीबाई की वीरता की गाथा है। जिन्होंने स्वराज्य की नींव डाली।
  • वीरांगना लक्ष्मीबाई एक साहसी, कर्मपरायण, देश प्रेमी नारी थी। उसने अंग्रेजों की नींद हराम कर दी थी।
  • वह अंग्रेजों की कूट नीति को सफ़ल नहीं होने दे रही थी। वह नूपुरों की झंकार की अपेक्षा तोपों की गर्जना सुनना चाहती थी।
  • उन्होंने यह सिद्ध कर दिखाया था कि आवश्यकता पड़ने पर अबला भी सबला बन सकती है।
  • अंग्रेजी, झाँसी, कालपी, ग्वालियर आदि राज्यों को हस्तगत कर लेना चाहते थे। लेकिन रानी
    लक्ष्मीबाई ने इसका डटकर विरोध किया। राज्य में ऊँच – नीच और छुआछूत की भावनाओं को मिटाना, सेवा, तपस्या बलिदान से स्वराज्य प्राप्त करने के हर संभव प्रयास किये।
  • राज्य में अनुशासन युक्त सेना तैयार की। साथ ही आवश्यक योजनाएँ बनाकर अमल में लाया। युद्ध के लिए आवश्यक सामग्री संचित की। ।
  • अंग्रेजों से वीरतापूर्वक युद्ध करते हुये वीरगति को प्राप्त कर ली।
  • इस प्रकार हम कह सकते हैं कि वीरांगना लक्ष्मीबाई देशभक्ति की एक अद्भुत मिसाल थी और यह सिद्ध किया कि लक्ष्मीबाई ने सच्चे अर्थों में स्वतंत्रता की नींव रखी थी।
18.

‘स्वराज्य की नींव एकांकी की ऐतिहासिकता अपने शब्दों में लिखिए।

Answer»
  • झाँसी पर अंग्रेजी लोग अपना अधिकार रखना चाहते थे।
  • सामाजिक, राजनैतिक और आर्थिक परिस्थितियों का पतन हुआ था। * राजा विलास प्रिय थे।
  • राजाओं में एकता नहीं थी।
  • स्वतंत्रता के लिए संघर्षमय वातावरण था।
  • स्त्रियों की सेना बनाकर झाँसी लक्ष्मीबाई युद्ध के लिए प्रयत्न कर रही थी।
  • लक्ष्मीबाई स्वराज्य की नींव डालना चाहती थी।
  • लक्ष्मीबाई अंग्रेजों से कहती है कि मैं अपनी झाँसी कभी नहीं दूंगी।
  • झाँसी 1857 के विद्रोह का एक प्रमुख केंद्र बन गया था।
  • झाँसी की सुरक्षा के लिए लक्ष्मीबाई ने युद्ध करना शुरू कर दिया।
  • 18 जून 1858 को लक्ष्मीबाई ने वीरगति प्राप्त की।
19.

मंजिल है कि पास आकर भी हर बार दूर चली जाती है – महारानी लक्ष्मीबाई ने ऐसा क्यों कहा होगा?

Answer»

मंजिल है कि पास आकर भी हर बार दूर चली जाती है – महारानी लक्ष्मीबाई ने निम्नलिखित कारणों से ऐसा कहा होगा । लक्ष्मीबाई स्वराज्य की प्राप्ति के लिए खूब कोशिश कर रही थी। लेकिन उनको मार्ग पर बहुत कष्ट आ रहे थे। उन कष्टों को झेलकर आयी तो इधर सेनापति विलासिता में डूबे हुए थे। उनको स्वराज्य प्राप्त होने की आशा मिलती थी, दूसरे ही क्षण में मार्ग में हिमालय पहाड अड जाता था। लक्ष्मीबाई हिमालय रूपी कष्ट को पार करती थी तो महासागर भयानक लहरों से टकराते हुए सामने आती थी। लक्ष्मीबाई उन लहरों को भी रोकती तो यहाँ सेनापति तात्या विलासिता में डूबकर सो रहा था, जैसे कष्टों के समय में नाविक सो रहा था। कष्ट समय में नाविक सोता तो नाव डूब जाता है। लक्ष्मीबाई को ही इनको संभालना पडता है।

20.

लक्ष्मीबाई के अनुसार स्वाराज्य की स्थापना कैसे हो सकती हैं?

Answer»

लक्ष्मीबाई के अनुसार स्वराज्य की स्थापना के लिए विलासिता को छोड़ देना चाहिए।
छुआछूत और ऊँच – नीच के भेदों को भूलकर जनसेवक बनना है।
सेवा, तपस्या और बलिदान से स्वराज्य पा सकते हैं।
निराशा छोड़कर आगे बढ़ना चाहिए। अपने को समर्पण करना चाहिए।

21.

पाठ के आधार पर “स्वराज्य की नींव” का अर्थ बताइये।

Answer»

स्वतंत्रता प्राप्ति के लिए लड़ना, अपने आप को तैयार रखना ही स्वराज्य की नींव रखना है। रानी लक्षमीबाई ने इस के लिए प्रयास किया था। अनुशासन युक्त सेना तैयार करने का प्रयास किया। समाज में छुआ – छूत और ऊँच नीच का भेद मिटाने की कोशिश की। विलास प्रियता को छोड़कर देश सेवा में निमग्न हो गयी।

22.

एकांकी के आधार पर बताइए कि “स्वराज्य की नींव’ का क्या तात्पर्य है?

Answer»
  • एकांकी के आधार पर बतायेंगे तो “स्वराज्य की नींव” का अर्थ या तात्पर्य यह है कि स्वराज्य तथा
  • स्वतंत्रता की लड़ाई के लिए सेना को तैयार करना है।
  • सेना को युद्ध कला का प्रशिक्षण देना है।
  • युद्ध सामग्री संचित करना है।
  • अनुशासन से युक्त सैनिकों को तैयार करना है।
  • स्वराज्य के लिए बलिदान देना भी स्वराज्य का नींव है।
23.

महारानी लक्ष्मीबाई को किस बात का दुःख था ?

Answer»
  • महारानी लक्ष्मीबाई देश की आजादी के लिए लड़ रही थी।
  • सेना में अनुशासन हीनता, विलास प्रियता आदि देखकर वह चिंतित थी।
  • स्वामी भक्ति का लोप, ऊँच – नीच का भेद – भाव समाज में व्याप्त था।
  • इस कारणों से महारानी लक्ष्मीबाई दुःखी थी।
24.

महारानी लक्ष्मीबाई का कौनसा कथन तुम्हें अच्छा लगा ? क्यों ?

Answer»

महारानी लक्ष्मीबाई का यह कथन जो तात्या से कही गयी – ‘तो जाओ, तलवार संभाल लो। नूपुरों की झंकार के स्थान पर तोपों का गर्जन होने दो। भूल जाओ राग – रंग। याद रखो हमें स्वराज्य लेना है। हमें रण भूमि में मौत से जूझना है।” मुझे अच्छा लगा।

यह कथन मुझे इसलिए अच्छा लगा कि लक्ष्मीबाई एक स्त्री होने पर भी तलवार हाथ लेकर युद्ध करना चाहती है। स्त्रियाँ नूपुरों की झंकार को पसंद करते हैं लेकिन लक्ष्मीबाई उसके स्थान पर तोपों का गर्जन सुनना चाहती है। स्वराज्य के लिए रणभूमि में प्राणों को भी अर्पित करना चाहती है।

25.

लक्ष्मीबाई को कौन-सा दर्द कचोट रहा था?

Answer»

लक्ष्मीबाई के सहयोगी विलासिता में डूबे हुए थे, लेकिन लक्ष्मीबाई उन्हें ठुकरा नहीं सकती थीं। उन्हें यही दर्द कचोट रहा था।

26.

वीरांगना लक्ष्मीबाई देशभक्ति की एक अद्भुत मिसाल थीं? स्पष्ट कीजिए।

Answer»

पाठ का नाम : स्वराज्य की नींव
लेखक : श्री विष्णु प्रभाकर
विधा : एकांकी पाठ

“खूब लडी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी” – सुभद्रा कुमारी चौहान जी की यह पंक्ति लक्ष्मीबाई की वीरता को प्रकट करती है। लक्ष्मीबाई ने यह सिद्धकर दिखाया कि अबला हमेशा अबला नहीं रहती। आवश्यकता पड़ने पर वह सबला भी बन सकती है। लक्ष्मीबाई ने सच्चे अर्थों में देश की स्वतंत्रता की नींव रखी थी। देश के प्रति उनकी कर्मपरायणता बहुत अधिक थी।

वह झाँसी को स्वतंत्रता तथा स्वराज्य दिलाने के लिए अंग्रेजी सरकार से बड़ी वीरता के साथ युद्ध करती है। नारी सेना को तैयार करती है। वह झाँसी, कालपी और ग्वालियर के लिए अंग्रेजों से लडती है।

झाँसी लक्ष्मीबाई सेवा, बलिदान और तपस्या की देवी है। वह नूपुरों की झंकार के स्थान पर तोपों का गर्जन सुनना चाहती है। इस प्रकार हम कह सकते हैं कि वीरांगना लक्ष्मीबाई देश भक्ति की एक अद्भुत मिसाल थी।

27.

निम्नलिखित वाक्य कौन-किससे कहता है? यह लिखिए :“मैं अपनी झांसी नहीं दूंगी।”“महारानी, आप तो गीता पढ़ती हैं।”“ओह, समझी! तुम तो उनका पक्ष लोगी ही?”“बाईसाहब, आप यूँ कब तक फटकारती रहेंगी?”“सरकार, आज में बराबर आपके साथ रहूंगी।”“और मैं तोपखाना संभालूंगी।”

Answer»

1. रानी लक्ष्मीबाई ने जूही से कहा।

2. जूही ने रानी लक्ष्मीबाई से कहा।

3. मुंदर ने जूही से कहा।

4. तात्या ने रानी लक्ष्मीबाई से कहा।

5. मुंदर ने रानी लक्ष्मीबाई से कहा।

6. जूही ने रानी लक्ष्मीबाई से कहा।

28.

किनके साथ बैठकर मोरां ने लोक-लाज खोई?A. भक्तB. राणाC. साधु-संतD. दुर्जनों

Answer»

सही विकल्प है C. साधु-संत

29.

राणा ने मीरां के लिए क्या भेजा?A. गंगाजलB. गीताC. सत्संगीD. विष का प्याला

Answer»

D. विष का प्याला

30.

मीरा की सास मीरा को क्या कहती थी?A. दासीB. कुलनाशिनीC. कुलवर्धिनीD. जोगण

Answer»

B. कुलनाशिनी

31.

किसकी कृपा से मीरा ने रामरतन धन पाया?A. पिताB. सासC. सद्गुरुD. राणा

Answer»

सही विकल्प है C. सद्गुरु

32.

मीरां के लिए सद्गुरु किसके समान है?

Answer»

मीरां के लिए सद्गुरु खेवनहार के समान है।

33.

मीरां को अपने सदगुरु पर अपार श्रद्धा है और …(अ) वे उन्हीं के साथ रहना चाहती है।(ब) वे उनकी ही दासी बनना चाहती है।(क) वे उन्हें ही भगवदभक्ति प्राप्त करने का आधार मानती है।

Answer»

मौरा को अपने सदगुरु पर अपार श्रद्धा है और वे उन्हें ही भगवद्भक्ति प्राप्त करने का आधार मानती हैं।

34.

मौराबाई ने अपने सदगुरु की कृपा से …(अ) बहुत बड़ा महल पाया।(ब) रामरतन धन पाया।(क) लोक-लाज खोई।

Answer»

मीराबाई ने अपने सदगुरु की कृपा से रामरतन धन पाया।

35.

मीरां ने किनके साथ बैठकर लोक-लाज खोई?

Answer»

मीरा ने साधुसंतों के साथ बैठकर लोक-लाज खोई।

36.

कृष्ण की भक्ति में डूबने से मौरां को कौन-से दुःख उठाने पड़े?

Answer»

मीरा कृष्ण के प्रेम में पड़कर संसार से विरक्त हो गई थीं। उन्होंने संसार के नियमों और मर्यादाओं की भी परवाह नहीं की। उन्हें पैरों में धुंधरू बांधकर नाचते देख लोगों ने उन्हें पागल कहा। साधु-संतों के साथ बैठी देखकर लोगों ने उनकी हंसी उड़ाई। सास को उनकी भक्ति भावना बिलकुल अच्छी नहीं लगी। उन्होंने उनका ‘कुलनाशिनी’ कहकर तिरस्कार किया। राजा को मीरां का रंग-ढंग राज परिवार के खिलाफ लगा और उन्होंने मौरां को जहर देकर मारने की कोशिश की। इस प्रकार कृष्णभक्ति में डूबने पर मीरां को तरह-तरह के दुःख उठाने पड़े।

37.

श्रीकृष्ण को प्राप्त करने के लिए मीरां ने किन-किन ३ से रिश्ता तोड़ लिया?

Answer»

श्रीकृष्ण को प्राप्त करने के लिए मौरां ने अपने भाई, बंधु, । परिवारजनों और सगे-संबंधियों से रिश्ता तोड़ लिया।

38.

आशय स्पष्ट कीजिए :सत् की नाव खेवटिया सत्गुरु भवसागर तरि आयौं ।

Answer»

सच्चाई मनुष्य का सबसे बड़ा गुण है। यदि कोई व्यक्ति सच्चे मन से अपने आराध्य देव का ध्यान करे और उसे सद्गुरु का सहयोग प्राप्त हो, तो व्यक्ति को भवसागर से मुक्ति पाना कठिन नहीं है। मोरांबाई को अपने सदगुरु पर अटूट विश्वास है। उनके लिए सदगुरु की कृपा इस संसाररूपी महासागर में नाव के समान है। इस नाव के सहारे वे सुरक्षितरूप से इस भवसागर को पार कर लेगी, इस बात का उन्हें पूरा विश्वास है।

39.

सोने के साथ सुहागे का …(अ) स्थायी संबंध होता है।(ब) अपनापन होता है।(क) अटूट बंधन होता है।

Answer»

सोने के साथ सुहागे का स्थायी संबंध होता है।

40.

जा कि जोति बरे ….।A. दिन-रातीB. दीन-रातीC. हमेशाD. मालिक

Answer»

सही विकल्प है A. दिन-राती

41.

प्रभुजी तुम चंदन हम ….।A. बातीB. सुवासC. पानीD. वंदन

Answer»

सही विकल्प है C. पानी

42.

मोती और धागा ………. का प्रतीक है।A. सुविचारB. एकाकारC. निराकारD. अहंकार

Answer»

सही विकल्प है B. एकाकार

43.

आत्मा-परमात्मा की अद्वैतता की बात …… काव्य में की गई है।A. कुत्ते की सीखB. साधूपदेशC. तोता और इन्द्रD. प्रभुजी तुम चंदन हम पानी

Answer»

D. प्रभुजी तुम चंदन हम पानी

44.

प्रभुजी तुम स्वामी हम ….।A. मोरB. दासाC. भक्तD. राजा :

Answer»

सही विकल्प है B. दासा

45.

चंदन और पानी के उदाहरण द्वारा भक्त और भगवान के बीच का कौन-सा भाव बताया गया है?

Answer»

चंदन और पानी का उदाहरण द्वारा भक्त और भगवान के बीच का निकटता का भाव बताया गया है।

46.

चातक पक्षी किसे देखता रहता है?

Answer»

चातक पक्षी चंद्रमा को देखता रहता है।

47.

सोने का महत्त्व कब बढ़ता है?

Answer»

जब सोने संग सुहागा मिलता है, तब सोने का महत्त्व बढ़ता है।

48.

भक्त बाती बनकर क्या चाहता है?

Answer»

भक्त बाती बनकर जलना चाहता है।

49.

मीरा के पदों के आधार पर सत्गुरु की महिमा का वर्णन कीजिए ।

Answer»

कहावत है ‘बिनु गुरु ज्ञान न होइ’। गुरु का महत्व सभी ने माना है। मीराबाई ने सदगुरु को बहुत महत्त्व दिया है। मीरां सांसारिक जीवन को त्यागकर अपने आराध्य देव श्रीकृष्ण की भक्ति पाकर मगन हैं। वे इसे रत्न की उपमा देती हैं। वे इस अनमोल वस्तु को प्राप्त कराने का श्रेय अपने सदगुरु को ही देती हैं और कहती हैं कि ‘रामरतनरूपी धन’ उन्हें उनके सदगुरु की कृपा से प्राप्त हुआ है। सदगुरु की कृपा इस संसाररूपी सागर में नाव के समान है। इस नाव में बैठकर मीरा सुरक्षित रूप से इस भवसागर को पार करने के प्रति निश्चिंत हैं, क्योंकि इस नाव के खेवनहार उनके सदगुरु होंगे। इस प्रकार मीरा के पद में सदगुरु को बहुत महत्त्व दिया गया है।

50.

मीरा के ‘राम रतन धन’ की क्या विशेषताएँ हैं ?

Answer»

मीराबाई ने अपने सद्गुरु की कृपा से ‘रामरतन धन’ नामक अमूल्य वस्तु प्राप्त की थी। मीराबाई उसे अपने जन्म-जन्मांतर की पूंजी मानती हैं। इस धन की ये विशेषताएँ हैं कि यह न तो खर्च होता है और न कोई चोर इसे चुरा सकता है। इसमें रोज-रोज सवाई वृद्धि होती है।